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sunil kumar

@kumarsunilmie
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मसूरी में दो बड़े विकास कार्यों का रास्ता साफ

गढ़वाल सभा भवन के लिए 99 साल की लीज, 
भिलाडू स्टेडियम की वन विभाग से जुड़ी अड़चनें दूर

मसूरी में विकास की दो महत्वपूर्ण योजनाओं को अब धरातल पर उतरने की उम्मीद जगी है। पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी और भाजपा मंडल अध्यक्ष राजत अग्रवाल ने संयुक्त प्रेसवार्ता में बताया कि कैंपटी टैक्सी स्टैंड के पास सरकारी भूमि गढ़वाल सभा भवन के लिए 99 साल की लीज पर दी गई है। भवन निर्माण की जिम्मेदारी एमडीडीए को दी गई है। भवन में सभागार, कमरे और गढ़वाली संस्कृति को प्रदर्शित करने वाली कलाकृतियां होंगी।
वहीं,  भिलाडू स्टेडियम के निर्माण में वन विभाग से जुड़ी अड़चनें भी दूर हो गई हैं। जल्द ही निर्माण शुरू होने की बात कही गई। इससे स्थानीय युवाओं को खेल सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
भारी बारिश से क्षतिग्रस्त मसूरी-देहरादून मार्ग के पानी वाले बैंड को लेकर भी दो लेन सड़क बनाने के प्रस्ताव पर काम चल रहा है। मसूरी की अन्य क्षतिग्रस्त सड़कों की बारिश के बाद मरम्मत कराई जाएगी। पालिका अध्यक्ष ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 16 अक्टूबर तक प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए हैं।
शहर की पार्किंग समस्या को देखते हुए जीरो प्वाइंट के पास पार्किंग निर्माण की तैयारी भी की जा रही है। पालिका अध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष ने कहा कि कैबिनेट मंत्री एवं मसूरी विधायक गणेश जोशी के प्रयासों से कई महत्वपूर्ण विकास योजनाओं को मंजूरी मिली है, जिसका लाभ पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों को भी मिलेगा।
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मसूरी में गोल्फ कार्ट को लेकर मजदूर संघ में रार, संचालन बंद कराने की मांग
107 श्रमिक पालिका पहुंचे, अध्यक्ष बोलीं- सहमति और कोर्ट के आदेश के बाद ही होगा फैसला

मसूरी में गोल्फ कार्ट संचालन को लेकर मजदूर संघ के दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। शनिवार को मजदूर संघ के 107 श्रमिक रिक्शा चालक पालिका पहुंचे और गोल्फ कार्ट का संचालन पूरी तरह बंद कराने तथा बकरीहॉल पार्किंग वापस मजदूर संघ को सौंपने की मांग की।
मजदूर संघ महामंत्री शोभन सिंह पवार ने कहा कि पूर्व में संघ के नाम से संचालित 14 गोल्फ कार्ट के सदस्यों को निष्कासित किया जा चुका है। गोल्फ कार्ट के पंजीकरण और संचालन को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि मसूरी में 121 रिक्शा चालक हैं, ऐसे में कुछ लोगों को गोल्फ कार्ट संचालन की अनुमति देना उनके हितों के साथ अन्याय होगा। मांग नहीं मानी गई तो संघ ने धरना-प्रदर्शन और आंदोलन की चेतावनी दी।
वहीं पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि मजदूर संघ के ही दो पक्ष गोल्फ कार्ट को लेकर अलग-अलग मांग कर रहे हैं। मामला न्यायालय में विचाराधीन है और पंजीकरण का मुद्दा भी सामने है। दोनों पक्षों में सहमति बनने और न्यायालय के आदेश तक गोल्फ कार्ट संचालन पर रोक जारी रहेगी। न्यायालय का जो भी आदेश होगा, पालिका उसका पालन करेगी।
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मसूरी एमपीजी कॉलेज की पटरी पर लौटेगी व्यवस्था, एसडीएम ने संभाली कमान

मसूरी। ऐतिहासिक एमपीजी कॉलेज की बिगड़ी व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए प्रशासन ने कमान संभाल ली है।  एसडीएम राहुल आनंद ने कॉलेज के प्रशासक का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने कॉलेज का निरीक्षण करने के साथ ही प्राचार्य सुनील पंवार और शिक्षण व गैर शिक्षण कर्मचारियों के साथ बैठक कर समस्याओं की जानकारी ली।बैठक में छह माह से वेतन का इंतजार कर रहे शिक्षकों और कर्मचारियों का मुद्दा सबसे प्रमुखता से उठा। एसडीएम ने एक सप्ताह के भीतर वेतन जारी कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। वहीं, करीब 30 माह से बिना वेतन कार्य कर रहे नौ शिक्षकों के मामले में भी जल्द निर्णय लेने की बात कही।

एसडीएम राहुल आनंद ने कहा कि कॉलेज शिक्षा का मंदिर है, इसलिए यहां राजनीति के बजाय शिक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉलेज के शैक्षणिक स्तर में पिछले करीब एक वर्ष में गिरावट आई है। व्यवस्था सुधारने के साथ जिम्मेदारी तय करने पर भी काम किया जाएगा। उन्होंने एमपीजी कॉलेज के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां से पढ़कर कई विद्यार्थी आइएएस समेत महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे हैं।

उन्होंने बताया कि कॉलेज में स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। शिक्षकों की कमी दूर करने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और रोजगारपरक नए विषय शुरू करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।

कॉलेज की आधारभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए नगर पालिका और एमडीडीए अधिकारियों को निरीक्षण कर आवश्यक सुधार कराने के निर्देश दिए गए। कॉलेज के बाहर अनधिकृत पार्किंग हटाने और परिसर के भीतर वाहनों की पार्किंग रोकने को कहा गया।
पत्रकारों से बातचीत में एसडीएम ने बताया कि एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और निर्धारित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है। प्राचार्य सुनील पंवार ने कॉलेज की विभिन्न समस्याओं से प्रशासक को अवगत कराया, जिस पर एसडीएम ने समाधान का भरोसा दिया।
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विपक्ष भगोड़ा, जनता के मुद्दों पर गंभीर नहीं कांग्रेस : रविंद्र जुगराण
कहा-2027 में भाजपा की हैट्रिक तय, मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी पार; समय रहते नहीं चेते तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

