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PRO JS VIDISHA

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विदिशा में फसल बीमा जागरूकता रथों को दिखाई हरी झंडी, 130 पंचायतों में पहुंचकर किसानों को करेंगे जागरूक 
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26 से 31 जुलाई तक चलेगा विशेष अभियान, अऋणी किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ने पर रहेगा विशेष फोकस 
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किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा "फसल बीमा माह" के अंतर्गत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए रविवार को विदिशा से दो विशेष जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अभियान का उद्देश्य जिले के अधिक से अधिक किसानों, विशेष रूप से अऋणी किसानों तक योजना की जानकारी पहुंचाकर उन्हें फसल बीमा के लिए प्रेरित करना है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की अनिश्चितताओं से होने वाले नुकसान की स्थिति में उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

स्थानीय विधायक श्री मुकेश टंडन, जिला पंचायत सीईओ श्री ओ.पी. सनोडिया तथा उप संचालक कृषि श्री सचिन जैन ने संयुक्त रूप से रविवार को उप संचालक कृषि कार्यालय परिसर से दोनों प्रचार-प्रसार रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है और प्रत्येक पात्र किसान को इसका लाभ लेना चाहिए।
जागरूकता अभियान के तहत दोनों रथ 26 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक जिले की लगभग 130 ग्राम पंचायतों का भ्रमण करेंगे। आधुनिक ऑडियो-वीडियो उपकरणों से सुसज्जित इन रथों के माध्यम से गांव-गांव पहुंचकर किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, बीमा कराने की समय-सीमा, प्रीमियम, दावा प्रक्रिया तथा योजना से मिलने वाले लाभों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। साथ ही लाउडस्पीकर के माध्यम से संदेश प्रसारित किए जाएंगे तथा पम्फलेट वितरित कर किसानों को जागरूक किया जाएगा।

कृषि विभाग ने बताया कि इस वर्ष अभियान में विशेष रूप से अऋणी किसानों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, क्योंकि ऐसे कई किसान अभी भी योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसान फसल बीमा कराकर अपनी मेहनत और फसल को प्राकृतिक आपदाओं, अतिवृष्टि, अल्पवृष्टि, ओलावृष्टि एवं अन्य जोखिमों से सुरक्षित कर सकें।

रथ रवाना कार्यक्रम में फसल बीमा कंपनी एसबीआई के जिला प्रतिनिधि श्री राघवेंद्र शर्मा एवं श्री देवेंद्र वर्मा, कृषि विभाग के जिला सलाहकार डॉ. डी.के. तिवारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री विशाल यादव, आत्मा कार्यालय के ब्लॉक तकनीकी प्रबंधक श्री प्रदीप मालवीय, श्री नरेंद्र रघुवंशी, कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा महिला कृषकों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

कृषि विभाग ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि जब यह जागरूकता रथ उनके गांव पहुंचे तो वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर योजना की जानकारी प्राप्त करें तथा निर्धारित अंतिम तिथि से पहले अपनी फसलों का बीमा कराकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ अवश्य उठाएं। यह अभियान किसानों को आत्मनिर्भर और सुरक्षित कृषि व्यवस्था की ओर अग्रसर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>
कारगिल विजय दिवस पर कन्या महाविद्यालय में वीर शहीदों को श्रद्धांजलि, एनसीसी कैडेट्स ने किया वृक्षारोपण 
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कारगिल विजय दिवस के अवसर पर राजमाता विजयाराजे सिंधिया शासकीय कन्या (अग्रणी) स्नातकोत्तर महाविद्यालय, विदिशा में देश के अमर शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राष्ट्रभक्ति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। 14 एमपी बटालियन एनसीसी, विदिशा के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल अंशुभान सिंह के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट्स ने महाविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया तथा कारगिल के वीर सैनिकों के अद्वितीय शौर्य और बलिदान को नमन किया।

कार्यक्रम के दौरान एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट डॉ. विनीता प्रजापति ने कारगिल युद्ध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, भारतीय सेना के अदम्य साहस, वीरता और राष्ट्रभक्ति पर प्रेरक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि कारगिल के रणबांकुरों का सर्वोच्च बलिदान प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा से युवाओं को राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण की सीख मिलती है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना की गौरवशाली विजय और वीर शहीदों की स्मृति में मनाया जाता है।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी. डी. अहिरवार ने एनसीसी कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और अखंडता हमारे वीर सैनिकों के अद्वितीय त्याग और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शहीदों के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनकी देखभाल करने का भी संदेश दिया।

कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. बी. डी. अहिरवार, नोडल अधिकारी डॉ. मलखान सिंह, प्रो. नीता दीक्षित, एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट डॉ. विनीता प्रजापति सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने शहीदों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर सभी एनसीसी कैडेट्स ने दो मिनट का मौन रखकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगौरव, देशभक्ति और शहीदों के प्रति कृतज्ञता के भाव के साथ हुआ। उपस्थित सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने संकल्प लिया कि वे राष्ट्रहित के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी निरंतर कार्य करेंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और हरित भविष्य का निर्माण किया जा सके। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>
नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का 6 दिवसीय आवासीय इंडक्शन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न
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गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की ओर मजबूत कदम: 40 नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का इंडक्शन प्रशिक्षण पूर्ण हुआ
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कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता के निर्देशन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती विनीता कांस्बा के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का 6 दिवसीय आवासीय इंडक्शन प्रशिक्षण आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 19 जुलाई से 25 जुलाई 2026 तक आयोजित इस प्रशिक्षण में जिले की 40 नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। प्रशिक्षण का उद्देश्य नवचयनित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को विभागीय योजनाओं, शासन की प्राथमिकताओं, सेवा प्रदायगी की प्रक्रिया तथा विभिन्न विभागों के साथ समन्वित रूप से कार्य करने के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल एवं व्यवहारिक दक्षता प्रदान करना था, जिससे वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में महिलाओं, बच्चों एवं किशोरियों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध करा सकें।
    
प्रशिक्षण का शुभारंभ विभाग द्वारा निर्धारित प्रशिक्षण मॉड्यूल के अनुसार किया गया, जिसमें आंगनबाड़ी सेवाओं की मूल अवधारणा, महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाएं, पोषण अभियान, सक्षम आंगनबाड़ी, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, किशोरी बालिका कार्यक्रम, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE), पोषण ट्रैकर का उपयोग, समुदाय आधारित गतिविधियां, रिकॉर्ड संधारण, गृह भ्रमण, परिवार परामर्श, व्यवहार परिवर्तन संचार तथा विभागीय दायित्वों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
    
प्रशिक्षण के दौरान विभागीय प्रशिक्षक श्री अरविंद मिश्रा एवं पर्यवेक्षक श्रीमती नीतू सोनी, श्रीमती संगीता सूर्यवंशी, सुश्री रजनी शर्मा तथा सुश्री नाहिद सुल्ताना द्वारा विभिन्न विषयों पर सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण को केवल कक्षागत व्याख्यान तक सीमित न रखते हुए प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए समूह चर्चा, प्रश्नोत्तर, गतिविधि आधारित शिक्षण, केस स्टडी एवं व्यवहारिक अभ्यास भी कराए गए। इससे प्रतिभागियों को अपने दायित्वों की गहन समझ विकसित करने में सहायता मिली।
    
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों का सुनपुरा आंगनबाड़ी केंद्र, विदिशा ग्रामीण परियोजना का एक्सपोजर विजिट भी कराया गया। इस भ्रमण के दौरान नवनियुक्त कार्यकर्ताओं ने आंगनबाड़ी केंद्र पर संचालित दैनिक गतिविधियों, बच्चों के पोषण एवं प्री-स्कूल शिक्षा, वजन एवं ऊंचाई मापन, वृद्धि निगरानी, पूरक पोषण आहार वितरण, समुदाय सहभागिता, मातृ समिति की भूमिका तथा केंद्र के समुचित संचालन की व्यवहारिक जानकारी प्राप्त की। इस भ्रमण ने प्रशिक्षणार्थियों को वास्तविक कार्यस्थल की परिस्थितियों को समझने और प्रशिक्षण में सीखी गई बातों को व्यवहार में लागू करने की प्रेरणा प्रदान की।
    
प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी एवं बहुआयामी बनाने के लिए विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के विशेषज्ञ अधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया। ई-गवर्नेंस मैनेजर श्री अमित अग्रवाल ने आधार पंजीयन, आधार अपडेट एवं आधार आधारित सेवाओं की प्रक्रिया तथा हितग्राहियों को मिलने वाले लाभों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजनाओं का लाभ समय पर प्राप्त करने के लिए आधार संबंधी जानकारी का अद्यतन होना अत्यंत आवश्यक है।
    
