*विजयादशमी पर होंगा सौभाग्य संवर्धक महोत्सव पूर्णाहुति एवं अणुव्रत संस्कार का आयोजन*
*आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में जारी भगवान पार्श्वनाथ विधान एवं नवग्रह जाप अनुष्ठान*
भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ),17 अक्टूबर श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज संसघ के सानिध्य में शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में नवरात्रि में सौभाग्य संवर्धक महोत्सव भगवान पार्श्वनाथ विधान एवं नवग्रह जाप अनुष्ठान का आयोजन जारी है। श्रद्धा एवं भक्ति से ओतप्रोत माहौल में हो रहे इस आयोजन में सैकड़ो श्रावक-श्राविकाएं अपने भाग्यांक, मूलांक या नामांक के आधार पर निर्धारित व्यवस्था के अनुसार अनुष्ठान में शामिल हो रहे है। महोत्सव की पूर्णाहुति 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन होगी इसी दिन श्रावक श्राविकाएं आचार्यश्री से अणुव्रत संस्कार भी ग्रहण करेंगे।
अनुष्ठान आयोजक श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि अनुष्ठान के तहत शनिवार को भाग्यांक आठ एवं शनि ग्रह था उन श्रावक श्राविकाओं द्वारा अनुष्ठान सम्पन्न किया गया। इसी तरह रविवार को जिनका भाग्यांक चार एवं राहु ग्रह है वह श्रावक श्राविकाएं अनुष्ठान में शामिल होकर यज्ञ हवन करेंगे। विजयादशमी पर पूर्णाहुति हवन के सामूहिक अनुष्ठान में उन श्रावक श्राविकाओं को भी शामिल होने का सुअवसर मिलेगा जो किसी भी कारण से अब तक इसमें शामिल नहीं हो पाए। सभी को उनके भाग्यांक एवं ग्रह के अनुसार वस्त्र प्रदान किए जाएंगे। इसके लिए इच्छुक श्रावक-श्राविकाएं 19 अक्टूबर तक चातुर्मास समिति के पास नाम लिखा सकते है।
सौभाग्य संवर्धक महोत्सव के समापन पर भाग्यांक एक से नौ नंबर तक के पुण्यार्जक जिन्होंने नवग्रह अनुष्ठान में भाग लिया उनका सामूहिक निष्ठापन अनुष्ठान होगा। इसके लिए अभिमंत्रित माला भी प्रदान की जाएगी। पूर्णाहुति अनुष्ठान के लिए करीब 100 हवन कुण्ड बनेंगे एवं नवग्रह की आहुतियां होगी। विजयादशमी के इस पावन अवसर पर आचार्यश्री के सानिध्य में अणुव्रत संस्कार का भव्य आयोजन होगा। इसमें श्रावक-श्राविकाएं अपनी-अपनी भावनानुसार गुरूदेव से छोटे-छोटे व्रत स्वीकार कर जीवन को पवित्र व पावन बनाएंगे। इन व्रतों में नियमित जिनेन्द्र भगवान की आराधना,रात्रि भोजन त्याग, जमीकंद का त्याग, नियमित मंदिर जाकर अभिषेक करना जैसे छोटे-छोटे अणुव्रत स्वीकार करने होंगे।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि थोड़े बहुत व्रत तो हमारे जीवन में होने ही चाहिए। अणुव्रत स्वीकार करके जीवन का त्याग करने पर आत्मा का कल्याण हो जाता है। अणुव्रत वह भी ले सकेंगे जो भगवान पार्श्वनाथ विधान एवं नवग्रह जाप अनुष्ठान में शामिल नहीं हो पाए। आचार्यश्री ने कहा कि कई लोग इन नियमों की पालना करते है पर गुरू से विधिवत नियम नहीं लेने से इसका फल प्राप्त नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी श्रावक श्राविकाएं श्रद्धा एवं आस्था के साथ अनुष्ठान करें एवं सदा अपने भगवान की शक्ति पर पूर्ण विश्वास रखे। आचार्यश्री ने अनुष्ठान का महत्व बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से नवरात्रि की साधना करते हुए हम अपने जीवन के कष्ट एवं बाधाओं को दूर करने के साथ जीवन में खुशहाली ला सकते है। भाग्यांक के आधार पर अनुष्ठान में बैठने वाले श्रावक श्राविकाओं को उनके ग्रह के रंगों के आधार पर वस्त्र प्रदान किए गए है। भीलवाड़ा में पहली बार हो रहे इस विशिष्ट आयोजन के लिए सूर्यमहल में आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य एवं मंत्रोच्चार के बीच सुबह 7 से 10 बजे तक अनुष्ठान हो रहा है।