मसूरी। भाजपा नेता एवं पर्यावरण मामलों के जानकार रविंद्र जुगराण ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसे प्रदेश में मुख्य विपक्ष की भूमिका निभाने में विफल बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता से जुड़े किसी भी गंभीर मुद्दे पर न तो सदन में और न ही सदन के बाहर प्रभावी ढंग से आवाज उठा पा रही है। उन्होंने कांग्रेस को “भगोड़ा विपक्ष” बताते हुए कहा कि जिम्मेदारी लेने के बजाय पार्टी हर मुद्दे से भागती नजर आ रही है।
जुगराण ने कहा कि राज्य की जनता ने कांग्रेस को मुख्य विपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन विपक्ष के पास न उत्साह है, न उमंग और न ही किसी मुद्दे पर गंभीरता दिखाई देती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष शायद पहले ही मानकर बैठ गया है कि उसे चुनाव हारना है। ऐसे में जनता के सामने भाजपा ही एक मजबूत  विकल्प के रूप में दिखाई दे रही है।
उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के अंतिम छोर तक लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है। यही कारण है कि जनता भाजपा के साथ खड़ी है।
मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी पर जताई गंभीर चिंता
रविंद्र जुगराण ने मसूरी के अनियोजित और तेजी से बढ़ते निर्माण पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी अब अपनी सीमा से काफी आगे निकल चुकी है। यदि समय रहते सरकार और स्थानीय प्रशासन ने ठोस निर्णय नहीं लिया तो आने वाले समय में इसका बड़ा खामियाजा मसूरी को भुगतना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि मसूरी और देहरादून के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर कथित अवैध कटान, झाड़ी कटान और जंगलों को नुकसान पहुंचने के मामलों पर संबंधित विभागों और अथॉरिटीज को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि निर्माण और विकास के नाम पर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी होती रही तो पहाड़ों की संवेदनशीलता कैसे बचाई जाएगी।
20-30 किलोमीटर के दायरे में विकसित हो ‘न्यू मसूरी’
जुगराण ने मसूरी के भविष्य को लेकर एक वैकल्पिक मॉडल की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि मसूरी से करीब 20 से 30 किलोमीटर के दायरे में ‘न्यू मसूरी’ विकसित करने की संभावनाओं पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नए क्षेत्र में इको फ्रेंडली स्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जाए और स्थानीय मिट्टी व पत्थर जैसी सामग्री का अधिकतम उपयोग किया जाए। इससे एक ओर पर्यावरण का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर मसूरी पर बढ़ता दबाव भी कम किया जा सकेगा।
उन्होंने नगर पालिका परिषद मसूरी से भी शहर के नियोजित विकास को लेकर पहल करने की अपील की। उनका कहना है कि पालिका बोर्ड और अध्यक्ष को सभी पक्षों से वार्ता कर शहर के भविष्य की ठोस योजना तैयार करनी चाहिए।
एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण प्रस्ताव पर पुनर्विचार की अपील
रविंद्र जुगराण ने मसूरी एमजी कॉलेज के प्रांतीयकरण के प्रस्ताव को लेकर भी नगर पालिका से पुनर्विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कॉलेज लंबे समय से हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से संबद्ध है और यहां से प्राप्त डिग्री को व्यापक स्तर पर मान्यता प्राप्त है।
उन्होंने कहा कि कॉलेज के प्रांतीयकरण के बाद इसके श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के अधीन आने की स्थिति में इसकी वर्तमान व्यवस्था और पहचान पर असर पड़ सकता है। उन्होंने नगर पालिका से आग्रह किया कि इस प्रस्ताव पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय सभी पहलुओं पर दोबारा विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय से जुड़ने जैसी संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों के भविष्य और संस्थान की प्रतिष्ठा को और मजबूती मिल सके।
हल्द्वानी प्रकरण पर भी दी प्रतिक्रिया
जुगराण ने हल्द्वानी में हुए शुद्धिकरण संबंधी मामले की निंदा करते हुए कहा कि जो भी हुआ, वह निंदनीय है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है। विपक्ष को सवाल उठाने का अधिकार है तो सत्ता पक्ष को भी उसका जवाब देने, स्थिति स्पष्ट करने और अपना विजन जनता के सामने रखने का पूरा अधिकार है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और जवाबदेही जरूरी है, लेकिन विपक्ष की भूमिका केवल विरोध तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उसे जनता से जुड़े मुद्दों पर वैकल्पिक नीतियां और समाधान भी सामने रखने चाहिए।
‘फाइलें पास करने में जुटा सत्ता पक्ष, विपक्ष कहां है?’
जुगराण ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता पक्ष जहां लगातार अपने काम और योजनाओं को आगे बढ़ाने में लगा है, वहीं विपक्ष के नेता न सदन में और न ही सदन के बाहर प्रभावी भूमिका निभाते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब विपक्ष किसी मुद्दे पर गंभीरता से अपनी बात नहीं रखेगा तो जनता उससे क्या उम्मीद करेगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश में जिम्मेदारी से बचने की राजनीति कर रही है और “भगोड़ा विपक्ष” की भूमिका निभा रही है। इसका जवाब उसे 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता के बीच देना पड़ेगा।
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मसूरी में हिंदी शिक्षकों का सम्मान कर लायंस क्लब ने दिया भाषा और संस्कारों को बढ़ावा
शिक्षक राष्ट्र के भविष्य के निर्माता, हिंदी हमारी संस्कृति और पहचान का आधार:- राजन विरमानी 

मसूरी, 9 सितंबर। लायंस क्लब मसूरी की ओर से शिक्षक सम्मान दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा के शिक्षकों के सम्मान में भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हिंदी शिक्षकों को सम्मानित करते हुए हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा व भारतीय भाषाओं से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में क्लब अध्यक्ष लायन  मसूरी में हिंदी शिक्षकों का सम्मान कर लायंस क्लब ने दिया भाषा और संस्कारों को बढ़ावा
शिक्षक राष्ट्र के भविष्य के निर्माता, हिंदी हमारी संस्कृति और पहचान का आधार:- राजन वीरमणी
मसूरी, 9 सितबंर (नवोदय टाइम्स)
मसूरी, 9 सितंबर। लायंस क्लब मसूरी की ओर से शिक्षक सम्मान दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा के शिक्षकों के सम्मान में भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हिंदी शिक्षकों को सम्मानित करते हुए हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा व भारतीय भाषाओं से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में क्लब अध्यक्ष लायन राजन वीरमणी ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण भी करते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी संस्कृति, संस्कार और पहचान से जुड़ी भाषा है। हिंदी शिक्षकों की भूमिका विद्यार्थियों में भाषा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का सम्मान वास्तव में ज्ञान और संस्कार का सम्मान है। क्लब सचिव लायन अतुल अग्रवाल ने कहा कि गुरु और मां का सम्मान भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों की पहचान है। उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने और नई पीढ़ी को हिंदी भाषा के प्रति जागरूक करने के लिए ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने चाहिए।
कार्यक्रम में लायन उषा चौधरी ने हिंदी शिक्षकों के सम्मान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और भावनात्मक जुड़ाव की भाषा के रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिंदी शिक्षकों का सम्मान विद्यार्थियों और समाज को यह संदेश देता है कि अपनी भाषा के प्रति सम्मान और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी सभी की है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी के प्रचार-प्रसार और भारतीय भाषाओं को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इस अवसर पर क्लब की ओर से डॉ. सुमन सक्सेना, पल्लवी त्यागी, रंजीत सिंह, मधु कला, शोभना नंद मंडल, मनोज ध्यानी, विजय लक्ष्मी, मीनाक्षी पंत, रेखा मलसी, शैलेन्द्र जोशी, गीता रावत, स्वाति रस्तोगी अग्रवाल, अपर्ण नौटियाल, रघुवीर सिंह नेगी और रंजना पंवार सहित हिंदी शिक्षकों का सम्मान किया गया। ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण भी करते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी संस्कृति, संस्कार और पहचान से जुड़ी भाषा है। हिंदी शिक्षकों की भूमिका विद्यार्थियों में भाषा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का सम्मान वास्तव में ज्ञान और संस्कार का सम्मान है। क्लब सचिव लायन अतुल अग्रवाल ने कहा कि गुरु और मां का सम्मान भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों की पहचान है। उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने और नई पीढ़ी को हिंदी भाषा के प्रति जागरूक करने के लिए ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने चाहिए।
कार्यक्रम में लायन उषा चौधरी ने हिंदी शिक्षकों के सम्मान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और भावनात्मक जुड़ाव की भाषा के रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिंदी शिक्षकों का सम्मान विद्यार्थियों और समाज को यह संदेश देता है कि अपनी भाषा के प्रति सम्मान और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी सभी की है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी के प्रचार-प्रसार और भारतीय भाषाओं को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इस अवसर पर क्लब की ओर से डॉ. सुमन सक्सेना, पल्लवी त्यागी, रंजीत सिंह, मधु कला, शोभना नंद मंडल, मनोज ध्यानी, विजय लक्ष्मी, मीनाक्षी पंत, रेखा मलसी, शैलेन्द्र जोशी, गीता रावत, स्वाति रस्तोगी अग्रवाल, अपर्ण नौटियाल, रघुवीर सिंह नेगी और रंजना पंवार सहित हिंदी शिक्षकों का सम्मान किया गया। 
DoonXpress News,
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पानी वाले बैंड की खाई में मिली 60 वर्षीय व्यक्ति की लाश, पास पड़ा था मोबाइल-पर्स और वाहन की चाबी
वाहन की सीट पर मिली शराब की आधी बोतल, हादसा या कुछ और... पुलिस जांच में जुटी
मसूरी/देहरादून। मसूरी-देहरादून मार्ग पर पानी वाले बैंड के पास मंगलवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब खाई में चट्टानों के बीच करीब 60 वर्षीय व्यक्ति का शव बरामद हुआ। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। घटनास्थल से मोबाइल फोन, पर्स और वाहन की चाबी मिलने से मामला और भी गंभीर हो गया है।
मृतक की पहचान अजय कुमार कोहली, निवासी क्रॉस रोड, देहरादून, उम्र करीब 60 वर्ष के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक अजय कुमार कोहली वाहन से पानी वाले बैंड क्षेत्र में पहुंचे थे। इसके बाद उनका शव सड़क से नीचे खाई में पानी के बीच चट्टानों के पास मिला।
मोबाइल, पर्स और चाबी मिली, वाहन में थी शराब की आधी बोतल
पुलिस को घटनास्थल के आसपास मृतक का मोबाइल फोन, पर्स और वाहन की चाबी बरामद हुई है। वहीं, जिस वाहन से उनके वहां पहुंचने की जानकारी सामने आई है, उसकी सीट पर शराब की आधी बोतल भी मिली है। इन परिस्थितियों ने पुलिस की जांच के कई पहलुओं को सामने ला दिया है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि व्यक्ति खाई में कैसे गिरे। क्या वह पैर फिसलने से नीचे पहुंचे या घटना के पीछे कोई अन्य वजह है, पुलिस इन सभी बिंदुओं की जांच कर रही है।
हादसा या कोई और वजह, पोस्टमार्टम से खुलेगा राज
शव जिस स्थान पर मिला है, वहां पानी और चट्टानों के बीच गहराई होने के कारण पुलिस हादसे की आशंका से भी इनकार नहीं कर रही है। हालांकि मौके से मिले सामान और वाहन में मिली शराब की बोतल को देखते हुए पुलिस घटना के अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की कार्रवाई की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस ने मृतक के स्वजन को घटना की सूचना दे दी है और मामले की जांच जारी है। हुई
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मसूरी में अवैध चार दुकानों पर चला प्रशासन का बुलडोजर, जेसीबी से किया ध्वस्तीकरण

