निर्दलीय विधायक अशोक कोठारी की सदस्यता पर फिर उठे सवाल, राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पहुंची याचिका
अनुच्छेद 191(2) व दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) का हवाला देकर अयोग्य घोषित करने की मांग; भाजपा कार्यक्रमों में कोठारी की सक्रिय मौजूदगी बनी चर्चा का केंद्र
भीलवाड़ा : (विशेष संवाददाता ) भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय विधायक अशोक कुमार कोठारी की विधानसभा सदस्यता को लेकर एक बार फिर सियासी और संवैधानिक सवाल खड़े हो गए हैं। भीलवाड़ा निवासी राजेश सिंह सिसोदिया ने विधायक कोठारी के खिलाफ भारत के संविधान के अनुच्छेद 191(2) सहपठित दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) के तहत याचिका प्रस्तुत कर उन्हें विधानसभा सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित किए जाने की मांग की है। याचिका 18 सितंबर 2026 को प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख दस्तावेज में है।
याचिका राज्यपाल, राजस्थान तथा राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत की गई है। इसमें अशोक कुमार कोठारी को विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र-180, भीलवाड़ा से वर्तमान निर्दलीय विधायक बताते हुए उनकी सदस्यता को संवैधानिक प्रावधानों की कसौटी पर जांचने और अयोग्यता संबंधी कार्रवाई की मांग की गई है।
निर्दलीय विधायक, लेकिन भाजपा के कार्यक्रमों में खुली मौजूदगी
मामले को चर्चा में लाने वाला अहम पहलू यह है कि विधायक अशोक कोठारी लगातार भाजपा से जुड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपनी मौजूदगी दर्ज करवाते नजर आ रहे हैं। हालिया नगर निगम चुनाव की राजनीतिक गतिविधियों के दौरान भी उनकी भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ सार्वजनिक उपस्थिति सामने आई। महापौर पद के भाजपा प्रत्याशी के नामांकन के दौरान भी कोठारी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ मौजूद रहे।
इसके अलावा सितंबर 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट में भाजपा कार्यक्रम में कोठारी के भाजपा दुपट्टे के साथ नजर आने को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
यहीं से विवाद का संवैधानिक पक्ष और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है—विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में कोठारी वर्तमान में निर्दलीय विधायक के रूप में दर्ज हैं, जबकि सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों में उनकी भाजपा के साथ निकटता लगातार दिखाई दे रही है।
2024 का विवाद भी फिर सुर्खियों में
कोठारी की भाजपा से नजदीकी को लेकर विवाद नया नहीं है। सितंबर 2024 में उनके भाजपा सदस्यता अभियान से जुड़ने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था। उस समय विपक्ष की ओर से उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उठाई गई थी। रिपोर्टों के अनुसार कोठारी ने उस समय भाजपा की सदस्यता से जुड़े प्रमाण साझा किए थे।
हालांकि बाद में भाजपा की ओर से कोठारी को पार्टी की औपचारिक सदस्यता दिए जाने से इनकार किए जाने की बात भी सामने आई थी और तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा था कि कोठारी भाजपा के सदस्य नहीं हैं।
अब नई याचिका ने पुराने विवाद को फिर कुरेदा
अब सितंबर 2026 में दाखिल नई याचिका ने इस पूरे प्रकरण को एक बार फिर संवैधानिक बहस के केंद्र में ला दिया है। याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 191(2) और दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) का उल्लेख करते हुए विधायक कोठारी को अयोग्य घोषित करने की मांग की है।
याचिका का आधार यह सवाल है कि निर्दलीय निर्वाचित विधायक की राजनीतिक दल से संबद्धता अथवा ऐसी गतिविधियां, यदि वे संविधान के दलबदल संबंधी प्रावधानों के दायरे में आती हैं, तो उनकी विधानसभा सदस्यता पर क्या प्रभाव पड़ता है।
2023 में निर्दलीय जीते थे कोठारी
विधानसभा चुनाव 2023 में अशोक कुमार कोठारी ने भीलवाड़ा विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता था। निर्वाचन विभाग के आधिकारिक प्रमाणपत्र में भी उन्हें 180-भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय निर्वाचित बताया गया है।
वर्तमान राजस्थान विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अशोक कुमार कोठारी को Independent सदस्य के रूप में दर्ज किया गया है।
अब निगाह संवैधानिक प्रक्रिया पर:-
फिलहाल महत्वपूर्ण बात यह है कि याचिका दाखिल होना अपने आप में सदस्यता समाप्त होने का निर्णय नहीं है। याचिका में लगाए गए आधार, उपलब्ध दस्तावेज और विधायक की स्थिति पर सक्षम संवैधानिक प्राधिकारी द्वारा विचार और निर्धारित प्रक्रिया के बाद ही कोई अंतिम निर्णय सामने आएगा।
लेकिन इस याचिका ने भीलवाड़ा की राजनीति में एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—जब विधानसभा के रिकॉर्ड में विधायक निर्दलीय हैं, तो भाजपा के सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी लगातार सक्रिय मौजूदगी और राजनीतिक भूमिका को संवैधानिक प्रावधानों की कसौटी पर कैसे देखा जाएगा?
अब इस पूरे मामले में राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर होने वाली आगामी कार्रवाई पर राजनीतिक गलियारों की निगाहें टिक गई हैं।
Bhilwara, Bhilwara | Sep 30, 2026