भीलवाड़ा में लोक संस्कृति, परंपरा और लोक विरासत के उत्सव के रूप में आयोजित हुई ‘लोक मंथन यात्रा 2026’
‘हम भारत के लोग’ के भाव के साथ लोक परंपराओं, भारतीय मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत का हुआ संगम
भीलवाड़ा:राजकुमार गोयल, 17 अक्टूबर 2026
लोक संस्कृति, लोक परंपराओं, लोक भाषाओं, लोक कलाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से शनिवार को भीलवाड़ा में ‘लोक मंथन यात्रा 2026 – हम भारत के लोग’ का भव्य आयोजन किया गया। इस यात्रा के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकात्मता तथा लोकजीवन में रची-बसी परंपराओं को जन-जन तक पहुँचाने का संदेश दिया गया। आयोजन में विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं वैचारिक संगठनों ने सहभागिता करते हुए भारतीय संस्कृति के विविध आयामों को प्रस्तुत किया। पूरे कार्यक्रम में लोक विरासत के प्रति गौरव, अपनी जड़ों से जुड़ाव और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका का भाव प्रमुखता से दिखाई दिया।
अम्बेडकर सर्कल से हुआ यात्रा का शुभारंभ
लोक मंथन यात्रा कार्यक्रम के संयोजक बलराज आचार्य ने बताया कि यात्रा का शुभारंभ भीलवाड़ा में रेलवे स्टेशन के निकट अम्बेडकर सर्कल से हुआ। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक एवं वैचारिक संगठनों और समूहों द्वारा पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ यात्रा का आत्मीय स्वागत किया गया। पारंपरिक वेशभूषा, उत्साहपूर्ण वातावरण और सांस्कृतिक उल्लास ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया। इसके पश्चात दुपहिया वाहन रैली निकाली गई, जिसके माध्यम से लोक मंथन यात्रा के उद्देश्य और संदेश को व्यापक स्तर पर पहुँचाया गया।
उन्होंने बताया कि लोक मंथन यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने, लोक परंपराओं के महत्व को समझने और विविधताओं के बीच एकता के भारतीय भाव को सशक्त करने का एक प्रयास है। भारत की वास्तविक पहचान यहाँ की विविध भाषाओं, बोलियों, रीति-रिवाजों, लोक कलाओं और जीवन मूल्यों में निहित है। इन्हीं विशेषताओं को समाज के सामने लाने के उद्देश्य से यात्रा का आयोजन किया गया।
‘हम भारत के लोग’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित
यात्रा के अंतर्गत माणिक्य लाल वर्मा महाविद्यालय परिसर स्थित विवेकानंद सभागार में ‘हम भारत के लोग’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में भारतीय संविधान, सांस्कृतिक मूल्यों, सामाजिक एकात्मता और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार व्यक्त किए गए।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता जसवंत खत्री ने संविधान में भारतीय मूल्यों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना राष्ट्र जीवन को सशक्त आधार प्रदान करती है। ‘हम भारत के लोग’ संविधान की प्रस्तावना का महत्वपूर्ण भाव है, जो नागरिकों की सामूहिक शक्ति, लोकतांत्रिक चेतना और राष्ट्र के प्रति साझा उत्तरदायित्व को अभिव्यक्त करता है। भारतीय संविधान के मूल भाव को समझने के लिए देश की सांस्कृतिक परंपराओं और समाज की सामूहिक चेतना को जानना भी आवश्यक है।
यात्रा संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि लोकजीवन में आत्मीयता और अपनत्व जोड़ने वाले विविध संबोधन हमारी सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण अंग हैं। भारत की लोक परंपराओं में परस्पर सम्मान, रिश्तों की आत्मीयता, सामाजिक सहयोग और सामूहिक जीवन की भावना सहज रूप से दिखाई देती है। ‘हम भारत के लोग’ केवल एक वाक्यांश नहीं, बल्कि सामूहिक शक्ति, सामाजिक एकात्मता और राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी का प्रतीक है। लोक संस्कृति इन मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
विभिन्न विषयों पर आधारित प्रदर्शनियों ने आकर्षित किया
कार्यक्रम के दौरान इतिहास, विज्ञान, संस्कृत और साहित्य सहित विभिन्न विषयों पर आधारित प्रदर्शनियों का उद्घाटन एवं अवलोकन किया गया। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा, ऐतिहासिक विरासत, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, भाषा-साहित्य और सांस्कृतिक चेतना के विविध पक्षों को प्रस्तुत किया गया।
मेवाड़ की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय परंपराओं, लोक साहित्य, पारंपरिक ज्ञान और लोक जीवन से जुड़े विषयों ने आयोजन को शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध बनाया। प्रदर्शनियों का उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं और आम नागरिकों को अपनी विरासत से परिचित कराना तथा भारतीय परंपराओं के प्रति जिज्ञासा एवं गौरव का भाव विकसित करना रहा।