पहाड़ों की रानी मसूरी में अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए झूलाघर क्षेत्र में चार दुकानों को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। मसूरी पब्लिक स्कूल के सामने हुई इस कार्रवाई से अवैध निर्माण करने वालों में हड़कंप मच गया। कार्रवाई के दौरान एमडीडीए, पुलिस और नगर पालिका की संयुक्त टीम के साथ पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा।
एसडीएम मसूरी राहुल आनंद के निर्देश पर तहसीलदार उपेंद्र राणा के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची। यहां रॉक स्टोन, अपर झूलाघर क्षेत्र में संजय मेहरोत्रा व राजीव मेहरोत्रा की ओर से किए गए अनधिकृत निर्माण के मामले में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। संबंधित प्रकरण में सुनवाई के बाद 17 अगस्त 2026 को ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया था, जिसकी प्रति संबंधित पक्ष को 19 अगस्त को प्राप्त कराई गई थी।
आदेश में संबंधित पक्ष को 15 दिन के भीतर स्वयं अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित अवधि दो सितंबर को समाप्त हो गई, लेकिन निर्माण नहीं हटाया गया। प्रशासन के अनुसार ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ फिलहाल कोई स्थगनादेश भी प्राप्त नहीं हुआ था। इसके बाद एमडीडीए ने सोमवार को पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई करते हुए चार दुकानों को ध्वस्त कर दिया।
अपील खारिज होने के बाद कार्रवाई का रास्ता साफ
नायब तहसीलदार उपेंद्र राणा ने बताया कि संबंधित निर्माणकर्ता की ओर से ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ कमिश्नर के समक्ष अपील की गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि पूरी कार्रवाई निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत की गई है।
अवैध निर्माण पर आगे भी होगी कार्रवाई
एसडीएम राहुल आनंद ने स्पष्ट किया है कि मसूरी में अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे कई मामले प्रशासन और विकास प्राधिकरण के स्तर पर विचाराधीन हैं। जांच और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद अन्य अवैध निर्माणों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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मसूरी में जन्माष्टमी के बाद नगर भ्रमण पर निकले श्रीकृष्ण, जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत

अंग्रेजों के दौर से चली आ रही परंपरा आज भी कायम, मंदिर समिति ने निकाली श्रीकृष्ण की शोभायात्रा

मसूरी। जन्माष्टमी के बाद रविवार को पहाड़ों की रानी मसूरी में भगवान श्रीकृष्ण की डोली नगर भ्रमण पर निकली। सनातन धर्म मंदिर समिति की ओर से आयोजित शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। भगवान श्रीकृष्ण की डोली के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए शहर के साथ ही आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु पहुंचे। बैंड की धार्मिक धुनों और श्रीकृष्ण के जयकारों के बीच निकली शोभायात्रा में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित विभिन्न आकर्षक झांकियां शामिल रहीं। इनमें वासुदेव की जेल और श्रीकृष्ण जन्म से जुड़ी झांकी लोगों के आकर्षण का विशेष केंद्र रही। श्रद्धालुओं ने झांकियों की जमकर सराहना की। शोभायात्रा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग को जीवंत करती झांकी विशेष आकर्षण रही। वासुदेव की जेल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उन्हें लेकर गोकुल जाने के प्रसंग को झांकी के माध्यम से बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। झांकी में श्रीकृष्ण जन्म की कथा को देखकर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए और लोगों ने इसकी खूब सराहना की। इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं पर आधारित अन्य झांकियां भी शोभायात्रा में शामिल रहीं, जिसने धार्मिक आयोजन को और भव्य बना दिया।पर्यटकों ने भी शोभायात्रा को उत्सुकता से देखा और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए। शोभायात्रा मलिंगार चौक से शुरू होकर घंटाघर, पिक्चर पैलेस चौक और शहीद स्थल होते हुए गांधी चौक पहुंची। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए। विभिन्न स्थानों पर सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं की ओर से शोभायात्रा का स्वागत किया गया तथा मिष्ठान वितरित किया गया। पिक्चर पैलेस चौक पर स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर के मुख्य पुजारी परशुराम भट्ट ने भगवान श्रीकृष्ण की डोली का विधिवत पूजन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और वातावरण श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा।
सनातन धर्म मंदिर समिति के अध्यक्ष ने बताया कि जन्माष्टमी के बाद आने वाले रविवार को प्रत्येक वर्ष भगवान श्रीकृष्ण की डोली नगर भ्रमण पर निकालने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण स्वयं डोली में विराजमान होकर नगर का भ्रमण करते हैं और भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं।उन्होंने बताया कि यह परंपरा नई नहीं बल्कि अंग्रेजों के शासनकाल से चली आ रही है। एक समय अंग्रेजों ने इस धार्मिक परंपरा को रोकने का प्रयास किया था, लेकिन हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों के प्रयासों से यह परंपरा जारी रही। कोरोना काल में भी इसे सूक्ष्म रूप से निभाया गया और परंपरा को टूटने नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि आज इस डोली के माध्यम से मसूरी ही नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से लोग भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। देश-विदेश से मसूरी आने वाले पर्यटक भी इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनते हैं।
नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने भी भगवान श्रीकृष्ण की डोली के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से मसूरी, प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि मसूरी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं शहर की पहचान हैं। पीढ़ियों से चली आ रही ऐसी परंपराओं को संरक्षित करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने आयोजन के लिए सनातन धर्म मंदिर समिति और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। जगह-जगह लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण की डोली पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। धार्मिक आयोजन ने मसूरी के वातावरण को भक्ति और उल्लास से सराबोर कर दिया। 
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मसूरी एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण का विरोध नहीं, लेकिन प्रक्रिया पर उठे सवालः- गुनसोला
पूर्व विधायक ने कहा एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण को लेकर नगर पालिका जारी करे ब्लूप्रिंट और श्वेत पत्र

