ऐतिहासिक लक्ष्मी नारायण मंदिर के संरक्षण और विकास पर उठे सवाल, जसवीर नागपाल ने मांगा दुकानों और जमीन का पूरा हिसाब
धाम-भंडारे के आयोजन का शुल्क 5 हजार से बढ़ाकर 11 हजार रुपये करने पर जताई आपत्ति, मंदिर की संपत्ति और किराये का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
चंबा 01 नवंबर 2026
ऐतिहासिक श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर चंबा के संरक्षण, विकास और मंदिर न्यास की व्यवस्थाओं को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। जसवीर नागपाल ने मंदिर से जुड़ी दुकानों, जमीन, किराये और धार्मिक आयोजनों के लिए निर्धारित शुल्क में बढ़ोतरी को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने मंदिर न्यास से मांग की है कि मंदिर की संपत्तियों का पारदर्शी आकलन करवाकर पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि श्रद्धालुओं और आम जनता को मंदिर की वास्तविक संपत्ति एवं आय के बारे में जानकारी मिल सके।
जसवीर नागपाल का कहना है कि मंदिर के नाम पर कई दुकानें आवंटित हैं, जिनमें कुछ दुकानों का किराया आज भी कथित तौर पर 50 पैसे और 5 रुपये के आसपास है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वर्तमान समय के हिसाब से इन दुकानों के किराये का पुनर्मूल्यांकन नहीं होना चाहिए? यदि मंदिर की संपत्तियों से उचित आय प्राप्त हो सकती है, तो उसका लाभ मंदिर के संरक्षण, रखरखाव और विकास कार्यों में क्यों नहीं लिया जाना चाहिए?
उन्होंने मांग की कि मंदिर न्यास के अधीन आने वाली सभी दुकानों का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। दुकानों का वर्तमान किराया, आवंटन की स्थिति और किराया संशोधन की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए।
धाम-भंडारे का शुल्क 5 हजार से 11 हजार रुपये, क्या यह उचित है?
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल धाम और भंडारे के आयोजन से जुड़े शुल्क में बढ़ोतरी को लेकर भी उठाया गया है। बताया गया है कि धाम-भंडारे के आयोजन के लिए निर्धारित शुल्क 5,000 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये कर दिया गया है।
जसवीर नागपाल ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि धार्मिक आयोजन हर व्यक्ति की आस्था से जुड़े होते हैं। समाज में हर परिवार आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होता। ऐसे में शुल्क में इतनी बड़ी बढ़ोतरी करने से सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शुल्क बढ़ाने से पहले आम श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा गया? मंदिर न्यास को इस फैसले के पीछे का आधार और खर्चों का विवरण भी जनता के सामने रखना चाहिए।
मंदिर के नाम कितनी जमीन, सार्वजनिक हो पूरा विवरण
जसवीर नागपाल ने मंदिर की जमीन को लेकर भी पारदर्शिता की मांग उठाई है। उनका कहना है कि ऐतिहासिक लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम पर कितनी जमीन दर्ज है, वह कहां-कहां स्थित है और उसका वर्तमान उपयोग किस प्रकार हो रहा है, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि मंदिर की भूमि, दुकानों, किराये और अन्य संपत्तियों का एक विस्तृत आकलन करवाया जाए। इससे मंदिर की वास्तविक आर्थिक स्थिति स्पष्ट होगी और भविष्य में विकास एवं संरक्षण की योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।
संरक्षण के साथ पारदर्शिता भी जरूरी
ऐतिहासिक लक्ष्मी नारायण मंदिर चंबा की पहचान और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर की ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी मंदिर न्यास की संपत्तियों और आर्थिक व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बनाए रखना भी है।
जसवीर नागपाल ने मंदिर न्यास से आग्रह किया है कि दुकानों के किराये का उचित मूल्यांकन, जमीन का पूरा रिकॉर्ड, धाम-भंडारे के शुल्क में बढ़ोतरी का औचित्य और मंदिर की आय-व्यय का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि मंदिर न्यास इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है? क्या मंदिर की संपत्तियों का नए सिरे से आकलन होगा और क्या धाम-भंडारे के बढ़े हुए शुल्क पर पुनर्विचार किया जाएगा?
👉इन सवालों पर मंदिर न्यास का पक्ष और आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आना भी जरूरी है।
क्या धार्मिक आयोजनों का शुल्क बढ़ाना उचित है, जबकि हर परिवार आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है? क्या ऐतिहासिक मंदिर की दुकानों, जमीन और किराये का पूरा हिसाब जनता के सामने नहीं आना चाहिए?
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Chamba, Chamba | Nov 1, 2026