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sunil kumar

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मसूरी में तंबाकू की दुकानों पर कसेगा शिकंजा, लाइसेंस के बिना बिक्री पर लग सकती है रोक

मसूरी नगर पालिका तैयार कर रही नियमावली, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान रोकने के लिए भी सख्ती की तैयारी; जागरूकता के साथ कार्रवाई पर जोर’’

पर्यटन नगरी मसूरी में तंबाकू उत्पादों की बिक्री को नियंत्रित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए नगर पालिका नई व्यवस्था की तैयारी कर रही है। तंबाकू की दुकानों को लाइसेंस व्यवस्था के दायरे में लाने के साथ सार्वजनिक स्थानों पर धूमपान से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए शुक्रवार को नगर पालिका परिषद में तंबाकू विक्रेता लाइसेंसिंग (टीवीएल) और तंबाकू नियंत्रण पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इस पहल का अहम पहलू यह है कि तंबाकू नियंत्रण को केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी मानने के बजाय स्थानीय निकाय, विक्रेताओं और अन्य संबंधित पक्षों की साझा जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है। नगर पालिका का प्रयास है कि बिक्री से जुड़े नियम स्पष्ट हों, विक्रेताओं को उनकी जिम्मेदारियों की जानकारी मिले और कानून का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की जा सके।
लाइसेंस व्यवस्था से बिक्री पर निगरानी की तैयारी’’
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने बताया कि जिलाधिकारी देहरादून के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग और संबंधित हितधारकों के साथ बैठक की गई है। तंबाकू विक्रेता लाइसेंसिंग और बिक्री को नियंत्रित करने के लिए नियमावली तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तंबाकू सेवन के दुष्परिणामों को देखते हुए लोगों को जागरूक करना जरूरी है। नगर पालिका स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर प्रचार-प्रसार करेगी। नियमावली तैयार होने के बाद नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सार्वजनिक स्थानों पर धूमपान रोकना भी चुनौती
तंबाकू नियंत्रण के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूमपान रोकना भी महत्वपूर्ण है। गौरव भसीन के अनुसार, सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा), 2003 में सार्वजनिक स्थानों पर धूमपान पर रोक सहित कई प्रावधान हैं, लेकिन इनके प्रभावी पालन के लिए प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। मसूरी में बड़ी संख्या में पर्यटकों की आवाजाही रहती है। ऐसे में सार्वजनिक स्थलों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करना और लोगों को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। कार्यशाला में जिला तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ की प्रतिनिधि अर्चना उनियाल तथा बालाजी सेवा संस्थान के अवधेश कुमार और ममता थापा ने तंबाकू नियंत्रण कानूनों, लाइसेंस व्यवस्था और विभागों के बीच समन्वय पर चर्चा की। राज्य सरकार की ओर से गुटखा, खैनी सहित कुछ तंबाकू उत्पादों पर एक वर्ष के प्रतिबंध का विषय भी कार्यशाला में उठाया गया। संबंधित उत्पादों और प्रतिबंध की लागू शर्तों के संबंध में सरकारी आदेश के अनुरूप ही कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल नगर पालिका की नियमावली तैयार होने और उसके लागू होने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि लाइसेंस किन विक्रेताओं के लिए अनिवार्य होगा और नियमों के उल्लंघन पर किस तरह की कार्रवाई की जाएगी।
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मसूरी में जुटे 550 नेत्र विशेषज्ञ, आधुनिक सर्जरी पर होगा मंथन
गणेश जोशी ने किया उत्तराखंड आईकॉन-2026 का शुभारंभ, बोले- अब देहरादून में भी उपलब्ध हैं आंखों के बेहतर इलाज की सुविधाएं

मसूरी, 23 अक्टूबर (नवोदय टाइम्स)। उत्तराखंड आईकॉन-2026 के तहत मसूरी में देश-विदेश के करीब 550 नेत्र विशेषज्ञ जुटे हैं। शुक्रवार को पिक्चर पैलेस स्थित होटल रामाडा में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने तीन दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। सम्मेलन में आंखों की आधुनिक सर्जरी, नई उपचार तकनीकों और नेत्र रोगों के बेहतर इलाज पर चर्चा होगी।

गणेश जोशी ने कहा कि आंखें मानव शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं और इनकी देखभाल बेहद जरूरी है। पहले गंभीर नेत्र रोगों के इलाज के लिए मरीजों को दिल्ली जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता था, लेकिन अब देहरादून में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल रहा है।

लाइव सर्जरी और नई तकनीकों पर चर्चा

उत्तराखंड ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसायटी की वार्षिक बैठक के तहत 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित सम्मेलन में मोतियाबिंद, लेसिक व लेजर सर्जरी, डायबिटिक रेटिनोपैथी और ऑकुलोप्लास्टी सहित विभिन्न नेत्र रोगों के उपचार पर चर्चा होगी। आयोजकों के अनुसार, करीब 125 विशेषज्ञ वैज्ञानिक प्रस्तुतियां देंगे। सम्मेलन में आधुनिक सर्जरी के वीडियो और लाइव सर्जरी के प्रदर्शन की भी योजना है।

इस आयोजन से उत्तराखंड के नेत्र चिकित्सकों को नई तकनीकें सीखने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा। इसका लाभ भविष्य में मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में मिल सकता है।

इस अवसर पर सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. बीके ओली, आयोजन सचिव डॉ. विशाल शर्मा, यूकेएसओएस के मानद सचिव डॉ. अमिल सिंह, डॉ. गौरव लूथरा और वैज्ञानिक समिति के अध्यक्ष डॉ. सौरभ लूथरा सहित अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
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मसूरी में टैक्सी कारोबारियों का विवाद कोतवाली पहुंचा, दोनों पक्षों में जमकर आरोप-प्रत्यारोप
एसोसिएशन ने 800 लोगों की रोजी-रोटी का हवाला देकर दो दिन में कार्रवाई नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी, दूसरे पक्ष ने कहा- सीसीटीवी फुटेज से हो निष्पक्ष जांच

पर्यटन नगरी मसूरी में टैक्सी संचालन को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। टैक्सी-कार ओनर्स एसोसिएशन के कार्यालय में कथित तोड़फोड़ और लूटपाट का मामला गुरुवार को मसूरी कोतवाली पहुंच गया, जहां दोनों पक्षों के लोग बड़ी संख्या में एकत्र हो गए। कोतवाली में दोनों पक्षों के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप हुए और हंगामे की स्थिति बन गई। पुलिस को बीच में आकर दोनों पक्षों को शांत कराना पड़ा। एक ओर एसोसिएशन ने कार्यालय में तोड़फोड़ और नकदी चोरी के आरोप लगाते हुए तत्काल मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की, वहीं दूसरे पक्ष ने आरोपों को खारिज करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। मामले में दोनों पक्षों की तहरीर मिलने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है।
दो दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो हड़ताल की चेतावनी
मसूरी टैक्सी-कार ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजेन्द्र पवार और पदाधिकारियों ने कहा कि एसोसिएशन अपने नियमों के अनुसार संचालित होती है, लेकिन कुछ सदस्य नियमों के विपरीत जाकर सवारियां उठाने का काम कर रहे हैं। इससे संगठन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन से करीब 800 लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। ऐसे में यदि कुछ लोग नियमों को दरकिनार कर केवल अपने हितों को प्राथमिकता देंगे तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कार्यालय में तोड़फोड़ की गई, महत्वपूर्ण रजिस्टर फाड़े गए, सीसीटीवी कैमरे तोड़े गए और नकदी चोरी की गई। उन्होंने पुलिस से मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि दो दिन के भीतर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो एसोसिएशन अनिश्चितकालीन हड़ताल करेगी और मसूरी में चक्का जाम किया जाएगा।
दूसरे पक्ष का आरोप- अभद्रता और मारपीट की गई
वहीं, दूसरे पक्ष के विपिन भंडारी ने एसोसिएशन के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने बताया कि गुरुवार सुबह सवारी ले जाने को लेकर एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ उनका विवाद हुआ था। उनका आरोप है कि इस दौरान एसोसिएशन के कुछ लोगों ने उनके साथ अभद्रता और मारपीट की। विपिन भंडारी ने कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनके किसी सहयोगी ने एसोसिएशन कार्यालय में तोड़फोड़ या लूटपाट की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें फंसाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने पुलिस से सीसीटीवी फुटेज के आधार पर निष्पक्ष जांच करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि किसी ने कार्यालय में तोड़फोड़ या लूटपाट की है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
टैक्सी संचालन के अधिकार को लेकर भी आमने-सामने
विपिन भंडारी ने कहा कि अपनी टैक्सी से सवारी ले जाना उनका मौलिक अधिकार है और एसोसिएशन उन पर अनुचित दबाव बना रही है। वहीं, एसोसिएशन पदाधिकारियों का कहना है कि संगठन के नियमों का पालन जरूरी है और नियमों के विपरीत सवारियां उठाने से दूसरे टैक्सी संचालकों की आजीविका प्रभावित होती है। दोनों पक्षों के इन परस्पर विरोधी दावों के बीच अब पुलिस जांच से ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
कोतवाल बोले- दोनों पक्षों की तहरीर मिली, जांच जारी
मसूरी कोतवाल नरेंद्र सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। दोनों पक्षों की ओर से तहरीर प्राप्त हुई हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
एसडीएम ने दिए निष्पक्ष कार्रवाई के निर्देश
एसडीएम मसूरी राहुल आनंद ने बताया कि उन्होंने पुलिस को मामले में नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पक्ष को अनुचित संरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए और जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। मसूरी जैसे शांतिप्रिय पर्यटन क्षेत्र का माहौल किसी भी स्थिति में खराब नहीं होने दिया जाएगा।
टैक्सी संचालन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब पुलिस जांच के साथ-साथ शहर की यातायात व्यवस्था और कारोबारियों की आजीविका से भी जुड़ गया है। एक पक्ष ने दो दिन में कार्रवाई नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है, जबकि दूसरा पक्ष सीसीटीवी फुटेज के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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मसूरी टैक्सी कार ऑनर्स एसोसिएशन के कार्यालय पर हमले से भड़का आक्रोश, मसूरी में लगाया जाम

आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े टैक्सी कारोबारी, मौके पर पहुंची पुलिस

मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी में देर शाम मसूरी टैक्सी-कार ओनर्स एसोसिएशन के कार्यालय पर कथित तौर पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा हमला किए जाने से टैक्सी कारोबारियों में भारी आक्रोश फैल गया। घटना से नाराज एसोसिएशन के सदस्यों ने मसूरी के मैसोनिक लॉज क्षेत्र में जाम लगा दिया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।

टैक्सी कारोबारियों का कहना है कि जब तक हमले में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता, तब तक जाम नहीं खोला जाएगा। घटना की सूचना मिलने पर मसूरी पुलिस मौके पर पहुंची और आक्रोशित लोगों को समझाकर स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया।

घटना के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया। टैक्सी एसोसिएशन के सदस्यों ने आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस से सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। अब पुलिस की कार्रवाई और जाम खुलने को लेकर स्थिति बनी हुई है।
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मसूरी में सेवा संकल्प अभियान का समापन, योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर

मसूरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में भाजपा मसूरी मंडल की ओर से चलाए गए सेवा संकल्प अभियान का समापन किया गया। अभियान के दौरान शहर और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाई गई। भाजपा मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और लोगों को उनके अधिकारों व सुविधाओं के प्रति जागरूक करना रहा।
रजत अग्रवाल ने बताया कि अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को उपहार और फल वितरित किए गए तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना की गई। विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ सेवा संकल्प सेतु कार्यक्रम आयोजित कर लोगों की समस्याएं सुनी गईं। रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान और नाले-खालों की सफाई के माध्यम से स्वच्छता का संदेश भी दिया गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने सुभाष चंद्र छात्रावास पहुंचकर बच्चों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने बताया कि अभियान में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, युवाओं को स्टार्टअप के प्रति प्रेरित करने, सड़क सुरक्षा के नियमों की जानकारी देने और नशे से दूर रहने के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी शामिल रहे। प्रधानमंत्री के विकसित भारत-2047 के संकल्प को लेकर लोगों को छोटे उद्योगों और स्वरोजगार के महत्व से अवगत कराया गया।
रजत अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकारें जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लोगों के जीवन में बदलाव लाने का प्रयास कर रही हैं। अभियान के दौरान लोगों ने योजनाओं की जानकारी ली और पात्र लाभार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया।
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सेवा संकल्प अभियान के तहत लोक गायिका मीणा आर्य ने ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के प्रति किया जागरूक

मसूरी। लोक संस्कृति और लोकगीतों के माध्यम से सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सूचना एवं लोक संपर्क विभाग की ओर से क्यारकुली-भट्टा ग्राम में सेवा संकल्प अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। लोक गायिका मीणा आर्य ने ग्रामीणों को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी और उन्हें इनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में आयुष्मान कार्ड, आधार कार्ड, पेंशन योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और दहेज प्रथा जैसी सामाजिक समस्याओं से जुड़े विषयों पर जानकारी दी गई। लोक गायिका मीणा आर्य ने लोकगीतों के जरिए सामाजिक जागरूकता का संदेश देते हुए ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक रहने और पात्र होने पर उनका लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। लोक गायिका मीणा आर्य ने कहा कि लोकगीत हमारी संस्कृति की पहचान हैं और इनके माध्यम से सामाजिक संदेश प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। सरकारी योजनाओं की जानकारी सरल भाषा और लोक संस्कृति के माध्यम से देने से ग्रामीणों को उन्हें समझने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं, बेटियों और जरूरतमंद परिवारों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाना जरूरी है, ताकि पात्र लोग सरकारी सुविधाओं से वंचित न रहें। ग्राम प्रधान मीणा कोटाल ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम जरूरी हैं। कई बार जानकारी के अभाव में पात्र लोग सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे आयुष्मान कार्ड, पेंशन सहित अन्य योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें और पात्रता के अनुसार उनका लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। कार्यक्रम में क्यारकुली-भट्टा की ग्राम प्रधान मीणा कोटाल, उपप्रधान मोनिका जदवान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरिता थापली, सपना थापली और शीला पंडित सहित प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिकाएं ममता जैन और दमयंती रावत मौजूद रहीं। कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दिया गया।
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मसूरी में सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पर राज्य सफाई कर्मचारी    आयोग सख्त, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर नाराजगी, पीएफ और पढ़े-लिखे कर्मचारियों की तैनाती की होगी जांच

मसूरी। राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष संतोष कुमार ने सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर सख्त रुख अपनाया। टाउन हॉल में आयोजित समीक्षा बैठक में 21 विभागों के अधिकारियों को बुलाया गया था, लेकिन कुछ विभागों के ही अधिकारी पहुंचे। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने अधिशासी अधिकारी और नायब तहसीलदार को अनुपस्थित अधिकारियों के कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर जिलाधिकारी से वेतन रोकने की संस्तुति की जाएगी।

बैठक में संतोष कुमार ने सफाई कर्मचारियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने नगर पालिका में ठेका कंपनी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के पीएफ और अन्य देय सुविधाओं की जांच कराने को कहा। साथ ही इंटरमीडिएट या उससे अधिक शिक्षित पर्यावरण मित्रों की शैक्षिक योग्यता के अनुसार लिपिक पदों पर तैनाती की संभावनाओं पर विचार करने के निर्देश दिए। इसके लिए अधिशासी अधिकारी को 15 दिन में कार्रवाई कर आयोग को रिपोर्ट सौंपनी होगी।

उन्होंने वाल्मीकि बस्ती में शिविर लगाकर कर्मचारियों और उनके परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया। संतोष कुमार ने कहा कि सफाई कर्मचारी शहर को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनके अधिकारों, वेतन और सुविधाओं की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। कर्मचारियों की समस्याओं को शासन के समक्ष उठाकर उनके समाधान का प्रयास किया जाएगा।
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मसूरी में जिला योजना समिति के चुनाव में पवन थलवाल ने एक मत से मारी बाजी

गीता कुमाई को मिले 6 मत, पवन थलवाल को 7 वोट; मसूरी के विकास को प्राथमिकता देने का किया वादा

मसूरी। नगर पालिका परिषद मसूरी में जिला योजना समिति के सदस्य के निर्वाचन में सभासद पवन थलवाल ने एक मत से जीत दर्ज की। उन्हें 7 मत मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी सभासद गीता कुमाई को 6 मत प्राप्त हुए। एसडीएम मसूरी राहुल आनंद ने पवन थलवाल को विजयी घोषित किया।

चुनाव के लिए दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक मतदान कराया गया। इसके बाद एसडीएम राहुल आनंद के नेतृत्व में मतगणना शुरू हुई। मतगणना में पवन थलवाल को 7 और गीता कुमाई को 6 मत मिले। इस तरह पवन थलवाल ने एक मत से जीत हासिल की।

एसडीएम राहुल आनंद ने बताया कि जिला योजना समिति के लिए मसूरी नगर पालिका से सदस्य का निर्वाचन किया जाना था। निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदान और मतगणना संपन्न कराई गई, जिसके बाद पवन थलवाल को विजयी घोषित किया गया।

