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कँगना पर पूछे गए सवाल को लेकर CL ठाकुर ने सांधी चुप्पी
चंबा में  C L ठाकुर की प्रेस वार्ता
सांप के काटने पर घबराएं नहीं, तुरंत अस्पताल पहुंचें: डॉ. प्रदीप सिंह

चंबा 24 सितम्बर 
 मेडिकल कॉलेज चंबा में इन दिनों सांप के काटने और कुत्ते के काटने से संबंधित मामले सामने आ रहे हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रदीप सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए लोगों से अपील की है कि सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय घायल व्यक्ति को बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाया जाए।

डॉ. प्रदीप सिंह ने बताया कि भारत में सांपों की सभी प्रजातियां जहरीली नहीं होतीं और लोगों में अक्सर सांप के काटने को लेकर डर इतना अधिक होता है कि वे घबरा जाते हैं। उन्होंने कहा कि सर्पदंश के मामले में समय पर अस्पताल पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण है। उचित चिकित्सा उपचार मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है।

उन्होंने लोगों को सलाह दी कि सांप के काटने के बाद झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय बर्बाद न करें और मरीज को जल्द से जल्द स्वास्थ्य संस्थान पहुंचाएं। चंबा स्वास्थ्य विभाग भी सर्पदंश के मामलों में समय पर चिकित्सा सहायता लेने पर लगातार जोर दे रहा है।

कुत्ते के काटने पर भी तत्काल उपचार जरूरी

मेडिकल कॉलेज में कुत्ते के काटने के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में रेबीज से बचाव के लिए समय पर चिकित्सा सलाह और आवश्यक टीकाकरण महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार पशु के काटने के बाद स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क कर पोस्ट-एक्सपोजर उपचार की जानकारी लेना जरूरी है।

अस्पताल में मरीजों और मौतों का ब्यौरा भी साझा किया

डॉ. प्रदीप सिंह ने मीडिया के समक्ष मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए पहुंचे मरीजों, विभिन्न बीमारियों से संबंधित मामलों तथा अस्पताल में हुई मृत्यु के आंकड़ों की जानकारी भी साझा की। इन आंकड़ों का विस्तृत विवरण डॉ. प्रदीप सिंह की बाइट में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार ही प्रकाशित किया जाएगा, ताकि किसी भी संख्या को अनुमान के आधार पर प्रस्तुत न किया जाए।

उन्होंने कहा कि लोगों को बीमारी अथवा सर्पदंश के मामलों में डरने के बजाय समय पर चिकित्सा सुविधा लेनी चाहिए।

🎙️ बाइट — डॉ. प्रदीप सिंह

एमएस, मेडिकल कॉलेज चंबा

"सांप के काटने पर घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण है कि मरीज को बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाया जाए, ताकि समय पर आवश्यक उपचार दिया जा सके।"
सड़क दुर्घटना में घायलों को मिलेगा तत्काल इलाज, PM-RAHAT योजना से ₹1.50 लाख तक कैशलेस उपचार

सुरेंद्र ठाकुर 
चंबा 24 सितम्बर 
सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले लोगों के लिए केंद्र सरकार की PM-RAHAT योजना महत्वपूर्ण राहत लेकर आई है। योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को उपचार के लिए आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए ₹1.50 लाख तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। यह सुविधा दुर्घटना की तारीख से अधिकतम 7 दिनों तक निर्धारित शर्तों और उपचार पैकेज के अनुसार उपलब्ध रहती है।

इस संबंध में चंबा मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ. प्रदीप सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना होने पर अब घायलों को तत्काल उपचार उपलब्ध करवाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उनका कहना है कि हादसे के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है और घायल व्यक्ति को इलाज के लिए अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े, इसके लिए निर्धारित व्यवस्था के तहत उपचार उपलब्ध करवाया जाएगा।

🚑 पैसे की व्यवस्था में इलाज में देरी न हो

PM-RAHAT योजना का उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाना है, ताकि परिजनों को शुरुआती उपचार के लिए पैसे की व्यवस्था करने में समय न गंवाना पड़े।

योजना के तहत पात्र पीड़ित को ₹1.50 लाख तक कैशलेस उपचार की सुविधा मिल सकती है। हालांकि यह सुविधा योजना में निर्धारित पात्रता, उपचार पैकेज और नामित/पंजीकृत अस्पतालों की व्यवस्था के अनुसार लागू होती है।

🏥 चंबा जैसे पहाड़ी जिले में महत्वपूर्ण व्यवस्था

चंबा जिला भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्र है। कई स्थानों से गंभीर सड़क दुर्घटना के मरीजों को जिला मुख्यालय तक पहुंचाने में समय लग जाता है। ऐसे में दुर्घटना के बाद अस्पताल पहुंचते ही उपचार प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो, यह व्यवस्था मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।

मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से भी लोगों से अपील की गई है कि सड़क दुर्घटना की स्थिति में घायल को जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाएं और आपात स्थिति में 112 जैसी आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करें।

⚠️ जनता यह बात जरूर समझे

PM-RAHAT का अर्थ यह नहीं है कि हर अस्पताल में हर प्रकार का इलाज असीमित रूप से मुफ्त होगा। ₹1.50 लाख तक का कैशलेस उपचार योजना की निर्धारित शर्तों, पैकेज और नामित अस्पतालों के माध्यम से उपलब्ध होता है।

इसलिए सड़क दुर्घटना होने पर परिजन अस्पताल में यह जरूर पूछें कि घायल व्यक्ति का उपचार PM-RAHAT योजना के अंतर्गत दर्ज किया जा रहा है या नहीं।

सड़क हादसे के बाद पहला लक्ष्य पैसा जुटाना नहीं, बल्कि घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाना और तत्काल चिकित्सा सहायता दिलाना होना चाहिए।

स्रोत: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार / PIB
बालू आयुर्वेदिक अस्पताल में मनाया गया राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस

विधायक Neeraj Nayar  ने बतौर मुख्य अतिथि की शिरकत, लोगों को मिला निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और आयुर्वेदिक दवाइयों का लाभ

सुरेंद्र ठाकुर 
चंबा, 23 सितंबर
 बालू स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में आयुष विभाग की ओर से राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में स्थानीय विधायक नीरज नैयर ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। अस्पताल परिसर पहुंचने पर आयुष विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने विधायक का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।

राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस का उद्देश्य लोगों को आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा पद्धति, इसके महत्व और स्वस्थ जीवनशैली में इसकी भूमिका के प्रति जागरूक करना है। कार्यक्रम के दौरान आयुर्वेद में उपचार के साथ-साथ रोगों से बचाव, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।

इस अवसर पर स्थानीय लोगों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया। शिविर में चिकित्सकों ने लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर आवश्यक परामर्श दिया। जरूरतमंद लोगों को आयुर्वेदिक दवाइयां भी निःशुल्क वितरित की गईं।

कार्यक्रम में हर्बल एवं औषधीय पौधों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें विभिन्न औषधीय पौधों को प्रदर्शित करते हुए आयुष विभाग के विशेषज्ञों ने लोगों को उनके औषधीय गुणों, उपयोग और स्वास्थ्य संबंधी महत्व की जानकारी दी।

कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को आयुर्वेद को दैनिक जीवनशैली से जोड़ने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा स्वस्थ जीवन के लिए पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।

आयुष विभाग की इस पहल के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति और औषधीय पौधों के प्रति जानकारी बढ़ाने का प्रयास किया गया।
पांगी में जिया लाल कपूर के स्वागत से गरमाई सियासत

भाजपा के तीन चेहरों के बीच बढ़ी हलचल, 2027 की टिकट को लेकर चर्चाएं तेज

चंबा/पांगी 23 सितम्बर 
जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में पूर्व विधायक जिया लाल कपूर के पहुंचते ही राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज होती नजर आई। पांगी पहुंचने पर उनके समर्थकों ने गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया। स्वागत के दौरान समर्थकों का उत्साह चर्चा का विषय बना रहा।

जिया लाल कपूर वर्ष 2017 से 2022 तक भरमौर-पांगी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रहे। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काटकर डॉ. जनक राज को प्रत्याशी बनाया था। डॉ. जनक राज चुनाव जीतकर वर्तमान विधायक हैं।

अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पांगी की सियासत में भाजपा के भीतर तीन नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं—मौजूदा विधायक डॉ. जनक राज, पूर्व विधायक जिया लाल कपूर और युवा भाजपा नेता अनिल ढकोग। हालिया रिपोर्टों में भी इन तीनों नेताओं की क्षेत्र में सक्रियता और टिकट को लेकर चर्चाओं का उल्लेख किया गया है।

दिलचस्प पहलू यह है कि एक तरफ पार्टी नेतृत्व की ओर से डॉ. जनक राज को 2027 में टिकट मिलने की बात सार्वजनिक रूप से कही गई है, वहीं जिया लाल कपूर की पांगी में सक्रियता और समर्थकों की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है।

वहीं, अनिल ढकोग भी भाजपा के सक्रिय युवा चेहरों में शामिल हैं और उनका नाम भी टिकट की चर्चाओं में सामने आ रहा है। भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की सूची में डॉ. जनक राज, जिया लाल कपूर और अनिल ढकोग तीनों के नाम शामिल रहे हैं।

