हिंदुस्तान जिंक की रामपुरा आगुचा में खदान सुरक्षा पर बड़ी पहल
माइन वाइंडर सिस्टम पर डीजीएमएस की कार्यशाला, एआई-आईओटी और डिजिटल मॉनिटरिंग पर किया मंथन
रामपुरा आगुचा में 100 से अधिक खनन विशेषज्ञ ने भूमिगत खदानों में सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और विश्वसनीय संचालन पर किया मंथन
भीलवाड़ा (रमेश चन्द्र डाढ)। भूमिगत खदानों में माइन शाफ्ट वाइंडर सिस्टम की सुरक्षा, विश्वसनीयता और तकनीकी उन्नयन पर मंथन के लिए हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की रामपुरा आगुचा खदान में विशेष कार्यशाला आयोजित हुई। महानिदेशालय खान सुरक्षा (डीजीएमएस) के तत्वावधान में हुई कार्यशाला में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें डीजीएमएस के वरिष्ठ अधिकारी, खनन विशेषज्ञ, तकनीकी पेशेवर, उपकरण निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधि और उद्योग विशेषज्ञ शामिल रहे। कार्यशाला का केंद्र भूमिगत खदानों में उपयोग होने वाले वाइंडर सिस्टम को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के साथ डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल तथा नियामकीय मानकों के प्रभावी अनुपालन पर रहा। विभिन्न संस्थाओं और कंपनियों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए आधुनिक तकनीकों के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। मुख्य अतिथि डीजीएमएस के उप महानिदेशक, नॉर्थ वेस्टर्न जोन मुरलीधर बिदारी ने कहा कि माइन वाइंडर की सुरक्षा के लिए नियमों का पालन, मजबूत इंजीनियरिंग, आधुनिक सुरक्षा प्रणालियां और निरंतर सीखने की संस्कृति जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं नियामकों, खदान संचालकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर सुरक्षा मानकों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विशेषज्ञों ने आईओटी आधारित सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत सिग्नलिंग सिस्टम, वाइंडर सिमुलेटर, डिजिटल मॉनिटरिंग, ब्रेक सिस्टम डिजाइन और इवेंट रिकॉर्डिंग सिस्टम सहित विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर प्रस्तुतियां दीं। प्रिवेंटिव एवं प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस, एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स और रिमोट मॉनिटरिंग के जरिए संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान तथा अगली पीढ़ी के सुरक्षा समाधानों पर भी विचार-विमर्श हुआ। वैश्विक स्तर पर हुई माइन वाइंडर घटनाओं से मिले सबक और भविष्य में दुर्घटना जोखिम कम करने के उपायों पर भी चर्चा की गई। कार्यशाला में डीजीएमएस के वरिष्ठ अधिकारी टी. श्रीनिवास, प्रकाश कुमार, श्याम सुंदर सोनी, उमेश कुमार राव, विनोद राजक, के. रविंदर और रूपेश कुमार श्रीवास्तव मौजूद रहे। हिंदुस्तान जिंक के सीओओ किशोर एस., रामपुरा आगुचा के आईबीयू सीईओ राम मुरारी सहित कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञों ने भी सहभागिता की। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, एबीबी, सिमेंस और सीआईटीआईसी के प्रतिनिधियों ने भी तकनीकी अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के अंत में रामपुरा आगुचा के यूनिट हेड वेकेश चित्तौड़ा ने आभार व्यक्त किया। कार्यशाला के माध्यम से नियामक संस्थाओं, खनन कंपनियों और तकनीकी साझेदारों के बीच सुरक्षा, तकनीक और नवाचार से जुड़े अनुभवों के आदान-प्रदान को मंच मिला।