जमुई: बिना रेलिंग के छत पर और जमीन में बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर है बच्चे, स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही आई सामने
जमुई: एक ओर बिहार सरकार स्कूलों में बेहतर शिक्षा के साथ बच्चों की सुरक्षा के भी बड़े-बड़े दावे करती है तो दूसरी ओर इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहां झाझा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय उर्दू घोरिक्वा से आई तस्वीर विभाग पर सवाल खड़े कर रही है। इस विद्यालय में वर्ग आठ तक कि पढ़ाई के लिए नामांकित 663 बच्चों पर सिर्फ सात शिक्षक ही कार्यरत हैं। इतना ही नहीं महज पांच कमरे के सहारे ही विद्यालय का संचालन हो रहा है। लिहाजा कमरों में जगह नहीं मिलने पर छोटे-छोटे बच्चे बरामदे और जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं सबसे गंभीर स्थिति स्कूल की छत पर है। बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण छत के ऊपर बने कमरे के पास खुले हिस्से में बेंच-डेस्क लगाकर ढाई दर्जन से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है। छत के किनारे सुरक्षा के लिए रेलिंग तक नहीं है। ऐसे में जरा सी चूक नौनिहालों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। ऊपर लगाए गए बेंच-डेस्क भी क्षतिग्रस्त बताए जा रहे हैं। हालांकि इस मामले को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने फौरन संज्ञान लेते हुए शुक्रवार की दोपहर 1:00 बजे जांच का आदेश जारी कर दिया है।
छत पर पढ़ रहे बच्चों ने बताया कि वहां बैठने में उन्हें डर लगता है। रेलिंग नहीं होने के कारण हमेशा गिरने की आशंका बनी रहती है। बच्चों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से तत्काल छत पर रेलिंग लगाने, अतिरिक्त क्लासरूम बनाने और स्कूल परिसर में बाउंड्री कराने की मांग की है। अब सवाल यह है कि जब छत पर सुरक्षा रेलिंग नहीं है तो बच्चों को वहां बैठाने की अनुमति कैसे दी गई? फिलहाल, स्कूल में कमरों की कमी अपनी जगह है, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल बच्चों की सुरक्षा का है। लिहाजा शिक्षा विभाग को किसी हादसे का इंतजार करने के बजाय तत्काल छत की घेराबंदी और सुरक्षित कक्ष उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।
बड़ी बात तो यह है कि जब विद्यालय के प्रधानाध्यापक रणधीर कुमार से बच्चों की सुरक्षा के बारे में सवाल पूछा गया तो उनकी नींद खुली, तब उन्होंने कहा कि छत की रेलिंग लगवाने का प्रयास किया जाएगा, जबकि काफी दिनों से बच्चों की जान को जोखिम में डालकर ही पढ़ाई करवाया जा रहा है, जो विद्यालय प्रबंधन की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि 663 बच्चों के बीच महज पांच क्लासरूम उपलब्ध हैं। कमरों की कमी के कारण बच्चों को जमीन और छत पर बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। अतिरिक्त क्लासरूम के लिए विभाग से मांग की गई है। #jamuinews #education #school #deojamui #viralpost #viralreelsシ
Jamui, Jamui | Sep 18, 2026