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जोल्हूपुर ओवरब्रिज निर्माण में मुआवजे को लेकर हंगामा, ग्रामीणों का प्रदर्शन सर्किल रेट के अनुसार मुआवजा देने की मांग, एसडीएम बोले– असंतुष्ट हैं तो कोर्ट जाइए कालपी तहसील क्षेत्र के जोल्हूपुर मोड़ पर निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) को लेकर शनिवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब अधिग्रहण की जद में आ रहे मकानों के स्वामियों और ग्रामीणों ने कम मुआवजा दिए जाने का आरोप लगाते हुए निर्माण कार्य का विरोध शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मौके पर एकत्र हो गए और मशीनों को रोकने का प्रयास किया। सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाकर स्थिति को शांत कराया। हालांकि, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा उन्हें क्षेत्र के प्रचलित सर्किल रेट के अनुरूप मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि जिस दर से मुआवजा बनना चाहिए, उससे काफी कम राशि निर्धारित की गई है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई लोगों को अधिग्रहण की प्रक्रिया से संबंधित कोई स्पष्ट लिखित नोटिस तक नहीं दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार ओवरब्रिज और प्रस्तावित सर्विस रोड की जद में लगभग 13 परिवार प्रभावित हैं, जिनमें करीब 8 से 10 मकान पूरी या आंशिक रूप से हटाए जाएंगे। उनका कहना है कि कुछ लोगों को मुआवजे के चेक दिए गए, लेकिन अधिकांश प्रभावितों ने राशि कम होने का आरोप लगाते हुए चेक लेने से इनकार कर दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बताया कि अधिकारियों से कई बार अनुरोध किया गया कि पहले उचित मुआवजा दिया जाए, उसके बाद निर्माण कार्य कराया जाए, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई और पिलर खोदने सहित निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि समय रहते सर्विस रोड, नाली और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई तो बरसात के दौरान उनके घरों में पानी भरने की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। उनका कहना है कि ओवरब्रिज बनने के बाद क्षेत्र के लोगों की आवाजाही भी प्रभावित होगी। रेलवे फाटक पहले से बंद है और निर्माण कार्य के चलते अंडरपास का रास्ता भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एसडीएम ने समझाया, निर्माण कार्य नहीं रुकेगा ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर पहुंचे एसडीएम और अन्य अधिकारियों ने उन्हें समझाते हुए कहा कि मुआवजा प्रशासन द्वारा गठित टीम की रिपोर्ट के आधार पर तय किया गया है। यदि कोई व्यक्ति इससे संतुष्ट नहीं है तो वह न्यायालय की शरण ले सकता है, लेकिन निर्माण कार्य नहीं रोका जाएगा। इसके बाद कुछ लोगों ने सरकारी चेक स्वीकार कर लिए, जबकि अन्य प्रभावित परिवारों ने चेक लेने से इनकार कर दिया। ग्राम प्रधान ने बताया कि प्रभावित परिवार लगातार सर्किल रेट के अनुसार मुआवजे की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने बताया है कि मुआवजा उच्च अधिकारियों द्वारा गठित टीम की रिपोर्ट के आधार पर तय किया गया है। यदि किसी को आपत्ति है तो उसके लिए कानूनी विकल्प खुले हैं। प्रधान ने यह भी कहा कि ग्रामीणों ने सर्विस रोड, नाली, लाइट और आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था की मांग रखी है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि निर्माण के दौरान और बाद में लोगों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी। ग्रामीणों की प्रमुख मांगें - सर्किल रेट के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाए। - सभी प्रभावित परिवारों को पारदर्शी तरीके से अधिग्रहण संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। - सर्विस रोड, नाली, स्ट्रीट लाइट और जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। - निर्माण कार्य के दौरान आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराया जाए। - बरसात में जलभराव से बचाव के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। फिलहाल प्रशासन ने निर्माण कार्य जारी रखा है, जबकि प्रभावित परिवार उचित मुआवजे और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद किए हुए हैं। आने वाले दिनों में यह मामला प्रशासनिक स्तर पर सुलझता है या न्यायालय तक पहुंचता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार इस पूरे मामले में समाचार लिखे जाने तक किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक लिखित या विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। यदि भविष्य में प्रशासन, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) अथवा संबंधित एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। यह समाचार मौके पर मौजूद प्रभावित ग्रामीणों, ग्राम प्रधान और घटनास्थल पर हुई बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार का उद्देश्य किसी पक्ष का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के तथ्यों को सामने लाना है। अब उठ रहे हैं कई बड़े सवाल... - यदि ग्रामीणों का आरोप सही है तो सर्किल रेट के अनुरूप मुआवजा क्यों नहीं दिया गया? - यदि मुआवजा नियमानुसार तय हुआ है तो उसकी गणना का आधार सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? - क्या सभी प्रभावित परिवारों को अधिग्रहण संबंधी नोटिस विधिवत दिए गए थे? - निर्माण कार्य शुरू होने से पहले क्या सर्विस रोड, जल निकासी और आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की गई? - जिन परिवारों ने मुआवजा लेने से इनकार किया है, उनकी आपत्तियों का समाधान कब और कैसे होगा? - क्या प्रशासन प्रभावित परिवारों के साथ दोबारा वार्ता करेगा या मामला न्यायालय तक पहुंचेगा? इन सभी सवालों के जवाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और आधिकारिक बयान पर टिकी हैं। आपकी क्या राय है कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं ?? #BreakingNews #Jalaun #Kalpi #Jholupur #OverBridge #Compensation #LandAcquisition #GraminProtest #UPNews #Bundelkhand #Development #SDM #DM #PublicIssue #Infrastructure #RoadProject #ServiceRoad #CircleRate #JusticeForVillagers #HindiNews #SonuMaharaj #CrimeReporterJalaun #GroundReport #LatestNews #UttarPradesh

