खेत बचाओ अभियान के तहत किसान संगोष्ठी आयोजित, उन्नत खेती और डिजिटल साक्षरता पर दिया गया जोर
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सहकारी संस्था, इफको एवं पीएनबी कृषक प्रशिक्षण केंद्र विदिशा के संयुक्त तत्वावधान में "खेत बचाओ अभियान" के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, वित्तीय एवं डिजिटल साक्षरता तथा विभिन्न शासकीय एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी प्रदान कर उन्हें आधुनिक और टिकाऊ खेती के लिए प्रेरित करना था।
संगोष्ठी में इफको के राज्य विपणन प्रबंधक डॉ. डी.के. सोलंकी ने किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के सीमित एवं संतुलित उपयोग पर बल देते हुए जैविक खाद और नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों और जैविक उत्पादों के प्रयोग से उत्पादन लागत में कमी आती है तथा मृदा की उर्वरता और स्वास्थ्य में सुधार होता है।
कार्यक्रम में नाबार्ड की जिला विकास प्रबंधक श्रीमती जगप्रीत कौर ने किसानों को नाबार्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME), डेयरी किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), सहकारी समितियों के माध्यम से दीर्घकालीन ऋण वितरण व्यवस्था तथा हैप्पी सीडर जैसी योजनाओं के लाभों पर प्रकाश डालते हुए किसानों को इनका अधिकाधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
संगोष्ठी में पंजाब नेशनल बैंक के मंडल कार्यालय से मुख्य प्रबंधक श्री विवेक बोधी, जिले की तीनों शाखाओं के शाखा प्रबंधक एवं ऋण अधिकारी उपस्थित रहे। श्री बोधी ने किसानों को वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल बैंकिंग, साइबर सुरक्षा तथा बैंक द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग करने और बैंकिंग सेवाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
इफको के क्षेत्रीय अधिकारी श्री कुमार मनेंद्र ने किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई से पूर्व नैनो डीएपी द्वारा बीज उपचार की सलाह दी। उन्होंने बताया कि प्रति किलोग्राम बीज पर 5 मिलीलीटर नैनो डीएपी के उपयोग से बीजों का अंकुरण तेज और समान रूप से होता है, पौधों का विकास बेहतर होता है तथा शुरुआती अवस्था में फसल अधिक मजबूत बनती है। उन्होंने बताया कि नैनो डीएपी के उपयोग से फास्फेटिक उर्वरकों की अनुशंसित मात्रा में 50 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है, जिससे लागत घटती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने जैव उर्वरकों, बायो डीकंपोजर, सागरिका एवं अन्य नैनो उत्पादों के उपयोग की भी जानकारी दी। साथ ही मिट्टी परीक्षण के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी का नमूना लेकर उसकी जांच कराने से किसानों को फसलवार संतुलित पोषण प्रबंधन की सटीक सलाह प्राप्त होती है।
पीएनबी कृषक प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक श्री अजय सिंह परिहार ने संस्थान द्वारा संचालित वित्तीय एवं डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों के साथ-साथ महिलाओं और ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार आधारित प्रशिक्षणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ब्यूटी पार्लर, खाद्य प्रसंस्करण, लिप्पण आर्ट, पेंटिंग सहित विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं एवं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। कार्यक्रम में इफको के कृषि स्नातक प्रशिक्षु श्री विशाल पाटीदार ने जैव उर्वरकों के लाभ, उनकी उपयोगिता तथा प्रभावी उपयोग की विधियों की जानकारी किसानों को प्रदान की।
संगोष्ठी के दौरान किसानों से मिट्टी के नमूने भी एकत्रित किए गए, जिनका निःशुल्क परीक्षण इफको की प्रयोगशाला में कराया जाएगा। परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर किसानों को फसलवार उर्वरक उपयोग एवं पोषण प्रबंधन संबंधी वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यक्रम में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी विशेष महत्व दिया गया। किसानों एवं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही बालिकाओं को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना तथा प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से जोड़ा गया। इसके लिए उनके बैंक खाते खुलवाकर योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी पूरी की गई।
संगोष्ठी के अंत में किसानों की समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया तथा उन्हें टिकाऊ, लाभकारी एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने का संदेश दिया गया। इस अवसर पर इफको द्वारा नैनो उर्वरक, जल विलेय उर्वरक, जैव उर्वरक, सागरिका एवं अन्य विशिष्ट कृषि उत्पादों के साथ कृषि ड्रोन की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसने किसानों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर कृषि संबंधी नवीन जानकारियों का लाभ उठाया।
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8 views | Vidisha, Madhya Pradesh | Jun 25, 2026