मसूरी में जन्माष्टमी के बाद नगर भ्रमण पर निकले श्रीकृष्ण, जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत
अंग्रेजों के दौर से चली आ रही परंपरा आज भी कायम, मंदिर समिति ने निकाली श्रीकृष्ण की शोभायात्रा
मसूरी। जन्माष्टमी के बाद रविवार को पहाड़ों की रानी मसूरी में भगवान श्रीकृष्ण की डोली नगर भ्रमण पर निकली। सनातन धर्म मंदिर समिति की ओर से आयोजित शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। भगवान श्रीकृष्ण की डोली के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए शहर के साथ ही आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु पहुंचे। बैंड की धार्मिक धुनों और श्रीकृष्ण के जयकारों के बीच निकली शोभायात्रा में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित विभिन्न आकर्षक झांकियां शामिल रहीं। इनमें वासुदेव की जेल और श्रीकृष्ण जन्म से जुड़ी झांकी लोगों के आकर्षण का विशेष केंद्र रही। श्रद्धालुओं ने झांकियों की जमकर सराहना की। शोभायात्रा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग को जीवंत करती झांकी विशेष आकर्षण रही। वासुदेव की जेल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उन्हें लेकर गोकुल जाने के प्रसंग को झांकी के माध्यम से बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। झांकी में श्रीकृष्ण जन्म की कथा को देखकर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए और लोगों ने इसकी खूब सराहना की। इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं पर आधारित अन्य झांकियां भी शोभायात्रा में शामिल रहीं, जिसने धार्मिक आयोजन को और भव्य बना दिया।पर्यटकों ने भी शोभायात्रा को उत्सुकता से देखा और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए। शोभायात्रा मलिंगार चौक से शुरू होकर घंटाघर, पिक्चर पैलेस चौक और शहीद स्थल होते हुए गांधी चौक पहुंची। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए। विभिन्न स्थानों पर सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं की ओर से शोभायात्रा का स्वागत किया गया तथा मिष्ठान वितरित किया गया। पिक्चर पैलेस चौक पर स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर के मुख्य पुजारी परशुराम भट्ट ने भगवान श्रीकृष्ण की डोली का विधिवत पूजन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और वातावरण श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा।
सनातन धर्म मंदिर समिति के अध्यक्ष ने बताया कि जन्माष्टमी के बाद आने वाले रविवार को प्रत्येक वर्ष भगवान श्रीकृष्ण की डोली नगर भ्रमण पर निकालने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण स्वयं डोली में विराजमान होकर नगर का भ्रमण करते हैं और भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं।उन्होंने बताया कि यह परंपरा नई नहीं बल्कि अंग्रेजों के शासनकाल से चली आ रही है। एक समय अंग्रेजों ने इस धार्मिक परंपरा को रोकने का प्रयास किया था, लेकिन हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों के प्रयासों से यह परंपरा जारी रही। कोरोना काल में भी इसे सूक्ष्म रूप से निभाया गया और परंपरा को टूटने नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि आज इस डोली के माध्यम से मसूरी ही नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से लोग भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। देश-विदेश से मसूरी आने वाले पर्यटक भी इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनते हैं।
नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने भी भगवान श्रीकृष्ण की डोली के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से मसूरी, प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि मसूरी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं शहर की पहचान हैं। पीढ़ियों से चली आ रही ऐसी परंपराओं को संरक्षित करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने आयोजन के लिए सनातन धर्म मंदिर समिति और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। जगह-जगह लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण की डोली पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। धार्मिक आयोजन ने मसूरी के वातावरण को भक्ति और उल्लास से सराबोर कर दिया।
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Mussoorie, Dehradun | Sep 7, 2026