Kalpi, Jalaun | Jun 27, 2026

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पड़ौरी गौशाला में मौत का मातम, जिम्मेदारों की संवेदनाएं भी हुईं मृत?

गौशाला में गायें मर रहीं, जिम्मेदार एसी में बैठकर आदेशों की फाइलें पलट रहे हैं! 

बेजुबानों की आह जब आसमान तक पहुंची, तब जाकर जिम्मेदारों की गाड़ियां गौशाला तक पहुंचीं...

उरई मुख्यालय से सटीक सटे ग्राम पंचायत पड़ौरी की गौशाला एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
 यहां दर्जनों गाय बीमार पड़ी हैं और कई गायों के मृत मिलने की खबर ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया।
 सूचना आग की तरह फैली तो आनन-फानन में सीवीओ, अपर मुख्य पशु चिकित्सक, सचिव, प्रधान और अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंच गए।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गायें लगातार बीमार हो रही थीं, तब जिम्मेदार कहां थे?

गौशाला के केयरटेकर का कहना है कि कल तक गायें ठीक थीं, लेकिन अचानक उनकी हालत बिगड़ गई। 
वहीं मौके पर जो तस्वीरें दिखाई दीं, उन्होंने सरकारी दावों की पोल खोल दी। सफाई व्यवस्था बदहाल, तीन शेड के नीचे दर्जनों गायों को ठूंसकर रखा गया, हरे चारे का अभाव और भीषण गर्मी में पशुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था तक नहीं मिली।

सवालों के घेरे में प्रधान और सचिव

जिलाधिकारी लगातार बैठकों में गौशालाओं में साफ-सफाई, हरा चारा, स्वच्छ पानी, पंखे और कूलर जैसी व्यवस्थाओं के निर्देश देते हैं। 
लेकिन पड़ौरी गौशाला में इन आदेशों की खुली धज्जियां उड़ती नजर आईं।

45 डिग्री तापमान में जहां इंसान एसी और कूलर के बिना नहीं रह पा रहा, वहीं बेजुबान गायें टीन शेड के नीचे तपने को मजबूर हैं।

घंटों एसी की ठंडी हवा खाने वाले जिम्मेदार क्या कभी इन बेजुबानों की पीड़ा समझ पाएंगे?

पूड़ी खाने से बीमार हुईं गायें या कुछ और है राज?