पंजाब नेशनल बैंक कृषक प्रशिक्षण केंद्र के श्री अजय सिंह परिहार ने वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग सेवाएं, डिजिटल भुगतान, बचत की आदत, बैंक खातों का महत्व तथा विभिन्न वित्तीय योजनाओं की जानकारी प्रदान की। उन्होंने कार्यकर्ताओं को हितग्राहियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
    
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के श्री रवि चौकसे ने स्व-सहायता समूहों की भूमिका, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्वरोजगार के अवसर तथा विभागीय समन्वय के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गांवों में महिलाओं को आजीविका के अवसरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती हैं।
     
जिला टीकाकरण अधिकारी श्री पंचोली ने नियमित टीकाकरण, मिशन इंद्रधनुष, दस्तक अभियान, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, जन्म के तुरंत बाद स्तनपान की आवश्यकता, पूर्ण टीकाकरण तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता के समन्वित प्रयासों की महत्ता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने समुदाय में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
     
विभाग की ओर से श्रीमती रेनू सक्सेना ने विभागीय योजनाओं, प्रशासनिक प्रक्रियाओं, अभिलेख संधारण, समय-सीमा में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने तथा कार्यालयीन कार्यप्रणाली के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन दिया। वहीं वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक श्रीमती कृतिका व्यास ने महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम, कानूनी अधिकार, आपातकालीन सहायता, परामर्श सेवाएं तथा वन स्टॉप सेंटर द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की जानकारी दी।
     
प्रशिक्षण के दौरान लीड डेवलपमेंट मैनेजर द्वारा वित्तीय समावेशन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा बैंकिंग प्रणाली से संबंधित उपयोगी जानकारी दी गई। शिक्षा विभाग के जिला परियोजना प्रबंधक ने विद्यालयों में नामांकन, ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान, समग्र शिक्षा अभियान तथा शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वित प्रयासों पर प्रकाश डाला।
     
डॉ. समीर किरार एवं श्रीमती ज्योति (एड्स एवं क्षय रोग प्रबंधन विभाग) ने एचआईवी/एड्स एवं क्षय रोग के प्रति जागरूकता, संक्रमण से बचाव, प्रारंभिक पहचान, जांच एवं उपचार की जानकारी देते हुए समुदाय स्तर पर जागरूकता फैलाने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका पर विशेष बल दिया।
     
आईटीआई विदिशा की प्राचार्य सुश्री कविता रघुवंशी ने युवाओं एवं किशोरियों के लिए उपलब्ध व्यावसायिक एवं कौशल विकास पाठ्यक्रमों, रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण तथा प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी साझा की। आरसेटी (RSETI) विदिशा के श्री प्रशांत परिहार ने स्वरोजगार, उद्यमिता विकास, कौशल प्रशिक्षण तथा स्वयं का रोजगार स्थापित करने की विभिन्न योजनाओं पर मार्गदर्शन दिया। वहीं खाद्य सुरक्षा एवं प्रसंस्करण विभाग की श्रीमती किरण श्रीवास्तव ने खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, सुरक्षित भोजन, पोषण एवं खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं।
    
प्रशिक्षण के अंतिम दिवस प्रतिभागियों द्वारा प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए गए। सभी नवनियुक्त कार्यकर्ताओं ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं व्यवहारिक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें विभागीय योजनाओं को बेहतर ढंग से समझने और क्षेत्र में प्रभावी कार्य करने का आत्मविश्वास प्राप्त हुआ। समापन अवसर पर प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाली सभी 40 नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षण प्राप्त सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने-अपने कार्यक्षेत्र में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण सुधार, प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास, किशोरियों के सशक्तिकरण तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/>
पैरालीगल वालेंटियर्स को डिजिटल न्याय व्यवस्था और साइबर सुरक्षा का मिला प्रशिक्षण, सीआईएस एवं ई-कोर्ट सेवाओं की दी गई व्यवहारिक जानकारी 
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राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, विदिशा द्वारा  प्रधान जिला न्यायाधीश एवं  जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष श्री शेख सलीम के मार्गदर्शन में शनिवार को एडीआर भवन के सभागार में पैरालीगल वालेंटियर्स के दक्षता संवर्धन के उद्देश्य से सीआईएस (कोर्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम) एवं साइबर सुरक्षा विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण का उद्देश्य पैरालीगल वालेंटियर्स को डिजिटल न्याय व्यवस्था, ई-कोर्ट सेवाओं तथा साइबर अपराधों से बचाव संबंधी व्यावहारिक जानकारी देकर उन्हें आमजन तक इन सेवाओं की जानकारी पहुंचाने के लिए सक्षम बनाना था। कार्यक्रम का शुभारंभ  प्रधान जिला न्यायाधीश एवं  जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष श्री शेख सलीम ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।  अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था तेजी से डिजिटल स्वरूप ग्रहण कर रही है। ऐसे समय में पैरालीगल वालेंटियर्स की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि यदि वालेंटियर्स डिजिटल न्यायिक सेवाओं की पूरी जानकारी प्राप्त कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं तो न्याय को अधिक सुलभ, सरल और पारदर्शी बनाया जा सकता है। उन्होंने सभी वालेंटियर्स से तकनीकी रूप से दक्ष बनने और आम नागरिकों को न्यायिक सेवाओं का लाभ दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खंड एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री नितेन्द्र सिंह तोमर ने डिजिटल जस्टिस में पैरालीगल वालेंटियर्स की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ई-फाइलिंग, ई-पे, ई-समंस, ई-कोर्ट सेवाएं, केस स्टेटस, कॉज लिस्ट तथा अन्य ऑनलाइन न्यायिक सुविधाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाना वालेंटियर्स का महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से न्याय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और सुविधाजनक बन रही है, जिसका लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना आवश्यक है।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान जिला न्यायालय विदिशा के सिस्टम ऑफिसर श्री राजीव चतुर्वेदी एवं सिस्टम असिस्टेंट श्री ठाकुर दयालसिंह ने कोर्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (सीआईएस) की कार्यप्रणाली, उद्देश्यों एवं उपयोगिता पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने ई-कोर्ट मोबाइल एप एवं सिटीजन सर्विसेज पोर्टल का लाइव प्रदर्शन करते हुए प्रतिभागियों को केस स्टेटस देखने, कॉज लिस्ट प्राप्त करने तथा अन्य ऑनलाइन न्यायिक सेवाओं का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया। इस प्रदर्शन से पैरालीगल वालेंटियर्स को डिजिटल माध्यम से न्यायिक जानकारी प्राप्त करने और नागरिकों को इन सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया समझने का अवसर मिला।

प्रशिक्षण के दूसरे सत्र में साइबर सेल विदिशा के आरक्षक श्री रूपेश कुमार एवं श्री शिवप्रताप सिंह ने साइबर सुरक्षा एवं साइबर अपराधों से बचाव पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने फिशिंग, ओटीपी एवं वीपीआई फ्रॉड, सोशल मीडिया स्कैम, सुरक्षित पासवर्ड बनाने के तरीके, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, डेटा प्राइवेसी तथा डिजिटल सतर्कता के महत्वपूर्ण पहलुओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया। साथ ही साइबर अपराध की स्थिति में राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 तथा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी समझाई।

कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पैरालीगल वालेंटियर्स ने डिजिटल न्याय व्यवस्था एवं साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान किया। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया गया कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाएं तथा लोगों को डिजिटल न्यायिक सेवाओं और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाकर सुरक्षित एवं सशक्त समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/>
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की हरित पहल, एनसीसी कैडेट्स ने लगाए 150 पौधे 
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पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के संकल्प को साकार करने की दिशा में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में शनिवार को “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की एनसीसी यूनिट, एनएसएस स्वयंसेवकों तथा विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए महाविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के 150 पौधों का रोपण किया। इस दौरान सभी प्रतिभागियों ने पौधों के संरक्षण और नियमित देखभाल का संकल्प भी लिया।

कार्यक्रम का आयोजन एनसीसी अधिकारी डॉ. राजकमल प्रजापति के संयोजन में किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. वनिता बाजपेई मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को प्रकृति और मातृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त करने वाली प्रेरणादायी पहल बताते हुए विद्यार्थियों से इसे जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

वृक्षारोपण कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार जैन, डॉ. डी.पी.सी. नरवरिया, डॉ. रश्मि यादव, डॉ. राजकुमार भीमटे, डॉ. प्रमोद सेन, डॉ. बृजेश साहू, श्रीमती श्वेता सोलंकी, डॉ. निमिषा वर्मा, सुश्री आकांक्षा अहिरवार, श्री संदीप त्रिपाठी एवं श्री अंकित दुबे सहित अन्य प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस स्वयंसेवकों तथा महाविद्यालय के लगभग 100 विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए परिसर में छायादार, फलदार एवं पर्यावरण के अनुकूल विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए। विद्यार्थियों ने पौधों की नियमित देखभाल, संरक्षण और संवर्धन का सामूहिक संकल्प लेते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।