जीत के बाद पवन थलवाल ने सभी सभासदों और पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिला योजना समिति के माध्यम से मसूरी के हितों और विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। शहर के विकास और जनहित की योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
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माल रोड पर तेज रफ्तार पर लगेगा ब्रेक, प्रतिबंधित समय में बंद होंगे रास्ते

एनपीआर कैमरों से होगी निगरानी, शाम 4 से रात 10 बजे तक वाहनों की एंट्री रोकने को लगेंगे ऑटोमैटिक बोलार्ड

मसूरी। माल रोड पर तेज रफ्तार और प्रतिबंधित समय में वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। एसडीएम राहुल आनंद ने एमडीडीए, नगर पालिका, परिवहन विभाग और पुलिस अधिकारियों के साथ निरीक्षण कर एनपीआर कैमरे और ऑटोमैटिक बोलार्ड लगाने के लिए स्थान चिह्नित किए। कैमरों से वाहनों की पहचान और नियमानुसार ऑनलाइन चालान की व्यवस्था प्रस्तावित है।

एसडीएम ने बताया कि उच्च न्यायालय में प्रवेश पंत बनाम उत्तराखंड सरकार से संबंधित याचिका के क्रम में गृह सचिव और जिलाधिकारी के निर्देशों पर यह कार्रवाई की जा रही है। शाम चार से रात दस बजे तक प्रतिबंधित समय में सामान्य वाहनों की एंट्री रोकने के लिए बोलार्ड लगाए जाएंगे, जबकि आपातकालीन वाहनों को नियमानुसार अनुमति देने की व्यवस्था होगी।

माल रोड पर बड़ी संख्या में पर्यटकों के पैदल घूमने के कारण यातायात नियंत्रण और सुरक्षा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ ही मसूरी-जड़ीपानी से कोल्हूखेत तक वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। एसडीएम के अनुसार, मार्ग की उपयोगिता का आकलन कर विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। कैमरे और बोलार्ड लगाने का काम उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बाद आगे बढ़ेगा।

निरीक्षण के दौरान एमडीडीए के एई अजय मलिक, कर अधीक्षक अनिरुद्ध चौधरी, एआरटीओ रत्नाकर सिंह और एसएसआई सत्येंद्र भाटी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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मसूरी पैराडाइज मेंशन होटल में कर्मचारियों ने मालिक पर अभद्रता और हिसाब नहीं करने का लगाया आरोप, पुलिस के हस्तक्षेप से खुलवाए गए ताले
मनमाने रवैये से पर्यटन की छवि प्रभावित होने की आशंका, पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल ने कर्मचारियों के समर्थन में उठाई आवाज

पहाड़ों की रानी मसूरी में होटल कर्मचारियों के उत्पीड़न का मामला सामने आया है। अंबेडकर चौक के पास स्थित पैराडाइज मेंशन होटल के कर्मचारियों ने होटल मालिक और लीजर पर अभद्रता करने और उनका हिसाब-किताब नहीं करने का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। कर्मचारियों का कहना है कि होटल को लीज पर दिए जाने के बाद उनके साथ विवाद की स्थिति पैदा हुई। आरोप है कि विरोध करने पर होटल के मुख्य गेट और किचन में ताला लगा दिया गया, जिससे होटल के अंदर मौजूद कर्मचारी अंदर ही फंस गए, जबकि बाहर मौजूद कर्मचारी अंदर नहीं जा सके। घटना के बाद कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया।
कर्मचारियों के अनुसार, विवाद की सूचना मिलते ही मसूरी के कई लोग मौके पर पहुंचे। इसके बाद मसूरी पुलिस के सहयोग से होटल के मुख्य गेट और किचन के ताले खुलवाए गए, ताकि अंदर मौजूद कर्मचारियों को राहत मिल सके और वे भोजन कर सकें। घटना ने होटल प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच बने तनाव को उजागर कर दिया है।
कर्मचारियों ने कहा- नियम के अनुसार किया जाए हिसाब
होटल कर्मचारियों ने मांग की कि उनके काम और सेवा अवधि के अनुसार नियमानुसार हिसाब-किताब किया जाए। उनका कहना है कि होटल प्रबंधन के साथ आगे काम करना है या नहीं, यह निर्णय उन पर छोड़ा जाना चाहिए, लेकिन उनके साथ अभद्रता नहीं होनी चाहिए और न ही उनके जायज भुगतान को लेकर टालमटोल की जानी चाहिए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनका हिसाब नहीं किया गया तो वे अपना आंदोलन तेज करने को मजबूर होंगे।
पूर्व पालिकाध्यक्ष बोले- कर्मचारियों के बिना नहीं चलता कोई प्रतिष्ठान
मामले में पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल ने कर्मचारियों का समर्थन करते हुए कहा कि मसूरी में इस तरह की गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने कहा कि किसी भी होटल या अन्य प्रतिष्ठान को चलाने में कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कर्मचारियों के सहयोग के बिना कोई भी प्रतिष्ठान बेहतर तरीके से संचालित नहीं हो सकता। उन्होंने होटल मालिक से आग्रह किया कि कर्मचारियों का नियमानुसार हिसाब-किताब कर उन्हें अपनी आगे की नौकरी के संबंध में निर्णय लेने का अवसर दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि होटल मालिकों का रवैया इसी तरह रहा तो इसका असर मसूरी के पर्यटन व्यवसाय और शहर की छवि पर भी पड़ सकता है।
पर्यटन नगरी में कर्मचारी-मालिक विवाद से उठे सवाल
मसूरी की अर्थव्यवस्था में होटल और पर्यटन व्यवसाय की अहम भूमिका है। ऐसे में होटल प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच विवाद सामने आने से श्रमिकों के अधिकारों, भुगतान की पारदर्शिता और प्रतिष्ठानों के संचालन को लेकर सवाल उठते हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए और उनके बकाया भुगतान का नियमानुसार निस्तारण होना चाहिए।
फिलहाल कर्मचारियों की प्रमुख मांग उनके हिसाब-किताब का निपटारा है। मामले में होटल मालिक का पक्ष सामने आना बाकी है। विवाद के संबंध में प्रशासन या पुलिस की ओर से किसी औपचारिक कार्रवाई की पुष्टि भी नहीं हुई है। ऐसे में मामले के सभी पहलुओं की जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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मसूरी में एमडीडीए के नोटिस से मसूरी के पर्यटन कारोबार में हड़कंप
होमस्टे, होटल और गेस्ट हाउस संचालकों ने जताई नाराजगी, बोले- मास्टर प्लान और लैंड यूज स्पष्ट किए बिना कैसे तय होगा व्यावसायिक उपयोग 
पहाडों की रानी मसूरी में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मसूरी में एमडीडीए की नोटिस कार्रवाई से पर्यटन कारोबारियों में बेचौनी बढ़ गई है। होमस्टे, होटल, गेस्ट हाउस और बीएनबी संचालकों को नोटिस मिलने से नाराज लोग प्राधिकरण कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए और सरकार से हस्तक्षेप कर राहत दिलाने की मांग की। कारोबारियों का कहना है कि यदि मौजूदा परिस्थितियों में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करनी पड़ीं तो मसूरी के पर्यटन कारोबार पर व्यापक असर पड़ सकता है।
स्थानीय निवासी सुधांशु रावत और सभासद पवन थलवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत आवासीय संपत्तियों में नियमों के विरुद्ध चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, उनका सवाल है कि मसूरी में मास्टर प्लान, नोटिफाइड-डीनोटिफाइड क्षेत्रों और भूमि उपयोग की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण कारोबारियों के सामने असमंजस बना हुआ है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पृष्ठ संख्या 21 के उपखंड-2 का हवाला देते हुए कहा कि जहां मास्टर प्लान या भूमि उपयोग निर्धारित नहीं है, वहां यथास्थिति बनाए रखने से संबंधित प्रावधान पर भी विचार किया जाना चाहिए। कारोबारियों ने मांग की कि मसूरी की भौगोलिक और नियोजन संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाए।
कारोबारियों ने कहा कि सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे योजना को प्रोत्साहित किया है। ऐसे में अब होमस्टे और अन्य पर्यटन इकाइयों को नोटिस मिलने से संचालक परेशान हैं। उनका कहना है कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मसूरी की वास्तविक परिस्थितियों और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था का पक्ष प्रभावी ढंग से रखना चाहिए, ताकि नियमों के दायरे में समाधान निकाला जा सके।
सुधांशु रावत ने आरोप लगाया कि नोटिस कार्रवाई से कारोबारियों में मानसिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मसूरी विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल है, जहां पर्यटकों को ठहरने की सुविधा देने में होटल, गेस्ट हाउस, होमस्टे और बीएनबी की अहम भूमिका है। यदि इन गतिविधियों पर व्यापक रोक लगती है तो पर्यटन उद्योग और उससे जुड़े रोजगार प्रभावित हो सकते हैं।
सभासद पवन थलवाल ने कहा कि मसूरी में आवासीय नक्शों पर बने भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नोटिस दिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई से होटल, गेस्ट हाउस, होमस्टे और बीएनबी कारोबार से जुड़े करीब 95 प्रतिशत लोग प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने सरकार से अध्यादेश लाकर पुराने निर्माणों को निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत नियमित करने की व्यवस्था बनाने की मांग की। उनका सुझाव है कि जहां कानूनी रूप से संभव हो, वहां निर्धारित जुर्माना लेकर निर्माण को नियमित करने का विकल्प दिया जाए। उन्होंने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अनधिकृत कमरों को नियमित करने के लिए प्रति कमरा 50 हजार रुपये शुल्क का प्रावधान होने की बात सामने आई है। उन्होंने मसूरी में भी इसी तरह की व्यवस्था पर विचार करने की मांग की। कारोबारियों ने बताया कि वे इस संबंध में एसडीएम मसूरी से मुलाकात कर ज्ञापन दे चुके हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार और एमडीडीए मामले का समाधान निकालने तक नोटिस कार्रवाई पर पुनर्विचार करें तथा पर्यटन कारोबारियों को राहत देने के लिए बीच का रास्ता तलाशें। कारोबारियों ने कहा कि मसूरी में वन संरक्षण कानून और भूमि उपयोग से जुड़ी पाबंदियों के बीच निर्माण तथा व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट नीति जरूरी है। अब सवाल यह है कि पर्यटन को बढ़ावा देने वाली योजनाओं, पुराने निर्माणों की स्थिति और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बीच सरकार किस तरह संतुलन बनाती है। फिलहाल, नोटिस कार्रवाई ने मसूरी के पर्यटन कारोबार और स्थानीय रोजगार को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
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मसूरी माल रोड पर हिरोईन संग शॉपिंग करते दिखे अक्षय कुमार, फैंस में मची झलक पाने की होड़
हाथ में शॉपिंग बैग लेकर पूरे जोश में नजर आए खिलाड़ी कुमार, होटल सवॉय में गाने की शूटिंग; प्रशंसकों का हाथ हिलाकर किया अभिवादन