स्थानीय लोगों ने दावा किया कि किसी भंडारे से लाई गई पूड़ियां खाने के कारण गायें बीमार हुई हैं।
 लेकिन मौके पर न तो गौशाला के अंदर और न ही बाहर कहीं पूड़ियां दिखाई दीं। 
ऐसे में यह तर्क भी सवालों के घेरे में है।

गायों की हालत देखकर साफ लगता है कि उनके शरीर पर मांस कम और हड्डियां ज्यादा नजर आ रही हैं। 

आखिर पोषण के नाम पर आने वाला पैसा कहां जा रहा है?

सबसे बड़े सवाल

● जब गायें बीमार थीं तो समय रहते इलाज क्यों नहीं हुआ?

● गौशाला में दर्ज 45 गायों के मुकाबले मौके पर केवल 30-32 गायें ही क्यों मिलीं?

● बाकी गायें कहां गईं?

● हरे चारे और पोषण की व्यवस्था कहां है?

● लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद गायों की हालत कुपोषित क्यों है?

● क्या गौशालाएं सिर्फ कागजों पर संचालित हो रही हैं?

● क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या मामला जांच के नाम पर दब जाएगा?

गायों के नाम पर बजट पूरा, लेकिन गायों के पेट खाली; जिम्मेदारों के कमरे ठंडे, मगर गौशाला में मौत की गर्मी जारी...

जिले की अन्य गौशालाओं में भी लगातार अनियमितताओं की तस्वीरें सामने आती रही हैं। 
सवाल यह है कि आखिर कब तक बेजुबान पशु भ्रष्ट व्यवस्था की कीमत चुकाते रहेंगे?

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में केवल फटकार तक सीमित रहता है या वास्तव में जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी होती है।

आपकी क्या राय है? 
क्या गौशालाओं की बदहाली के लिए सीधे जिम्मेदार अधिकारियों, प्रधान और सचिव पर कार्रवाई होनी चाहिए?

 अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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पड़ौरी गौशाला में मौत का मातम, जिम्मेदारों की संवेदनाएं भी हुईं मृत? गौशाला में गायें मर रहीं, जिम्मेदार एसी में बैठकर आदेशों की फाइलें पलट रहे हैं! बेजुबानों की आह जब आसमान तक पहुंची, तब जाकर जिम्मेदारों की गाड़ियां गौशाला तक पहुंचीं... उरई मुख्यालय से सटीक सटे ग्राम पंचायत पड़ौरी की गौशाला एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यहां दर्जनों गाय बीमार पड़ी हैं और कई गायों के मृत मिलने की खबर ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया। सूचना आग की तरह फैली तो आनन-फानन में सीवीओ, अपर मुख्य पशु चिकित्सक, सचिव, प्रधान और अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंच गए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गायें लगातार बीमार हो रही थीं, तब जिम्मेदार कहां थे? गौशाला के केयरटेकर का कहना है कि कल तक गायें ठीक थीं, लेकिन अचानक उनकी हालत बिगड़ गई। वहीं मौके पर जो तस्वीरें दिखाई दीं, उन्होंने सरकारी दावों की पोल खोल दी। सफाई व्यवस्था बदहाल, तीन शेड के नीचे दर्जनों गायों को ठूंसकर रखा गया, हरे चारे का अभाव और भीषण गर्मी में पशुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था तक नहीं मिली। सवालों के घेरे में प्रधान और सचिव जिलाधिकारी लगातार बैठकों में गौशालाओं में साफ-सफाई, हरा चारा, स्वच्छ पानी, पंखे और कूलर जैसी व्यवस्थाओं के निर्देश देते हैं। लेकिन पड़ौरी गौशाला में इन आदेशों की खुली धज्जियां उड़ती नजर आईं। 45 डिग्री तापमान में जहां इंसान एसी और कूलर के बिना नहीं रह पा रहा, वहीं बेजुबान गायें टीन शेड के नीचे तपने को मजबूर हैं। घंटों एसी की ठंडी हवा खाने वाले जिम्मेदार क्या कभी इन बेजुबानों की पीड़ा समझ पाएंगे? पूड़ी खाने से बीमार हुईं गायें या कुछ और है राज? स्थानीय लोगों ने दावा किया कि किसी भंडारे से लाई गई पूड़ियां खाने के कारण गायें बीमार हुई हैं। लेकिन मौके पर न तो गौशाला के अंदर और न ही बाहर कहीं पूड़ियां दिखाई दीं। ऐसे में यह तर्क भी सवालों के घेरे में है। गायों की हालत देखकर साफ लगता है कि उनके शरीर पर मांस कम और हड्डियां ज्यादा नजर आ रही हैं। आखिर पोषण के नाम पर आने वाला पैसा कहां जा रहा है? सबसे बड़े सवाल ● जब गायें बीमार थीं तो समय रहते इलाज क्यों नहीं हुआ? ● गौशाला में दर्ज 45 गायों के मुकाबले मौके पर केवल 30-32 गायें ही क्यों मिलीं? ● बाकी गायें कहां गईं? ● हरे चारे और पोषण की व्यवस्था कहां है? ● लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद गायों की हालत कुपोषित क्यों है? ● क्या गौशालाएं सिर्फ कागजों पर संचालित हो रही हैं? ● क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या मामला जांच के नाम पर दब जाएगा? गायों के नाम पर बजट पूरा, लेकिन गायों के पेट खाली; जिम्मेदारों के कमरे ठंडे, मगर गौशाला में मौत की गर्मी जारी... जिले की अन्य गौशालाओं में भी लगातार अनियमितताओं की तस्वीरें सामने आती रही हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक बेजुबान पशु भ्रष्ट व्यवस्था की कीमत चुकाते रहेंगे? अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में केवल फटकार तक सीमित रहता है या वास्तव में जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी होती है। आपकी क्या राय है? क्या गौशालाओं की बदहाली के लिए सीधे जिम्मेदार अधिकारियों, प्रधान और सचिव पर कार्रवाई होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। #पड़ौरी_गौशाला #उरई #जालौन #गौशाला_कांड #गाय_बीमार #गाय_मृत #गौमाता #AnimalWelfare #CowShelter #BreakingNews #GroundReport #CrimeReporter #Urai #Jalaun #UPNews #उत्तरप्रदेश #DMJalaun #CVO #प्रधान #सचिव #भ्रष्टाचार #लापरवाही #सरकारी_व्यवस्था #गौशाला_सत्य #JusticeForCows #SaveCows #गोवंश #बेजुबान #गौसेवा #जिला_प्रशासन #लोकल_न्यूज #ViralNews #Breaking #HindiNews #NewsUpdate #GroundZero #Kalpi #Kadaura #Orai #Bundelkhand #UPPolice #DistrictAdministration #जनता_की_आवाज #सवाल_तो_बनता_है #एक्शन_कब #जिम्मेदार_कौन #वायरल_न्यूज #LatestNews #Trending #Viral #News #Journalism #सोनू_महाराज #बुंदेलखंड #भारत #India #PublicIssue #गौशाला_अनियमितता #CowCare #SaveAnimals #VoiceOfVoiceless #सिस्टम_जागो #ActionNeeded #जनहित

Kalpi, Jalaun | Jun 27, 2026

अवैध निर्माण और कॉलोनियों पर चलेगा बुलडोजर, डीएम के सख्त तेवर

बिना स्वीकृत मानचित्र निर्माण करने वालों पर होगी सीलिंग, अभियोजन और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई; कोचिंग, अस्पताल, होटल और मैरिज हॉल की भी होगी जांच

उरई (जालौन)। उरई विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अब अवैध निर्माण और नियमों को ताक पर रखकर बसाई जा रही कॉलोनियों पर प्रशासन का शिकंजा कसने जा रहा है।
 जिलाधिकारी एवं उपाध्यक्ष उरई विकास प्राधिकरण राजेश कुमार पाण्डेय ने शुक्रवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना स्वीकृत मानचित्र के किए गए निर्माण तथा मानचित्र के विपरीत बनाए गए भवनों के खिलाफ उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक में अवैध कॉलोनियों, अनधिकृत निर्माण, लंबित वादों, नई टाउनशिप और विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि नियमों का उल्लंघन अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
 ऐसे सभी निर्माणों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए जाएं और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सीलिंग, अभियोजन तथा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जाए।

डीएम ने शहर के कोचिंग संस्थानों, शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, होटलों और मैरिज हॉल की भी व्यापक जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पार्किंग व्यवस्था, अग्निशमन सुरक्षा, आपातकालीन निकास सहित सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए। जहां भी लापरवाही मिले, वहां नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