स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में जिया लाल कपूर और अनिल ढकोग के बीच आपसी राजनीतिक तालमेल की भी बात कही जा रही है, हालांकि इस संबंध में दोनों नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—2027 में भाजपा का चेहरा कौन होगा?
क्या मौजूदा विधायक डॉ. जनक राज पर पार्टी फिर भरोसा जताएगी, क्या पूर्व विधायक जिया लाल कपूर एक बार फिर टिकट की दौड़ में मजबूती से सामने आएंगे, या फिर युवा चेहरे अनिल ढकोग को मौका मिलेगा?

फिलहाल तीनों ही भाजपा से जुड़े चेहरे हैं और टिकट का अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है। लेकिन पांगी में जिया लाल कपूर के गर्मजोशी से हुए स्वागत ने इतना जरूर संकेत दिया है कि 2027 से पहले भरमौर-पांगी की सियासत में हलचल अभी थमने वाली नहीं है।

पांगी लाइव न्यूज़ की नजर अब इस बात पर रहेगी कि भाजपा की अगली राजनीतिक रणनीति क्या होती है और टिकट की दौड़ आखिर किस दिशा में जाती है।
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चंबा की समृद्ध कला को मिलेगा नया मंच, रंग महल में विकसित होगा आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर

एक ही छत के नीचे चंबा रुमाल, चंबा चप्पल, चंबा थाल, मेटल और स्टोन क्राफ्ट के कलाकार होंगे एकत्रित

सुरेंद्र ठाकुर 
चंबा, 23 सितंबर
 ऐतिहासिक चंबा नगर अपनी समृद्ध कला एवं शिल्प परंपराओं के लिए देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। चंबा रुमाल, चंबा चप्पल, चंबा थाल, मेटल क्राफ्ट और स्टोन क्राफ्ट जैसी पारंपरिक कलाएं यहां की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

इन पारंपरिक कलाओं को नई पहचान और मंच देने के उद्देश्य से ऐतिहासिक रंग महल में आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर विकसित करने की दिशा में प्रशासन ने पहल शुरू की है। इस संबंध में एडीसी चंबा अमित मैहरा की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न पारंपरिक कलाओं से जुड़े कलाकार और शिल्पकार शामिल हुए।

प्रशासन की योजना के अनुसार रंग महल में ऐसा केंद्र विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जहां चंबा रुमाल, चंबा चप्पल, चंबा थाल, मेटल और स्टोन क्राफ्ट से जुड़े कलाकार एक ही छत के नीचे बैठकर अपना कार्य कर सकें। इससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को न केवल तैयार कलाकृतियां देखने का अवसर मिलेगा, बल्कि वे कलाकारों को काम करते हुए देखकर इन पारंपरिक कलाओं की प्रक्रिया को भी समझ सकेंगे।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पारंपरिक कला को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना भी है। स्थानीय युवाओं को इन कलाओं का प्रशिक्षण देकर उन्हें भविष्य में अपने स्तर पर काम शुरू करने का अवसर उपलब्ध करवाने की योजना है।

प्रशासन की ओर से दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले युवाओं के लिए रंग महल में प्रशिक्षण के दौरान ठहरने और खाने-पीने की व्यवस्था उपलब्ध करवाने का प्रयास भी किया जा रहा है, ताकि उन्हें प्रशिक्षण के बाद रोजाना लंबी दूरी तय न करनी पड़े।

कलाकारों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि चंबा की पारंपरिक कलाएं केवल हस्तशिल्प नहीं, बल्कि क्षेत्र के इतिहास और संस्कृति की पहचान हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर की योजना सफल होती है तो कलाकारों को बेहतर मंच मिलेगा और चंबा की कला को देश-विदेश तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

पद्मश्री सहित राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कलाकारों ने भी चंबा की कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। ऐसे में रंग महल में प्रस्तावित आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर चंबा की पारंपरिक कलाओं, कलाकारों और नई पीढ़ी के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बनने की दिशा में कदम माना जा रहा है।
डॉ. जनक राज पर हाकम राणा का तीखा हमला, बोले—“राजनीति का अता-पता नहीं, थोपे हुए आदमी नहीं चाहिए”

हमारी भूल थी जो उन्हें जिताया 

पांगी 23 सितम्बर 
पांगी घाटी की सियासत में इन दिनों बयानबाजी तेज होती नजर आ रही है। भाजपा के पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष हाकम राणा ने विधायक डॉ. जनक राज को लेकर तीखी टिप्पणी की है।