पहाड़ों की रानी मसूरी की माल रोड पर गुरुवार दोपहर उस समय बॉलीवुड का रंग देखने को मिला, जब फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार अपनी फिल्म की शूटिंग करते नजर आए। फिल्म के एक सीन में अक्षय कुमार अपनी हिरोईन के साथ माल रोड पर घूमते और शॉपिंग करते दिखाई दिए। उनके हाथ में शॉपिंग बैग था और वह पूरे जोश में नजर आए। अभिनेता को अपने बीच देखकर प्रशंसकों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोग उनकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित दिखाई दिए।
माल रोड पर फिल्माए गए इस दृश्य में अक्षय कुमार अपनी साथी कलाकार के साथ आम पर्यटक की तरह बाजार में घूमते नजर आए। शूटिंग देखने के लिए स्थानीय लोगों और पर्यटकों की भीड़ जुट गई। इस दौरान अक्षय कुमार ने भी अपने प्रशंसकों को निराश नहीं किया और हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के चलते फिल्म यूनिट ने शूटिंग स्थल पर विशेष इंतजाम किए थे। अभिनेता ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और अपने काम पर ध्यान केंद्रित किया।
माल रोड के अलावा मसूरी के ऐतिहासिक होटल सवॉय में भी फिल्म के एक गाने का दृश्य फिल्माया गया। फिल्म यूनिट मसूरी की खूबसूरत लोकेशन को कैमरे में कैद कर रही है। बताया जा रहा है कि देर शाम जॉर्ज एवरेस्ट और स्प्रिंग रोड क्षेत्र में भी फिल्म के कुछ दृश्य फिल्माए जाने हैं। शुक्रवार को भी अक्षय कुमार के मसूरी में शूटिंग करने की संभावना है। इसके बाद फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग देहरादून के विभिन्न स्थानों पर की जाएगी।
अक्षय कुमार की शूटिंग के साथ उनकी सेहत भी चर्चा में रही। बताया जा रहा है कि बुधवार को कमर में दर्द के कारण उन्हें परेशानी हुई थी और देहरादून में उनका उपचार कराया गया था। गुरुवार को वह शूटिंग के दौरान सक्रिय नजर आए और फिल्म के दृश्यों में हिस्सा लिया। हालांकि, उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
मसूरी की माल रोड, ऐतिहासिक इमारतें, पहाड़ी रास्ते और प्राकृतिक सुंदरता फिल्मकारों को लंबे समय से आकर्षित करती रही हैं। अक्षय कुमार की शूटिंग से एक बार फिर शहर में बॉलीवुड की हलचल बढ़ गई है। अभिनेता को करीब से देखने के लिए प्रशंसकों में खासा उत्साह रहा।
फिल्म की शूटिंग से स्थानीय होटल, टैक्सी, खानपान और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को भी काम मिलने की संभावना रहती है। वहीं, माल रोड जैसे व्यस्त पर्यटन स्थल पर शूटिंग के दौरान सुरक्षा और आम लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित रखना भी जरूरी है।
फिलहाल मसूरी और देहरादून में फिल्म के अलग-अलग दृश्यों की शूटिंग का कार्यक्रम बताया जा रहा है। अक्षय कुमार की मौजूदगी से शहर में फिल्म शूटिंग को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।

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अंकिता भंडारी को न्याय मिले, मसूरी में टाउनशिप प्लान भी लागू हो: जसबीर कौर

एमडीडीए की कार्रवाई पर उठाए सवाल,नोटिफाइड-डिनोटिफाइड प्रक्रिया पूरी करने की मांग

मसूरी। शहर कांग्रेस महिला अध्यक्ष जसबीर कौर ने अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय की मांग उठाते हुए भाजपा सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय मिलना चाहिए और मामले में उठ रहे सवालों का पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाना चाहिए।

जसबीर कौर ने मसूरी में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर एमडीडीए की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण के दौरान नियमों का उल्लंघन हो रहा था तो संबंधित अधिकारियों ने उस समय कार्रवाई क्यों नहीं की? उन्होंने आरोप लगाया कि नोटिस की कार्रवाई से स्थानीय भवन स्वामियों और कारोबारियों में चिंता है।

उन्होंने कहा कि मसूरी में नोटिफाइड और डिनोटिफाइड क्षेत्रों से जुड़ी प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है और टाउनशिप प्लान भी सामने नहीं आया है। सरकार और एमडीडीए को स्पष्ट नीति बनाकर समयबद्ध समाधान निकालना चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों को राहत मिल सके और शहर का नियोजित विकास सुनिश्चित हो।
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अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने में सरकार गंभीर नहीं: उपेंद्र थापली
दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने पर कांग्रेस ने जताई आपत्ति, निष्पक्ष जांच की मांग

मसूरी। अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय की मांग को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। शहर कांग्रेस कमेटी की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मंडी परिषद सभापति उपेंद्र थापली ने आरोप लगाया कि सरकार अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के बजाय मामले से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब देने से बच रही है।

थापली ने कहा कि प्रकरण में कथित वीआईपी की पहचान और भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए मामले के हर पहलू को पारदर्शी तरीके से सामने लाना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस न्याय की मांग को लेकर अपनी आवाज उठाती रहेगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने मसूरी में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर एमडीडीए की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निर्माण के समय नियमों की निगरानी क्यों नहीं की गई और अब स्थानीय भवन स्वामियों को नोटिस देकर परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है। कांग्रेस ने निष्पक्ष कार्रवाई और स्थानीय लोगों को स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की मांग की हैँ 
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मसूरी भट्टा गांव रोपवे बीच हवा में रुका, दो पर्यटक फंसे; संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर निकाला सुरक्षित
मसूरी में आपदा प्रबंधन की मॉक ड्रिल,

 एनडीआरएफ-एसडीआरएफ समेत कई विभागों ने लिया हिस्सा; रिस्पांस टाइम और आपसी तालमेल को परखा

