पीथास में 121 वर्षों से चली आ रही तेजाजी मेले की गौरवशाली परंपरा
बृजमोहन सुवालका पीथास
ग्राम पीथास में वीर तेजाजी महाराज के प्रति आस्था और श्रद्धा से जुड़ा पारंपरिक मेला पिछले 121 वर्षों से निरंतर आयोजित होता आ रहा है। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि गांव की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकजुटता की पहचान भी बन चुका है।
हर वर्ष तेजाजी महाराज के मेले का ग्रामीणों को बेसब्री से इंतजार रहता है। मेले के अवसर पर तेजाजी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। दूर-दराज के गांवों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर तेजाजी महाराज के दर्शन करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना करते हैं।
121 वर्षों की यह निरंतर परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी ग्रामीणों की आस्था और विश्वास को दर्शाती है। बुजुर्गों द्वारा संजोई गई इस परंपरा को वर्तमान पीढ़ी भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही है। मेले के दौरान पूरा गांव धार्मिक एवं उत्सवी माहौल में रंग जाता है।
तेजाजी महाराज राजस्थान के लोकदेवता के रूप में विशेष श्रद्धा के पात्र हैं। उनके जीवन, त्याग, वचनबद्धता और लोककल्याण की भावना से जुड़ी मान्यताएं आज भी ग्रामीण समाज को प्रेरणा देती हैं। इसी आस्था के चलते पीथास का तेजाजी मेला क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है।
मेले में धार्मिक आयोजनों के साथ ग्रामीणों की सहभागिता, मेल-मिलाप और सामाजिक सौहार्द का भी विशेष महत्व रहता है। वर्षों पुरानी इस परंपरा ने गांव की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पीथास का तेजाजी मेला आज केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि 121 वर्षों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है, जिसे ग्रामीण पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।