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सन्डे ऑन साईकिल अभियान के तहत उदयपुर पुलिस ने निकाली भव्य साइकिल रैली..
स्वस्थ शरीर, स्वस्थ पर्यावरण और फिट इंडिया का दिया सन्देश.
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*उत्तर पश्चिम रेलवे पर ‘संडेज ऑन साइकिल’ अभियान के अन्तर्गत साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन का आयोजन*
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उत्तर पश्चिम रेलवे स्पोर्ट्स एशोसियेशन के तत्वाधान में जयपुर मंडल द्वारा वर्ल्ड साइकिल डे के उपलक्ष्य में फिट इंडिया मिशन के अंतर्गत स्वस्थ जीवनशैली, शारीरिक सक्रियता तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिनांक 7 जून 2026 (रविवार) को जयपुर स्थित के. पी. सिंह स्टेडियम, गणपति नगर में “संडेज ऑन साइकिल” अभियान के अन्तर्गत साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन का आयोजन किया गया। 

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन के अनुसार स्वस्थ जीवनशैली, शारीरिक सक्रियता तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिनांक 7 जून 2026 (रविवार) को जयपुर स्थित के. पी. सिंह स्टेडियम, गणपति नगर में “संडेज ऑन साइकिल” अभियान के अन्तर्गत साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन का आयोजन किया गया। “संडेज ऑन साइकिल” अभियान ने देशभर में स्वास्थ्य एवं फिटनेस के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिनमें लाखों नागरिकों ने भागीदारी कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया है। अभियान के अंतर्गत साइक्लिंग के साथ-साथ योग, जुम्बा, रस्सीकूद तथा अन्य फिटनेस गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।

7 जून 2026 (रविवार) को आयोजित इस विशेष अभियान का उद्देश्य नागरिकों को नियमित शारीरिक गतिविधियों के प्रति प्रेरित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत तथा सतत विकास के संदेश को भी जन-जन तक पहुँचाना है । साइकिल का उपयोग न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह प्रदूषण नियंत्रण तथा हरित वातावरण के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
 
“संडेज ऑन साइकिल” अभियान के अन्तर्गत आयोजित साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन कार्यक्रम में स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में भी अवगत कराया गया।

“संडेज ऑन साइकिल” अभियान के अन्तर्गत साइक्लोथॉन एवं वॉकथॉन कार्यक्रम में रेलवे अधिकारियों, कर्मचारियों, खिलाड़ियों तथा आम नागरिकों व बच्चों ने भाग लिया।
‘साइकिल ऑफ लाईफ’ में मंचित की गई बाप-बेटे के संबंधों की मार्मिक कथा
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उदयपुर, 7 जून। जीवन यात्रा के उतार-चढ़ाव तथा बाप-बेटे के संबंधों की मार्मिक कथा रविवार की शाम शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में मंचित की गई। यह आयोजन पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर द्वारा प्रति माह आयोजित होने वाली मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के अंतर्गत किया गया।

पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि रंगशाला के अंतर्गत प्रिज्म थिएटर सोसायटी दिल्ली द्वारा साइकिल ऑफ लाईफ नाटक का मंचन रविवार को शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में किया गया। इस नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन गिन्नी बब्बर ने की। दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में इस प्रभावशाली प्रस्तुति को खूब सराहा गया।

नाटक में ललित प्रकाश ने बुजुर्ग बाप, निशांत कुमार ठाकुर ने बेटे तथा ज्योति नागपाल ने मां की भूमिका निभाते हुए नाटक में जीवन चक्र का बखूबी चित्रण किया। बाप-बेटे की नोकझोंक से शुरू होकर नाटक बाप की मृत्यु उपरांत बेटे के जीवन में बदलाव तथा इस पूरे परिदृश्य में मां की स्थिति का चित्रण अभिनेताओं ने जीवंत कर दिया। नाटक में लाइटिंग का दायित्व निर्वहन विकास बाहरी ने किया।
रंगमंच प्रेमियों ने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की इस पहल की प्रशंसा करते हुए ऐसे आयोजनों के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया।