महाविद्यालय परिवार ने इस अभियान को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरक पहल बताते हुए भविष्य में भी ऐसे जन-जागरूकता एवं प्रकृति संरक्षण से जुड़े रचनात्मक कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन करने का संकल्प व्यक्त किया। वृक्षारोपण कार्यक्रम ने परिसर में हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ किया। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>
नशे से दूरी है जरूरी: नशा मुक्ति रैली में जनभागीदारी के साथ नशामुक्त समाज का संकल्प, शहर में निकली जागरूकता रैली
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कलेक्टर, एसपी ने नशा मुक्ति जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाई, नशे से दूर रहने का दिया संदेश
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के आह्वान एवं पुलिस मुख्यालय, मध्यप्रदेश के निर्देशानुसार 15 से 30 जुलाई 2026 तक संचालित प्रदेशव्यापी जन-जागरूकता अभियान "नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0" के अंतर्गत शनिवार को विदिशा के यातायात थाना परिसर से भव्य नशा मुक्त जन जागरूकता रैली का निकाली गई। उक्त रैली को कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता, पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली थाना यातायात से प्रारंभ होकर गुलाब वाटिका, बड़ा बाजार एवं माधवगंज होते हुए रेलवे स्टेशन पहुंचकर सम्पन्न हुई। रैली में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों, पुलिस अधिकारियों, सामाजिक संगठनों, मीडियाकर्मियों व नागरिक बंधुओं ने सहभागिता करते हुए नशामुक्त समाज का संदेश दिया गया।
    
कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने कहा कि नशे के विरुद्ध समाज का प्रत्येक वर्ग सक्रिय रूप से अपनी भूमिका निभा रहा है तथा जिलेभर में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशे से किसी का कोई लाभ नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति, परिवार और समाज को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से नशे से दूर रहने तथा सभी नागरिकों से जनभागीदारी के माध्यम से नशामुक्त विदिशा के निर्माण में अपना योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थान पर कहीं भी कोई भी व्यक्ति नशीले पदार्थों विक्रय अथवा सेवन करता दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दें।
    
पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज के भविष्य को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों का सेवन व्यक्ति के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा, करियर, आर्थिक स्थिति एवं पारिवारिक जीवन पर गंभीर दुष्प्रभाव डालता है। उन्होंने युवाओं से हर प्रकार के नशे से दूर रहने, गलत संगति से बचने तथा अपने मित्रों और परिवारजनों को भी जागरूक करने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार अथवा सेवन होता दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दें। पुलिस और समाज की संयुक्त भागीदारी से ही नशे के विरुद्ध प्रभावी एवं स्थायी लड़ाई संभव है।

रेलवे स्टेशन पर दिलाई नशामुक्ति की शपथ -
    
रैली के समापन पर रेलवे स्टेशन, विदिशा में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती मोनिका तिवारी ने उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, नागरिकों एवं सभी प्रतिभागियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई। उन्होंने सभी से स्वयं नशे से दूर रहने, दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने तथा नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार एवं सेवन की जानकारी तत्काल पुलिस को देकर नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाने का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती मोनिका तिवारी, ब्रह्माकुमारी संस्था के सदस्य गण, पुलिस अधिकारी, कर्मचारी, विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकगण, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं सहित बड़ी संख्या में शहर के नागरिक गण मौजूद रहे। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nashamukti nis:value=NashaMukti nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nashesedoorihaizaroori nis:value=NasheSeDooriHaiZaroori nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=drugfreeindia nis:value=DrugFreeIndia nis:enabled=true nis:link/>
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को EVTHS का प्रशिक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य समन्वय पर दिया गया विशेष मार्गदर्शन
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मध्यप्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के EVTHS प्रशिक्षण में शिक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की क्षमता वृद्धि करते हुए उन्हें बच्चों, किशोर-किशोरियों एवं समुदाय के स्वास्थ्य, शिक्षा और जागरूकता संबंधी गतिविधियों में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए तैयार करना रहा।

प्रशिक्षण के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी श्री नरेन्द्र कुमार अहिरवार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को "आंगनवाड़ी एवं शाला एक परिसर" विषय पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ी और विद्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से बच्चों के प्रारंभिक शिक्षा स्तर में सुधार होगा तथा विद्यालय में प्रवेश, नियमित उपस्थिति और समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बच्चों की शैक्षणिक प्रगति पर विशेष ध्यान देने तथा अभिभावकों से निरंतर संवाद बनाए रखने का आग्रह किया।

इस अवसर पर जिला क्षय एवं एड्स रोग अधिकारी डॉ. समीर किरार ने कार्यकर्ताओं को एचआईवी/एड्स, क्षय रोग (टीबी), संक्रमण की रोकथाम, समय पर जांच एवं उपचार तथा जन-जागरूकता के महत्व पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य संबंधी संदेश पहुंचाने की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनके माध्यम से लोगों में एचआईवी/एड्स और टीबी जैसी बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, भ्रांतियों को दूर करने तथा समय पर उपचार के लिए प्रेरित करने का कार्य प्रभावी रूप से किया जा सकता है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने विषय विशेषज्ञों से विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी प्राप्त की तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा से जुड़े व्यवहारिक पहलुओं पर चर्चा की। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को समुदाय में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने, बच्चों के सर्वांगीण विकास तथा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर समन्वय के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/>
लक्ष्य स्पष्ट हो, तैयारी निरंतर हो तो प्रशासनिक सेवा में सफलता निश्चित 
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शासकीय आदर्श महाविद्यालय, विदिशा की छह दिवसीय कार्यशाला का समापन 
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प्रशासनिक सेवा, बैंकिंग एवं प्रतियोगी परीक्षाओं पर विशेषज्ञों ने दिए सफलता के मंत्र 
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शासकीय आदर्श महाविद्यालय, विदिशा में आयोजित "प्रशासनिक अधिकारी कैसे बनें" विषयक छह दिवसीय कार्यशाला का शनिवार को प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक वातावरण में समापन हुआ। समापन सत्र में प्रशासनिक सेवा, प्रतियोगी परीक्षाओं तथा बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को सफलता के व्यावहारिक सूत्र बताते हुए उनके प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दिए। वक्ताओं ने कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, तैयारी निरंतर और अनुशासित हो तो प्रशासनिक सेवाओं में सफलता अवश्य प्राप्त की जा सकती है।

कार्यक्रम के विशेष अतिथि शासकीय अग्रणी महाविद्यालय, विदिशा के प्राचार्य डॉ. बी.डी. अहिरवार ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा, विभिन्न सेवाओं के कैडर, चयन प्रक्रिया तथा प्रशासनिक सेवाओं में उपलब्ध अवसरों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित अध्ययन, समय का प्रभावी प्रबंधन, आत्मविश्वास और निरंतर अभ्यास ही प्रशासनिक अधिकारी बनने की मजबूत नींव हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को वर्तमान घटनाक्रम, सामान्य अध्ययन और व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान देने की सलाह भी दी।

मुख्य अतिथि अजय गोयल, सहायक संचालक, संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गणित, रीजनिंग और समय प्रबंधन की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता केवल अधिक पढ़ने से नहीं, बल्कि सही रणनीति, नियमित अभ्यास और निरंतर आत्ममूल्यांकन से मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतिदिन लक्ष्य निर्धारित कर योजनाबद्ध तरीके से अध्ययन करने की प्रेरणा दी।

विशिष्ट अतिथि भगवान सिंह बघेल, मुख्य शाखा प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक, विदिशा ने बैंकिंग क्षेत्र में रोजगार और करियर की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते महत्व की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को बैंकिंग सेवाओं में उपलब्ध अवसरों, तकनीकी बदलावों तथा डिजिटल लेन-देन के सुरक्षित उपयोग के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में बैंकिंग क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार और विकास का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से डिजिटल बैंकिंग के लाभ एवं चुनौतियों, अध्ययन के दौरान मन को एकाग्र रखने के उपाय, साक्षात्कार की प्रभावी तैयारी, लक्ष्य निर्धारण तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की रणनीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अनेक प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने व्यावहारिक उदाहरणों और अपने अनुभवों के आधार पर विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया, जिससे उन्हें अपने करियर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