मसूरी। मसूरी म्युनिसिपल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज (एमपीजी कॉलेज) के प्रांतीयकरण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला ने कॉलेज के प्रांतीयकरण का विरोध करने से इनकार करते हुए इसकी प्रक्रिया और भविष्य को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के हित में कॉलेज का बेहतर संचालन और उच्च शिक्षा की सुविधाओं का विस्तार जरूरी है, लेकिन प्रांतीयकरण से पहले सभी वैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कॉलेज का विश्वविद्यालय और संबंधित संस्थाओं से पुराना संबंध रहा है और कॉलेज की व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं का पालन किया जाता रहा है। ऐसे में प्रांतीयकरण के मामले में भी सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
घटती छात्र संख्या और शिक्षकों की कमी पर चिंता
गुनसोला ने कॉलेज में घटती छात्र संख्या को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समय के साथ मसूरी में शिक्षा का स्वरूप बदला है। शहर में निजी और मिशनरी स्कूलों की संख्या बढ़ने के कारण विद्यार्थियों को स्कूली स्तर पर ही बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इसका असर उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज में आने वाले विद्यार्थियों की संख्या पर भी पड़ा है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में वर्तमान में स्थायी शिक्षकों की संख्या बेहद कम है और करीब चार-पांच स्थायी शिक्षक ही कार्यरत बताए जा रहे हैं, जिनमें से कई आने वाले समय में सेवानिवृत्त होंगे। ऐसे में सवाल यह है कि कॉलेज के शैक्षणिक ढांचे और इंफ्रास्ट्रक्चर को किस तरह मजबूत किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कई शिक्षकों की नियुक्ति के बाद भी उनके भुगतान का मामला लंबित होना गंभीर विषय है। ऐसे मामलों का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए, ताकि शिक्षकों और कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े और कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित न हो।
‘शिक्षा का मंदिर, राजनीति का अखाड़ा नहीं’
पूर्व विधायक ने कॉलेज में शिक्षक और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एमजी कॉलेज शिक्षा का मंदिर है और इसे राजनीतिक गतिविधियों का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए। यदि किसी शिक्षक या कर्मचारी की ओर से नियमों के विपरीत राजनीतिक गतिविधियां की जा रही हैं तो कॉलेज प्रबंधन को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉलेज नगर पालिका के अधीन है और नगर पालिका अध्यक्ष कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भी होते हैं। ऐसे में प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि कॉलेज में अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण कायम रखा जाए तथा किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि को शिक्षा व्यवस्था पर हावी न होने दिया जाए।
कॉलेज की पूरी भूमि और भवन को लेकर स्पष्टता मांगी
गुनसोला ने प्रांतीयकरण के बाद कॉलेज की संपत्ति को लेकर भी स्पष्ट नीति की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि एमजी कॉलेज का प्रांतीयकरण किया जाता है तो कॉलेज की संपूर्ण भूमि, भवन और उससे संबंधित परिसंपत्तियां भी कॉलेज की व्यवस्था में सुरक्षित रहनी चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि प्रांतीयकरण की प्रक्रिया के दौरान कॉलेज की जमीन का किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उन्होंने नगर पालिका प्रशासन से प्रांतीयकरण के लिए तैयार किए गए प्रस्ताव, उसकी पूरी रूपरेखा और भविष्य की योजना को सार्वजनिक करने की मांग की।
‘नगर पालिका एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण को लेकर जारी करे श्वेतपत्र’
पूर्व विधायक ने नगर पालिका प्रशासन से प्रांतीयकरण के पूरे मामले पर ब्लूप्रिंट और श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता के सामने यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रांतीयकरण के बाद कॉलेज की भूमि, भवन, शिक्षकों, कर्मचारियों, पाठ्यक्रम, वित्तीय व्यवस्था और विद्यार्थियों के हितों को लेकर क्या योजना है। उन्होंने कहा कि पूरी जानकारी सार्वजनिक होने से लोगों के मन में उठ रहे संदेह दूर होंगे और कॉलेज के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
एमपीजी कॉलेज की भूमि पर तहसील बनाने की कवायद पर जताई आपत्ति
गुनसोला ने एमपीजी कॉलेज की भूमि के किसी अन्य उपयोग की संभावित कवायद पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कॉलेज की भूमि पर तहसील बनाए जाने की बात सामने आ रही है, जो उचित नहीं है। उनका कहना है कि यदि कॉलेज को भविष्य में विश्वविद्यालय का स्वरूप देना है तो उसके लिए पर्याप्त भूमि का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एमजी कॉलेज की भूमि का इस्तेमाल किसी अन्य प्रयोजन के लिए किया गया और इससे कॉलेज के भविष्य या विश्वविद्यालय के प्रस्ताव पर असर पड़ा तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
‘विश्वविद्यालय के लिए भूमि सबसे जरूरी’
गुनसोला ने कहा कि एमपीजी कॉलेज को भविष्य में विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उसकी भूमि को सुरक्षित रखना जरूरी है। यदि कॉलेज की जमीन को किसी दूसरे विभाग या संस्था के उपयोग में दे दिया गया तो विश्वविद्यालय के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि मसूरी के इस ऐतिहासिक कॉलेज को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाई जानी चाहिए। प्रांतीयकरण हो या विश्वविद्यालय का स्वरूप दिया जाए, हर स्थिति में प्राथमिकता विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा, पर्याप्त शिक्षक, आधुनिक सुविधाएं और सुरक्षित शैक्षणिक भविष्य उपलब्ध कराने की होनी चाहिए। पूर्व विधायक ने नगर पालिका प्रशासन से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने और कॉलेज की संपत्ति व भविष्य को लेकर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
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मसूरी सड़क के नीचे खिसकी जमीन, हादसे के खतरे से अंबेडकर चौक-कैमल बैक रोड बंद
कृष्णा पैलेस होटल के सामने सड़क का बेस हुआ खोखला, पालिका ने दोनों ओर बैरिकेडिंग कर वाहनों और पैदल आवाजाही पर लगाई रोक
मसूरी अंबेडकर चौक से कैमल बैक रोड जाने वाले मार्ग पर कृष्णा पैलेस होटल के सामने सड़क के नीचे की जमीन खिसकने से सड़क का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। सड़क के नीचे का बेस पूरी तरह खाली होने के कारण इसके कभी भी धंसने की आशंका बनी हुई है। हादसे की आशंका को देखते हुए नगर पालिका प्रशासन और पुलिस ने एहतियातन मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया है। सड़क के दोनों ओर बैरिकेडिंग लगाकर रात के समय आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई है।
घटना की सूचना मिलते ही नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी मौके पर पहुंचीं और उन्होंने भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि सड़क के किनारे हुए भारी भू-धंसाव के कारण सड़क का बेस काफी हद तक खोखला हो चुका है। यदि इस हिस्से से कोई वाहन गुजरता है तो सड़क का बचा हुआ हिस्सा भी धंस सकता है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है। इसी खतरे को देखते हुए फिलहाल मार्ग को पूर्ण रूप से बंद किया गया है।
पेयजल लाइनों में लीकेज से बढ़ी परेशानी
पालिका अध्यक्ष ने सड़क की स्थिति के लिए पेयजल लाइनों और जल निकासी व्यवस्था को भी जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों जल निगम और जल संस्थान की ओर से पाइपलाइन बिछाने के दौरान सड़क की खुदाई और उसके बाद की मरम्मत अपेक्षित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं होने से सड़क का हिस्सा कमजोर हुआ। इसके अलावा आसपास से गुजर रही कई पेयजल लाइनों में लीकेज की शिकायत है। रिस रहा पानी जमीन के भीतर जाने से मिट्टी कमजोर होती गई और अंततः सड़क के नीचे का हिस्सा खिसक गया। उन्होंने बताया कि जल निगम और जल संस्थान के अधिकारियों को रविवार सुबह मौके पर बुलाया गया है। दोनों विभागों के अधिकारियों के साथ मौके का निरीक्षण कर समस्या का स्थायी समाधान निकालने और सड़क को जल्द से जल्द दुरुस्त कराने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
कई महत्वपूर्ण स्थानों को जोड़ता है मार्ग
यह मार्ग स्थानीय लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी क्षेत्र में नगर पालिका अध्यक्ष और उनका आवास है, जबकि एसडीएम मसूरी का आवास भी आसपास स्थित है। इसके अलावा क्षेत्र के कई प्रमुख होटलों तक पहुंचने के लिए भी यही मुख्य मार्ग इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में सड़क बंद होने से स्थानीय लोगों और होटल कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई है।
होटल में भी घुसता है बारिश का पानी
कृष्णा पैलेस होटल के संचालक ने बताया कि होटल के सामने मुख्य सड़क के नीचे काफी बड़ा हिस्सा कमजोर हो गया है। पानी की उचित निकासी नहीं होने के कारण बारिश और अन्य स्रोतों का पानी लगातार जमीन में जा रहा है। यही वजह है कि सड़क के नीचे की मिट्टी धीरे-धीरे कमजोर होती गई। होटल में भी समय-समय पर पानी घुसने की समस्या बनी रहती है। होटल संचालक ने प्रशासन और नगर पालिका से मांग की कि सड़क के नीचे मजबूत पुस्ते का निर्माण कराने के साथ ही पानी की निकासी के लिए स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि यदि अभी समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में सड़क का और बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो सकता है और इससे जान-माल का खतरा भी बढ़ जाएगा।
फिलहाल सड़क पर आवाजाही पूरी तरह बंद है और प्रशासन की प्राथमिकता सड़क के नीचे कमजोर हो चुके हिस्से को सुरक्षित करना तथा पानी के रिसाव की समस्या का समाधान करना है।
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मसूरी एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण की राह में अड़ंगा डालने की कोशिश नाकाम, हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज

पालिका के प्रस्ताव को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता के पास ही नहीं था वैधानिक अधिकार, सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने माना—याचिका आगे नहीं बढ़ाएंगे

मसूरी। एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण को लेकर नगर पालिका परिषद मसूरी की ओर से पारित प्रस्ताव को चुनौती देने की कोशिश को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने करारा झटका दिया है। हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने अनुज गुप्ता बनाम उत्तराखंड राज्य व अन्य, रिट याचिका संख्या 630/2026 (M/B) पर सुनवाई करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। अदालत के इस फैसले से नगर पालिका के उस प्रस्ताव को मजबूती मिली है, जिसके माध्यम से मसूरी के महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण की दिशा में पहल की गई है।
पालिका की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, याचिकाकर्ता अनुज गुप्ता ने एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण के लिए नगर पालिका बोर्ड की ओर से पारित प्रस्ताव को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने स्वयं स्वीकार किया कि पालिका के उक्त प्रस्ताव को चुनौती देने के लिए याचिकाकर्ता के पास वैधानिक अधिकार (Locus Standi) नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से याचिका पर आगे जोर नहीं देने यानी ‘नॉट प्रेस्ड’ किए जाने का अनुरोध किया गया।
खंडपीठ ने इस आधार पर दो सितंबर 2026 को रिट याचिका को निरस्त कर दिया और इससे संबंधित सभी लंबित प्रार्थना पत्रों का भी निस्तारण कर दिया।
प्रांतीयकरण की कोशिश पर बार-बार सवाल खड़े करने से बढ़ा विवाद
एमपीजी कॉलेज मसूरी के प्रांतीयकरण का मामला लंबे समय से स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है। नगर पालिका का तर्क है कि कॉलेज के प्रांतीयकरण से संस्थान को अधिक स्थायित्व, बेहतर शैक्षणिक संसाधन और विद्यार्थियों को व्यापक सुविधाएं उपलब्ध कराने का रास्ता खुल सकता है। इसी उद्देश्य से पालिका बोर्ड ने प्रांतीयकरण की दिशा में प्रस्ताव पारित किया था।
हालांकि, पालिका के इस कदम के बाद विभिन्न स्तरों पर इसका विरोध और कानूनी अड़चनें सामने आती रही हैं। पालिका  अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ और हितों के चलते कॉलेज के प्रांतीयकरण की प्रक्रिया में लगातार अड़ंगा लगाने का प्रयास कर रहे हैं। पालिका का कहना है कि ऐसे प्रयासों से न केवल बोर्ड के निर्णय पर सवाल खड़े करने की कोशिश हुई, बल्कि कॉलेज के भविष्य से जुड़ी प्रक्रिया को भी प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
अब हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद पालिका को इस मामले में बड़ी राहत मिली है। हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि अदालत ने मामले में याचिका को ‘नॉट प्रेस्ड’ किए जाने के अनुरोध के बाद खारिज किया है। इसलिए इसे प्रांतीयकरण के अंतिम रूप से पूरा हो जाने के बजाय पालिका के प्रस्ताव के खिलाफ दायर इस विशेष याचिका के खारिज होने के रूप में देखा जाना चाहिए।
पालिका बोली—जनहित के फैसलों में बाधा स्वीकार नहीं
नगर पालिका परिषद का कहना है कि एमपीजी कॉलेज मसूरी की शैक्षणिक व्यवस्था और विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रांतीयकरण की पहल की गई है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति या समूह व्यक्तिगत हितों के कारण प्रक्रिया को रोकने का प्रयास करता है तो उसका प्रतिकूल असर शहर के विद्यार्थियों और कॉलेज के भविष्य पर पड़ सकता है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद पालिका बोर्ड को उम्मीद है कि अब प्रांतीयकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अनावश्यक कानूनी अड़चनें कम होंगी। पालिका प्रशासन ने संकेत दिया है कि कॉलेज के हित और विद्यार्थियों के भविष्य को केंद्र में रखते हुए आगे की कार्रवाई नियमानुसार जारी रखी जाएगी।
फैसले के बाद उठे कई सवाल
हाईकोर्ट के आदेश ने जहां नगर पालिका को राहत दी है, वहीं इस पूरे प्रकरण ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि यदि किसी प्रस्ताव से किसी व्यक्ति का प्रत्यक्ष कानूनी हित प्रभावित नहीं होता, तो उसे अदालत में चुनौती देने का अधिकार किस आधार पर दिया जा सकता है। इस मामले की सुनवाई के दौरान स्वयं याचिकाकर्ता के अधिवक्ता द्वारा वैधानिक अधिकार न होने की बात स्वीकार किए जाने से याचिका की स्थिति स्पष्ट हो गई।
पालिका के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उसके द्वारा पारित प्रस्ताव को चुनौती देने वाली मौजूदा कानूनी कोशिश समाप्त हो गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण की प्रक्रिया आगे किस गति से बढ़ती है और शासन स्तर पर इस प्रस्ताव पर क्या निर्णय लिया जाता है।
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मसूरी विधानसभा टिकट की दौड़ में गामा ने ठोकी ताल, बोले- आखिरी गेंद तक उम्मीद बरकरार

मसूरी। मसूरी विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट को लेकर सियासी हलचल के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा ने अपनी दावेदारी को लेकर बड़ा संकेत दिया है। गामा ने कहा कि वह मसूरी विधानसभा से चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा को लेकर लगातार प्रयास करते रहेंगे। हालांकि टिकट का अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा, लेकिन उन्होंने कहा कि जब तक मैच की आखिरी गेंद नहीं फेंकी जाती, तब तक चौका-छक्का लगने की उम्मीद बनी रहती है।

गामा ने कहा कि वह करीब 40 वर्षों से भाजपा के सिपाही के रूप में संगठन के लिए काम कर रहे हैं। वर्ष 2018 में पार्टी ने उन्हें देहरादून नगर निगम के मेयर पद का टिकट देकर आशीर्वाद दिया था। उन्होंने पार्टी के भरोसे पर खरा उतरते हुए चुनाव जीता। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार गामा ने वर्ष 1989 में वार्ड अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया था और इसके बाद भाजपा युवा मोर्चा समेत संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने जब वर्ष 2025 में सौरभ थपलियाल को टिकट दिया, तब भी उन्होंने अपनी व्यक्तिगत दावेदारी से ऊपर पार्टी हित को रखा और संगठन के निर्देश पर उनके लिए पूरी ताकत से काम किया। गामा ने कहा कि भाजपा में व्यक्ति नहीं, बल्कि संगठन सर्वोपरि है।

'टिकट किसी को मिले, कमल खिलाने के लिए एकजुट होकर करेंगे काम'

गामा ने स्पष्ट किया कि भाजपा नेतृत्व मसूरी से जिसे भी प्रत्याशी बनाएगा, वह उसके साथ पूरी मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर पार्टी प्रत्याशी को जिताने के लिए काम करना होगा।उन्होंने कहा, "मसूरी में पहले भी कमल खिला है और आगे भी कमल खिलेगा।" भाजपा की जीत के लिए कार्यकर्ताओं की एकजुटता सबसे बड़ी ताकत है।