बैठक में धारा-27 के अंतर्गत लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिना स्वीकृति निर्माण करने वालों को किसी भी प्रकार की राहत न दी जाए। 
साथ ही शहर में सड़क, मार्ग प्रकाश एवं अन्य विकास परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराने और प्राधिकरण की आय बढ़ाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने नागरिकों और कॉलोनी विकासकर्ताओं से अपील की कि बिना मानचित्र स्वीकृत कराए कोई भी निर्माण या प्लॉटिंग न करें। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सीलिंग, अभियोजन और बुलडोजर जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित निर्माणकर्ता की होगी।

बैठक में सचिव परमानंद यादव, मुख्य लेखाधिकारी आशुतोष चतुर्वेदी, सहायक अभियंता, अवर अभियंता सहित प्राधिकरण के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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अवैध निर्माण और कॉलोनियों पर चलेगा बुलडोजर, डीएम के सख्त तेवर बिना स्वीकृत मानचित्र निर्माण करने वालों पर होगी सीलिंग, अभियोजन और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई; कोचिंग, अस्पताल, होटल और मैरिज हॉल की भी होगी जांच उरई (जालौन)। उरई विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अब अवैध निर्माण और नियमों को ताक पर रखकर बसाई जा रही कॉलोनियों पर प्रशासन का शिकंजा कसने जा रहा है। जिलाधिकारी एवं उपाध्यक्ष उरई विकास प्राधिकरण राजेश कुमार पाण्डेय ने शुक्रवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना स्वीकृत मानचित्र के किए गए निर्माण तथा मानचित्र के विपरीत बनाए गए भवनों के खिलाफ उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में अवैध कॉलोनियों, अनधिकृत निर्माण, लंबित वादों, नई टाउनशिप और विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि नियमों का उल्लंघन अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे सभी निर्माणों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए जाएं और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सीलिंग, अभियोजन तथा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जाए। डीएम ने शहर के कोचिंग संस्थानों, शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, होटलों और मैरिज हॉल की भी व्यापक जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पार्किंग व्यवस्था, अग्निशमन सुरक्षा, आपातकालीन निकास सहित सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए। जहां भी लापरवाही मिले, वहां नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। बैठक में धारा-27 के अंतर्गत लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिना स्वीकृति निर्माण करने वालों को किसी भी प्रकार की राहत न दी जाए। साथ ही शहर में सड़क, मार्ग प्रकाश एवं अन्य विकास परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराने और प्राधिकरण की आय बढ़ाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए। बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने नागरिकों और कॉलोनी विकासकर्ताओं से अपील की कि बिना मानचित्र स्वीकृत कराए कोई भी निर्माण या प्लॉटिंग न करें। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सीलिंग, अभियोजन और बुलडोजर जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित निर्माणकर्ता की होगी। बैठक में सचिव परमानंद यादव, मुख्य लेखाधिकारी आशुतोष चतुर्वेदी, सहायक अभियंता, अवर अभियंता सहित प्राधिकरण के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। #उरई #जालौन #BreakingNews #DMJalaun #RajeshKumarPandey #BulldozerAction #IllegalConstruction #IllegalColonies #UDA #DevelopmentAuthority #Bulldozer #Encroachment #CityDevelopment #TownPlanning #UPNews #UttarPradesh #SmartCity #PublicSafety #FireSafety #ParkingRules #ConstructionRules #ActionMode #GovernmentAction #LatestNews #HindiNews #SonuMaharaj #CrimeReporter #JalaunNews #UraiNews #Kalpi #Bundelkhand #NewsUpdate #ViralNews #BulldozerAction #NoIllegalConstruction

Kalpi, Jalaun | Jun 27, 2026

जालौन पुलिस की बड़ी कार्रवाई 

गोहन में पुलिस मुठभेड़, बदमाश के पैर में लगी गोली, दो शातिर आरोपी गिरफ्तार

जनपद जालौन के थाना गोहन क्षेत्र में शुक्रवार देर रात पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। 
एसओजी, सर्विलांस टीम और थाना गोहन पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बकरी चोरी और पशुपालक को घायल करने की घटना में वांछित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। 
पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक आरोपी के पैर में गोली लगी, जबकि दूसरा आरोपी घेराबंदी कर दबोच लिया गया।