समापन समारोह में चीरखेड़ा के सरपंच अरुण शर्मा, जाफरखेड़ी के सरपंच हुकुम सिंह लोधी तथा खमतला के सरपंच प्रदीप मिश्रा भी उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें लक्ष्य के प्रति समर्पित रहकर निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का संचालन रूचि जैन ने प्रभावी ढंग से किया, जबकि संजय शर्मा ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ब्रह्मदीप अलूने ने बताया कि छह दिनों तक आयोजित इस कार्यशाला में प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और बैंकिंग विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं सहित विभिन्न प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में सफल करियर के लिए प्रेरित करना था। विद्यार्थियों ने भी कार्यशाला को अपने भविष्य निर्माण की दिशा में अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायी और मार्गदर्शक पहल बताते हुए ऐसे कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/>
खेतों की तारबाड़ में करंट छोड़ना गैरकानूनी
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कलेक्टर ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने से पूर्व दस अगस्त तक मांगे नागरिकों के सुझाव व आपत्तियां 
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जिले में किसानों द्वारा अपनी फसलों को पालतू एवं जंगली जानवरों से बचाने के लिए खेतों की तारबाड़ में झटका मशीन अथवा अन्य माध्यमों से विद्युत करंट प्रवाहित किए जाने की घटनाओं को गंभीरता से लिया गया है। इस संबंध में उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, विदिशा द्वारा जिला प्रशासन को अवगत कराया गया है कि करंट युक्त तारबाड़ के कारण कई स्थानों पर आम नागरिकों एवं पशुओं की मृत्यु होने की सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं। ऐसे मामले जनजीवन की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खेतों की तारफेंसिंग में विद्युत करंट प्रवाहित करना पूरी तरह गैरकानूनी एवं दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की लापरवाही से किसी व्यक्ति अथवा पशु की जान को खतरा पहुंचना कानून का उल्लंघन है और इसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
इसी परिप्रेक्ष्य में जिले में तारफेंसिंग में करंट प्रवाहित करने की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्तावित आदेश लागू करने से पूर्व जिला प्रशासन द्वारा नागरिकों को अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया गया है।

यदि किसी व्यक्ति, किसान, संस्था अथवा अन्य संबंधित पक्ष को प्रस्तावित प्रतिबंधात्मक आदेश के संबंध में कोई आपत्ति, सुझाव या आवेदन प्रस्तुत करना हो अथवा मौखिक रूप से अपना पक्ष रखना हो, तो वे 10 अगस्त 2026 तक न्यायालय कलेक्टर, विदिशा में अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि मानव जीवन एवं पशुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए खेतों की सुरक्षा के लिए ऐसे किसी भी अवैध एवं जोखिमपूर्ण तरीके का उपयोग न करें तथा सुरक्षित एवं वैधानिक उपाय अपनाएं। प्रशासन का उद्देश्य जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=Vidisha nis:enabled=true nis:link/>
मिलावट के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा विभाग का अभियान जारी, दूध-दही सहित विभिन्न दुग्ध उत्पादों के लिए नमूनें 
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कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता द्वारा दिए गए  निर्देशानुसार जिले में मिलावट के विरुद्ध विशेष अभियान लगातार संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य आमजन को शुद्ध, सुरक्षित एवं गुणवत्तायुक्त दूध एवं दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में खाद्य सुरक्षा प्रशासन द्वारा जिले के विभिन्न दूध विक्रेताओं, डेयरियों एवं दुग्ध शीत केंद्रों का नियमित निरीक्षण कर खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्रित किए जा रहे हैं।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्रीमती किरण एम. श्रीवास्तव ने बताया कि अभियान के तहत  गंजबासौदा स्थित सिरोंज रोड के दुग्ध शीत केंद्र से मिश्रित दूध का नमूना जांच के लिए लिया गया। वहीं आज 25 जुलाई को विदिशा शहर के तिलक चौक स्थित श्री धी डेयरी एंड प्रोडक्ट्स का निरीक्षण कर टोंड मिल्क, स्कीम मिल्क तथा दही के नमूने संग्रहित किए गए। संग्रहित सभी नमूनों को गुणवत्ता एवं मानकों की जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजा गया है। प्रयोगशाला से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने संबंधित खाद्य कारोबारकर्ताओं को स्वच्छता, गुणवत्ता एवं खाद्य सुरक्षा मानकों का पूर्णतः पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा मिलावट करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं मिलावटी अथवा संदिग्ध खाद्य पदार्थों का विक्रय होने की जानकारी मिले तो इसकी सूचना संबंधित विभाग को दें, ताकि समय पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जिले में मिलावट के विरुद्ध यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>
दृष्टिबाधित दंपत्ति के चार बच्चों को मिलेगी स्पॉन्सरशिप योजना की सहायता, कलेक्टर की पहल: जरूरतमंद चार बच्चों को मिलेगा स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ
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विदिशा के दृष्टिबाधित दंपत्ति के चार जरूरतमंद बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ दिलाने की पहल की गई है। 
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कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता के निर्देश पर परिवार को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां आर्थिक स्थिति का आंकलन कर बच्चों के भरण-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए योजना से लाभान्वित करने की अनुशंसा की गई है।
 
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बासौदा-सिरोंज मार्ग पर बेतवा नदी के उच्च स्तरीय पुल का मुख्य कार्य पूरा, दिसंबर 2026 तक संपूर्ण कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य 
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एप्रोच रोड का निर्माण कार्य जारी है, दिसंबर 2026 तक उक्त कार्य पूर्ण कर यह मार्ग जनसामान्य के आवागमन हेतु शुरू होगा
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लोक निर्माण विभाग (सेतु निर्माण) संभाग भोपाल के कार्यपालन यंत्री द्वारा बताया गया कि विदिशा जिले के बासौदा-सिरोंज मार्ग (किमी 7/2)  पर बेतवा नदी पर निर्माणाधीन उच्च स्तरीय पुल का मुख्य संरचनात्मक निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग (सेतु निर्माण) द्वारा पूरा कर लिया गया है। विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी अनुसार उक्त पुल के दोनों छोर पर पहुंच मार्ग का निर्माण कार्य प्रगति पर है जो दिसंबर 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। बासौदा-सिरोंज मार्ग पर बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का कार्य में मेसर्स माधव इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, वडोदरा (गुजरात) द्वारा किया जा रहा है। जिसका अनुबंध विभाग के साथ 15 अक्टूबर 2018 को निष्पादित हुआ था। लोक निर्माण विभाग (सेतु निर्माण) द्वारा एनडीबी के पैकेज 1-अ के अंतर्गत पुल का मुख्य संरचनात्मक निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। 

प्राकृतिक आपदा के कारण तकनीकी संशोधन -
    विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी अनुसार प्रारंभिक ड्राइंग अप्रूवल के बाद सितंबर 2020 में कार्य शुरू किया गया था। हालांकि, वर्ष 2022 में आई अभूतपूर्व बाढ़ के कारण नदी के उच्चतम जल स्तर (HFL) में परिवर्तन दर्ज किया गया। यात्रियों की सुरक्षा एवं संरचना की मजबूती को ध्यान में रखते हुए पुल की स्ट्रक्चरल ड्राइंग में तकनीकी बदलाव किए गए। संशोधित ड्राइंग की स्वीकृति के पश्चात 18 जनवरी 2024 से कार्य पुनः तीव्र गति से प्रारंभ किया गया। नए डिजाइनों के तहत फाउंडेशन (नींव) का आकार बढ़ाया गया। पियर (खंभों) की रीबारिंग की गई। सुपरस्ट्रक्चर का निर्माण कार्य पूरा किया गया। 
      इन तकनीकी बदलावों के साथ मुख्य पुल का निर्माण 28 दिसंबर 2025 को पूर्ण कर लिया गया। तकनीकी संशोधनों से बढ़ी लागत के दृष्टिगत विभाग द्वारा 04 मई 2026 को संशोधित प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त की गई, प्रशासकीय स्वीकृति के लंबित रहने की अवधि के दौरान निर्माण कार्य स्थगित रहा। इसके उपरांत एप्रोच रोड की रिटेनिंग वॉल हेतु 15 मई 2026 को ड्राइंग स्वीकृत होते ही एप्रोच मार्ग का निर्माण कार्य आरंभ कर दिया गया है।