इस अवसर पर केन्द्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, अधीक्षण अभियंता सी.एल. सालवी, कार्यक्रम अधिशाषी हेमंत मेहता, सिद्धांत भटनागर सहित केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी एवं शहर के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक (वित्तीय एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी ने किया।
संस्कृत भविष्य की सुधारक, भारत की शक्ति और विश्व बंधुत्व का आधार : सोडाणी

वसुधैव कुटुम्बकम् का भाव केवल संस्कृत से संभव : परमानंद शर्मा 

संस्कृत भारत की जड़ है, इससे जुड़कर ही होगी उन्नति : प्रो. सारंगदेवोत
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उदयपुर, 7 जून। संस्कृत भारत की सांस्कृतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक शक्ति का मूल स्रोत है। संस्कृत न केवल विश्व की प्राचीनतम एवं वैज्ञानिक भाषा है, बल्कि भविष्य की सुधारक भाषा भी है। संस्कृत से ही अच्छे नागरिकों का निर्माण, सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण और राष्ट्र की उन्नति संभव है। यह विचार संस्कृत भारती उदयपुर विभाग द्वारा आयोजित छह दिवसीय आवासीय संस्कृत भाषा बोधन वर्ग के समारोप समारोह में मुख्य अतिथि राज्यपाल सलाहकार (उच्च शिक्षा) एवं पूर्व कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने व्यक्त किये। 

संस्कृत भारती उदयपुर विभाग द्वारा आयोजित छह दिवसीय आवासीय संस्कृत भाषा बोधन वर्ग का समारोप समारोह रविवार को उत्साह, गरिमा एवं संस्कृतमय वातावरण में सम्पन्न हुआ। छह दिनों तक चले इस आवासीय वर्ग में संस्कृत संभाषण, योगाभ्यास, प्रातःस्मरण, विभक्ति-अभ्यास, भाषा-क्रीड़ा, संस्कृत गीत, श्लोक, चर्चा-सत्र, प्रतिभा प्रदर्शन एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों में संस्कृत के प्रति आत्मीयता और व्यवहारिक दक्षता विकसित की गई।

समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल सलाहकार (उच्च शिक्षा) एवं पूर्व कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने कहा कि संस्कृत केवल अतीत की भाषा नहीं, बल्कि भविष्य की सुधारक भाषा है। भारत की वास्तविक शक्ति उसकी संस्कृति और संस्कृत भाषा में निहित है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे पढ़ने की आदत विकसित करें, क्योंकि अध्ययन ही ज्ञान और व्यक्तित्व विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से दूरी बनाकर खेलकूद एवं रचनात्मक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। संस्कृत और भारतीय संस्कृति के निकट रहने से व्यक्ति में स्वतः ही अच्छे नागरिक के गुण विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत का अध्ययन आज के समय का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है, क्योंकि यही भारत की शक्ति, पहचान और सांस्कृतिक आत्मा है।

प्रो. सोडाणी ने संस्कृत को विश्व की प्राचीनतम एवं वैज्ञानिक भाषा बताते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, साहित्य, गणित, आयुर्वेद और विज्ञान का विशाल भंडार संस्कृत में सुरक्षित है। संस्कृत भारती द्वारा जनसामान्य को संस्कृत संभाषण से जोड़ने का अभियान भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रभावी माध्यम बन रहा है। उन्होंने वर्ग की अनुशासित व्यवस्था, शिक्षण पद्धति एवं संस्कृतमय वातावरण की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी पहल बताया।

