उरई में सजी ‘मोहन दीर्घा’, दुर्लभ धरोहरों में दिखा श्रीकृष्ण का वैश्विक स्वरूप
उरई(9 सिंतबर)। शहर की चूड़ी वाली गली में स्थित संध्या पुरवार के आवास पर भारतीय संस्कृति और श्रीकृष्ण से जुड़ी दुर्लभ ऐतिहासिक धरोहरों की अनूठी झलक देखने को मिली। इंटैक उरई अध्याय, कानपुर-बुंदेलखंड प्रांतीय धरोहर समिति और संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में ‘मोहन दीर्घा’ का शुभारंभ किया गया।
दीर्घा में देश-विदेश से जुड़ी श्रीकृष्ण की सांस्कृतिक विरासत को संग्रहित कर प्रदर्शित किया गया है। यहां 100 वर्ष से अधिक पुरानी श्रीकृष्ण, श्रीनाथजी और जगन्नाथजी की पेंटिंग, 14वीं से 16वीं शताब्दी की मदुरै की दुर्लभ ताम्र मुद्राएं, विदेशी सिक्के, टेंपल टोकन, पीतल की कलात्मक वस्तुएं और विभिन्न प्रकार के शंख लोगों के आकर्षण का केंद्र बने।
कार्यक्रम का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्षा डॉ. स्वयं प्रभा दुबे ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। दीर्घा के संयोजक डॉ. हरिमोहन पुरवार ने बताया कि प्रदर्शनी में भारत के साथ-साथ इंडोनेशिया, नेपाल, लाओस, गुयाना और श्रीलंका में श्रीकृष्ण से संबंधित जारी किए गए डाक टिकट, प्रथम दिवस आवरण और पोस्टकार्ड भी शामिल हैं।
प्रदर्शनी में कृष्ण के जीवन एवं चरित्र पर आधारित कटआउट और एआई से तैयार किए गए चित्र भी दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं। इसके अलावा करीब 150 वर्ष पुराना बुंदेली कलम शैली में हस्तनिर्मित ‘कन्हैया जू का पट’ भी दीर्घा की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।
इस अवसर पर संध्या पुरवार, उषा सिंह निरंजन और चंचल मिश्रा सहित अन्य लोगों ने मुख्य अतिथि का अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत किया। ‘मोहन दीर्घा’ के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय कला, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का प्रयास भी देखने को मिला।
Orai, Jalaun | Sep 10, 2026