पुलिस के अनुसार मुखबिर से सूचना मिलने पर रसूलपुर से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे संपर्क मार्ग पर चेकिंग की जा रही थी। 
इसी दौरान संदिग्ध बदमाश पुलिस को देखकर फायरिंग करने लगे। 
आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आसिफ पुत्र अहमद रसूल (35), निवासी बदनपुर थाना गोहन के पैर में गोली लगी। वहीं उसका साथी उदल पुत्र राजू (21), निवासी नाहिली थाना कुठौंद भागने का प्रयास कर रहा था, लेकिन पुलिस टीम ने पीछा कर उसे भी गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से एक अवैध तमंचा, कारतूस, दो जिंदा कारतूस, एक खोखा कारतूस और एक ब्लेडनुमा चाकू बरामद किया गया।

एएसपी डॉ. ईशान सोनी ने बताया कि घायल आरोपी आशिफ पूर्व में गो-तस्करी के मामले में जेल जा चुका है।
 कुछ दिन पहले उसने अपने साथियों के साथ गोहन क्षेत्र में एक पशुपालक से मारपीट कर उसकी तीन बकरियां चोरी कर ली थीं। 
विवेचना में दोनों आरोपियों की संलिप्तता सामने आने के बाद पुलिस उनकी तलाश में जुटी थी।

फिलहाल दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि फरार दो अन्य साथियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

मुठभेड़ में शामिल प्रमुख पुलिस अधिकारी एवं टीम
 एएसपी डॉ. ईशान सोनी के निर्देशन में कार्रवाई
 एसओजी प्रभारी रिंकू चौधरी
 थाना प्रभारी गोहन सतीश कुमार कुशवाहा
 एसओजी टीम
 सर्विलांस सेल
 थाना गोहन पुलिस टीम

 आपकी राय क्या है?
क्या लगातार हो रही पुलिस मुठभेड़ों से अपराधियों में डर बढ़ेगा, या अपराध पर लगाम लगाने के लिए और सख्त कदमों की जरूरत है?

 वीडियो सुनिए कि एएसपी डॉ. ईशान सोनी ने इस पूरे घटनाक्रम पर क्या कहा...
अपनी राय जरूर बताइए और कमेंट बॉक्स में लिखिए — क्या जालौन पुलिस की यह कार्रवाई अपराधियों के लिए बड़ा संदेश है?

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जालौन पुलिस की बड़ी कार्रवाई गोहन में पुलिस मुठभेड़, बदमाश के पैर में लगी गोली, दो शातिर आरोपी गिरफ्तार जनपद जालौन के थाना गोहन क्षेत्र में शुक्रवार देर रात पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। एसओजी, सर्विलांस टीम और थाना गोहन पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बकरी चोरी और पशुपालक को घायल करने की घटना में वांछित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक आरोपी के पैर में गोली लगी, जबकि दूसरा आरोपी घेराबंदी कर दबोच लिया गया। पुलिस के अनुसार मुखबिर से सूचना मिलने पर रसूलपुर से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे संपर्क मार्ग पर चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान संदिग्ध बदमाश पुलिस को देखकर फायरिंग करने लगे। आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आसिफ पुत्र अहमद रसूल (35), निवासी बदनपुर थाना गोहन के पैर में गोली लगी। वहीं उसका साथी उदल पुत्र राजू (21), निवासी नाहिली थाना कुठौंद भागने का प्रयास कर रहा था, लेकिन पुलिस टीम ने पीछा कर उसे भी गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से एक अवैध तमंचा, कारतूस, दो जिंदा कारतूस, एक खोखा कारतूस और एक ब्लेडनुमा चाकू बरामद किया गया। एएसपी डॉ. ईशान सोनी ने बताया कि घायल आरोपी आशिफ पूर्व में गो-तस्करी के मामले में जेल जा चुका है। कुछ दिन पहले उसने अपने साथियों के साथ गोहन क्षेत्र में एक पशुपालक से मारपीट कर उसकी तीन बकरियां चोरी कर ली थीं। विवेचना में दोनों आरोपियों की संलिप्तता सामने आने के बाद पुलिस उनकी तलाश में जुटी थी। फिलहाल दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि फरार दो अन्य साथियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। मुठभेड़ में शामिल प्रमुख पुलिस अधिकारी एवं टीम एएसपी डॉ. ईशान सोनी के निर्देशन में कार्रवाई एसओजी प्रभारी रिंकू चौधरी थाना प्रभारी गोहन सतीश कुमार कुशवाहा एसओजी टीम सर्विलांस सेल थाना गोहन पुलिस टीम आपकी राय क्या है? क्या लगातार हो रही पुलिस मुठभेड़ों से अपराधियों में डर बढ़ेगा, या अपराध पर लगाम लगाने के लिए और सख्त कदमों की जरूरत है? वीडियो सुनिए कि एएसपी डॉ. ईशान सोनी ने इस पूरे घटनाक्रम पर क्या कहा... अपनी राय जरूर बताइए और कमेंट बॉक्स में लिखिए — क्या जालौन पुलिस की यह कार्रवाई अपराधियों के लिए बड़ा संदेश है? #BreakingNews #Jalaun #Orai #Gohan #PoliceEncounter #UPPolice #SOG #Surveillance #CrimeNews #GoatTheft #BundelkhandExpressway #Encounter #ASP #IshanSoni #RinkuChaudhary #SatishKumarKushwaha #UttarPradesh #JalaunPolice #CrimeReporter #गोहन_में_पुलिस_मुठभेड़ #बकरी_चोरी_कांड_का_खुलासा