मुख्य वक्ता परमानंद शर्मा ने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का सार्वभौमिक भाव संस्कृत भाषा और भारतीय चिंतन की ही देन है। संस्कृत केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि विश्व बंधुत्व और मानवता की भाषा है। उन्होंने बताया कि संस्कृत भारती के प्रयासों से आज देशभर में छह हजार से अधिक संस्कृत परिवार सक्रिय रूप से संस्कृत का व्यवहार कर रहे हैं तथा एक करोड़ से अधिक लोग संस्कृत संभाषण करने लगे हैं। यह संस्कृत के पुनर्जागरण का जीवंत प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल पूजा-पाठ तक सीमित समझना एक बड़ी भ्रांति है। संस्कृत भारती के संभाषण वर्गों ने सिद्ध कर दिया है कि संस्कृत सहज, सरल और व्यवहार की भाषा बन सकती है। उन्होंने प्रतिभागियों का आह्वान किया कि वे संस्कृत को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं तथा परिवार एवं समाज में संस्कृत संभाषण का वातावरण निर्मित करें।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति प्रो. (मानद) कर्नल शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि संस्कृत ज्ञान का अथाह खजाना है। भारतीय दर्शन, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा, गणित और संस्कृति का विशाल वैभव संस्कृत में सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारतोपीय भाषा परिवार की जननी है और अनेक आधुनिक भाषाओं की आधारशिला भी है।

उन्होंने कहा कि आज विश्व की प्रतिष्ठित संस्थाएं भी संस्कृत के महत्व को स्वीकार कर रही हैं। नासा जैसे संस्थान भी संस्कृत को भावी ज्ञान पद्धति के लिए महत्वपूर्ण भाषा मानने लगे हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी आधारभूत एवं समृद्ध भाषा होने के बावजूद संस्कृत बोलने वालों का अनुपात अभी भी अपेक्षाकृत कम है, जिसे बढ़ाना समय की आवश्यकता है। यदि संस्कृत का व्यवहार बढ़ेगा तो भारत की उन्नति भी कई गुना बढ़ेगी।

प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि नेपाल सहित कई देशों में आज भी संस्कृत की सशक्त उपस्थिति है। जो समाज और राष्ट्र अपनी जड़ों से दूर हो जाते हैं, वे अंततः खोखले हो जाते हैं। संस्कृत भारत की जड़ है और इससे जुड़े रहना राष्ट्र की निरंतर उन्नति के लिए आवश्यक है। उन्होंने संस्कृत भारती के इस प्रयास को राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान बताया।

समारोह से पूर्व अतिथियों ने वर्ग का अवलोकन कर विभिन्न सत्रों, संस्कृत संभाषण अभ्यास, योग, भाषा-क्रीड़ा, प्रतिभा प्रदर्शन तथा शिक्षण पद्धति का निरीक्षण किया। अतिथियों ने वर्ग की व्यवस्थाओं, अनुशासन एवं संस्कृतमय वातावरण की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

इस अवसर पर अंतिम दिन वर्ग अवलोकन के लिए आपदा राहत विभाग के भाजपा प्रदेश संयोजक एवं राजस्थान गौरव सम्मान प्राप्त डॉ. जिनेन्द्र शास्त्री, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती अलका मूंदड़ा, प्रतापनगर थानाधिकारी पूरणसिंह राजपुरोहित, आलोक विद्यालय हिरणमगरी सेक्टर-11 के प्राचार्य शशांक टांक, गहरीलाल पाटीदार, संस्कृत शिक्षा विभाग राजस्थान सरकार के विशेष अधिकारी अभयसिंह राठौड़ तथा कनक डायनिंग हॉल के रमेश श्रीमाली सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने संस्कृत भारती के इस अभिनव प्रयास की सराहना करते हुए इसे समाजोपयोगी और प्रेरणादायी पहल बताया।

वर्गार्थियों महिमा शर्मा एवं झरनेश पालीवाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मात्र छह दिनों के अल्पकाल में ही वे संस्कृत बोलने, समझने और व्यवहार में प्रयोग करने में सक्षम हुए हैं। अनुभव कथन एवं प्रतिभा प्रदर्शन ने उपस्थित जनसमूह को विशेष रूप से प्रभावित किया।

