फर्जी ट्रैप कार्रवाई के आरोपों पर भड़का लेखपाल संघ, 75 जिलों की 351 तहसीलों में कार्य बहिष्कार
अयोध्या के सोहावल में लेखपाल उत्कर्षदीप प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग, एसीओ/एंटी करप्शन की कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल
संतकबीरनगर। प्रदेश के लेखपालों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ)/एंटी करप्शन एवं विजिलेंस द्वारा की जा रही कथित गलत, अनुचित एवं दुर्भावनापूर्ण ट्रैप कार्रवाई के विरोध में उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि लेखपालों के विरुद्ध ट्रैप कार्रवाई से पहले शिकायत की सत्यता, शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि, कथित रंजिश तथा संबंधित कार्य में लेखपाल के अधिकार क्षेत्र की निष्पक्ष जांच अनिवार्य की जाए।संघ का कहना है कि लेखपाल राजस्व विभाग की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और कठिन परिस्थितियों में गांव-गांव जाकर शासन की योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने के साथ भूमि विवाद, पैमाइश, अतिक्रमण तथा अन्य राजस्व संबंधी कार्यों का दायित्व निभाते हैं। ऐसे में किसी शिकायत या व्यक्तिगत विवाद के आधार पर लेखपालों को झूठे मामलों में फंसाने का प्रयास कर्मचारियों के मनोबल और कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहा है।संघ ने आरोप लगाया कि कई मामलों में असंतुष्ट व्यक्ति निजी स्वार्थ अथवा दुर्भावना के चलते लेखपाल के खिलाफ शिकायत कर उसे झूठे मामले में फंसाने का प्रयास करते हैं। संघ ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार में संलिप्त किसी कर्मचारी का समर्थन नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन किसी निर्दोष कर्मचारी को निजी रंजिश, षड्यंत्र अथवा फर्जी शिकायत के आधार पर ट्रैप करना भी स्वीकार्य नहीं है।
अयोध्या के सोहावल प्रकरण से बढ़ा आक्रोश
संघ के अनुसार 20 अगस्त 2026 को जनपद अयोध्या की तहसील सोहावल में लेखपाल श्री उत्कर्षदीप से संबंधित घटना ने पूरे प्रदेश के लेखपाल संवर्ग को आहत एवं आक्रोशित किया है। संघ ने उपलब्ध तथ्यों, सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो एवं अन्य साक्ष्यों को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
संघ का कहना है कि घटना के बाद प्रदेशभर के लेखपालों में भय, मानसिक दबाव एवं असुरक्षा की भावना बढ़ी है। ऐसे माहौल में कर्मचारियों के लिए निष्पक्ष एवं ईमानदारी से कार्य करना कठिन हो सकता है।
75 जिलों की 351 तहसीलों में एक दिवसीय कार्य बहिष्कार
इसी गंभीर मामले के विरोध में प्रदेश के सभी 75 जनपदों की 351 तहसीलों में लेखपालों ने थाना दिवस का बहिष्कार करते हुए एक दिवसीय कलमबंद हड़ताल एवं धरना-प्रदर्शन किया। संघ ने कहा कि यह आंदोलन किसी भ्रष्टाचार के आरोपी कर्मचारी के समर्थन में नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और निर्दोष कर्मचारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर है।
मुख्यमंत्री से चार प्रमुख मांगें
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि—
1. अयोध्या के सोहावल प्रकरण की स्वतंत्र जांच हो:
लेखपाल उत्कर्षदीप के विरुद्ध हुई कार्रवाई की पुलिस विभाग से स्वतंत्र एजेंसी/SIT के माध्यम से निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, शिकायत तथा कथित प्री-ट्रैप प्रक्रिया सहित सभी तथ्यों की जांच कराई जाए। यदि किसी कर्मचारी को षड्यंत्रपूर्वक फंसाया जाना पाया जाता है तो उसे तत्काल न्यायोचित राहत दी जाए।
2. ट्रैप कार्रवाई से पहले अनिवार्य जांच हो:
भविष्य में किसी लेखपाल के खिलाफ ट्रैप कार्रवाई से पहले शिकायत की सत्यता, शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि, संभावित रंजिश एवं निजी स्वार्थ तथा संबंधित कार्य में लेखपाल के वास्तविक अधिकार क्षेत्र की विस्तृत जांच अनिवार्य की जाए। केवल मौखिक शिकायत अथवा सामान्य आरोप के आधार पर कार्रवाई न की जाए।
3. फर्जी अथवा दुर्भावनापूर्ण ट्रैप पर रोक लगे:
संघ ने मांग की कि यदि जांच में शिकायतकर्ता, दलाल या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा झूठी शिकायत, षड्यंत्र अथवा कर्मचारी को फंसाने का प्रयास प्रमाणित होता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर सहित नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही बिना ठोस एवं प्रत्यक्ष साक्ष्य के गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई से बचने की व्यवस्था हो।
4. स्पष्ट एवं पारदर्शी एसओपी जारी हो:
भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ) एवं विजिलेंस विभाग की ट्रैप कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट, पारदर्शी एवं जवाबदेह Standard Operating Procedure (SOP) जारी की जाए, ताकि प्रत्येक कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया एवं निष्पक्ष मानकों के अनुरूप हो और किसी निर्दोष कर्मचारी को दुर्भावनापूर्ण या फर्जी कार्रवाई का शिकार न होना पड़े।
‘भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं, निर्दोष के उत्पीड़न का विरोध’
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने स्पष्ट किया कि संघ भ्रष्टाचार के किसी भी रूप का समर्थन नहीं करता। यदि कोई कर्मचारी रिश्वत मांगने या लेने का दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन किसी कर्मचारी को निजी रंजिश, षड्यंत्र, झूठी शिकायत अथवा जबरन ट्रैप के माध्यम से फंसाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।संघ ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले में निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और निर्दोष लेखपाल को न्याय दिलाने की मांग करते हुए कहा कि लेखपाल शासन और जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। भयमुक्त वातावरण में ही वे अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकते हैं। #NTCAgency #Lekhpal #संतकबीरनगर