*एक नाम की साधना से ही जीता जा सकता काम ओर क्रोध-आचार्य रामदयालजी महाराज*
*जीवन में वासना का अंत हुए बिना सुख शांति की प्राप्ति नहीं हो सकती*
*माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में दैनिक चातुर्मासिक सत्संग*
भीलवाड़ा:निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ), 9 अक्टूबर राम नाम की प्रबल साधना से ही पांचों इन्द्रियों को नियंत्रित किया जा सकता है। योगेश्वर कृष्ण ने जिस काम ओर क्रोध को इंसान का सबसे बड़ा शत्रु बताया है उन्हें भी एक नाम की साधना से ही जीता जा सकता है। जिस पर राम गुरू की कृपा हो जाए वहीं अर्न्तसाधना करके जीवन को धन्य कर सकता है। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत शुक्रवार को दैनिक सत्संग में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि काम ओर क्रोध जैसे शत्रुओं पर नियंत्रण के लिए कृष्ण भगवान ने अर्जुन को संयम की अद्भुत शिक्षा प्रदान की। साधना के माध्यम से ही इनको साधा जा सकता है।
आचार्यश्री ने जीवन में भाई-भाई के मध्य स्नेह कायम रखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि भाई साथ नहीं होने से ही रावण सब कुछ खो बैठा था। शक्तिसिंह ने भी महाराणा प्रताप को खोया तो पछतावा हुआ। व्यक्ति के जीवन में अज्ञान, अहंकार, अर्थ ही परिवार,समाज व राष्ट्र के प्रति विषाद, विरोध व विद्रोह के कारण बनते है। इनके कारण ही रक्त सम्बन्ध खूनी संघर्ष में बदल जाते है। उन्होंने कहा कि संसार में वासना के कई रूप है जिनसे बचना कठिन है लेकिन परमात्मा की नाम साधना उससे बचा सकती है। मानव जीवन को सार्थक बनाने के लिए काम ओर क्रोध को नष्ट करना जरूरी है।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि जीवन में वासना का अंत हुए बिना सुख शांति की प्राप्ति नहीं हो सकती। इसके लिए समझदार बनना होगा। समझ आने पर समस्या का समाधान अपने आप हो जाता है। उन्होंने कहा कि श्राद्ध पक्ष समाप्त हो रहे ओर श्रद्धा का समय नवरात्रि प्रारंभ हो रही है। इस दौरान श्रद्धालु अपनी-अपनी आस्था के आधार पर आराधना व भक्ति करेंगे। शक्ति के उपासक शक्ति की आराधना करेंगे तो कई श्रद्धालु गरबा के माध्यम से माता रानी की भक्ति करेंगे।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। दैनिक सत्संग सुबह 9 बजे से हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।
*सामूहिक वाणीजी पाठ करने वाले श्रद्धालुओं को साधुवाद अर्पित*
आचार्य रामदयाल महाराज ने रामद्वारा धाम में 27 सितम्बर से 8 अक्टूबर तक महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज द्वारा रचित अनुभव वाणीजी के सामूहिक पाठ में शामिल श्रद्धालुओं को साधुवाद अर्पित करते हुए कहा कि जो लोग वाणीजी नहीं समझते थे वह भी दर्शन करके धन्य हो गए। इसके माध्यम से विभिन्न विषयों पर स्वामी रामचरण महाराज के आत्म उपदेश का ध्यान हुआ। उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा रामद्वारा धाम नहीं पहुंच पाने वाले कई श्रद्धालुओं ने अपने शहर, गांव के रामद्वारा धाम ओर घर में रहकर भी वाणीजी का पाठ कर श्रद्धा व आस्था के महायज्ञ में सहभागिता की।