एक देश एक स्वास्थ्य तंत्र वर्तमान समय की आवश्यकता डॉ अशोक कुमार वार्ष्णेय आरोग्य भारती की संगोष्ठी में समन्वित चिकित्सा पद्धति एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर दिया गया जोर
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उदयपुर। आरोग्य भारती उदयपुर विभाग की ओर से बुधवार को रविन्द्र नाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालयए उदयपुर के एल एन टी सभागार में श्एक देशए एक स्वास्थ्य तंत्र वर्तमान समय की आवश्यकता विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि देश में सुलभ गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सभी चिकित्सा पद्धतियों को समन्वित दृष्टिकोण के साथ कार्य करना चाहिए। कार्यक्रम में चिकित्सा पद्धतियों के बीच संवाद भारतीय ज्ञान परंपरा स्वास्थ्य संरक्षण तथा समाज में स्वास्थ्य चेतना के प्रसार पर विशेष जोर दिया गया।
डॉ वार्ष्णेय ने कहा कि प्रत्येक चिकित्सा पद्धति की अपनी विशेषताएं उपयोगिता और सीमाएं हैं। इनका वैज्ञानिक एवं विवेकपूर्ण आकलन करते हुए रोगी.केंद्रित चिकित्सा व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। चिकित्सकों को अपनी मूल चिकित्सा पद्धति का गहन ज्ञान प्राप्त करने के साथ.साथ अन्य चिकित्सा पद्धतियों के मूल सिद्धांतों की भी जानकारी रखनी चाहिए। इससे वे विभिन्न पद्धतियों की उपयोगी विशेषताओं को समझ सकेंगे और आवश्यकता के अनुसार रोगी के हित में उचित चिकित्सा विकल्पों पर विचार कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का समन्वित दृष्टिकोण रोगी की शीघ्र स्वस्थताए उपचार की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सस्ती सुलभ और समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था का केंद्र रोगी होना चाहिएए ताकि प्रत्येक व्यक्ति को उसकी आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके। विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के बीच सहयोग ज्ञान का आदान.प्रदान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर देश में अधिक प्रभावी एवं जनहितकारी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
क्षेत्रीय संयोजक श्री संजीवन जी ने आरोग्य भारती के उद्देश्य एवं कार्यक्षेत्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आरोग्य भारती विभिन्न आयामों के माध्यम से व्यक्ति परिवार समाज और पर्यावरण को स्वस्थ रखने के लिए कार्य करती है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा समाज में स्वास्थ्य संरक्षण की भावना विकसित करने में प्रत्येक व्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है।
क्षेत्रीय प्रचारक प्रमुख श्री वर्धन जी ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध चिकित्सा व्यवस्था एवं निरोग जीवन के सूत्रों पर विचार रखे। उन्होंने दिनचर्या ऋतुचर्या संतुलित आहार.विहार और प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि शरीर को स्वस्थ रखते हुए देश एवं समाज की सेवा का संकल्प जीवन का ध्येय बनाना चाहिए। भारतीय परंपरा में निहित स्वास्थ्य संबंधी सिद्धांत आज भी स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम में रविन्द्र नाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ राहुल जैन ने स्वागत भाषण दिया। मंच पर उपस्थित अतिथियों का परिचय डॉ अनुराग शर्मा ने दिया जबकि मंच संचालन डॉण् मधु कुमावत ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ महावीर शर्मा ने किया।
कार्यक्रम में चिकित्सा विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ ओ पी रायपुरिया सीएमएचओ उदयपुर डॉ अशोक आदित्य मदन मोहन मालवीय राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अशोक शर्मा तथा आरोग्य भारती उदयपुर महानगर अध्यक्ष डॉ गजानंद गुप्ता सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
संगोष्ठी में एमबीबीएस एवं नर्सिंग के 300 से अधिक विद्यार्थियों के साथ विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकए स्वास्थ्यकर्मी तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक आरोग्य भारती के सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा जगत में समन्वय की भावना को प्रोत्साहित करने के साथ.साथ समाज में स्वस्थ जीवनशैली एवं समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
यह जानकारी आरोग्य भारती के डॉ जय प्रकाश गुप्ता ने दी।
Girwa, Udaipur | Oct 17, 2026