हाकम राणा ने कहा कि क्षेत्र की राजनीति और जनता की भावनाओं को समझने वाले नेताओं की जरूरत है। उन्होंने डॉ. जनक राज पर निशाना साधते हुए कथित तौर पर कहा कि जिन्हें राजनीति का “अता-पता नहीं” है, ऐसे लोगों को जनता पर थोपना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि पांगी की जनता अपने क्षेत्र के मुद्दों और समस्याओं को समझने वाले नेतृत्व की अपेक्षा रखती है। उनका कहना है कि पार्टी संगठन को भी कार्यकर्ताओं और जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।

हाकम राणा की इस टिप्पणी के बाद पांगी भाजपा की अंदरूनी सियासत को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, डॉ. जनक राज की ओर से इस टिप्पणी पर अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

नोट: खबर में हाकम राणा के कथन को उनके बयान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। डॉ. जनक राज का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज 27 से 30 सितंबर तक जिला चम्बा के प्रवास पर रहेंगे

28 सितम्बर को दिशा बैठक की करेंगे अध्यक्षता, करियां में भारत नेट परियोजना का करेंगे शुभारम्भ 

सुरेंद्र ठाकुर 
चम्बा, 23 सितंबर 2026

लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज 27 से 30 सितंबर तक जिला चम्बा के प्रवास पर रहेंगे।
लोकसभा सांसद के जारी प्रवास कार्यक्रम की जानकारी देते हुए विभागीय प्रवक्ता ने बताया कि डॉ. राजीव भारद्वाज 27 सितंबर को शाम 7 बजे चम्बा पहुंचेंगे। उनका रात्रि ठहराव परिधि गृह चम्बा में रहेगा।
लोकसभा सांसद 28 सितंबर को पूर्वाह्न 11 बजे ग्राम पंचायत करियां में बीएसएनएल के भारत नेट परियोजना का शुभारम्भ करेंगे। डॉ. राजीव भारद्वाज दोपहर बाद 2 बजे बचत भवन में सड़क सुरक्षा समिति बैठक की अध्यक्षता भी करेंगे। उनका रात्रि ठहराव परिधि गृह चम्बा में रहेगा।
लोकसभा सांसद 29 सितम्बर को पूर्वाह्न 11 बजे बचत भवन में आयोजित दिशा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। डॉ. राजीव भारद्वाज अपराह्न 5 बजे डलहौज़ी के लिए प्रस्थान करेंगे। उनका रात्रि ठहराव डलहौज़ी में रहेगा।
डॉ. राजीव भारद्वाज अपने प्रवास कार्यक्रम की निरंतरता में 30 सितम्बर को पूर्वाह्न 11 बजे डलहौज़ी छावनी परिषद बैठक की अध्यक्षता करेंगे। 
डॉ. राजीव भारद्वाज दोपहर बाद 2 बजे डलहौज़ी से जसूर के लिए प्रस्थान करेंगे।
Video 9
10 लाख के मंच के स्थान चयन पर सवाल

विद्यालय से 600–700 मीटर दूर छात्रावास परिसर में निर्माण, स्थानीय लोगों ने मांगा स्पष्टीकरण

सुरेंद्र ठाकुर 
पांगी 23 सितम्बर 
जनजातीय क्षेत्र पांगी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय साच में करीब 10 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन मंच इन दिनों स्थानीय चर्चा का विषय बना हुआ है। मंच के निर्माण को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसके स्थान चयन को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि मंच का निर्माण मुख्य विद्यालय परिसर में न होकर विद्यालय से करीब 600 से 700 मीटर दूर स्थित छात्रावास परिसर में करवाया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय में मंच का उपयोग मुख्य रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शैक्षणिक गतिविधियों, जागरूकता कार्यक्रमों, वार्षिक समारोह, पुरस्कार वितरण तथा राष्ट्रीय पर्व जैसे आयोजनों के लिए किया जाता है। ऐसे में मंच को मुख्य विद्यालय परिसर से इतनी दूरी पर बनाए जाने को लेकर लोग इसके औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं।

विद्यालय में कार्यक्रम होंगे तो विद्यार्थी कहां जाएंगे?

स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि विद्यालय में वार्षिक समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पुरस्कार वितरण या अन्य सामूहिक गतिविधियां आयोजित होती हैं, तो क्या विद्यार्थियों और शिक्षकों को हर बार करीब 600–700 मीटर दूर छात्रावास परिसर तक जाना होगा?

लोगों का कहना है कि यदि मंच विद्यालय परिसर में उपलब्ध होता तो विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए कार्यक्रमों का आयोजन अधिक सुविधाजनक हो सकता था। साथ ही विद्यार्थियों की आवाजाही, अनुशासन और समय को लेकर भी सुविधा रहती।

स्थान चयन का आधार सार्वजनिक करने की मांग

करीब 10 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस मंच को लेकर स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और विद्यालय प्रशासन से स्वीकृति, अनुमानित लागत, निर्माण एजेंसी तथा स्थान चयन के आधार को स्पष्ट करने की मांग की है।

लोगों का कहना है कि सार्वजनिक धन से होने वाले निर्माण कार्यों में सुविधा की उपयोगिता, पहुंच और संबंधित संस्थान की वास्तविक जरूरत को ध्यान में रखना जरूरी है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि मंच को विद्यालय परिसर के बजाय छात्रावास परिसर में बनाने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया।

खेल मैदान के बाद मंच निर्माण पर भी चर्चा

विद्यालय में मंच निर्माण के साथ ही पूर्व में करीब 30 से 40 लाख रुपये की लागत से तैयार किए गए खेल मैदान को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। लोगों का कहना है कि विद्यालय से जुड़े विकास कार्यों में सरकारी धन का उपयोग विद्यार्थियों की वास्तविक जरूरतों और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।

फिलहाल निर्माणाधीन मंच को लेकर उठ रहे सवालों पर संबंधित विभाग और विद्यालय प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। मंच के लिए छात्रावास परिसर का चयन क्यों किया गया, इसकी स्वीकृति किस स्तर पर हुई और विद्यालय परिसर में संभावित विकल्पों पर विचार किया गया था या नहीं—इन सवालों के जवाब संबंधित विभाग की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।

Pangi Live News की अपील: सार्वजनिक धन से जुड़े किसी भी निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभाग के रिकॉर्ड और आधिकारिक जवाब के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
चंबा में बरसात के मौसम में डेंगू-मलेरिया और त्वचा संक्रमण का खतरा, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी

सुरेंद्र ठाकुर 
चंबा 23 सितम्बर 
 बरसात के मौसम में डेंगू, मलेरिया समेत विभिन्न प्रकार के त्वचा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग चंबा ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी चंबा डॉ. जालम भारद्वाज ने लोगों को बारिश के मौसम में साफ-सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।
डॉ. जालम भारद्वाज ने कहा कि बरसात के दौरान जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए घरों और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, पानी की टंकियों, गमलों और अन्य पानी के बर्तनों की नियमित सफाई करें। मच्छरों से बचाव के लिए पूरी बाजू के कपड़े पहनें और आवश्यकतानुसार मच्छररोधी उपायों का इस्तेमाल करें।
उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में त्वचा संबंधी संक्रमण से बचने के लिए शरीर को साफ और सूखा रखना बेहद जरूरी है। गीले कपड़े अधिक समय तक न पहनें तथा व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
सीएमओ ने लोगों से अपील की कि तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, कमजोरी, त्वचा पर असामान्य चकत्ते या अन्य लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा न लें, बल्कि नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में चिकित्सकीय सलाह लें।
उन्होंने कहा कि सावधानी, स्वच्छता और समय पर चिकित्सकीय परामर्श बरसात के मौसम में इन बीमारियों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बाइट: डॉ. जालम भारद्वाज, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चंबा
पांगी भरमौर के पूर्व विधायक जिया लाल कपूर कल पहुचेगे पांगी। पांगी भरमौर की राजनीती में बड़ी हलचल।
चंबा-किलाड़ मार्ग को स्ट्रैटेजिक रोड का दर्जा मिलने का दावा

हर्ष महाजन बोले—चुराह और पांगी की कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा लाभ, निर्माण व रखरखाव की जिम्मेदारी MoRTH को

सुरेंद्र ठाकुर 
चंबा, 22 सितंबर 2026
चंबा जिले के दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों चुराह और पांगी-किलाड़ की सड़क कनेक्टिविटी को लेकर राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उनके अनुसार, उनकी लगातार पहल और पैरवी के परिणामस्वरूप चंबा से चुराह होते हुए किलाड़ (पांगी) जाने वाले मार्ग को रक्षा मंत्रालय द्वारा स्ट्रैटेजिक रोड के रूप में शामिल किया गया है।

हर्ष महाजन के मुताबिक, इस सड़क के निर्माण एवं रखरखाव की जिम्मेदारी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को दी गई है और कार्य बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की देखरेख में किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि चंबा-किलाड़ मार्ग केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि चुराह और पांगी जैसे दुर्गम एवं जनजातीय क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण जीवनरेखा है। प्रस्तावित विकास में नए पुलों और महत्वपूर्ण दर्रों, जिसमें चैनी पास भी शामिल है, से संबंधित कार्यों का भी उल्लेख किया गया है।