समारोप कार्यक्रम का शुभारंभ विशाल द्वारा प्रस्तुत वैदिक मंगलाचरण से हुआ। दिव्यांशु ने ध्येय मंत्र एवं सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। प्रांत संपर्क प्रमुख डॉ. यज्ञ आमेटा ने अतिथियों का परिचय एवं स्वागत कराया। लारा उपाध्याय ने सामूहिक गीत प्रस्तुत किया। वर्ग संयोजक संजय शांडिल्य ने वर्ग प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। दिव्यांशु जोशी एवं ध्रुव पालीवाल ने अनुभव कथन प्रस्तुत किए, जबकि मुकेश कुमावत ने व्यक्तिगत गीत की प्रस्तुति दी।

दुष्यंत नागदा ने अतिथियों, विद्याभारती संस्था के पदाधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, शिक्षकों, प्रबंधकों एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन गौरव साहू द्वारा कल्याण मंत्र एवं वैदिक मंगलकामनाओं के साथ हुआ। इस अवसर पर सम्पूर्ण परिसर संस्कृत वंदना, गीतों एवं जयघोषों से गुंजायमान रहा।

वर्ग में मुख्य शिक्षक के रूप में श्रीयांश कंसारा तथा सह-शिक्षक के रूप में गौरव साहू, दिव्यांशु, मेहरान, विशाल शर्मा, लक्ष्मण, आंचल चौधरी, लारा उपाध्याय, ईशा पालीवाल एवं दिव्यांशी पालीवाल ने दायित्व निभाया। वर्ग संचालन एवं व्यवस्थाओं में डॉ. यज्ञ आमेटा, दुष्यंत नागदा, नरेंद्र शर्मा, चैन शंकर दशोरा, डॉ. रेनू पालीवाल, कुलदीप जोशी, मीनाक्षी द्विवेदी, केशव नागदा, पहल सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय योगदान दिया।

समापन अवसर पर विभाग संयोजक एवं कार्यकर्ताओं ने बताया कि संस्कृत भारती का उद्देश्य संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाना तथा भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों को समाज में पुनः प्रतिष्ठित करना है। वर्ग के माध्यम से संस्कृत संभाषण के साथ-साथ व्यक्तित्व निर्माण, राष्ट्रभावना, संस्कार एवं सामाजिक समरसता के मूल्यों का भी विकास किया जाता है। उपस्थित जनों ने ऐसे वर्गों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल देते हुए संस्कृत भारती के प्रयासों की सराहना की।
नारायण सेवा संस्थान ने 46वें सामूहिक विवाह समारोह में 21 दिव्यांग जोड़ों के सपनों को दिया नया आसमान

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जब जीवन की राहों में गरीबी, दिव्यांगता और सामाजिक चुनौतियां दीवार बनकर खड़ी हो जाएं, तब किसी का हाथ थामकर सपनों को सच करना किसी वरदान से कम नहीं होता। ऐसे ही 21 दिव्यांग एवं निर्धन जोड़ों के जीवन में खुशियों की नई सुबह लेकर आया नारायण सेवा संस्थान का 46वां नि:शुल्क सामूहिक विवाह समारोह, जहां सात फेरों के साथ केवल दो दिल ही नहीं मिले, बल्कि वर्षों के संघर्ष, इंतजार और अधूरे सपनों को भी मंजिल मिली।

नई दिल्ली में आयोजित इस भावनात्मक समारोह में राजस्थान, झारखंड, बिहार, गुजरात और उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए 21 जोड़ों ने वैदिक मंत्रों और अग्नि को साक्षी मानकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। विवाह मंडप में कहीं माता-पिता की नम आंखें थीं तो कहीं नवदंपतियों के चेहरों पर नए जीवन की चमक। हर फेरे के साथ मानो संघर्षों के बादलों को चीरकर उम्मीद का सूरज निकल रहा था।

दो दिवसीय आयोजन की शुरुआत गणपति स्थापना, हल्दी और मेहंदी जैसी पारंपरिक रस्मों से हुई। महिलाओं के मंगल गीत, घूमर और लोकनृत्यों ने वातावरण को उत्सव, संस्कृति और भावनाओं से सराबोर कर दिया। उपस्थित अतिथियों और स्वयंसेवकों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद देकर उनके सुखद एवं सम्मानपूर्ण जीवन की कामना की।