भू-अर्जन एवं एप्रोच मार्ग की अद्यतन स्थिति -
     एप्रोच मार्ग निर्माण हेतु भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जा रहा है। एप्रोच मार्ग (सिरोंज दिशा) "आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति" के तहत अप्रैल 2024 में ही भू-अर्जन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली गई थी। एप्रोच मार्ग मार्ग (बासौदा दिशा) कृषकों से आपसी सहमति न बन पाने के कारण भूमि अधिग्रहण "भूमि अर्जन, पुनर्वसन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013" के तहत किया जा रहा है। इसमें धारा 19 का प्रकाशन 19-06-2026 पूर्ण हो चुका है। धारा 21 की वैधानिक कार्यवाही 02/07/2026 को संपन्न कर ली गई है। भू-स्वामियों के लिए अवार्ड राशि का निर्धारण की कार्यवाही प्रगतिरत है।अवार्ड राशि तय होते ही मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पूरी कर बासौदा दिशा के एप्रोच मार्ग का कार्य भी शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। विभाग द्वारा एप्रोच रोड सहित संपूर्ण परियोजना का कार्य दिसंबर 2026 तक पूर्ण कर जनसामान्य के आवागमन हेतु मार्ग शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/>
हुनर से उड़ान: आईटीआई से ट्रेनिंग ऑफिसर बनने वाली बेटियों की सफलता की कहानी
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"हुनरमंद नारी ही सशक्त भारत का आधार है।" आज की नारी केवल सिलाई-कढ़ाई या पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास ने महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) से अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षण लेकर आकांक्षा, सविता, नाज़िश, कीर्ति, पूनम, सोनम, और श्वेता ने न
केवल अपने सपनों को साकार किया, बल्कि सरकारी क्षेत्र में ट्रेनिंग ऑफिसर का पद हासिल कर महिला सशक्तिकरण की एक मिसाल कायम की है। विभिन्न ट्रेडों में अपनी धाक जमाने वाली वीरांगनाएँ इन पाँचों महिलाओं ने यह साबित कर दिया कि कोई भी तकनीकी ट्रेड केवल पुरुषों के लिए नहीं होता। अपनी लगन और कड़ी मेहनत के बल पर इन्होंने अपनी-अपनी फील्ड में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

आकांक्षा : टर्नर ट्रेड को पारंपरिक रूप से भारी मशीनों, लेथ मशीन और लेबर-इंटेन्सिव काम से जोड़कर देखा जाता है। आकांक्षा ने इस चुनौती को स्वीकार किया और लेथ मशीन पर सटीक कटिंग, शेपिंग और मेटल कटिंग की कला में महारत हासिल की। अपनी इसी निपुणता के दम पर वे आज आईटीआई में टर्नर ट्रेड की ट्रेनिंग ऑफिसर बनकर नए छात्रों का मार्गदर्शन कर रही हैं।

सविता : कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट ट्रेड से शुरुआत  करने वाली कीर्ति ने डिजिटल युग की ज़रूरतों को समझा। उन्होंने कोडिंग और आईटी स्किल्स में महारत हासिल की और आज वे भावी पीढ़ी को डिजिटल रूप से सक्षम बना रही हैं।

नाज़िश और कीर्ति : वायर डायग्राम, बिजली के सर्किट, मोटर्स और भारी इलेक्ट्रिकल पैनलों के बीच काम करते हुए नाज़िश ने इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में अपनी विशेष पहचान बनाई। उन्होंने अपनी तकनीकी दक्षता के बल पर ट्रेनिंग ऑफिसर का पद हासिल किया और आज वे भावी इलेक्ट्रिशियन्स को बिजली की बारीकियां और सुरक्षा नियम सिखा रही हैं।

पूनम, सोनम, और श्वेता : ट्रेड को अक्सर कठिन माना जाता है, लेकिन इन महिलाओं ने इस धारणा को तोड़ दिया। टूल्स, मेजरमेंट और असेंबलिंग के हर क्षेत्र में उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की और ट्रेनिंग ऑफिसर का पद हासिल संघर्ष से सफलता तक: ट्रेनिंग ऑफिसर बनने का सफर आईटीआई पूरी करने के बाद इनका सफर आसान नहीं था। प्रतियोगिता परीक्षा, व्यावहारिक कौशल परीक्षा और साक्षात्कारों को पास करते हुए इन्होंने आईटीआई में ट्रेनिंग ऑफिसर की प्रतिष्ठित नौकरी प्राप्त की।

ट्रेनिंग ऑफिसर का महत्व:

एक ट्रेनिंग ऑफिसर न केवल विद्यार्थियों को थ्योरी और प्रैक्टिकल का ज्ञान देता है, बल्कि उन्हें उद्योग की ज़रूरतों के अनुसार तैयार भी करता है। महिला सशक्तिकरण का नया दौर आकांक्षा, कीर्ति, नाज़िश, पूनम और सोनम की यह सफलता दर्शाती है कि आर्थिक स्वावलंबन: तकनीकी शिक्षा महिलाओं को बहुत कम समय और कम खर्च में आत्म-निर्भर बनाती है।

प्रेरणा का स्रोत: आज जब ये पाँचों अधिकारी क्लासरूम में छात्रों को पढ़ाती हैं, तो उन्हें देखकर सैकड़ों अन्य लड़कियों को भी कुछ बड़ा करने की प्रेरणा मिलती है। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>
आईटीआई प्रवेश 2026 : तीसरे एवं चौथे चरण की चॉइस फिलिंग की अंतिम तिथि 25 जुलाई
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औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया तृतीय एवं चतुर्थ चरण तीसरे एवं चौथे चरण हेतु चॉइस फिलिंग ( विकल्प चयन) की अंतिम तिथि आज शनिवार 25 जुलाई 2026 को है। प्रवेश के इच्छुक ऐसे सभी अभ्यर्थी जिन्होंने पूर्व में आवेदन किया है अथवा जो तीसरे व चौथे चरण के लिए अपनी ट्रेड और संस्थान का पुन: विकल्प चुनना चाहते हैं, वे शनिवार 25 जुलाई 2026 तक संस्था में उपस्थित होकर अथवा आधिकारिक पोर्टल वेबसाइट https://mpiticounseling.co.in/ और एमपी अनलाइन पर जाकर अपनी चॉइस दर्ज कर सकते हैं।

मुख्य दिशा-निर्देश व महत्वपूर्ण बिंदु -

आज अंतिम अवसर: आज के बाद तीसरे और चौथे चरण के लिए चॉइस फिलिंग या लॉक करने का अवसर प्रदान नहीं किया जाएगा। मेरिट लिस्ट व सीट आवंटन: चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात अभ्यर्थियों द्वारा चुने गए विकल्पों एवं मेरिट अंक के आधार पर ही सीट आवंटन की सूची जारी की जाएगी। विकल्पों का सही चयन: अभ्यर्थी अपनी रुचि एवं प्राथमिकता के अनुसार ही ट्रेड और ITI संस्थान का चयन सावधानीपूर्वक करें।

सहायता केंद्र: चॉइस फिलिंग में किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या आने पर अभ्यर्थी नजदीकी शासकीय आईटीआई शा. आईटीआई के हेल्प डेस्क से संपर्क कर सकते हैं।

विशेष अपील: विभाग सभी पात्र छात्र - छात्राओं से अपील करता है कि वे अंतिम समय में सर्वर पर अधिक लोड से बचने के लिए समय रहते आज ही अपनी चॉइस फिलिंग प्रक्रिया पूर्ण कर लें, ताकि वे प्रवेश प्रक्रिया से वंचित न रहें। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>
विशेष मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हुआ
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राजमाता विजयाराजे सिंधिया शासकीय कन्या अग्रणी स्नातकोत्तर महाविद्यालय विदिशा में विद्यार्थियों के मानसिक और भावनात्मक कल्याण के उद्देश्य से एक विशेष मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में  जिला चिकित्सालय विदिशा से मनोचिकित्सक डॉ अशोक राजपूत, नैदानिक मनोवैज्ञानिक श्री रवि सिंह सेंगर एवं मनोचिकित्सा नर्सिंग अधिकारी श्री गिरिराज सैनी ने छात्राओं को मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न विषयों पर जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को तनाव प्रबंधन (Stress Management), करियर के दबाव से निपटने और खुलकर अपनी बात रखने के तरीकों पर मार्गदर्शन दिया गया। साथ ही छात्राओं को जिला चिकित्सालय में संचालित 'मन क्लीनिक और टेलीमानस हेल्पलाइन नंबर से अवगत कराया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि "मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना या मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत पहचानना है।"
     
यह कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ बी डी अहिरवार के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ तथा NSS और मानसिक स्वास्थ्य क्लब के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया ।इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के स्टाफ ने भाग लिया तथा छात्राओं को एक सुरक्षित और सहयोगी माहौल देने का भरोसा दिलाया। छात्राओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और अपनी मानसिक परेशानियों व शंकाओं को साझा किया। कार्यक्रम का संचालन एनटीएफ प्रभारी प्रो. नीतू दांगी द्वारा सफलतापूर्वक किया गया। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/>
स्कूली बच्चों को दिया गया आपदा प्रबंधन का व्यवहारिक प्रशिक्षण
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एसडीआरएफ टीम ने बाढ़, अग्निकांड, सर्पदंश और आकाशीय बिजली से बचाव के बताए उपाय 
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कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता के निर्देशानुसार जिले के शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन संबंधी व्यावहारिक एवं उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने तथा आपदा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से गुरुवार को विदिशा तहसील के ग्राम अहमदपुर स्थित अग्रवाल स्कूल में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम जिला सेनानी श्री मयंक कुमार जैन के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को विभिन्न प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान सुरक्षित रहने के उपायों की विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बाढ़ की स्थिति में बचाव के तरीके, सर्पदंश होने पर बरती जाने वाली सावधानियां, अग्नि दुर्घटनाओं के समय सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया, आकाशीय बिजली गिरने की स्थिति में अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपाय तथा प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) की महत्वपूर्ण जानकारी सरल एवं व्यवहारिक तरीके से समझाई।

प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों को बताया कि आपदा के समय घबराने के बजाय सूझबूझ और सही जानकारी के साथ कार्य करने से जनहानि एवं संपत्ति के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही बच्चों से अपील की गई कि वे प्रशिक्षण में सीखी गई बातों को अपने परिवार एवं आसपास के लोगों तक भी पहुंचाएं, जिससे समाज में आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ सके।

प्रशिक्षण का संचालन विदिशा एसडीआरएफ टीम के प्रभारी कंपनी कमांडर श्री देवी सिंह परते के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान टीम के सदस्य देवेंद्र कटोरिया, संजय, गौरव रघुवंशी एवं संदीप ने विभिन्न आपदा परिस्थितियों से निपटने का प्रायोगिक प्रदर्शन किया। उन्होंने बचाव एवं राहत कार्यों का जीवंत प्रदर्शन कर विद्यार्थियों को आपातकालीन परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली तकनीकों से अवगत कराया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने आपदा प्रबंधन से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका एसडीआरएफ टीम द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया। प्रशिक्षण में विद्यालय के शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए आपदा प्रबंधन के महत्व को समझा और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में सतर्क एवं जागरूक रहने का संकल्प लिया। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>
सफलता की कहानी 
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वन स्टॉप सेंटर की प्रभावी काउंसलिंग से बसा टूटता परिवार, खुशहाल दांपत्य जीवन की लौ फिर जली 
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संवाद, समझाइश और संवेदनशील परामर्श से बदली फरीदा (परिवर्तित नाम) की जिंदगी
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महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित वन स्टॉप सेंटर, विदिशा केवल संकटग्रस्त महिलाओं को कानूनी, मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक सहायता ही नहीं प्रदान कर रहा, बल्कि संवेदनशील काउंसलिंग और समन्वित प्रयासों के माध्यम से कई परिवारों के जीवन में नई उम्मीद भी जगा रहा है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी है फरीदा (परिवर्तित नाम) की, जिनके वैवाहिक जीवन में आई दूरियों को वन स्टॉप सेंटर की प्रभावी काउंसलिंग ने समाप्त कर दिया।

फरीदा अपनी माता के साथ वन स्टॉप सेंटर पहुंचीं। वह मानसिक रूप से काफी व्यथित और चिंतित थीं। सेंटर के परामर्शदाताओं ने पहले उन्हें सहज महसूस कराया और धैर्यपूर्वक उनकी पूरी बात सुनी। फरीदा ने बताया कि उनकी शादी को दो वर्ष हो चुके हैं, लेकिन उनके पति अकरम उनसे बातचीत नहीं करते, उन्हें समय नहीं देते और किसी अन्य महिला से निकटता के कारण दोनों के बीच रिश्ते में काफी दूरी आ गई है। उन्होंने बताया कि वह अपने पति के साथ सामान्य और खुशहाल जीवन जीना चाहती हैं, लेकिन परिस्थितियां इसके विपरीत हैं।

वन स्टॉप सेंटर की टीम ने फरीदा को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्या का समाधान संवाद और समझाइश के माध्यम से निकालने का पूरा प्रयास किया जाएगा। इसके बाद अकरम को सेंटर बुलाकर दोनों पक्षों की बात अलग-अलग और फिर संयुक्त रूप से सुनी गई। काउंसलिंग के दौरान अकरम ने बताया कि वैवाहिक जीवन में तनाव का एक बड़ा कारण ससुराल पक्ष का अत्यधिक हस्तक्षेप रहा है, जिससे पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद होते रहे। दूसरी महिला से संबंध के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने स्वीकार किया कि पहले उनकी दोस्ती थी, लेकिन अब वह पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।

वन स्टॉप सेंटर के परामर्शदाताओं ने दोनों को धैर्यपूर्वक समझाया कि किसी भी वैवाहिक संबंध की मजबूती आपसी विश्वास, सम्मान और संवाद पर निर्भर करती है। दोनों पक्षों को परिवार में सामंजस्य बनाए रखने, एक-दूसरे की भावनाओं को समझने तथा अनावश्यक हस्तक्षेप से बचने की सलाह दी गई। काउंसलिंग का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। अकरम ने आश्वासन दिया कि वह भविष्य में अपनी पत्नी को शिकायत का कोई अवसर नहीं देंगे तथा उनका पूरा सम्मान और सहयोग करेंगे। इसके बाद दोनों को आपसी सहमति और विश्वास के साथ वन स्टॉप सेंटर से विदा किया गया।

कुछ समय बाद वन स्टॉप सेंटर द्वारा दोनों से पुनः संपर्क कर उनकी स्थिति की जानकारी ली गई। फरीदा ने बताया कि अब उनके वैवाहिक जीवन में पहले जैसी परेशानियां नहीं हैं। उनके पति अकरम उनका पूरा सहयोग करते हैं। वर्तमान में वह गर्भवती हैं और अकरम उनकी देखभाल पूरी जिम्मेदारी के साथ कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अन्य महिला से बातचीत पूरी तरह बंद हो चुकी है तथा माता-पिता के कारण होने वाले विवाद भी समाप्त हो गए हैं। आज फरीदा और अकरम आपसी विश्वास, प्रेम और सम्मान के साथ सुखद दांपत्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि समय पर सही परामर्श, संवेदनशील सुनवाई और सकारात्मक संवाद से कई पारिवारिक विवादों का शांतिपूर्ण समाधान संभव है। वन स्टॉप सेंटर, विदिशा का यह प्रयास एक परिवार को टूटने से बचाने और उसे फिर से खुशहाल बनाने में सफल रहा, जो अन्य परिवारों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>
आकांक्षी जिला विदिशा एवं बासौदा विकासखंड में NITI TARA  की कार्यप्रणाली से प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षित किया गया 
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डेटा आधारित विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण, संस्थागत क्षमता विकास पर रहा विशेष जोर 
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आकांक्षी जिला विदिशा एवं आकांक्षी विकासखंड बासौदा में विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, डेटा आधारित समीक्षा एवं बेहतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से NITI TARA (Toolkit for Analysis, Review & Action) का जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आज कलेक्ट्रेट के बेतवा सभागार में आयोजित किया गया था। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग के निर्देशानुसार आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य आकांक्षी जिलों एवं विकासखंडों में विकास संकेतकों की नियमित समीक्षा, विश्लेषण तथा समयबद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।
    
मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग, भोपाल के अवर सचिव द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार जुलाई 2026 के द्वितीय सप्ताह से आकांक्षी जिलों एवं विकासखंडों में NITI TARA प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। 
 
प्रशिक्षण का संचालन EdCIL (India) Limited के विशेषज्ञों द्वारा किया गया । प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को NITI TARA टूलकिट के संचालन, डेटा संग्रहण एवं विश्लेषण, विकास संकेतकों की समीक्षा, प्रगति की निगरानी तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। साथ ही अधिकारियों को बताया गया कि डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया अपनाकर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, पेयजल, आधारभूत संरचना एवं अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
     
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ श्री ओपी सनोडिया सहित जिला एवं आकांक्षी विकासखंड बासौदा के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान नीति आयोग द्वारा किए गए नवाचारों एवं विभिन्न सुधारात्मक पहलों की विस्तृत जानकारी मास्टर ट्रेनर श्री जोहिब खान ने प्रोजेक्टर के माध्यम से दी। उन्होंने NITI TARA टूलकिट की कार्यप्रणाली, हेटा विश्लेषण, समीक्षा एवं कार्रवाई की प्रक्रिया को सरल और व्यवहारिक ढंग से समझाया। इसके साथ ही NITI TARA इंस्ट्रूमेंट का संचालन प्रशिक्षणार्थियों से मौके पर ही कराकर व्यावहारिक अभ्यास कराया गया, जिससे अधिकारियों ने स्वयं पोर्टल की कार्यप्रणाली को समझा और उसके प्रभावी उपयोग का अनुभव प्राप्त किया गया है।
 
सभी अधिकारियों ने निर्धारित समय पर प्रशिक्षण प्राप्त कर NITI TARA प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग की जानकारी हासिल की। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि NITI TARA एक आधुनिक डेटा प्रबंधन एवं विश्लेषण प्रणाली है, जिसके माध्यम से विभिन्न विभागों की प्रगति का नियमित आकलन, कमियों की पहचान तथा आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे आकांक्षी जिला एवं विकासखंडों में विकास योजनाओं के परिणामों में गुणात्मक सुधार लाने में सहायता मिलेगी। 
     
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का उपयोग अपने-अपने विभागों में प्रभावी रूप से करें, ताकि शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध एवं पारदर्शी ढंग से पहुंचाया जा सके तथा आकांक्षी जिला विदिशा एवं आकांक्षी विकासखंड बासौदा के विकास संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार सुनिश्चित हो सके। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>
मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी: कृषि विशेषज्ञ डॉ. डी.के. तिवारी ने विद्यार्थियों को दिए वैज्ञानिक खेती और करियर के मंत्र 
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शासकीय आदर्श महाविद्यालय की छह दिवसीय कार्यशाला के चौथे दिन कृषि, रोजगार और स्वास्थ्य से जुड़े सवालों के दिए व्यावहारिक जवाब 
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शासकीय आदर्श महाविद्यालय, विदिशा में "प्रशासनिक अधिकारी कैसे बनें" विषय पर आयोजित छह दिवसीय कार्यशाला का चौथा दिवस कृषि, वैज्ञानिक खेती और कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसरों पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कृषि विभाग के जिला समन्वयक डॉ. डी.के. तिवारी एवं विशेष अतिथि सहायक तकनीकी प्रबंधक अशोक रघुवंशी उपस्थित रहे। दोनों विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों, मिट्टी संरक्षण, जैविक खेती तथा कृषि क्षेत्र में उपलब्ध करियर संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

मुख्य अतिथि डॉ. डी.के. तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में कृषि केवल परंपरागत आजीविका नहीं, बल्कि विज्ञान और तकनीक पर आधारित लाभकारी व्यवसाय बन चुकी है। उन्होंने कहा कि खेती की वास्तविक पूंजी मिट्टी है और यदि मिट्टी की गुणवत्ता एवं उर्वरता सुरक्षित नहीं रहेगी तो भविष्य में कृषि उत्पादन गंभीर रूप से प्रभावित होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि रासायनिक उर्वरकों का संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग करें तथा जैविक खाद और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि "मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी और खेती बचेगी तो किसान तथा देश का भविष्य सुरक्षित रहेगा।"
विशेष अतिथि अशोक रघुवंशी ने कृषि विभाग की आत्मा योजना की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण, नई कृषि तकनीकों का प्रदर्शन और आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। इससे खेती की लागत कम होती है, उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय में वृद्धि होती है।

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा विद्यार्थियों के साथ हुआ संवाद रहा, जिसमें उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, रोजगार और आधुनिक खेती से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। डॉ. तिवारी ने सभी प्रश्नों के सरल, वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उत्तर देकर विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। बीए प्रथम वर्ष की छात्रा मुस्कान श्रीवास्तव ने कृषि क्षेत्र में नौकरी करने वाले अधिकारियों की कार्यशैली के बारे में प्रश्न किया। इस पर डॉ. तिवारी ने बताया कि कृषि अधिकारी किसानों से नियमित संपर्क रखते हैं, खेतों का निरीक्षण करते हैं, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हैं तथा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

छात्रा रूचि जैन ने हाईब्रिड बीजों के स्वास्थ्य पर प्रभाव के संबंध में सवाल किया। डॉ. तिवारी ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक परीक्षण एवं स्वीकृति प्राप्त हाईब्रिड बीज पूरी तरह सुरक्षित होते हैं तथा स्वास्थ्य पर उनका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता। उन्होंने कहा कि संतुलित पोषण और सही खेती पद्धति अधिक महत्वपूर्ण है। अमोल सोले ने ऑर्गेनिक फसलों की पहचान के बारे में जानकारी चाही। इस पर डॉ. तिवारी ने बताया कि प्रमाणित जैविक उत्पादों पर अधिकृत प्रमाणन चिह्न अंकित होता है और केवल देखकर किसी फसल के ऑर्गेनिक होने की पहचान हमेशा संभव नहीं होती। शानू (बी.कॉम. प्रथम वर्ष) ने पूछा कि क्या अधिक यूरिया डालने से मिट्टी की क्षमता कम हो जाती है। इस पर डॉ. तिवारी ने कहा कि यूरिया का अत्यधिक उपयोग मिट्टी के जैविक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने के साथ-साथ जैविक खाद का प्रयोग भी आवश्यक है। राशि कुशवाह (कक्षा 9वीं) ने कृषि क्षेत्र में करियर के अवसरों पर प्रश्न किया। डॉ. तिवारी ने बताया कि कृषि क्षेत्र में कृषि वैज्ञानिक, कृषि अधिकारी, एग्री-बिजनेस विशेषज्ञ, कृषि उद्यमी, कृषि पत्रकार और शोधकर्ता सहित अनेक क्षेत्रों में उज्ज्वल करियर की संभावनाएं उपलब्ध हैं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्मिता सिंघई ने प्रभावी ढंग से किया तथा अंत में डॉ. अवधेश पांडे ने सभी अतिथियों, विद्यार्थियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला के अगले दिन शुक्रवार को डॉ. सुरेश गर्ग विद्यार्थियों के साथ बेहतर स्वास्थ्य, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की भूमिका तथा आदर्श नागरिक विषयों पर संवाद करेंगे। आयोजकों के अनुसार इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रशासनिक सेवाओं के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों की व्यावहारिक एवं समसामयिक जानकारी उपलब्ध कराकर उनके व्यक्तित्व और करियर विकास को नई दिशा देना है। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/>
जिले की पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन विकास पर मंथन
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जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद की बैठक में पर्यटन विकास के प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा हुई
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जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद की बैठक गुरुवार को कलेक्ट्रेट के बेतवा सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत सीईओ श्री ओपी सनोडिया ने की। इस दौरान जिले के पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण, पर्यटन विकास, सांस्कृतिक गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
    
बैठक में पुरातत्व एवं संरक्षण वाले प्रमुख स्थलों पर लाइट एंड साउंड शो की संभावनाओं, पुरातात्विक मूर्तियों की सुरक्षा, अतिक्रमण रोकने, विजय मंदिर-विजय मंडल में व्याख्या केंद्र विकसित करने, ग्यारसपुर स्थित माला देवी मंदिर, चौसठ योगिनी मंदिर के जीर्णोद्धार, बिखरी हुई पुरासंपदा के संरक्षण तथा बटेश्वर मंदिर समूह तक पहुंच मार्ग एवं पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विस्तार से चर्चा की गई।
    
पर्यटन विकास की समीक्षा के दौरान पर्यटन सर्किट को एकीकृत करने, आवास, शौचालय, पेयजल, पार्किंग, साइनेज, क्यूआर आधारित ऑडियो गाइड, डिजिटल प्रचार-प्रसार, होम स्टे एवं रूरल होम स्टे को बढ़ावा देने तथा स्थानीय युवाओं को गाइड के रूप में प्रशिक्षित करने के संबंध में पर्यटन विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
    
बैठक में संस्कृति एवं आयोजनों के अंतर्गत बेतवा महोत्सव सहित वार्षिक सांस्कृतिक आयोजनों की समीक्षा की गई। साथ ही लोककला एवं हस्तशिल्प को बाजार और मंच उपलब्ध कराने, संग्रहालयों के डिजिटल उन्नयन तथा स्कूलों में विरासत जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने पर भी विचार-विमर्श हुआ।
    
सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए संवेदनशील पुरातात्विक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने, सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, अतिक्रमण हटाने और सीमांकन कार्यों पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में जानकारी दी गई कि उदयपुर मंदिर में शीघ्र ही सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे तथा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी।
     
सीईओ श्री ओपी सनोडिया ने श्रावण मास में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उदयपुर मंदिर में सुरक्षा एवं सुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सीसीटीवी कैमरे स्थापित कराने और अतिक्रमण हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

बैठक में पांडुलिपियों के संरक्षण पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा परिषद में उपस्थित अधिकारियों एवं पुरातत्व विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए विभिन्न प्रस्तावों पर प्रस्तुतीकरण के साथ विचार-विमर्श किया गया। बैठक में पर्यटन विभाग, नगर पालिका, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा पर्यटन एवं पुरातत्व से जुड़े विशेषज्ञ उपस्थित रहे। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>
नव्या योजना की 40 बालिकाओं ने वर्धमान फैब्रिक्स, बुधनी का किया शैक्षणिक भ्रमण, औद्योगिक कार्यप्रणाली से हुए रूबरू
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कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता के निर्देशन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित नव्या योजना अंतर्गत 40 बालिकाओं का शैक्षणिक एवं औद्योगिक भ्रमण वर्धमान फैब्रिक्स, बुधनी में कराया गया। भ्रमण का उद्देश्य बालिकाओं को औद्योगिक कार्यप्रणाली, कौशल विकास एवं रोजगार के अवसरों से अवगत कराना था।
    
भ्रमण के दौरान बालिकाओं ने वर्धमान फैब्रिक्स में कपड़ा निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया का अवलोकन किया। उन्होंने धागे से कपड़ा तैयार होने तक की विभिन्न उत्पादन इकाइयों, अत्याधुनिक मशीनों, गुणवत्ता परीक्षण तथा पैकेजिंग व्यवस्था को निकट से देखा। संस्थान के अधिकारियों द्वारा बालिकाओं को वस्त्र उद्योग में उपलब्ध रोजगार एवं कौशल विकास के अवसरों की विस्तृत जानकारी दी गई तथा उनके प्रश्नों का समाधान भी किया गया।
    
इस अवसर पर आईटीआई की प्राचार्या सुश्री कविता रघुवंशी ने बालिकाओं को तकनीकी शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण के महत्व से अवगत कराते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग से श्री संतोष रघुवंशी ने बालिकाओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण उनके व्यक्तित्व विकास, करियर चयन एवं रोजगार संबंधी जानकारी को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    
भ्रमण के उपरांत बालिकाओं ने इसे अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव बताते हुए आधुनिक उद्योगों की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा नव्या योजना के माध्यम से बालिकाओं को शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगारोन्मुखी अवसरों से जोड़ने के लिए भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/>
अगस्त 2026 में जिलेभर में मनाए जाएंगे विभिन्न जयंती एवं दिवस
कार्यक्रमों के आयोजन हेतु विभागों को जारी हुए दिशा-निर्देश
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विदिशा। वर्ष 2026 के अगस्त माह में विभिन्न जयंती एवं दिवसों का जिला स्तर पर सुव्यवस्थित रूप से आयोजन सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त कलेक्टर द्वारा संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जारी कार्यक्रम शेड्यूल के अनुसार अगस्त माह में खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, महिला एवं बाल विकास, आदिवासी विकास सहित विभिन्न विभागों के समन्वय से जागरूकता कार्यक्रम, संगोष्ठियां, रैलियां, प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक आयोजन एवं अन्य गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
    
वर्ष 2026 के अगस्त माह में विभिन्न जयंती एवं दिवस का अयोजन जिला स्तर पर किया जाना है की जानकारी देते हुए संयुक्त कलेक्टर द्वारा बताया गया कि 1 अगस्त को खेल एवं युवा कल्याण विभाग और वन विभाग के संयुक्त समन्वय से राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस पर साहसिक गतिविधियों, पर्यावरण संरक्षण तथा जागरूकता और वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 6 अगस्त को शिक्षा विभाग और संस्कृति विभाग के संयुक्त समन्वय से हिरोशिमा दिवस पर शांति संदेश निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। 7 अगस्त को उद्योग और ग्रामोद्योग विभाग द्वारा राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर हस्तशिल्प प्रदर्शनी और स्थानीय उत्पादों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। 8 अगस्त को शिक्षा और संस्कृति विभाग द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन दिवस पर देशभक्ति कार्यक्रम, भाषण और रैली कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी विकास विभाग द्वारा आदिवासी संस्कृति कार्यक्रम और जागरूकता शिविर का आयोजन किया जाएगा। 12 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर खेल एवं युवा विभाग द्वारा युवा सम्मेलन और खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। 13 अगस्त को अंगदान दिवस के उपलक्ष में स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन करते हुए जागरूकता रैली निकाली जाएगी। 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के उपलक्ष में शिक्षा विभाग द्वारा संगोष्ठी, इतिहास पर चर्चा का आयोजन होगा।15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष में जिले के समस्त विभागों द्वारा ध्वजारोहण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा।19 अगस्त को विश्व मानवता दिवस के उपलक्ष में समाज कल्याण विभाग द्वारा सेवा कार्य और रक्तदान शिविर का आयोजन होगा। 20 अगस्त को सद्भावना दिवस के उपलक्ष में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा एकता शपथ और सद्भाव कार्यक्रम आयोजित होंगे। 26 अगस्त को महिला समानता दिवस के उपलक्ष में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महिला जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन होगा और 19 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष में खेल एवं युवा विभाग द्वारा खेल प्रतियोगिताओं और फिटनेस कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: किसान बंधु बीमा कराकर अपनी फसल को सुरक्षा कवच प्रदान करें
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योजना अंतर्गत बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित 
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (खरीफ 2026) अंतर्गत सभी किसान भाइयों (ऋणी एवं गैर-ऋणी) को सूचित किया गया है कि अधिसूचित फसलों (सोयाबीन, धान, मक्का, उड़द) का बीमा नामांकन शुरू हो चुका है। अतः किसान बंधु अपनी फसल को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित करने के लिए बीमा अवश्य कराएं। पीएम फसल बीमा योजना अंतर्गत बीमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।
    
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग जिला विदिशा द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी अनुसार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत बीमा करने के लिए प्रीमियम दर (प्रति हेक्टेयर) सोयाबीन हेतु 758 रुपये, धान (असिंचित) के लिए 596 रुपये, धान (सिंचित) के लिए 1,134 रुपये और मक्का के लिए 604 रुपये नियत किए गए हैं। उन्होंने बताई थी खरीफ सत्र के लिए ऋणमान का मात्र 2% है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत बीमा करने के लिए किसान बंधु अपनी नजदीकी बैंक शाखा, जिला सहकारी समिति (पैक्स) या सीएससी सेंटर पर पहुंचें और समय रहते नामांकन करवाकर अपनी फसल को सुरक्षा कवच प्रदान करें। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=kisan nis:value=kisan nis:enabled=true nis:link/>
हाई रिस्क गर्भवती महिला को सुरक्षित प्रसव हेतु बर्थ वेटिंग रूम में कराया गया भर्ती
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कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता के निर्देशानुसार एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती विनीता कांस्बा के मार्गदर्शन में हाई रिस्क गर्भवती माताओं के सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रसव संभावित तिथि से 15 दिवस पूर्व उन्हें अस्पताल में संचालित बर्थ वेटिंग रूम में भर्ती कराया जा रहा है।
    
इसी क्रम में विदिशा शहरी परियोजना अंतर्गत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती दुर्गेश यादव द्वारा हाई रिस्क गर्भवती महिला रजिया मंसूरी को सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल के बर्थ वेटिंग रूम में भर्ती कराया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की सतत निगरानी एवं समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराकर सुरक्षित मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>
नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का 6 दिवसीय इंडक्शन प्रशिक्षण प्रारंभ
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महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के क्षमता विकास एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से 6 दिवसीय इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती विनीता लोढ़ा के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण के प्रथम बैच में जिले की 40 नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भाग ले रही हैं।
    
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य नवचयनित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) की अवधारणा, विभागीय योजनाओं, पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी विषयों तथा मैदानी कार्यों के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना है, ताकि वे अपने कार्यक्षेत्र में महिलाओं, बच्चों एवं किशोरियों को बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकें।
     
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस पर प्रतिभागियों को आईसीडीएस की अवधारणा एवं उद्देश्यों, शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु अनुपात, कुपोषण के कारण एवं प्रकार, पोषण ट्रैकर एप के प्रभावी उपयोग, आंगनवाड़ी केन्द्रों के संचालन, तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, पर्यवेक्षक एवं परियोजना अधिकारी की भूमिका एवं उत्तरदायित्वों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। साथ ही समुदाय आधारित सेवाओं, पोषण जागरूकता एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
     
इस प्रशिक्षण में विदिशा शहरी, विदिशा ग्रामीण, गंज बासौदा एवं त्योंदा परियोजनाओं की नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहभागिता कर रही हैं। आगामी दिनों में उन्हें प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई), ग्रोथ मॉनिटरिंग, गृह भ्रमण, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, विभिन्न विभागीय योजनाओं, अभिलेख संधारण, डिजिटल रिपोर्टिंग तथा समुदाय आधारित व्यवहार परिवर्तन संबंधी विषयों पर व्यवहारिक एवं सहभागितापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
    
प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षकों में महिला एवं बाल विकास विभाग से श्री अरविन्द मिश्रा, पर्यवेक्षक श्रीमती नीतू सोनी, श्रीमती सीमा शर्मा, श्रीमती संगीता सूर्यवंशी, श्रीमती नाहिद सुल्ताना एवं श्रीमती नेहा रघुवंशी शामिल हैं। विभाग का उद्देश्य इस प्रशिक्षण के माध्यम से नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दक्ष, संवेदनशील एवं उत्तरदायी बनाना है, जिससे जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण तथा प्रारंभिक बाल विकास सेवाओं की गुणवत्ता में और अधिक सुधार सुनिश्चित किया जा सके। <nis:link nis:type=tag nis:id=vidisha nis:value=vidisha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jansamparkmp nis:value=JansamparkMP nis:enabled=true nis:link/>