पहाड़ों की रानी मसूरी में गुरुवार सुबह भट्टा गांव रोपवे पर उस समय आपात स्थिति का दृश्य तैयार किया गया, जब तकनीकी खराबी के कारण रोपवे बीच में रुक गया और उसमें सवार दो पर्यटक हवा में फंस गए। सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, मसूरी पुलिस, वन विभाग, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें सक्रिय हो गईं। संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर दोनों पर्यटकों को सुरक्षित निकालने और उन्हें प्राथमिक उपचार देने का अभ्यास किया गया। यह पूरी कार्रवाई प्रशासन की ओर से आयोजित मॉक ड्रिल का हिस्सा थी।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी वास्तविक दुर्घटना की स्थिति में संबंधित विभागों की तैयारी, मौके पर पहुंचने की गति, बचाव उपकरणों की उपलब्धता और आपसी समन्वय को परखना था। रोपवे जैसे पर्यटन स्थल पर तकनीकी खराबी आने की काल्पनिक स्थिति बनाकर यह देखा गया कि सूचना मिलने के बाद राहत एवं बचाव दल किस तरह काम करते हैं और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए किस प्रकार की रणनीति अपनाई जाती है।
अभ्यास के तहत भट्टा गांव रोपवे में तकनीकी खराबी आने और दो पर्यटकों के फंसने की सूचना दी गई। इसके बाद संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों ने मसूरी पुलिस तथा अन्य विभागों के साथ मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। काफी मशक्कत के बाद दोनों पर्यटकों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास पूरा किया गया।इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दोनों को प्राथमिक उपचार दिया और आगे के उपचार के लिए मसूरी उप जिला चिकित्सालय भेजने की प्रक्रिया का अभ्यास किया। इस दौरान बचाव कार्य के विभिन्न चरणों, विभागों के बीच तालमेल और घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था को भी परखा गया।
नायब तहसीलदार उपेंद्र राणा के नेतृत्व में आयोजित मॉक ड्रिल में आपदा की सूचना मिलने से लेकर बचाव दलों के मौके पर पहुंचने तक के समय का आकलन किया गया। इसके साथ ही यह भी परखा गया कि अलग-अलग विभाग आपात स्थिति में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किस तरह करते हैं। नायब तहसीलदार उपेंद्र राणा ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर मसूरी में समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाती हैं। इनका उद्देश्य आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को जांचना और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि इस तरह के अभ्यास से संबंधित विभागों को अपनी तैयारियों की समीक्षा करने और कमियों को दूर करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि मसूरी में संचालित रोपवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी समय-समय पर निरीक्षण और जांच की जाती है, ताकि किसी तरह की कमी सामने आने पर उसे दूर किया जा सके। मॉक ड्रिल से यह समझने में मदद मिलती है कि वास्तविक घटना के समय किस विभाग को क्या कदम उठाने हैं और किस तरह तेजी से कार्रवाई करनी है।
मसूरी में रोपवे समेत कई पर्यटन गतिविधियां पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। ऐसे में किसी तकनीकी खराबी या अन्य आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा इंतजामों और बचाव दलों की तत्परता महत्वपूर्ण है। मॉक ड्रिल के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि किसी अप्रत्याशित घटना में पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए राहत कार्य तेजी से संचालित किए जा सकें।प्रशासन की ओर से आयोजित यह अभ्यास वास्तविक दुर्घटना नहीं, बल्कि आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए किया गया था। इसमें विभिन्न विभागों की संयुक्त भागीदारी के माध्यम से बचाव प्रक्रिया, चिकित्सकीय सहायता और आपसी तालमेल का परीक्षण किया गया।

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18 साल की उम्र पूरी होते ही मतदाता सूची में जुड़वाएं नाम, लोकतंत्र में भागीदारी का पहला कदम है मतदान

मसूरी। लोकतंत्र में अपनी पसंद की सरकार चुनने का अधिकार तभी सार्थक होता है, जब प्रत्येक पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराए और मतदान प्रक्रिया में भाग ले। इसी उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी के सेवा संकल्प अभियान के तहत मसूरी में मतदाता जागरूकता एवं पंजीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें युवाओं और नए मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने, पंजीकरण प्रक्रिया और मतदान के महत्व की जानकारी दी गई। कार्यशाला में मुख्य वक्ता मदन मोहन शर्मा ने युवाओं से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। मदन मोहन शर्मा ने कहा कि युवाओं की लोकतंत्र में भागीदारी मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पात्र युवाओं को अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने के प्रति जागरूक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदान केवल अधिकार नहीं, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी भी है। युवाओं को अपने मताधिकार का महत्व समझना चाहिए और बिना किसी दबाव, प्रलोभन या भेदभाव के सोच-समझकर मतदान करना चाहिए। कार्यशाला में नए मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 भरने की प्रक्रिया समझाई गई। साथ ही मतदाता सूची में नाम, पते और अन्य विवरणों से संबंधित विसंगतियों को दूर करने तथा डिजिटल माध्यमों से पंजीकरण संबंधी सुविधाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं और पहली बार मतदान के पात्र बने नागरिकों को विशेष रूप से जागरूक करने पर जोर दिया गया। कार्यकर्ताओं को भी बताया गया कि पात्र नागरिकों तक पहुंचकर उन्हें पंजीकरण प्रक्रिया समझाएं, ताकि जानकारी के अभाव में कोई भी पात्र युवा मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित न रहे। कार्यशाला का उद्देश्य केवल मतदाता पंजीकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया, नैतिक मतदान और नागरिक सहभागिता के प्रति जागरूक करना भी रहा। अभियान के तहत सार्वजनिक स्थानों और शिक्षण संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने तथा जरूरत के अनुसार पंजीकरण में सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। नुक्कड़ नाटकों और अन्य जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से भी लोगों तक मतदान का संदेश पहुंचाने की योजना रखी गई।
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मसूरी शरदोत्सव की आखिरी शाम करिश्मा शाह और रुहान भारद्वाज के नाम, लोकगीतों पर झूमी मसूरी

दोनों की जोड़ी ने मचाया धमाल, उत्तराखंड की लोक संस्कृति के रंग में रंगे दर्शक

पहाड़ों की रानी मसूरी में 12 साल बाद आयोजित शरदोत्सव की आखिरी शाम लोक गायिका करिश्मा शाह और गायक रुहान भारद्वाज के नाम रही। दोनों कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों और उत्तराखंड के लोकगीतों से ऐसा समां बांधा कि दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए। लोक संस्कृति की मिठास, पहाड़ी सुरों की गूंज और दोनों कलाकारों की जोड़ी ने सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया। उनकी प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने जमकर उत्साह दिखाया और लोकगीतों का आनंद लिया।करिश्मा शाह और रुहान भारद्वाज ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति और संगीत की खूबसूरती को मंच पर उतारा। कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी खास तौर पर देखने को मिली। आधुनिक संगीत के दौर में पहाड़ी लोकगीतों के प्रति युवाओं का उत्साह देखकर दोनों कलाकार भी काफी खुश नजर आए।
कार्यक्रम के दौरान करिश्मा शाह और रुहान भारद्वाज ने कहा कि मसूरी में 12 साल बाद शरदोत्सव का आयोजन होना एक अच्छी पहल है। इस बार उत्सव की खास बात यह रही कि उत्तराखंड और मसूरी के स्थानीय कलाकारों को प्रमुखता से मंच प्रदान किया गया। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला दिखाने का अवसर मिला और क्षेत्र की लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने में भी मदद मिली। उन्होंने कहा कि वे देश-विदेश में कई मंचों पर प्रस्तुति देने जाते हैं, लेकिन मसूरी में दर्शकों से मिला प्यार और उत्साह उनके लिए बेहद खास रहा। यहां के लोगों का जुड़ाव और पहाड़ी संगीत के प्रति उनका लगाव कलाकारों को नई ऊर्जा देता है।
दोनों कलाकारों ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में युवाओं को अपनी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ते देखना सुखद अनुभव है। पहाड़ी गीतों पर युवाओं का उत्साह इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को न केवल अपना रही है, बल्कि उसका आनंद भी ले रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार के लिए इससे बड़ी खुशी नहीं हो सकती कि उसके गीतों को देश ही नहीं, विदेशों में भी श्रोता पसंद करें। उत्तराखंड के लोकगीतों को मिल रही लोकप्रियता से राज्य की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने में मदद मिल रही है।
करिश्मा शाह और रुहान भारद्वाज ने कहा कि उत्तराखंड के लोकगीतों को लेकर श्रोताओं का रुझान लगातार बढ़ रहा है। अब पहाड़ी संगीत की गूंज देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों में भी सुनाई दे रही है। यह उत्तराखंड के कलाकारों और लोक संगीत के लिए सकारात्मक संकेत है। दोनों कलाकारों ने नगर पालिका प्रशासन और राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन भविष्य में भी होते रहने चाहिए। ऐसे मंच स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करने के साथ ही उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराओं और संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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फरहान साबिर की आवाज पर झूमी मसूरी, सूफियाना अंदाज और कव्वालियों ने बांधा समां

द वॉयस इंडिया’ के विजेता ने टाउन हॉल में बिखेरा सुरों का जादू

मसूरी शरदोत्सव की संगीत संध्या में जब फरहान साबिर ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा तो टाउन हॉल का माहौल सुरों और तालियों से गूंज उठा। ‘द वॉयस इंडिया’ के विजेता और ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ के फाइनलिस्ट फरहान साबिर ने नए-पुराने गीतों के साथ कव्वालियां सुनाकर दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी प्रस्तुति पर युवा देर तक झूमते रहे। सूफियाना अंदाज और दमदार आवाज ने सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में फरहान साबिर ने कहा कि उन्हें मसूरी में प्रस्तुति देने के लिए राहुल छाबड़ा ने संपर्क किया था। यहां आने से पहले उन्हें जिस तरह के अनुभव की उम्मीद थी, उससे कहीं ज्यादा आनंद और प्यार मिला। उन्होंने कहा कि दर्शकों में युवाओं की अच्छी भागीदारी देखकर खुशी हुई। मसूरी की जनता ने उन्हें भरपूर स्नेह दिया, जिसके लिए वह आभारी हैं। उन्होंने इस अनुभव को अपनी जिंदगी के यादगार पलों में शामिल बताया। फरहान साबिर ने बताया कि वह कई रियलिटी शो में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। ‘द वॉयस इंडिया’ जीतने और ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ के फाइनल तक पहुंचने के दौरान उन्हें दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहती है कि जहां भी प्रस्तुति दें, वहां संगीत की महफिल यादगार बन जाए। वह श्रोताओं के लिए नए-नए गीत भी तैयार करते रहते हैं। उन्होंने बताया कि उनके कुछ नए गाने जल्द रिलीज होने वाले हैं और उन्हें उम्मीद है कि इन्हें हर उम्र के श्रोता पसंद करेंगे। फरहान ने बॉलीवुड में भी गायन का अवसर मिलने की बात कही, हालांकि फिलहाल उन्होंने इससे जुड़ी परियोजना का खुलासा नहीं किया। उन्होंने बताया कि चर्चित कलाकार तनु रावत के साथ भी उन्हें काम करने का अवसर मिल रहा है। फरहान साबिर ने 12 साल बाद मसूरी में शरदोत्सव की वापसी को सराहनीय कदम बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन स्थापित कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देते हैं, वहीं उभरते कलाकारों को भी अपनी पहचान बनाने के लिए मंच मिलता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मसूरी में आगे भी ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहेंगे। फरहान साबिर ने नगर पालिका और आयोजन से जुड़े लोगों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में दोबारा मसूरी आने की इच्छा जताई। उनकी प्रस्तुति ने शरदोत्सव में संगीत प्रेमियों को मनोरंजन देने के साथ यह भी दिखाया कि सांस्कृतिक मंच कलाकारों और दर्शकों के बीच जुड़ाव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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पद्मश्री प्रीतम भरतवाण के जागरों के साथ मसूरी शरदोत्सव का समापन, लोक संस्कृति के रंग में रंगी मसूरी

12 साल बाद लौटी सांस्कृतिक परंपरा ने स्थानीय कलाकारों को दिया मंच, पर्यटन और लोक विरासत को बढ़ावा देने पर रहा जोर

पहाड़ों की रानी मसूरी में पांच दिवसीय शरदोत्सव का समापन पद्मश्री जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण की शानदार प्रस्तुति के साथ हुआ। टाउन हॉल में उनके जागरों और लोकगीतों ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक झूमने लगे। पारंपरिक देव डोलियों और लोक संस्कृति की झलक ने समापन समारोह को खास बना दिया।करीब 12 साल बाद आयोजित शरदोत्सव ने मसूरी की सांस्कृतिक परंपरा को फिर से मंच दिया। उत्सव में स्थानीय और उत्तराखंड के कलाकारों को प्राथमिकता दी गई, वहीं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी लोक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया गया।
प्रीतम भरतवाण ने कहा कि मसूरी और शरदोत्सव से उनका पुराना जुड़ाव रहा है। यहां अपने लोगों के बीच प्रस्तुति देना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने हिमालयी संस्कृति को देश-विदेश के युवाओं तक पहुंचाने और पारंपरिक वाद्य यंत्रों से नई पीढ़ी को जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। इसके लिए वह ‘कल्चर फॉर ह्यूमैनिटी’ परियोजना के माध्यम से भी प्रयास कर रहे हैं।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि शरदोत्सव जैसे आयोजन मसूरी की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं। धार्मिक, साहसिक, ग्रामीण और सांस्कृतिक पर्यटन की संभावनाओं को आगे बढ़ाने में ऐसे कार्यक्रम अहम हैं। पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला ने 12 साल बाद उत्सव की वापसी का स्वागत करते हुए स्थानीय कलाकारों को मंच देने की पहल को महत्वपूर्ण बताया।
पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि शरदोत्सव का उद्देश्य युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ना और स्थानीय कलाकारों को अवसर देना था। उन्होंने आयोजन में सहयोग करने वाले कलाकारों, अधिकारियों, पालिका कर्मचारियों और शहरवासियों का आभार जताया। समापन पर सहयोगियों और कलाकारों को सम्मानित भी किया गया।
शरदोत्सव ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि लोकगीत, जागर और पारंपरिक कलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं
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शरदोत्सव के मंच पर सजी घंटाकर्ण देव की जात्रा, नौजा निशान देख भावुक हुए श्रद्धालु

12 साल बाद लौटे उत्सव में पहली बार मंच पर जीवंत हुई केदारखंड के आराध्य देवता की यात्रा,

नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की पहल

मसूरी में पहाड़ की लोक संस्कृति और देवी-देवताओं की परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की अनूठी पहल मसूरी शरदोत्सव की चौथी शाम देखने को मिली। टाउन हॉल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में केदारखंड के प्रसिद्ध आराध्य देवता श्री घंटाकर्ण देव की जात्रा का मंचन किया गया। देवता के नौजा निशान और पारंपरिक पूजन की झलक देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कई लोगों ने अपने इष्ट देव को नमन कर आस्था प्रकट की। शरदोत्सव के मंच पर पहली बार प्रस्तुत इस देव जात्रा ने दर्शकों को उत्तराखंड की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।
फिल्म निर्देशक और लोक संस्कृति कर्मी प्रदीप भंडारी के निर्देशन में तैयार इस प्रस्तुति में श्री घंटाकर्ण देव की यात्रा को पारंपरिक स्वरूप में जीवंत करने का प्रयास किया गया। आयोजकों के अनुसार, भगवान शिव के अंश माने जाने वाले श्री घंटाकर्ण देव बदरीनाथ क्षेत्र के क्षेत्रपाल हैं। उनकी पूजा और नौजा निशान की परंपरा उत्तराखंड की विशिष्ट धार्मिक विरासत का हिस्सा है।प्रस्तुति के दौरान देव यात्रा के दृश्य और पारंपरिक धार्मिक स्वरूप ने दर्शकों का ध्यान खींचा। यह आयोजन केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन परंपराओं को सामने लाने का प्रयास भी रहा, जिनसे पहाड़ के लोगों की आस्था और पहचान जुड़ी हुई है।
प्रदीप भंडारी ने कहा कि आज की नई पीढ़ी का बड़ा हिस्सा शहरों में जन्म ले रहा है। ऐसे में कई बच्चों को अपनी गौरवशाली संस्कृति, परंपराओं और देवी-देवताओं के बारे में करीब से जानने का अवसर नहीं मिल पाता। इसी विचार से श्री घंटाकर्ण देव जात्रा को मंच पर प्रस्तुत करने की पहल की गई। उन्होंने कहा कि उद्देश्य है कि युवा अपनी सांस्कृतिक विरासत को देखें, समझें और उसके बारे में जानने की जिज्ञासा विकसित करें। इससे वे अपनी जड़ों की तलाश में पहाड़ की ओर भी आकर्षित होंगे। साथ ही, पुरानी पीढ़ी को अपने आराध्य देव की परंपराओं को याद करने और उनसे जुड़ने का अवसर मिलेगा। भंडारी ने बताया कि हर 12 साल में आयोजित होने वाली विशाल देव यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इसके नौजा निशान और पूजन पद्धति इसे अन्य देव यात्राओं से अलग पहचान देते हैं।
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मसूरी षरदोत्सव में रेशमा शाह के गीतों पर थिरके गणेश जोशी और मीरा सकलानी, शरदोत्सव की चौथी शाम लोक संस्कृति के नाम
12 साल बाद लौटे उत्सव में कुमाऊं, गढ़वाल और जौनसार की संस्कृति का संगम; लोक गायिका बोलीं- मसूरी से शुरू हुआ था मेरा सफर

पहाड़ों की रानी मसूरी में नगर पालिका परिषद की ओर से आयोजित शरदोत्सव की चौथी शाम लोक संस्कृति के रंग में रंग गई। लोक गायिका रेशमा शाह के भक्ति गीतों से शुरू हुई सांस्कृतिक संध्या में उनके गीतों पर दर्शक जमकर झूमे। कार्यक्रम का उत्साह उस समय और बढ़ गया, जब कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी भी रेशमा शाह के साथ थिरकने लगे। दर्शकों ने इस पल का खूब आनंद लिया और तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने संयुक्त रूप से किया। रेशमा शाह ने पहले भक्ति गीत प्रस्तुत किया और फिर अपने लोकप्रिय लोकगीतों से समां बांध दिया।
रेशमा शाह ने कहा कि 12 साल बाद शरदोत्सव की वापसी मसूरी के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि उनके अपने करियर की शुरुआत भी मसूरी के इसी मंच से हुई थी। आज जब इसी मंच से कई कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है, तो उन्हें बेहद खुशी हो रही है।उन्होंने नगर पालिका की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस बार उत्तराखंड के कुमाऊं, गढ़वाल, जौनसार और अन्य क्षेत्रों के कलाकारों को एक मंच पर लाकर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता प्रदर्शित की गई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि 12 साल से बंद शरदोत्सव को दोबारा शुरू करने का श्रेय पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी और उनकी टीम को जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति और सांस्कृतिक गतिविधियों से होती है। उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति में पूरी दुनिया को दिशा देने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि मसूरी में देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से उन्हें उत्तराखंड की लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिलता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार भी संस्कृति और धरोहर के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि पालिका बोर्ड, अधिकारियों और पूरी टीम के सहयोग से शरदोत्सव को भव्य रूप दिया गया है। आयोजन में स्थानीय लोगों और युवाओं की बढ़-चढ़कर भागीदारी इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी अपनी संस्कृति से जुड़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि शरदोत्सव का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, देवी-देवताओं की परंपराओं और स्थानीय कलाकारों को मंच देना भी है। उत्सव के दौरान युवाओं की सक्रिय भागीदारी से यह उद्देश्य काफी हद तक पूरा होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में शरदोत्सव को और बेहतर स्वरूप दिया जाएगा।
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कुलदीप शर्मा के पहाड़ी गीतों पर देर रात तक झूमी मसूरी, शरदोत्सव की स्टार नाइट में उमड़ा उत्साह

12 साल बाद लौटे शरदोत्सव में हिमाचली लोक संस्कृति का रंग, संघर्ष से सफलता तक का सफर सुनाया; स्थानीय कलाकारों को मंच देने पर भी जोर

पहाड़ों की रानी मसूरी में शरदोत्सव की स्टार नाइट हिमाचली लोकगीतों के नाम रही। गुरुवार को टाउन हॉल परिसर में प्रसिद्ध लोक गायक कुलदीप शर्मा ने अपने सुपरहिट पहाड़ी गीतों से ऐसा समां बांधा कि युवा ही नहीं, बुजुर्ग भी देर रात तक झूमते नजर आए। ‘शिल्पा शिमले वालिए’, ‘दरोगा जी’ और ‘कुल्लू मनाली लागा मेला’ जैसे गीतों पर दर्शकों ने तालियों और नृत्य के साथ उत्साह बढ़ाया। 12 साल बाद आयोजित हो रहे शरदोत्सव में इस प्रस्तुति ने पहाड़ी लोक संस्कृति के प्रति लोगों की दीवानगी को फिर सामने रखा।
पत्रकारों से वार्ता करते हुए कुलदीप शर्मा ने अपने जीवन के संघर्ष साझा करते हुए बताया कि पढ़ाई में कई बार असफल होने के बावजूद संगीत के प्रति लगाव ने उन्हें नई पहचान दिलाई। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय प्रशंसकों के प्यार को देते हुए बताया कि वह अब तक तीन हजार से अधिक गीत गा चुके हैं। उनके अनुसार, 200 से ज्यादा गीतों को श्रोताओं ने खासा पसंद किया है। उन्होंने ब्रिटिश संसद, लंदन में हिमाचली लोक संगीत का प्रतिनिधित्व करने के अनुभव का भी जिक्र किया।
कुलदीप शर्मा ने बताया कि इंग्लैंड टूर पर आधारित उनका नया गीत जल्द रिलीज होगा, जिसमें उनकी पत्नी बीना शर्मा भी नजर आएंगी। उन्होंने मसूरी नगर पालिका, शरदोत्सव आयोजकों और मीडिया का आभार जताया।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने कहा कि पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी के प्रयासों से जनता की लंबे समय से चली आ रही शरदोत्सव की मांग पूरी हुई है। उन्होंने कहा कि आयोजन में उत्तराखंड के लोक कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को भी मंच दिया जा रहा है। जनता का भरपूर सहयोग इस उत्सव की सफलता का आधार है। उम्मीद है कि शरदोत्सव आने वाले वर्षों में भी मसूरी की सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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मसूरी शरदोत्सव की दूसरी शाम उत्तराखंड के लोक कलाकारों के नाम, गीतों पर झूमे दर्शक
संगीता ढौंढियाल, मनोज सागर, गजेंद्र राणा, मंजू नौटियाल समेत कलाकारों ने बांधा समां; पालिका अध्यक्ष बोलीं-लोक कलाकारों को मंच देना प्राथमिकता

मसूरी। करीब 12 साल बाद लौटे मसूरी शरदोत्सव की दूसरी शाम पूरी तरह उत्तराखंड के लोक कलाकारों और लोकगीत के नाम रही। टाउन हॉल में आयोजित स्टार नाइट में प्रदेश के जाने-माने लोक गायकों और कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि देर रात तक दर्शक झूमते रहे। संगीता ढौंडियाल, मनोज सागर, गजेंद्र राणा, मंजू नौटियाल, मन्नू वंदना और वीरेंद्र सिंह पंवार सहित कलाकारों ने अपने लोकप्रिय गीतों से श्रोताओं को थिरकने पर मजबूर कर दिया। स्टार नाइट के दौरान एक के बाद एक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। पहाड़ी गीतों की धुन पर दर्शक झूमते नजर आए। कई गीतों पर दर्शक अपनी सीटों से उठकर नाचने लगे। टाउन हॉल देर रात तक तालियों और पहाड़ी संगीत की गूंज से भरा रहा। टाउन हॉल दर्शकों से खचाखच भरा रहा और जैसे-जैसे कलाकारों ने पहाड़ी गीतों की प्रस्तुति शुरू की, माहौल लोकसंगीत के रंग में रंगता चला गया। युवाओं के साथ बुजुर्ग और पर्यटक भी कलाकारों के गीतों का आनंद लेते नजर आए।
लोक कलाकारों ने कहा कि करीब 12 साल बाद मसूरी शरदोत्सव का दोबारा आयोजन होना अपने आप में बड़ी बात है। उन्होंने इसके लिए पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी और नगर पालिका टीम के प्रयासों की सराहना की। कलाकारों ने कहा कि शरदोत्सव उत्तराखंड के कलाकारों के लिए हमेशा महत्वपूर्ण मंच रहा है और इस बार खास बात यह है कि प्रदेश के स्थानीय कलाकारों को प्रमुखता से मंच दिया जा रहा है। कलाकारों ने कहा कि मसूरी का शरदोत्सव कई कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण मंच रहा है और यहां से कई कलाकारों को बड़े मंचों तक पहुंचने का अवसर मिला। ऐसे में इतने लंबे अंतराल के बाद शरदोत्सव में प्रस्तुति देना उनके लिए भी खास अनुभव है।
लोक कलाकारों ने कहा कि उत्तराखंड का संगीत अब किसी भी मायने में बड़े फिल्मी संगीत से पीछे नहीं है। पहाड़ी गीतों की लोकप्रियता उत्तराखंड की सीमाओं से निकलकर देश के दूसरे राज्यों और विदेशों तक पहुंच रही है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने लोक कलाकारों को नया दर्शक वर्ग दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के कई गीतों पर वीडियो और बेहतर पिक्चराइजेशन होने के कारण उन्हें देशभर में पसंद किया जा रहा है। नई तकनीक और आधुनिक संगीत के प्रयोग से पहाड़ी गीतों का स्वरूप बदला है, लेकिन उनकी लोक जड़ें अब भी बरकरार हैं। कलाकारों ने कहा कि ऐसे आयोजनों की निरंतरता जरूरी है। इससे नए कलाकारों को मंच मिलेगा और पुराने एवं अनुभवी कलाकारों को भी नई पीढ़ी के सामने अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि शरदोत्सव को दोबारा शुरू करने के पीछे उनकी प्रमुख मंशा मसूरी की सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करना और स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि इस बार कोशिश की गई है कि शरदोत्सव में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और यहां के कलाकारों को विशेष स्थान मिले। उन्होंने कहा कि नगर पालिका के अधिकारियों, सभासदों और आयोजन से जुड़े सभी लोगों के सहयोग के साथ मसूरी की जनता का भी कार्यक्रम को भरपूर समर्थन मिल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में शरदोत्सव को और भव्य स्वरूप दिया जाएगा। पालिका अध्यक्ष ने कहा कि शरदोत्सव को केवल नाच-गाने तक सीमित नहीं रखा गया है। युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए भी विभिन्न खेल गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। मसूरी के अलग-अलग हिस्सों में खेल प्रतियोगिताएं कराई जा रही हैं, जिनमें छोटे बच्चों से लेकर बड़े खिलाड़ी तक प्रतिभाग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ खेलों को बढ़ावा देने का उद्देश्य युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए अलग-अलग मंच उपलब्ध कराना है।
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बसंती बिष्ट के जागरों से गूंजा मसूरी, 12 साल बाद लौटे शरदोत्सव की पहली शाम बनी लोक संस्कृति के नाम
श्रीकृष्ण, सेम नागराज और आंछरी के जागरों से पहाड़ की आस्था को मंच पर किया जीवंत