लोक मंथन यात्रा के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि इतिहास, साहित्य, विज्ञान और संस्कृति एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास और ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण आधार हैं। इन सभी क्षेत्रों का समन्वय भारतीय जीवन दृष्टि को समझने में सहायक है।
लोक कलाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति पर आधारित विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ रहीं। संस्कार भारती द्वारा लोक चरी नृत्य, कच्छी घोड़ी नृत्य, भवई नृत्य, तेजा गायन, भपंग वादन, फड़ वाचन एवं नाट्य प्रस्तुतियों जैसे लोक कला के विविध रूपों को मंच प्रदान किया गया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से राजस्थान की पारंपरिक कला, लोक आस्था, लोक संगीत और जनजीवन की जीवंत अभिव्यक्ति देखने को मिली।
लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया। लोक नृत्यों की लय, लोकगीतों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि और लोक कथाओं की प्रस्तुति ने भारतीय लोकजीवन की समृद्ध परंपरा को सजीव रूप में सामने रखा। फड़ वाचन एवं नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से लोक कथाओं, ऐतिहासिक स्मृतियों और जनमानस में प्रचलित सांस्कृतिक आख्यानों की महत्ता भी उजागर हुई।
इसके अतिरिक्त लोकोक्ति प्रश्नोत्तरी, लोक काव्य पाठ, संस्कृत नाटिका और पारंपरिक लोक खेलों जैसी गतिविधियों ने कार्यक्रम में सहभागिता एवं ज्ञानवर्धन का वातावरण बनाया। इन गतिविधियों के माध्यम से लोकभाषाओं, लोक साहित्य, पारंपरिक ज्ञान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सहज एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया।
लोक विरासत के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प
लोक मंथन यात्रा कार्यक्रम के समन्वयक योगेश पारीक ने बताया कि लोक मंथन यात्रा का मूल उद्देश्य समाज को अपनी जड़ों, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान से जोड़ना तथा लोक कलाकारों एवं लोक परंपराओं को सम्मान दिलाना है। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा होती है। इसमें उस समाज का इतिहास, अनुभव, जीवन दर्शन, पारिवारिक संबंध, सामाजिक व्यवहार और प्रकृति के प्रति दृष्टिकोण समाहित होता है।
उन्होंने बताया कि आधुनिक समय में लोक परंपराओं के संरक्षण के साथ उन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाना भी आवश्यक है। लोकगीत, लोकनृत्य, लोककथाएँ, लोकभाषाएँ, पारंपरिक खेल और स्थानीय कलाएँ हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाती हैं। ऐसे आयोजनों से समाज को अपनी परंपराओं को समझने, लोक कलाकारों को उचित मंच देने और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि लोक मंथन का उद्देश्य विभिन्न विचारों, परंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के बीच संवाद स्थापित करना भी है, ताकि समाज अपनी विविधता को अपनी शक्ति के रूप में पहचान सके। आयोजन ने यह संदेश दिया कि लोक संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान जीवन की प्रेरणा और भविष्य की सांस्कृतिक पहचान भी है।
विभिन्न संगठनों की सहभागिता से बना सांस्कृतिक समागम
लोक मंथन यात्रा के आयोजन में विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं वैचारिक संगठनों के प्रतिनिधियों, साहित्यकारों, लोक कलाकारों, विद्यार्थियों तथा संस्कृति प्रेमियों ने सहभागिता की। अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत संगठनों की सहभागिता से लोक संस्कृति, शिक्षा, इतिहास, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक चेतना के विविध आयाम एक मंच पर आए।
कार्यक्रम के माध्यम से नागरिकों को अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक होने, स्थानीय कला एवं कलाकारों को प्रोत्साहित करने तथा भारतीय परंपराओं को दैनिक जीवन में सम्मानजनक स्थान देने का आह्वान किया गया। आयोजन समिति ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी संगठनों, कलाकारों, अतिथियों, विद्यार्थियों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
लोक मंथन यात्रा 2026 ने भीलवाड़ा में लोक संस्कृति, भारतीय मूल्यों और राष्ट्रीय एकात्मता के संदेश को सशक्त स्वर प्रदान करते हुए यह भाव प्रस्तुत किया कि भारत की शक्ति उसकी विविधता, सांस्कृतिक निरंतरता और ‘हम भारत के लोग’ की सामूहिक चेतना में निहित है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ।