किशनगंज,निःशुल्क स्क्रीनिंग,आधुनिक जांच और सक्रिय खोज से ऐसे हजारों लोगों तक पहुंचा स्वास्थ्य विभाग, जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से कभी जांच नहीं करा पाते
किशनगंज जिला अन्तर्गत आज दिनांक 07-08-2026 को तपेदिक (टीबी) उन्मूलन केवल एक चिकित्सीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य समानता का अभियान भी है। टीबी का सबसे अधिक बोझ उन समुदायों पर पड़ता है जो आर्थिक रूप से कमजोर, भौगोलिक रूप से दूरस्थ अथवा सामाजिक रूप से वंचित हैं। ऐसे अनेक लोग, जिनमें टीबी के लक्षण मौजूद होते हैं, निजी अस्पतालों में जांच का खर्च वहन नहीं कर पाते या स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच सीमित रहती है। परिणामस्वरूप संक्रमण लंबे समय तक समुदाय में फैलता रहता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित 100 दिवसीय सघन टीबी स्क्रीनिंग अभियान का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पतालों की चारदीवारी से निकालकर सीधे उन लोगों तक पहुंचाना है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। यह अभियान सक्रिय खोज के माध्यम से टीबी की समय पर पहचान, निःशुल्क आधुनिक जांच तथा तत्काल उपचार सुनिश्चित कर संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
55 हजार से अधिक संवेदनशील एवं पहुंच से दूर आबादी को मिला निःशुल्क टीबी स्क्रीनिंग का लाभ
जिले में अभियान के अंतर्गत निर्धारित 4,64,620 स्क्रीनिंग लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 55,194 संवेदनशील एवं आउटरीच आबादी के लोगों की टीबी जांच की जा चुकी है। इनमें ऐसे लोग शामिल हैं, जो आर्थिक, सामाजिक अथवा भौगोलिक कारणों से नियमित स्वास्थ्य सेवाओं तक आसानी से नहीं पहुंच पाते। अभियान के दौरान 854 टीबी रोगियों की पहचान कर उन्हें तत्काल राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत निःशुल्क उपचार से जोड़ा गया है। यह केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों के लिए राहत का संदेश है जिनके लिए समय पर जांच और उपचार अन्यथा संभव नहीं था।
सरकार की मंशा—कोई भी संदिग्ध मरीज जांच और उपचार से वंचित न रहे
जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की स्पष्ट मंशा है कि आर्थिक स्थिति, सामाजिक परिस्थिति या भौगोलिक दूरी किसी भी नागरिक के उपचार में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि 100 दिवसीय अभियान का उद्देश्य केवल लक्ष्य पूरा करना नहीं, बल्कि प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। यदि कोई व्यक्ति निजी संस्थानों में जांच कराने में सक्षम नहीं है, तो सरकार स्वयं उसके द्वार तक स्क्रीनिंग, आधुनिक जांच और निःशुल्क उपचार की सुविधा पहुंचा रही है। समय पर पहचान ही टीबी उन्मूलन की सबसे प्रभावी रणनीति है और प्रशासन इस दिशा में प्रतिदिन अभियान की निगरानी कर रहा है।
आधुनिक तकनीक और सामुदायिक भागीदारी से तेज हुई टीबी उन्मूलन की मुहिम
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि अभियान के दौरान हैंडहेल्ड डिजिटल एक्स-रे, ट्रूनाट जैसी आधुनिक जांच तकनीकों तथा आशा कार्यकर्ताओं, सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मियों और स्थानीय प्रशासन के समन्वित प्रयासों से संभावित मरीजों की पहचान पहले की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से हो रही है। उन्होंने कहा कि टीबी का उपचार पूरी तरह निःशुल्क है और समय पर जांच से न केवल मरीज का जीवन बचाया जा सकता है, बल्कि परिवार और समुदाय को संक्रमण से भी सुरक्षित रखा जा सकता है।उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह या उससे अधिक समय से खांसी, लगातार बुखार, वजन में कमी, भूख न लगना या रात में अत्यधिक पसीना आने जैसे लक्षण हों, तो वह बिना विलंब निकटतम सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में जांच कराए। सरकार का लक्ष्य केवल रोग का उपचार करना नहीं, बल्कि वर्ष 2025 के बाद भी निरंतर प्रयासों के माध्यम से टीबी मुक्त भारत की दिशा में अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।
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