मसूरी। करीब 12 साल बाद लौटे मसूरी शरदोत्सव की पहली शाम किसी आधुनिक स्टार नाइट से नहीं, बल्कि पहाड़ की सदियों पुरानी लोकआस्था और जागर परंपरा से शुरू हुई। टाउन हॉल में पद्मश्री लोकगायिका बसंती बिष्ट ने अपने पारंपरिक अंदाज में जागरों की प्रस्तुति देकर उत्तराखंड की लोक संस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया। उनकी सशक्त आवाज में गूंजे जागरों ने दर्शकों को संगीत के साथ-साथ पहाड़ की आस्था और लोकविश्वास से भी जोड़ दिया।

नगर पालिका परिषद मसूरी की ओर से आयोजित शरदोत्सव-2026 की पहली सांस्कृतिक संध्या में बसंती बिष्ट और उनकी टीम ने भगवान श्रीकृष्ण, सेम नागराज और आंछरी सहित विभिन्न जागरों की प्रस्तुति दी। जैसे-जैसे जागरों की धुन आगे बढ़ी, टाउन हॉल का माहौल भक्तिमय होता चला गया। दर्शक शांत भाव से उनकी प्रस्तुति सुनते रहे और तालियों के माध्यम से कलाकारों का उत्साह बढ़ाते रहे।

जागर में दिखी पहाड़ की आत्मा
बसंती बिष्ट की प्रस्तुति की खासियत यह रही कि उन्होंने जागर को महज गीत के रूप में प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि इसके पीछे छिपी पहाड़ की आस्था, देवी-देवताओं के प्रति विश्वास और लोक परंपराओं को भी अपनी गायकी के माध्यम से सामने रखा। उनकी आवाज में पहाड़ की मिट्टी की खुशबू और लोकजीवन की गहराई साफ महसूस हुई।

शरदोत्सव की पहली शाम में उनकी प्रस्तुति ने यह भी दिखाया कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति आज भी लोगों को उसी तरह आकर्षित करती है, जैसे वह पीढ़ियों से पहाड़ के गांवों में लोगों के जीवन का हिस्सा रही है।

नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी
पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि शरदोत्सव का उद्देश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। उत्तराखंड की लोककला, संस्कृति और परंपराओं को देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों और खासकर नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी आयोजन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि लंबे अंतराल के बाद शरदोत्सव की वापसी के साथ प्रयास किया गया है कि कार्यक्रमों में पहाड़ की संस्कृति और स्थानीय विरासत को प्रमुख स्थान मिले।

उन्होंने कहा कि बसंती बिष्ट जैसी कलाकारों की प्रस्तुति युवाओं को अपनी लोक परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बन सकती है। आधुनिक दौर में जब लोकसंस्कृति के कई रूप धीरे-धीरे पीछे छूट रहे हैं, ऐसे आयोजनों के जरिए उन्हें मंच देना जरूरी है।

पर्यटकों ने भी महसूस की पहाड़ की संस्कृति
कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में पर्यटक भी मौजूद रहे। बाहरी राज्यों से मसूरी पहुंचे पर्यटकों के लिए बसंती बिष्ट की जागर प्रस्तुति उत्तराखंड की संस्कृति को करीब से जानने का अलग अनुभव रही। शरदोत्सव की पहली शाम ने पर्यटन और संस्कृति के रिश्ते को भी मजबूत किया।

बसंती बिष्ट की प्रस्तुति के साथ शरदोत्सव की शुरुआत ने यह संदेश दिया कि मसूरी में लौटे इस उत्सव की पहचान केवल रंगारंग कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पहाड़ की लोकधरोहर, आस्था और संस्कृति भी इसके केंद्र में रहेगी।
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पांडवाज ने मसूरी में छेड़ी पहाड़ की धुन, ईशान डोभाल बोले-लोकसंगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना मकसद

शरदोत्सव की पहली शाम पांडवाज की प्रस्तुति ने बांधा समां, पारंपरिक लोक धुनों को आधुनिक संगीत से जोड़ा

मसूरी। शरदोत्सव-2026 की पहली सांस्कृतिक शाम में पांडवाज बैंड ने उत्तराखंड के लोक संगीत को आधुनिक अंदाज में पेश कर मसूरी के टाउन हॉल में मौजूद दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। पहाड़ की लोक धुनों, लोक कथाओं और पारंपरिक संगीत को आधुनिक वाद्य यंत्रों और नई प्रस्तुति शैली के साथ पेश किया गया, जिसे स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों और युवाओं ने भी खूब पसंद किया।

पांडवाज की प्रस्तुति की खासियत यह रही कि इसमें आधुनिक संगीत का प्रभाव जरूर दिखाई दिया, लेकिन उत्तराखंड की मूल लोकधुन और पहाड़ी संस्कृति की पहचान को बरकरार रखा गया। जैसे-जैसे बैंड की प्रस्तुति आगे बढ़ी, दर्शक तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाते नजर आए। कई युवा संगीत की धुनों पर झूमते दिखाई दिए।

लोकसंगीत को सिर्फ बचाना नहीं, नए अंदाज में आगे बढ़ाना है
पांडवाज के निर्देशक ईशान डोभाल ने कहा कि उत्तराखंड का लोकसंगीत बेहद समृद्ध है और इसमें दुनिया के किसी भी मंच को आकर्षित करने की क्षमता है। उनका प्रयास है कि पहाड़ के पारंपरिक संगीत को उसी रूप में संरक्षित करने के साथ उसे आज के युवाओं की पसंद और आधुनिक संगीत की तकनीक से भी जोड़ा जाए।

ईशान डोभाल के अनुसार, “हमारा उद्देश्य केवल लोकसंगीत को प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। अगर युवा पहाड़ के पारंपरिक संगीत को आधुनिक अंदाज में सुनेंगे और उससे जुड़ेंगे, तो हमारी लोकसंस्कृति आने वाली पीढ़ियों तक और मजबूत तरीके से पहुंचेगी।”

उन्होंने कहा कि पांडवाज की प्रस्तुतियों में उत्तराखंड की मिट्टी, पहाड़ का जीवन, यहां की परंपराएं और लोकविश्वास प्रमुख आधार होते हैं। टीम कोशिश करती है कि संगीत के साथ कहानी और संस्कृति भी दर्शकों तक पहुंचे।

मसूरी में प्रस्तुति को बताया खास अनुभव
ईशान डोभाल ने कहा कि मसूरी में शरदोत्सव जैसे मंच पर प्रस्तुति देना पांडवाज के लिए विशेष अनुभव है। यहां स्थानीय लोगों के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से आए पर्यटक भी मौजूद रहते हैं। ऐसे में उत्तराखंड के संगीत को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि पांडवाज भविष्य में भी उत्तराखंड की लोक धुनों और संस्कृति को नए प्रयोगों के साथ देश-दुनिया के मंचों तक ले जाने के लिए काम करता रहेगा।

लोक धुनों पर झूमे स्थानीय और पर्यटक
पांडवाज की प्रस्तुति के दौरान टाउन हॉल तालियों और संगीत की गूंज से भर गया। युवाओं के साथ बुजुर्ग और पर्यटक भी कार्यक्रम का आनंद लेते नजर आए। लोक धुनों में आधुनिक संगीत का मेल दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।

शरदोत्सव की पहली शाम पांडवाज के लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि करीब 12 साल बाद आयोजित हो रहे इस उत्सव के मंच से उत्तराखंड की लोक संस्कृति को आधुनिक संगीत के माध्यम से नई पहचान देने का संदेश गया।
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