गामा ने कहा कि अब उनकी इच्छा मसूरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने की है। इसके लिए वह लगातार जनता और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय रहेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी में लंबे समय से काम करने के कारण संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच उनका मजबूत जुड़ाव है और वह अपनी इस इच्छा को लेकर आखिरी समय तक प्रयास करते रहेंगे।
मसूरी विधानसभा सीट को लेकर भाजपा के भीतर संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ने के बीच गामा का यह बयान आने वाले दिनों में पार्टी की अंदरूनी सियासत को और गरमा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय भाजपा नेतृत्व को ही करना है।
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मसूरी विधानसभा टिकट की दौड़ में गामा ने ठोकी ताल, बोले- आखिरी गेंद तक उम्मीद बरकरार
मसूरी। मसूरी विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट को लेकर सियासी हलचल के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा ने अपनी दावेदारी को लेकर बड़ा संकेत दिया है। गामा ने कहा कि वह मसूरी विधानसभा से चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा को लेकर लगातार प्रयास करते रहेंगे। हालांकि टिकट का अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा, लेकिन उन्होंने कहा कि जब तक मैच की आखिरी गेंद नहीं फेंकी जाती, तब तक चौका-छक्का लगने की उम्मीद बनी रहती है।
गामा ने कहा कि वह करीब 40 वर्षों से भाजपा के सिपाही के रूप में संगठन के लिए काम कर रहे हैं। वर्ष 2018 में पार्टी ने उन्हें देहरादून नगर निगम के मेयर पद का टिकट देकर आशीर्वाद दिया था। उन्होंने पार्टी के भरोसे पर खरा उतरते हुए चुनाव जीता। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार गामा ने वर्ष 1989 में वार्ड अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया था और इसके बाद भाजपा युवा मोर्चा समेत संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने जब वर्ष 2025 में सौरभ थपलियाल को टिकट दिया, तब भी उन्होंने अपनी व्यक्तिगत दावेदारी से ऊपर पार्टी हित को रखा और संगठन के निर्देश पर उनके लिए पूरी ताकत से काम किया। गामा ने कहा कि भाजपा में व्यक्ति नहीं, बल्कि संगठन सर्वोपरि है।
'टिकट किसी को मिले, कमल खिलाने के लिए एकजुट होकर करेंगे काम'
गामा ने स्पष्ट किया कि भाजपा नेतृत्व मसूरी से जिसे भी प्रत्याशी बनाएगा, वह उसके साथ पूरी मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर पार्टी प्रत्याशी को जिताने के लिए काम करना होगा।
उन्होंने कहा, "मसूरी में पहले भी कमल खिला है और आगे भी कमल खिलेगा।" भाजपा की जीत के लिए कार्यकर्ताओं की एकजुटता सबसे बड़ी ताकत है।
गामा ने कहा कि अब उनकी इच्छा मसूरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने की है। इसके लिए वह लगातार जनता और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय रहेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी में लंबे समय से काम करने के कारण संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच उनका मजबूत जुड़ाव है और वह अपनी इस इच्छा को लेकर आखिरी समय तक प्रयास करते रहेंगे।
मसूरी विधानसभा सीट को लेकर भाजपा के भीतर संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ने के बीच गामा का यह बयान आने वाले दिनों में पार्टी की अंदरूनी सियासत को और गरमा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय भाजपा नेतृत्व को ही करना है।
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मसूरी गलोगीधार में पलटी रोडवेज बस, दो घंटे तक जाम में फंसा मसूरी-देहरादून मार्ग

क्रेन और स्थानीय लोगों की मदद से बस हटने के बाद खुला रास्ता, आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर उठे वाल

मसूरी-देहरादून मार्ग के गलोगीधार में गुरुवार सुबह रोडवेज बस के सड़क पर पलटने से यातायात व्यवस्था ठप हो गई। बस को समय रहते सड़क किनारे नहीं किए जाने के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और पर्यटकों व स्थानीय लोगों को करीब दो घंटे तक जाम में फंसे रहना पड़ा।
बस को हटाने के लिए क्रेन मंगाई गई, लेकिन कई घंटे की मशक्कत के बाद भी सफलता नहीं मिली। आखिरकार पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने क्रेन की मदद से बस को सीधा कर सड़क किनारे किया, जिसके बाद यातायात सुचारू हो सका।

घटना ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून में मसूरी मार्ग पर दुर्घटनाएं और भूस्खलन आम हैं, ऐसे में सड़क से बाधा हटाने के लिए त्वरित और प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। लोगों ने कहा कि सरकार आपदा प्रबंधन को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन एक बस को सड़क से हटाने में घंटों लगना इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करता है।
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ब्रेक फेल होने से सड़क पर पलटी रोडवेज की टेंपो ट्रैवलर, 17 यात्री घायल
गलोगीधार के पास हादसे से मची अफरा-तफरी,

 मसूरी-देहरादून मार्ग पर गलोगीधार के पास गुरुवार को उस समय बड़ा हादसा होने से टल गया, जब उत्तराखंड परिवहन निगम की टेंपो ट्रैवलर के अचानक ब्रेक फेल हो गए। चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए वाहन को खाई की ओर जाने से रोकने के लिए पहाड़ से टकरा दिया। इसके बाद टेंपो ट्रैवलर सड़क पर पलट गई। हादसे में वाहन में सवार 17 यात्री घायल हो गए, जबकि एक यात्री को गंभीर चोटें आई हैं।
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‘मसूरी से गणेश जोशी की विदाई तय, इस बार 21 हजार मतों से हारेंगे’
कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद रावत ने भाजपा सरकार पर बोला हमला, बेरोजगारी और माफिया को लेकर साधा निशाना

मसूरी। कांग्रेस नेत्री डॉ. सोनिया आनंद रावत ने प्रदेश की भाजपा सरकार और मसूरी विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है और राज्य शराब, खनन तथा भू-माफिया के प्रभाव में जा रहा है। उन्होंने कहा कि मसूरी में भी रोजगार के अवसरों की कमी और रेहड़ी-पटरी वालों की समस्याओं को लेकर सरकार गंभीर नहीं है।
डॉ. रावत ने कहा कि मसूरी में बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए छोटे कारोबार और रेहड़ी-पटरी पर निर्भर हैं, लेकिन कई लोगों को अपने रोजगार से वंचित होना पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘रेहड़ी-पटरी वालों को बेघर कर दिया गया, लेकिन उनकी समस्याओं की चर्चा करने वाला कोई नहीं है।’ उन्होंने कहा कि पर्यटन नगरी में स्थानीय लोगों के हितों और रोजगार के मुद्दों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
‘21 हजार से जीत नहीं, हार की बात होगी’
कांग्रेस नेत्री ने गणेश जोशी के आगामी चुनाव में 21 हजार मतों से जीतने के दावे पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यह उनका भ्रम है और इस बार परिणाम इसके ठीक उलट होंगे। ‘गणेश जोशी 21 हजार मतों से जीतने की बात कर रहे हैं, जबकि इस बार उन्हें 21 हजार मतों से हार का सामना करना पड़ेगा।’
उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से गणेश जोशी को दोबारा मसूरी से टिकट दिए जाने की चर्चा कांग्रेस के लिए कोई चिंता का विषय नहीं है। कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और पार्टी प्रत्याशी को जिताने के लिए एकजुट होकर काम करेगी।
‘कांग्रेस में नहीं कोई अंतर्कलह’
डॉ. रावत ने कांग्रेस में टिकट को लेकर चल रही संभावित खींचतान के सवाल पर कहा कि पार्टी में किसी प्रकार की अंतर्कलह नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व जिसे भी प्रत्याशी घोषित करेगा, कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता और नेता उसके लिए पूरी ताकत से काम करेंगे।
उन्होंने दावा किया कि मसूरी की जनता अब भाजपा सरकार और विधायक के कार्यों को अच्छी तरह पहचान चुकी है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में बदलाव तय है और गणेश जोशी की मसूरी से विदाई निश्चित है।
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मसूरी गोलीकांड की 32वीं बरसी पर शहीदों को नमन, विकास के दावों पर विपक्ष ने उठाए सवाल
शहीद स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में परिजनों ने दी श्रद्धांजलि, सीएम धामी ने वर्चुअल माध्यम से किया नमन; मंत्री गणेश जोशी ने गिनाईं विकास योजनाए

