मसूरी शरदोत्सव की दूसरी शाम उत्तराखंड के लोक कलाकारों के नाम, गीतों पर झूमे दर्शक
संगीता ढौंढियाल, मनोज सागर, गजेंद्र राणा, मंजू नौटियाल समेत कलाकारों ने बांधा समां; पालिका अध्यक्ष बोलीं-लोक कलाकारों को मंच देना प्राथमिकता
मसूरी। करीब 12 साल बाद लौटे मसूरी शरदोत्सव की दूसरी शाम पूरी तरह उत्तराखंड के लोक कलाकारों और लोकगीत के नाम रही। टाउन हॉल में आयोजित स्टार नाइट में प्रदेश के जाने-माने लोक गायकों और कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि देर रात तक दर्शक झूमते रहे। संगीता ढौंडियाल, मनोज सागर, गजेंद्र राणा, मंजू नौटियाल, मन्नू वंदना और वीरेंद्र सिंह पंवार सहित कलाकारों ने अपने लोकप्रिय गीतों से श्रोताओं को थिरकने पर मजबूर कर दिया। स्टार नाइट के दौरान एक के बाद एक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। पहाड़ी गीतों की धुन पर दर्शक झूमते नजर आए। कई गीतों पर दर्शक अपनी सीटों से उठकर नाचने लगे। टाउन हॉल देर रात तक तालियों और पहाड़ी संगीत की गूंज से भरा रहा। टाउन हॉल दर्शकों से खचाखच भरा रहा और जैसे-जैसे कलाकारों ने पहाड़ी गीतों की प्रस्तुति शुरू की, माहौल लोकसंगीत के रंग में रंगता चला गया। युवाओं के साथ बुजुर्ग और पर्यटक भी कलाकारों के गीतों का आनंद लेते नजर आए।
लोक कलाकारों ने कहा कि करीब 12 साल बाद मसूरी शरदोत्सव का दोबारा आयोजन होना अपने आप में बड़ी बात है। उन्होंने इसके लिए पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी और नगर पालिका टीम के प्रयासों की सराहना की। कलाकारों ने कहा कि शरदोत्सव उत्तराखंड के कलाकारों के लिए हमेशा महत्वपूर्ण मंच रहा है और इस बार खास बात यह है कि प्रदेश के स्थानीय कलाकारों को प्रमुखता से मंच दिया जा रहा है। कलाकारों ने कहा कि मसूरी का शरदोत्सव कई कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण मंच रहा है और यहां से कई कलाकारों को बड़े मंचों तक पहुंचने का अवसर मिला। ऐसे में इतने लंबे अंतराल के बाद शरदोत्सव में प्रस्तुति देना उनके लिए भी खास अनुभव है।
लोक कलाकारों ने कहा कि उत्तराखंड का संगीत अब किसी भी मायने में बड़े फिल्मी संगीत से पीछे नहीं है। पहाड़ी गीतों की लोकप्रियता उत्तराखंड की सीमाओं से निकलकर देश के दूसरे राज्यों और विदेशों तक पहुंच रही है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने लोक कलाकारों को नया दर्शक वर्ग दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के कई गीतों पर वीडियो और बेहतर पिक्चराइजेशन होने के कारण उन्हें देशभर में पसंद किया जा रहा है। नई तकनीक और आधुनिक संगीत के प्रयोग से पहाड़ी गीतों का स्वरूप बदला है, लेकिन उनकी लोक जड़ें अब भी बरकरार हैं। कलाकारों ने कहा कि ऐसे आयोजनों की निरंतरता जरूरी है। इससे नए कलाकारों को मंच मिलेगा और पुराने एवं अनुभवी कलाकारों को भी नई पीढ़ी के सामने अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि शरदोत्सव को दोबारा शुरू करने के पीछे उनकी प्रमुख मंशा मसूरी की सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करना और स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि इस बार कोशिश की गई है कि शरदोत्सव में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और यहां के कलाकारों को विशेष स्थान मिले। उन्होंने कहा कि नगर पालिका के अधिकारियों, सभासदों और आयोजन से जुड़े सभी लोगों के सहयोग के साथ मसूरी की जनता का भी कार्यक्रम को भरपूर समर्थन मिल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में शरदोत्सव को और भव्य स्वरूप दिया जाएगा। पालिका अध्यक्ष ने कहा कि शरदोत्सव को केवल नाच-गाने तक सीमित नहीं रखा गया है। युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए भी विभिन्न खेल गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। मसूरी के अलग-अलग हिस्सों में खेल प्रतियोगिताएं कराई जा रही हैं, जिनमें छोटे बच्चों से लेकर बड़े खिलाड़ी तक प्रतिभाग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ खेलों को बढ़ावा देने का उद्देश्य युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए अलग-अलग मंच उपलब्ध कराना है।
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Mussoorie, Dehradun | Oct 8, 2026