समारोह के दौरान संस्था के प्रेसिडेंट प्रशांत अग्रवाल, डायरेक्टर वंदना अग्रवाल तथा ट्रस्टी देवेंद्र चौबीसा ने सहयोगी दानदाताओं एवं अतिथियों का पारंपरिक सम्मान किया।

नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थ जीवन की मजबूत शुरुआत देने के लिए संस्थान ने पलंग, अलमारी, गैस चूल्हा, पंखे, मिक्सर तथा 100 से अधिक प्रकार के घरेलू उपयोग के बर्तन भेंट किए। दिल्ली के अनेक दानदाताओं ने भी आगे बढ़कर उपहार देकर नवदंपतियों की खुशियों में भागीदारी निभाई।

प्रेसिडेंट प्रशांत अग्रवाल ने कहा, "सामूहिक विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं है, बल्कि यह सम्मान, समानता और सामाजिक समरसता का उत्सव है। हमारा प्रयास है कि कोई भी दिव्यांग या आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति केवल संसाधनों के अभाव में अपने जीवन के इस महत्वपूर्ण संस्कार से वंचित न रहे।"

प्यार, संघर्ष और उम्मीद की कहानी

इस समारोह में झारखंड के शिबू कुमार और गीता कुमारी की कहानी हर किसी की आंखें नम कर गई। पिछले दो वर्षों से एक-दूसरे का साथ निभा रहे इस जोड़े के सामने आर्थिक तंगी और सामाजिक चुनौतियां बड़ी बाधा बनी हुई थीं। शिबू के दोनों पैरों में विकृति है, जबकि गीता अपने दाहिने पैर से दिव्यांग हैं।

जब उम्मीद की किरण धुंधली पड़ने लगी, तब उन्होंने नारायण सेवा संस्थान का दरवाजा खटखटाया। संस्था ने गीता के उपचार में सहयोग किया और शिबू को आधुनिक कैलीपर्स उपलब्ध कराए, जिससे उनकी चलने-फिरने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। अंततः दोनों का विवाह उसी संस्थान के मंच पर संपन्न हुआ जिसने उनके जीवन में नई आशा जगाई।

आंसुओं से भरी आंखों के साथ गीता ने कहा, "नारायण सेवा संस्थान हमारे लिए भगवान के समान है। आज संस्था की वजह से मुझे मेरा प्यार और अपना घर बसाने का अवसर मिला है।"

एक और सपना हुआ साकार :
राजस्थान के बांसवाड़ा निवासी मुकेश और दुर्गा की कहानी भी संघर्ष और विश्वास की मिसाल है। मुकेश के पिता का निधन हो चुका है और उनकी मां मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। वहीं दुर्गा के पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। वर्ष 2009 में नारायण सेवा संस्थान द्वारा किए गए सफल ऑपरेशन के बाद दुर्गा आज एक निजी विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं।

आर्थिक और पारिवारिक कठिनाइयों के बीच विवाह का सपना दूर होता जा रहा था, लेकिन संस्थान ने उनके जीवन में भी खुशियों का दीप जलाया। विवाह के बाद भावुक दुर्गा ने कहा, "2009 में संस्थान ने मुझे चलने का आत्मविश्वास दिया था और आज जीवनसाथी का साथ भी। मेरे लिए यह केवल विवाह नहीं, बल्कि जीवन का नया जन्म है।"

चार दशक से अधिक समय से सेवा, संवेदना और समर्पण के मार्ग पर अग्रसर नारायण सेवा संस्थान अब तक 2,582 दिव्यांग एवं निर्धन जोड़ों का विवाह संपन्न करा चुका है। यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन में रोशनी, सम्मान और आत्मविश्वास की नई कहानी है।

संस्थान के संस्थापक कैलाश मानव अग्रवाल को वर्ष 2008 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था, जबकि संस्था के प्रेसिडेंट प्रशांत अग्रवाल को वर्ष 2023 में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। संस्था अब तक 39,388 से अधिक लोगों को नि:शुल्क कृत्रिम अंग उपलब्ध करा चुकी है तथा 4.52 लाख से अधिक मरीजों का नि:शुल्क उपचार कर चुकी है।

