गांव बापोड़ा में महाग्राम योजना से बदलेगी तस्वीर : प्रति व्यक्ति 155 लीटर शुद्ध जलापूर्ति का लक्ष्य, दिसंबर तक होगा चालू
गांव बापोड़ा के एसटीपी परिसर में बन रहा हरित ऑक्सीवन, लगेंगे एक हजार से अधिक पौधे और हर्बल वाटिका : जेई बिजेश जावला
अप्रैल 2027 की डेडलाइन से 4 महीने पहले पूरा होगा काम, जलभराव और बीमारी से मिलेगी मुक्ति : जेई बिजेश जावला
भिवानी, 22 अक्तूबर : जिला के गांव बापोड़ा में महाग्राम योजना के अंतर्गत जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा जलापूर्ति एवं सीवरेज व्यवस्था को अत्याधुनिक बनाने का कार्य ऐतिहासिक गति से प्रगति पर है, जो ग्रामीण जीवन शैली को एक नई ऊंचाई प्रदान करने जा रहा है। योजना के तहत वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 10 हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 155 लीटर के मानक से शुद्ध पेयजल और संपूर्ण सीवरेज नेटवर्क उपलब्ध कराने का ठोस ढांचा तैयार किया गया है। जलघर में नए स्टोरेज व क्लियर वाटर टैंक, पंप चैंबर तथा उन्नत मोटर-मशीनरी के साथ-साथ दो नए बूस्टिंग स्टेशन भी स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त देवसर-बापोड़ा रोड पर निर्मित 3 एमएलडी क्षमता का अत्याधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट रोजाना 30 लाख लीटर सीवरेज जल का उपचार करेगा, जिससे गलियों में जलभराव और बीमारियों की समस्या से स्थायी मुक्ति मिलेगी तथा ग्रामीणों का जीवन स्तर पहले से कहीं अधिक स्वच्छ और समृद्ध बनेगा।
परियोजना की सबसे अनुकरणीय और जन-संदेशात्मक उपलब्धि एसटीपी परिसर में विकसित किया जा रहा हरित ऑक्सीवन है, जो विकास और पर्यावरण संरक्षण के अनूठे संतुलन की मिसाल पेश कर रहा है। पौधरोपण अभियान का शुभारंभ करते हुए कनिष्ठ अभियंता बिजेश कुमार जावला ने कहा कि आज विकास की दौड़ में कटते पेड़ों के बीच हरित क्षेत्र को बढ़ाना और प्रकृति को सहेजना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस एसटीपी परिसर में एक हजार से अधिक छायादार, फलदार, फूलदार और औषधीय पौधे लगाए जा रहे हैं। यहां त्रिवेणी, एरीका पाम, नीम, अर्जुन, आम, अमरूद और आंवला जैसे वृक्षों के साथ-साथ एक विशेष हर्बल वाटिका भी तैयार की जा रही है, जिसमें तुलसी, एलोवेरा, सहजन और अश्वगंधा जैसी अमूल्य औषधियां शामिल हैं। यह ऑक्सीवन न केवल वायु की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा, बल्कि आने वाली भावी पीढिय़ों के लिए एक अमूल्य और हरित विरासत साबित होगा।
विभागीय तत्परता और जनसहयोग का परिणाम यह है कि जिस परियोजना की पूर्णता समय-सीमा अप्रैल 2027 तय की गई थी, उसे इसी वर्ष दिसंबर तक पूरी तरह चालू करने का ऐतिहासिक कीर्तिमान रचा जा रहा है। इसके साथ-साथ गांव की जिन गलियों में पाइप लाइन बहुत पुरानी है अर्थात जर्जर है या बार-बार लीकेज होती है या जिन कॉलोनियों में पाइपलाइन थी ही नहीं उनमें नई पाइप लाइन डालने का कार्य भी जोर-जोर से जारी है तथा दो नए इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन से सीवरेज का पानी भी एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। जो उपचारित करने के बाद घग्घर ड्रेन में चला जाएगा। कनिष्ठ अभियंता बिजेश कुमार जावला ने बताया कि उच्च अधिकारियों के कुशल मार्गदर्शन, कार्यकारी एजेंसी और ग्रामीणों के अभूतपूर्व सहयोग के कारण यह ड्रीम प्रोजेक्ट निर्धारित समय से बहुत पहले जनता को समर्पित किया जाएगा। इस परियोजना के चालू होने से ग्रामीणों को कुई बनाने के खर्च से मुक्ति मिलेगी और जन-स्वास्थ्य सुरक्षा सुदृढ़ होगी। यह पहल समाज को स्पष्ट संदेश देती है कि जब आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण पर्यावरण के जतन के साथ किया जाता है, तो वह विकास गांव के संपूर्ण कल्याण का आधार बनता है।
फोटो, 1 : परिसर में लगाए जाने वाले पौधों के साथ बृजेश कुमार जावला जे ई ,गांव के सरपंच सुग्रीव, एजेंसी के मालिक जयप्रकाश सेठी, ठेकेदार जगबीर व अन्य।
फोटो, 2 : एसटीपी पर निर्माणाधीन ऑफिस बिल्डिंग।