मसूरी गोलीकांड की 32वीं बरसी पर बुधवार को शहीद स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में आंदोलन के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। शहीदों के परिजनों ने उनके चित्रों पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
खराब मौसम के कारण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मसूरी नहीं पहुंच सके। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राज्य आंदोलन के शहीदों और उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों और शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य पहाड़ के लोगों को रोजगार और विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए छोटे उद्योगों, होमस्टे समेत विभिन्न योजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य आंदोलनकारियों को क्षैतिज आरक्षण और सरकारी सेवाओं में आरक्षण का लाभ भी दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सरकार मसूरी के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से प्रस्तावित भिलाडू स्टेडियम के निर्माण में वन विभाग की एनओसी बड़ी बाधा बनी हुई थी, लेकिन अब अनापत्ति प्रमाणपत्र मिल गया है। जल्द ही स्टेडियम का निर्माण शुरू कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि गढ़वाल सभा के भवन के निर्माण को लेकर भी प्रयास जारी हैं और जल्द ही प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा।
वहीं, कार्यक्रम में मौजूद राज्य आंदोलनकारियों और विपक्षी नेताओं ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विकास के नाम पर केवल घोषणाएं कर रही है, जबकि धरातल पर स्थिति अलग है। आंदोलनकारियों ने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी शहीदों और आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बन पाया है। उन्होंने आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
विपक्षी नेताओं ने कहा कि सरकार को शहीदों के नाम पर राजनीति करने के बजाय उनके सपनों को धरातल पर उतारने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने मसूरी में हो रहे निर्माण और विकास कार्यों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विकास के नाम पर पर्यावरण और पहाड़ को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
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मसूरी शहीद स्थल पर यूकेडी नेताओं के बैठने पर हुआ विरोध, आंदोलनकारियों ने जताई आपत्ति
यूकेडी अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती बोले- विरोध नहीं, शहीदों के सम्मान में किया मौन; भाजपा-कांग्रेस पर उत्तराखंड के दोहन का लगाया आरोप

मसूरी गोलीकांड की 32वीं बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती और उनकी टीम को शहीद स्थल पर कुछ राज्य आंदोलनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा। यूकेडी नेता इंद्रमणि बडोनी के भतीजे आशीष बडोनी के साथ मौन में बैठ गए थे। इस पर कुछ आंदोलनकारियों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि शहीद स्थल पर विरोध या राजनीतिक गतिविधि का यह उचित समय नहीं है। विरोध के बाद यूकेडी नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे किसी प्रकार का प्रदर्शन या विरोध नहीं कर रहे थे। शहीद स्थल पर बैठने की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण वे आशीष बडोनी के साथ मौन में बैठ गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और कुछ नेताओं की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है।
सुरेंद्र कुकरेती ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण में उत्तराखंड क्रांति दल और आंदोलनकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य बनने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ने सत्ता में रहते हुए प्रदेश के संसाधनों का दोहन किया, जबकि राज्य आंदोलन के मूल मुद्दे आज भी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। उन्होंने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने के मुद्दे पर भी सरकारों को घेरा। कुकरेती ने कहा कि प्रदेश में खनन, शराब और अन्य माफिया हावी हैं तथा भ्रष्टाचार चरम पर है। ऐसे में शहीदों के नाम पर राजनीति करने के बजाय उनके सपनों के उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
यूकेडी के केन्द्रीय महामंत्री केन्द्रपाल सिंह तोपवाल और यूकेडी नेता प्रमिला रावत ने कहा कि शहीद स्थल जैसे स्थान पर राजनीति किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड की समस्याओं और पहाड़ के दर्द को यूकेडी सबसे बेहतर तरीके से समझती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में यूकेडी प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है। उन्होने कहा कि इस बार पार्टी को जनता से पूरी उम्मीद है और प्रदेश की जनता भाजपा व कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों के बजाय क्षेत्रीय दल को मौका देगी। उन्होंने दावा किया कि यूकेडी को अवसर मिलने पर गैरसैंण राजधानी, रोजगार, पलायन, भ्रष्टाचार और पहाड़ के संसाधनों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाया जाएगा।
शहीद स्थल पर हुई नोकझोंक ने कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक माहौल को भी गरमा दिया। एक ओर जहां शहीदों को श्रद्धांजलि देकर उनके सपनों का उत्तराखंड बनाने की बात कही गई, वहीं दूसरी ओर राज्य आंदोलन से जुड़े संगठनों ने सरकारों के कामकाज पर सवाल उठाए। इसी बीच यूकेडी नेताओं और आंदोलनकारियों के बीच बैठने को लेकर हुई आपत्ति ने कार्यक्रम में राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया।
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मसूरी गोलीकांड के 32 साल बाद भी जिंदा हैं सवाल, शहीद परिवारों को आज भी इंतजार
दो महिलाओं समेत छह आंदोलनकारियों ने दी थी शहादत, 46 आंदोलनकारियों को भेजा गया था बरेली जेल; राज्य मिला, लेकिन कई सपने अब भी अधूरे

दो सितंबर 1994... उत्तराखंड आंदोलन के इतिहास का वह काला दिन, जिसे मसूरी कभी नहीं भूल सकती। पहाड़ों की शांत वादियां अचानक गोलियों की आवाज से दहल उठी थीं। अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों पर पुलिस और पीएसी की गोलीबारी में छह आंदोलनकारियों ने शहादत दी थी। इनमें दो महिलाएं भी शामिल थीं। घटना के दौरान एक पुलिस अधिकारी की भी मौत हुई थी। आज गोलीकांड की 32वीं बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी, लेकिन उनके परिजनों और आंदोलनकारियों के बीच एक सवाल अब भी गूंज रहा है—जिस उत्तराखंड के लिए इतना बड़ा बलिदान दिया गया, क्या वह उनके सपनों का उत्तराखंड बन पाया?

खटीमा गोलीकांड के विरोध में निकले थे आंदोलनकारी
राज्य आंदोलनकारी पूरण जुयाल के अनुसार, एक सितंबर 1994 को खटीमा गोलीकांड के बाद मसूरी में भी आक्रोश था। दो सितंबर को आंदोलनकारी खटीमा घटना के विरोध में जुलूस निकालकर उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष समिति के झूलाघर स्थित कार्यालय की ओर जा रहे थे। इसी दौरान गनहिल की ओर से पथराव होने के बाद भगदड़ जैसी स्थिति बनी और आंदोलनकारी कार्यालय की ओर जाने लगे। इसी बीच पुलिस और पीएसी की ओर से गोलीबारी शुरू हो गई।

गोलीकांड में मदनमोहन ममगाईं, हंसा धनाई, बेलमती चौहान, बलबीर सिंह नेगी, धनपत सिंह और राय सिंह बंगारी शहीद हो गए। सेंट मैरी अस्पताल के बाहर तत्कालीन सीओ उमाकांत त्रिपाठी की भी मौत हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया। आंदोलनकारियों के अनुसार करीब 46 लोगों को बरेली सेंट्रल जेल भेजा गया। कई लोगों को लंबे समय तक मुकदमों का सामना भी करना पड़ा।

32 साल बाद भी नहीं भूले वो जख्म
गोलीकांड के प्रत्यक्षदर्शी और आंदोलनकारी आज भी उस दिन को याद कर भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि उस समय आंदोलन केवल अलग राज्य की मांग तक सीमित नहीं था। इसके पीछे पहाड़ के लोगों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान के साथ जीने का अवसर देने तथा पलायन रोकने की उम्मीद थी।

आंदोलनकारियों का कहना है कि नौ नवंबर 2000 को उत्तराखंड अलग राज्य बनना उनके संघर्ष की बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन राज्य बनने के बाद भी पहाड़ की कई मूल समस्याएं पूरी तरह खत्म नहीं हुईं।

शहीदों के परिवारों की आर्थिक स्थिति बनी चिंता
राज्य आंदोलनकारियों का कहना है कि हर वर्ष दो सितंबर को शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम होता है। नेता और जनप्रतिनिधि शहीदों को नमन करते हैं, लेकिन कई शहीद परिवार आज भी आर्थिक और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। आंदोलनकारियों के अनुसार कई लोगों का अब तक राज्य आंदोलनकारी के रूप में चिह्नीकरण नहीं हो पाया है।

उनका कहना है कि आंदोलन के दौरान घायल हुए कई आंदोलनकारी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके परिवारों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। ऐसे में केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करने के बजाय सरकार को शहीद परिवारों और आंदोलनकारियों की लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

उमाकांत त्रिपाठी को शहीद का दर्जा देने की मांग
आंदोलनकारियों की एक प्रमुख मांग यह भी है कि गोलीकांड में जान गंवाने वाले तत्कालीन सीओ उमाकांत त्रिपाठी को शहीद का दर्जा दिया जाए। उनका कहना है कि गोलीकांड में उनकी भी जान गई थी और इस पहलू को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