कनेक्टिविटी से विकास को मिलेगी गति

सांसद के अनुसार, इस मार्ग के स्ट्रैटेजिक रोड के रूप में विकसित होने से क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविटी के साथ-साथ आवागमन, पर्यटन, आर्थिक गतिविधियों, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं तथा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि चुराह और पांगी जैसे क्षेत्रों को लंबे समय से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम के कारण सड़क कनेक्टिविटी की चुनौतियों का सामना करना पड़ता रहा है। ऐसे में केंद्र स्तर पर सड़क की जिम्मेदारी लिए जाने से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

पठानकोट-चंबा-भरमौर मार्ग का भी किया उल्लेख

हर्ष महाजन ने कहा कि चंबा की सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करना उनकी प्राथमिकताओं में रहा है। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले पठानकोट-चंबा-भरमौर मार्ग को NHAI के अधीन लाने की दिशा में भी उनकी पहल और पैरवी रही है।

उन्होंने कहा कि इस मार्ग में कई महत्वपूर्ण पास, सुरंगें और पुल शामिल हैं तथा इसकी विस्तृत DPR तैयार की जा रही है। उनके अनुसार, इन दोनों निर्णयों से आकांक्षी जिला चंबा की सड़क कनेक्टिविटी को दीर्घकालिक मजबूती मिल सकती है।

हिमाचल को अन्य रणनीतिक सड़कों का भी उल्लेख

प्रेस नोट में हर्ष महाजन ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से हिमाचल प्रदेश को खानाडुंती-लामखागा-दर्श-हरसिल सड़क तथा वांगतु-मुड-अट्टारगु सड़क के निर्माण का भी तोहफा मिला है।

उन्होंने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री का आभार व्यक्त किया।

हर्ष महाजन ने कहा कि केंद्र सरकार दुर्गम और आकांक्षी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रही है और चंबा जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले जिले को इसका लाभ मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि चंबा के विकास और यहां के लोगों की मूलभूत जरूरतों से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना और उनके समाधान के लिए प्रयास करना उनकी प्राथमिकता बनी रहेगी।

नोट: चंबा-किलाड़ मार्ग को स्ट्रैटेजिक रोड का दर्जा मिलने और MoRTH/BRO को जिम्मेदारी सौंपे जाने संबंधी जानकारी सांसद हर्ष महाजन की ओर से जारी प्रेस नोट में कही गई है।
कौन है जो इस प्रकार की हरकत कर रहा है, हमारे देश की आन बान शान की है तिरंगा 
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विश्व पर्यटन दिवस पर सुराल में सजेगा पांगी की संस्कृति का रंग

26–27 सितंबर को दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक परिधानों में शामिल होने की अपील

सुराल, पांगी | 21 सितंबर 2026

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर पांगी घाटी के सुराल में 26 और 27 सितंबर को दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। सुराल पर्यटन विकास संघ के अध्यक्ष कुलदीप धूतवानी ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पांगी की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है।

आयोजन को लेकर युवक मंडलों, महिला मंडलों, स्वयं सहायता समूहों और आम नागरिकों से विशेष अपील की गई है कि वे पारंपरिक स्थानीय परिधानों में कार्यक्रम में शामिल होकर पांगी की सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करें।

कार्यक्रम में भाग लेने के इच्छुक प्रतिभागी 23 सितंबर तक सुराल पर्यटन विकास संघ के पदाधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।

स्टॉल लगाने का भी अवसर

दो दिवसीय आयोजन में स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक वस्तुओं और अन्य सामग्री के स्टॉल लगाने के इच्छुक समूह, युवक मंडल अथवा व्यक्ति सुराल पर्यटन विकास संघ से संपर्क कर निःशुल्क स्टॉल बुक करवा सकते हैं।

आयोजकों के अनुसार यह आयोजन पांगी प्रशासन, विधायक डॉ. जनक राज एवं सुराल पर्यटन विकास संघ के सहयोग से किया जा रहा है।

संपर्क

कुलदीप धूतवानी
अध्यक्ष, सुराल पर्यटन विकास संघ
📞 89880 21021

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बोबी की मौत पर उठे सवाल: आखिर समय पर क्यों नहीं मिली एंबुलेंस?