Kalpi, Jalaun | Jun 27, 2026

सीएचसी कदौरा पर सीएमओ का औचक छापा: गंदगी, जर्जर सड़क और बदहाल टीन शेड देख भड़के, लेकिन बड़ा सवाल—क्या अब बदलेगी व्यवस्था या फिर निरीक्षण बनकर रह जाएगा खानापूर्ति?

कदौरा (जालौन)
जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिनंदन प्रसाद ने एसीएमओ डॉ. के.पी. वर्मा के साथ शुक्रवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कदौरा का औचक निरीक्षण किया।
 निरीक्षण के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आ गई। परिसर में फैली गंदगी, अस्पताल तक जाने वाली जर्जर सड़क, उखड़ती रंगाई-पुताई और मरीजों के बैठने के लिए लगाए गए टीन शेड की बदहाल स्थिति पर सीएमओ ने कड़ी नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने ओपीडी, डिलीवरी रूम, दवा वितरण कक्ष, वार्ड, अभिलेखों और अन्य व्यवस्थाओं की गहन जांच की।
 उन्होंने भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों से बातचीत कर अस्पताल में मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली और उनकी शिकायतें भी सुनीं। सीएमओ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हालांकि इस निरीक्षण ने कई बड़े सवाल भी खड़े कर दिए हैं। 
यदि अस्पताल की हालत इतनी खराब थी तो अब तक जिम्मेदार अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ी?
 क्या नियमित निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित थे? 
अस्पताल परिसर में गंदगी और जर्जर सड़क आखिर किसकी जिम्मेदारी है? मरीजों के बैठने के लिए लगाया गया टीन शेड कब से बदहाल था और इसकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई?
 यदि सीएमओ के आने पर इतनी खामियां मिलीं तो आम दिनों में मरीजों को किन परिस्थितियों में इलाज कराना पड़ता होगा?

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या इस निरीक्षण के बाद केवल निर्देश देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर वास्तव में विभागीय कार्रवाई होगी? 
क्या अस्पताल की व्यवस्थाएं कुछ दिनों के लिए सुधरेंगी और फिर पहले जैसी हो जाएंगी? जनता को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर बदलाव चाहिए।

सीएमओ ने संबंधित अधिकारियों को साफ-सफाई तत्काल दुरुस्त कराने, जर्जर सड़क की मरम्मत कराने, टीन शेड बदलवाने और अन्य आवश्यक कार्य जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए। 
साथ ही कर्मचारियों को समयबद्ध और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की हिदायत देते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सीएमओ की सख्ती का असर वास्तव में अस्पताल की व्यवस्था पर दिखाई देता है या फिर यह औचक निरीक्षण भी सरकारी फाइलों में दर्ज होकर रह जाएगा।

सवाल

आखिर सीएचसी कदौरा की बदहाली का जिम्मेदार कौन?