इसके साथ ही आंदोलनकारी लंबे समय से लंबित चिह्नीकरण, सुविधाओं और उनके परिवारों से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग करते रहे हैं।

पलायन ने फिर खड़ा किया वही सवाल
आंदोलनकारियों का कहना है कि अलग राज्य बनने के बावजूद पहाड़ से पलायन आज भी बड़ी चुनौती है। रोजगार की तलाश में युवा मैदानों की ओर जा रहे हैं और कई गांवों में आबादी लगातार घट रही है। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं को लेकर भी दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

आंदोलनकारी कहते हैं कि उनका सपना ऐसा उत्तराखंड था, जहां पहाड़ का पानी और जवानी पहाड़ के काम आए। युवाओं को अपने गांव और क्षेत्र में ही रोजगार मिले और उन्हें मजबूरी में पलायन न करना पड़े।

विकास हुआ, लेकिन पहाड़ तक पहुंच अभी चुनौती
हालांकि उत्तराखंड बनने के बाद राज्य में विकास के कई काम हुए हैं। सड़क और संचार नेटवर्क का विस्तार हुआ है। गांवों तक सड़कें पहुंची हैं और बिजली समेत कई मूलभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है। सरकार की ओर से पलायन रोकने और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं।

लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि विकास का असली पैमाना यह होना चाहिए कि इसका लाभ पहाड़ के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक कितना पहुंचा। उनका कहना है कि देहरादून जैसे मैदानी केंद्रों तक विकास सीमित रहने के बजाय पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

श्रद्धांजलि के साथ आत्ममंथन का दिन
मसूरी गोलीकांड की 32वीं बरसी पर बुधवार को शहीद स्थल पर विभिन्न राजनीतिक दलों, राज्य आंदोलनकारियों और सामाजिक संगठनों की ओर से शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस दौरान शहीदों के बलिदान को याद करने के साथ उनकी लंबित मांगों और पहाड़ की मौजूदा समस्याओं को लेकर भी आवाज उठेगी।

32 साल बाद भी मसूरी गोलीकांड सिर्फ इतिहास की घटना नहीं है। यह आज भी सरकार और समाज के सामने एक सवाल खड़ा करता है—उत्तराखंड तो बन गया, लेकिन जिन सपनों के लिए आंदोलनकारियों ने लाठियां खाईं और छह लोगों ने अपनी जान गंवाई, उन सपनों को पूरा करने की दिशा में अभी कितना सफर बाकी है?
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मसूरी में फिर गूंजेगा शरदोत्सव का रंग, आयोजन को सैद्धांतिक मंजूरी
स्थानीय कलाकारों, खिलाड़ियों और पर्यटन कारोबारियों में उत्साह; फंड जुटाना पालिका के सामने बड़ी चुनौती

पहाड़ों की रानी मसूरी में वर्षों से बंद पड़े शरदोत्सव को फिर से शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। सोमवार को नगर पालिका सभागार में पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी की अध्यक्षता में हुई बैठक में शहर के विभिन्न स्टेकहोल्डर्स, होटल एसोसिएशन, होमस्टे संगठन, खेल संगठनों, रंगकर्मियों, लोक गायकों और कलाकारों ने भाग लिया। सभी ने एकजुट होकर शरदोत्सव के आयोजन पर सहमति जताई। पालिका ने भी इसके आयोजन को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। बैठक में स्थानीय कलाकारों और लोगों ने कहा कि शरदोत्सव केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि मसूरी की सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली परंपरा रहा है। वर्ष 1953 में पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से शुरू हुआ यह उत्सव लंबे समय तक मसूरी की पहचान बना रहा। बताया गया कि शरदोत्सव के मंच से कई कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला और अनेक कलाकारों ने यहीं से अपने करियर की शुरुआत की। देश के नामचीन कलाकारों ने भी समय-समय पर मसूरी के इस आयोजन में प्रस्तुतियां दी हैं।
स्थानीय लोगों ने कहा कि शरदोत्सव में स्थानीय कलाकारों, खिलाड़ियों और प्रतिभाओं को मंच मिलता था। वर्ष 2013 की आपदा के बाद नगर पालिका के सामने आर्थिक संकट बढ़ने के कारण शरदोत्सव का आयोजन बंद हो गया। इसके बाद प्रशासन की ओर से विंटर लाइन कार्निवल आयोजित किया जाने लगा। अब शरदोत्सव को दोबारा शुरू करने की पहल से स्थानीय कलाकारों और खेल प्रेमियों में खासा उत्साह है। पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि बैठक में मौजूद सभी लोगों की सहमति के बाद शरदोत्सव आयोजित करने को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। हालांकि, आयोजन की विस्तृत रूपरेखा, कार्यक्रमों और तिथि को लेकर अभी विचार-विमर्श किया जाना है। उन्होंने कहा कि नगर पालिका के पास सीमित बजट है और शरदोत्सव जैसे बड़े आयोजन के लिए पर्याप्त धन की आवश्यकता होगी। इसके लिए प्रशासन, मसूरी विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी सहित विभिन्न विभागों से सहयोग लेने के साथ ही अन्य स्रोतों से भी फंड जुटाने का प्रयास किया जाएगा। शरदोत्सव के दोबारा आयोजन की पहल से शहर में यह उम्मीद जगी है कि एक बार फिर मसूरी की सड़कों और मंचों पर स्थानीय संस्कृति, लोक कला, संगीत और खेल प्रतिभाओं का रंग देखने को मिलेगा।
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शरदोत्सव के दोबारा आयोजन की पहल से स्थानीय कलाकारों में खुशी
कलाकारों ने पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी का जताया आभार, बोले-उभरती प्रतिभाओं के लिए साबित होगा बड़ा मंच

मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी में नगर पालिका प्रशासन की ओर से शरदोत्सव को दोबारा आयोजित कराने की कवायद से स्थानीय कलाकारों में खुशी की लहर है। कलाकारों का कहना है कि शरदोत्सव केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय और उभरती प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच रहा है।
स्थानीय कलाकार मनोज टम्टा, ममता राव, कुमार शैलेंद्र बिष्ट और त्रिलोक चौहान ने शरदोत्सव के आयोजन की पहल के लिए नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि शरदोत्सव के मंच से मसूरी और उत्तराखंड के कई छोटे कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है।
कलाकारों ने कहा कि शरदोत्सव ने कई कलाकारों को आगे बढ़ने का रास्ता दिया है। इस मंच से अपनी पहचान बनाने वाले कलाकारों में प्रीतम भरतवाण, पद्मश्री प्रीतम सिंह, मीना राणा और पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी सहित कई नाम शामिल हैं, जिन्होंने बाद में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
उन्होंने कहा कि उभरते कलाकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी प्रतिभा को लोगों तक पहुंचाने के लिए उचित मंच की होती है। ऐसे में शरदोत्सव स्थानीय लोक कलाकारों, गायकों, वादकों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं के लिए एक बेहतर प्लेटफॉर्म साबित हो सकता है।
कलाकारों ने उम्मीद जताई कि इस बार शरदोत्सव में स्थानीय प्रतिभाओं को पर्याप्त अवसर दिया जाएगा। इससे न केवल नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा, बल्कि मसूरी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक संस्कृति को भी मजबूती मिलेगी।
कलाकारों ने कहा कि नगर पालिका की यह पहल स्वागत योग्य है और इससे मसूरी में सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस बार स्थानीय और छोटे कलाकारों को शरदोत्सव के मंच पर सम्मानजनक स्थान मिलेगा।
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मसूरी देहरादून मार्ग पानी वाले बैंड के पास एक बार सड़क बह जाने के कारण रोड पूरी तरीके से बंद 
लोगों को हो रही है भारी परेशानी 
देर रात को करीब 2 बजे  8 घंटे की मशक्कत के बाद गलोगी धार भारी भूस्खलन होने के बाद आए मालवा और बोल्डर को हटाकर सड़क को किया गया था सुचारू 
सुबह 5 बजे पानी वाले बैंड के पास भारी भूस्खलन के बाद रोड पूरी तरीके से बह जाने के बाद हुई बंद
लोक निर्माण विभाग द्वारा पहाड़ को काटकर सड़क बनाने की की जा रही है कोशिश
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