कुम्हारका की 36 वर्षीय बोबी देवी ने टांडा रेफर होने के बाद बाथरी के पास तोड़ा दम | परिजनों ने 108 एंबुलेंस में देरी के लगाए गंभीर आरोप

चंबा 21 सितम्बर 
कुम्हारका पंचायत की 36 वर्षीय बोबी देवी की मौत ने चंबा की स्वास्थ्य और आपातकालीन एंबुलेंस व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घास काटते समय ढांक से गिरकर घायल हुई बोबी देवी को परिजन उपचार के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें टांडा रेफर किया गया। लेकिन परिजनों का आरोप है कि रेफर किए जाने के बाद उन्हें काफी देर तक 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक परिजनों का कहना है कि वे सुबह करीब 7 बजे अस्पताल पहुंच गए थे और लगभग पौने 10 बजे एंबुलेंस मिली। टांडा ले जाते समय बाथरी के पास बोबी देवी ने दम तोड़ दिया।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या गंभीर मरीज के लिए एंबुलेंस की उपलब्धता में हुई देरी ने इलाज की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया?

हालांकि, इस सवाल का अंतिम जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। 108 सेवा के जिला समन्वयक सुनील धर के अनुसार मेडिकल कॉलेज से सुबह 8:24 बजे एंबुलेंस की मांग प्राप्त हुई और बालू से एंबुलेंस को रवाना किया गया। उनका कहना है कि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए व्यवस्था की गई थी। मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ. प्रदीप सिंह ने भी 108 प्रबंधन से घटना को लेकर स्पष्टीकरण मांगे जाने और पूरे घटनाक्रम की जांच की बात कही है।

लेकिन जनता के सवाल इससे खत्म नहीं होते।

मेडिकल कॉलेज से करीब 4 किलोमीटर दूर क्यों खड़ी है एंबुलेंस व्यवस्था?

यदि मेडिकल कॉलेज चंबा में गंभीर मरीज को रेफर करने के लिए एंबुलेंस की आवश्यकता है, तो एंबुलेंस की तैनाती ऐसी जगह क्यों हो कि उसे अस्पताल तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लगे? बालू में एंबुलेंस की पार्किंग व्यवस्था क्या आपातकालीन जरूरतों के अनुरूप है?

और अगर अस्पताल परिसर अथवा आसपास उपलब्ध एंबुलेंस पर्याप्त नहीं हैं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?

सरोल में खड़ी एंबुलेंसों का क्या होगा?

चंबा में पहले भी एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। जनवरी 2026 की एक रिपोर्ट में मेडिकल कॉलेज की तीन एंबुलेंस में से केवल एक के सेवा में होने और दूसरी के खराब तथा तीसरी के पासिंग में अटके होने की बात सामने आई थी।

ऐसे में जनता जानना चाहती है कि जो एंबुलेंस लंबे समय से उपयोग में नहीं हैं, उनकी मरम्मत, संचालन अथवा नीलामी को लेकर क्या कार्रवाई हुई?

मेडिकल कॉलेज प्रशासन से जनता के सीधे सवाल

क्या बोबी देवी को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध हुई थी?

एंबुलेंस की मांग किस समय दर्ज हुई और मौके से एंबुलेंस किस समय रवाना हुई?

एंबुलेंस की वास्तविक लोकेशन और रिस्पॉन्स टाइम का रिकॉर्ड क्या कहता है?

अगर देरी हुई तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

क्या मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच शुरू कर दी है?

और क्या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?

चंबा मेडिकल कॉलेज में इससे पहले भी एंबुलेंस और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में बोबी देवी की मौत को केवल एक अलग घटना मानकर छोड़ देना जनता के सवालों का समाधान नहीं होगा।

सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का नहीं, जवाबदेही तय करने का है।

अगर व्यवस्था में कमी थी तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अगर एंबुलेंस समय पर रवाना हुई थी, तो उसका पूरा रिकॉर्ड जनता के सामने आना चाहिए। और अगर देरी के आरोप सही नहीं हैं, तो तथ्य भी सार्वजनिक होने चाहिए।

क्योंकि एक परिवार ने अपना सदस्य खोया है—और अब पूरे चंबा की जनता जवाब चाहती है।

पूछता है चंबा—आपातकाल में एंबुलेंस का इंतजार आखिर कब तक?

मेडिकल कॉलेज में मरीजों की जिंदगी से जुड़े सवालों पर जवाबदेही कब तय होगी?