यह समारोह केवल विवाह का आयोजन नहीं था, बल्कि इस बात का जीवंत प्रमाण था कि जब समाज संवेदनशील बनता है, तो दिव्यांगता और गरीबी जैसी बाधाएं भी सपनों का रास्ता नहीं रोक पातीं।
-महाराणा प्रताप की कृषि नीति आज भी प्रासंगिक — डॉ. मेहता 

—पर्यावरणविदों ने किया मेवाड़ की कृषि परंपरा के पुनरुद्धार का आह्वान

-महाराणा प्रताप जयंती व हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतुःशती उत्सव  

-17 जून को होने वाली राष्ट्र चेतना संकल्प सभा की तैयारियां जारी  
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उदयपुर, 7 जून। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने दिवेर विजय के बाद युद्धग्रस्त मेवाड़ के पुनर्निर्माण के लिए कृषि, फलोत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया था। 

यह बात पर्यावरणविद डॉ. अनिल मेहता ने रविवार को यहां प्रताप गौरव केन्द्र 'राष्ट्रीय तीर्थ' में विश्व पर्यावरण दिवस तथा हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतु:शती उत्सव के कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत आयोजित संगोष्ठी में कही। महाराणा प्रताप का पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन में योगदान विषय पर डॉ. मेहता ने मेवाड़ की गौरवशाली कृषि परंपरा, पर्यावरण संरक्षण और महाराणा प्रताप की दूरदर्शी कृषि नीति को पुनः स्मरण करते हुए मेवाड़ की कृषि विरासत के पुनरुद्धार का आह्वान किया।

प्रताप गौरव शोध केन्द्र के अधीक्षक डॉ. विवेक भटनागर ने कहा कि लंबे समय तक मुगलों को अस्थिर रखने के उद्देश्य से कृषि पर प्रतिबंध रखने के बाद महाराणा प्रताप ने अपने शासन के अंतिम वर्षों में नए गांव बसाने और बाहरी क्षेत्रों से कृषकों को लाकर बसाने की योजना शुरू की। इस योजना के तहत गुजरात से पाटीदार, मारवाड़ से जाट तथा मालवा से कुलमी समाज के लोगों को मेवाड़ में बसाकर कृषि विकास को बढ़ावा दिया गया। यह प्रक्रिया आगे चलकर लंबे समय तक जारी रही।

प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि संगोष्ठी में महाराणा प्रताप द्वारा पंडित चक्रपाणि मिश्र से रचित ‘विश्ववल्लभ’ ग्रंथ की विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने इसे मध्यकालीन भारत का महत्वपूर्ण कृषि एवं पर्यावरण शास्त्र प्रतिपादित किया। ग्रंथ में भूमिगत जल स्रोतों की पहचान, जल शुद्धि, बांध एवं कुण्ड निर्माण, वृक्षारोपण, बीजोपचार, वृक्षों के पोषण तथा रोगग्रस्त वृक्षों की चिकित्सा जैसे विषयों का विस्तृत वर्णन मिलता है। वक्ताओं ने कहा कि यह ग्रंथ आज भी सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के उपाध्यक्ष एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुभाष भार्गव ने कहा कि युद्ध और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद महाराणा प्रताप ने नकदी फसलों, फलोत्पादन और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित किया। इससे राज्य की आत्मनिर्भरता मजबूत हुई तथा प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हुआ।  

इस अवसर पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के सदस्य अभय सिंह राठौड़, वरिष्ठ  अधिवक्ता अशोक सिंघवी आदि ने विचार रखे। 

