#Balrampur ! #उतरौला में शानो-शौकत से निकला जुलूस-ए-गौसिया, या गौस अल मदद के नारों से गूंजा शहर...
#उतरौला (#बलरामपुर)। हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी अलैहिर्रहमां (बड़े पीर साहब) की यौमे पैदाइश 'ग्यारहवीं शरीफ' के मुबारक मौके पर गुरुवार को उतरौला शहर में जुलूस-ए-गौसिया बेहद शानो-शौकत और अदब ओ अकीदत के साथ निकाला गया।
शाहजहानी शाह दरगाह से दोपहर बाद जुलूस-ए-गौसिया कमेटी के सदर निसार नकी शाह, इजहार शाह व अंजुमन गुलामाने मुस्तफा दरगाह शाहजहानी कमेटी के सदर सलमान जमशेद व इस्माइल के ज़ेरे कयादत तथा मुफ्ती मोहम्मद जमील अहमद खान की सरपरस्ती में जुलूस की शुरुआत हुई। इस्लामी लिबास कुर्ता-पाजामा, सिर पर साफा व टोपी पहने और हाथों में मजहबी परचम थामे अकीदतमंद "गौस का दामन नहीं छोड़ेंगे", "या गौस अल मदद", "नारे तकबीर अल्लाह-हू-अकबर" और "हिन्दुस्तान जिंदाबाद" के नारे लगाते हुए आगे बढ़े। इस दौरान रहीम रज़ा बलरामपुरी, सद्दाम हुसैन, तौहीद रज़ा और मास्टर शबी अहमद शब्बू समेत कई नातिया शायरों की नात-ख्वानी पर अकीदतमंद झूमते नज़र आए।
औलिया-ए-किराम के बताए रास्ते पर चलने का आह्वान
जुलूस शाहजहानी दरगाह से निकलकर हाटन रोड, जामा मस्जिद और गोंडा मोड़ होते हुए कर्बला पहुंचा। यहां उलेमा-ए-दीन ने तकरीर करते हुए कहा कि आज हम बुजुर्गाने दीन और औलिया-ए-किराम के वाकयात सुनकर खुश तो हो लेते हैं, लेकिन उनकी तालीमात को अपनी जिंदगी में नहीं उतारते। अगर हम गौस-ए-पाक से सच्ची मोहब्बत करते हैं, तो उनके बताए रास्ते पर चलना होगा और शरीयत के अहकाम की पाबंदी करनी होगी।
देश में तरक्की और अमन-चैन की मांगी गई दुआ
कर्बला से वापस होकर जुलूस गोंडा मोड़, अंबेडकर चौराहा, रज़ा मस्जिद और श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौराहा होते हुए चांद मस्जिद पहुंचा, जहां मौलाना ने गौस-ए-पाक के करामातों और मुकाम पर रोशनी डाली। इसके बाद जुलूस हाटन रोड होते हुए पुन: शाहजहानी शाह दरगाह पहुंचकर संपन्न हुआ।
समापन पर मुफ्ती मोहम्मद जमील खान ने कहा कि हिन्दुस्तान में दीन-ए-इस्लाम और ईमान किसी बादशाह के जरिए नहीं, बल्कि औलिया और सूफियों के इखलाक व पैगाम से फैला है। आखिर में सलातो-सलाम के बाद मुल्क की तरक्की, खुशहाली, आपसी भाईचारे और कौमी एकता के लिए दुआ की गई।
इस मौके पर इज़हार शाह, हाफिज अब्दुल दैयान हशमती, पम्मी शाह, जमील अहमद, एहसान बाबा, मोहम्मद तालीम अली, अली हुसैन, मोहम्मद मसी, तस्सु खान, इस्माइल, आमिर निजाम, मेराज अहमद, मौलाना शोएब, तूफेल, रिजवान अहमद और जिलानी समेत सैकड़ों की तादाद में अकीदतमंद मौजूद रहे।