PANGI LIVE NEWS — सवाल व्यवस्था से, जवाब जनता के लिए।
तलवे कौन चाट रहा है,  विपक्ष कह रहा है 
कितना सच है, अपनी राय जरूर दें
सबकी मिली भगत, दावे के साथ,  इसमें सब का हिसा है, कोई अधिकारी नहीं सुनता
चंबा में बाबा श्रीचंद जी महाराज के 532वें प्रकाशोत्सव पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

प्राचीन मंदिर में सुबह से लगी श्रद्धालुओं की कतारें, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण से भक्तिमय हुआ वातावरण

चंबा 20 सितम्बर 
ऐतिहासिक चंबा की धरती आज आस्था और भक्ति के रंग में रंगी नजर आई। श्री गुरु नानक देव जी के ज्येष्ठ पुत्र बाबा श्रीचंद जी महाराज के 532वें प्रकाशोत्सव के अवसर पर उनके प्राचीन मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे अनुयायियों ने बाबा श्रीचंद जी महाराज के श्रीचरणों में शीश नवाया और सुख-शांति की कामना की। पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के बीच पूरा मंदिर परिसर दिनभर धार्मिक उल्लास से सराबोर रहा।

एक महीने से चल रही थीं तैयारियां

प्रकाशोत्सव को लेकर करीब एक महीने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया और बाहर से आने वाली संगत के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं की गईं। प्रकाशोत्सव के अवसर पर बाबा श्रीचंद जी महाराज के अनुयायियों ने देश-विदेश से पहुंची संगत का स्वागत किया और सभी को प्रकाशोत्सव की शुभकामनाएं दीं।

उदासीन परंपरा के प्रमुख संत माने जाते हैं बाबा श्रीचंद

बाबा श्रीचंद जी महाराज को उदासीन परंपरा के प्रमुख संतों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण किया और चंबा की धरती पर भी उनके चरण पड़े।

बाबा श्रीचंद जी महाराज से जुड़ी कई धार्मिक एवं ऐतिहासिक मान्यताएं आज भी चंबा की लोक आस्था का हिस्सा हैं।

पवित्र शिला से जुड़ी है अनूठी धार्मिक मान्यता

बाबा श्रीचंद जी महाराज के चंबा आगमन से जुड़ी सबसे प्रमुख मान्यताओं में मंदिर परिसर में स्थित पवित्र शिला का विशेष स्थान है।

स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय में जब साधु-संतों के चंबा में प्रवेश पर रोक थी, तब बाबा श्रीचंद जी महाराज को रावी नदी के उस पार रोक दिया गया। मान्यता है कि उस समय बाबा जी ने नदी किनारे पड़ी एक शिला को रावी पार ले जाने का आदेश दिया।

धार्मिक मान्यता के मुताबिक, इसके बाद वह शिला बाबा श्रीचंद जी महाराज को लेकर रावी नदी पार पहुंची और चंबा नगर के तीन चक्कर लगाने के बाद वर्तमान स्थान पर आकर रुक गई।

कहा जाता है कि इस घटना के बाद चंबा के राजा ने बाबा श्रीचंद जी महाराज के चरणों में नतमस्तक होकर क्षमा मांगी। स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार बाबा जी ने राजा को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद भी दिया।

आज भी आस्था का केंद्र है पवित्र शिला

स्थानीय मान्यता के अनुसार बाबा श्रीचंद जी महाराज कुछ समय के लिए इसी पवित्र शिला से उतरे और फिर अंतर्ध्यान हो गए। एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, बाद में मणिमहेश मार्ग पर धनछोह में किसी संत ने बाबा श्रीचंद जी महाराज के दर्शन किए थे।

इन धार्मिक मान्यताओं का प्रमाणिक ऐतिहासिक दस्तावेजों से अलग-अलग मूल्यांकन हो सकता है, लेकिन स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए यह परंपरा आज भी गहरी आस्था का विषय है।

आज भी दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु मंदिर में स्थित इस पवित्र शिला के दर्शन करते हैं और इसे बाबा श्रीचंद जी महाराज के आशीर्वाद से जोड़कर देखते हैं।

देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंची संगत

532वें प्रकाशोत्सव के अवसर पर चंबा के अलावा बाहरी राज्यों से भी बड़ी संख्या में बाबा श्रीचंद जी महाराज के अनुयायी पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मंदिर में माथा टेका, पूजा-अर्चना की, भजन-कीर्तन में हिस्सा लिया और प्रसाद ग्रहण किया।

दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और पूरा वातावरण भक्ति एवं श्रद्धा से सराबोर नजर आया।

चंबा की पहचान में संत परंपरा की भी अहम भूमिका

चंबा की पहचान केवल ऐतिहासिक इमारतों, प्राचीन मंदिरों और खूबसूरत वादियों तक सीमित नहीं है। यहां की मिट्टी में सदियों पुरानी धार्मिक आस्था, लोक परंपराएं और संत संस्कृति भी गहराई से रची-बसी है।

बाबा श्रीचंद जी महाराज का प्राचीन मंदिर इसी धार्मिक विरासत और आस्था की जीवंत तस्वीर है, जहां हर वर्ष प्रकाशोत्सव के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचकर अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।

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