नियमित निरीक्षण होते रहे तो खामियां अब जाकर क्यों मिलीं?

मरीजों की सुविधा से आखिर कब तक होगा समझौता?

क्या निर्देशों के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी या सिर्फ चेतावनी?

क्या अस्पताल की तस्वीर स्थायी रूप से बदलेगी या कुछ दिन की सफाई अभियान तक सीमित रहेगी?

क्या स्वास्थ्य विभाग निरीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा?

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सीएचसी कदौरा पर सीएमओ का औचक छापा: गंदगी, जर्जर सड़क और बदहाल टीन शेड देख भड़के, लेकिन बड़ा सवाल—क्या अब बदलेगी व्यवस्था या फिर निरीक्षण बनकर रह जाएगा खानापूर्ति? कदौरा (जालौन) जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिनंदन प्रसाद ने एसीएमओ डॉ. के.पी. वर्मा के साथ शुक्रवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कदौरा का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आ गई। परिसर में फैली गंदगी, अस्पताल तक जाने वाली जर्जर सड़क, उखड़ती रंगाई-पुताई और मरीजों के बैठने के लिए लगाए गए टीन शेड की बदहाल स्थिति पर सीएमओ ने कड़ी नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने ओपीडी, डिलीवरी रूम, दवा वितरण कक्ष, वार्ड, अभिलेखों और अन्य व्यवस्थाओं की गहन जांच की। उन्होंने भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों से बातचीत कर अस्पताल में मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली और उनकी शिकायतें भी सुनीं। सीएमओ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि इस निरीक्षण ने कई बड़े सवाल भी खड़े कर दिए हैं। यदि अस्पताल की हालत इतनी खराब थी तो अब तक जिम्मेदार अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ी? क्या नियमित निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित थे? अस्पताल परिसर में गंदगी और जर्जर सड़क आखिर किसकी जिम्मेदारी है? मरीजों के बैठने के लिए लगाया गया टीन शेड कब से बदहाल था और इसकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? यदि सीएमओ के आने पर इतनी खामियां मिलीं तो आम दिनों में मरीजों को किन परिस्थितियों में इलाज कराना पड़ता होगा? सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या इस निरीक्षण के बाद केवल निर्देश देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर वास्तव में विभागीय कार्रवाई होगी? क्या अस्पताल की व्यवस्थाएं कुछ दिनों के लिए सुधरेंगी और फिर पहले जैसी हो जाएंगी? जनता को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर बदलाव चाहिए। सीएमओ ने संबंधित अधिकारियों को साफ-सफाई तत्काल दुरुस्त कराने, जर्जर सड़क की मरम्मत कराने, टीन शेड बदलवाने और अन्य आवश्यक कार्य जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए। साथ ही कर्मचारियों को समयबद्ध और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की हिदायत देते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सीएमओ की सख्ती का असर वास्तव में अस्पताल की व्यवस्था पर दिखाई देता है या फिर यह औचक निरीक्षण भी सरकारी फाइलों में दर्ज होकर रह जाएगा। सवाल आखिर सीएचसी कदौरा की बदहाली का जिम्मेदार कौन? नियमित निरीक्षण होते रहे तो खामियां अब जाकर क्यों मिलीं? मरीजों की सुविधा से आखिर कब तक होगा समझौता? क्या निर्देशों के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी या सिर्फ चेतावनी? क्या अस्पताल की तस्वीर स्थायी रूप से बदलेगी या कुछ दिन की सफाई अभियान तक सीमित रहेगी? क्या स्वास्थ्य विभाग निरीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा? #CMOJalaun #CHCKadaura #Jalaun #HealthDepartment #HospitalInspection #BreakingNews #BigAction #Healthcare #GovernmentHospital #UPHealth #UttarPradesh #MedicalServices #PublicHealth #CleanHospital #PatientsFirst #HealthSystem #Accountability #GroundReality #HospitalNews #Kadaura #Urai #JalaunNews #Breaking #Exclusive #HealthAlert #Administration #Inspection #MedicalCare #NewsUpdate #HindiNews

Kalpi, Jalaun | Jun 26, 2026