गोष्ठी के पश्चात रोपे पौधे 

—कार्यक्रम संयोजक सीए महावीर चपलोत ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में महाराणा प्रताप के पर्यावरण व प्रकृति संरक्षण में योगदान को याद करते हुए प्रताप गौरव केन्द्र परिसर में मेवाड़ के अरावली क्षेत्र में पाई जाने वाली मूल वनस्पतियों नीम, गूलर, पलाश, कड़ाया, महुआ, देसी सागवान, गुग्गल, सेमल आदि के पौधों का रोपण भी किया गया। इस अवसर पर जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश ओझा सहित गौरव केन्द्र के कार्यकर्ताओं ने भी पौधे रोपे। डॉ. दुहन ने क्षेत्र के पर्यावरणीय अनुकूल पौधों का चयन करने को अच्छी पहल बताते हुए कहा कि इससे पौधों का विकास शीघ्र होता है, उनके मुरझाने की आशंका कम रहती है। 

आज प्रात: आयोजन स्थल भूमि पूजन 

—वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के महामंत्री दीपक कुमार शुक्ल ने बताया कि 17 जून को महाराणा भूपाल स्टेडियम गांधी ग्राउण्ड में प्रातः 9.30 बजे होने वाली विशाल राष्ट्र चेतना संकल्प सभा के लिए सोमवार प्रात: 7 बजे आयोजन स्थल का वैदिक विधिविधानपूर्वक भूमि पूजन किया जाएगा। इसके साथ ही आयोजन स्थल पर डोम लगाने, अतिथियों के बैठने के​ लिए ब्लॉक आदि निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि सभा में मेवाड़-वागड़ सहित राजस्थान और देश के विभिन्न कोनों से बड़ी संख्या में अतिथियों का आगमन होगा। इस विशाल सभा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डाॅ. मोहन भागवत संबोधित करेंगे। 

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भागवत कथा में माखन लीला व गिरिराज धारण प्रसंग का किया भावपूर्ण वर्णन
हिरण मगरी, सेक्टर 5 स्थित राडा जी मंदिर पार्क में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का रसपान किया। व्यासपीठ से श्री वृंदावन धाम, तीतरडी पीठाधीश्वर सुप्रसिद्ध भागवताचार्य संत श्री कृष्णानंद जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन करते हुए माखन लीला, गिरिराज धारण प्रसंग सहित विभिन्न धार्मिक प्रसंगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं मानव जीवन को प्रेम, धर्म और भक्ति का मार्ग दिखाती हैं।

महाराज ने श्रद्धालुओं को अहंकार त्यागकर ईश्वर की शरण में रहने का संदेश दिया। कथा के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु भजन-कीर्तन के बीच भाव-विभोर नजर आए। पूरा पांडाल श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगा दिखाई दिया। इस अवसर पर मुख्य यजमान परिवार व सभी भक्तों द्वारा ठाकुर जी को छप्पन भोग धराया गया। सभी भक्तों ने महाराज जी के सानिध्य में बृज की मानसिक परिक्रमा कर अक्षय पुण्य लाभ प्राप्त किया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। उल्लेखनीय है कि पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर सभी श्रेत्रवासियो द्वारा बडे ही भक्ति भाव से यह दिव्य आयोजन करवाया जा रहा है।
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डॉ. चारण के जन्मदिवस पर पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
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भादसोड़ा । राजस्थान में ऑनलाइन शिक्षा जगत के प्रसिद्ध शिक्षाविद् एवं समाजसेवी डॉ. सुभाष चारण (तारानगर) के जन्मदिवस के अवसर पर राधे सुथार एवं साथियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। राधे सुथार ने बताया कि पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच पौधारोपण ही प्रकृति के संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम है। राधे सुथार के साथ शम्भूलाल जाट, विमल सुथार, कमलेश चौधरी, प्रकाश जाट आदि ने सुथारिया खेड़ा, भादसोड़ा में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए। इस अवसर पर डॉ. सुभाष चारण के शिक्षा एवं समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सुखमय एवं दीर्घायु जीवन की कामना की गई।
सनातन पाठशाला द्वारा संस्कार एवं व्यक्तित्व विकास शिविर का सफल आयोजन
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उदयपुर। न्यू विद्या नगर स्थित आर्ची पीस पार्क सोसाइटी में सनातन पाठशाला समिति के तत्वावधान में दो दिवसीय संस्कार एवं व्यक्तित्व विकास शिविर का आयोजन किया गया। समिति संयोजक आशीष सिंहल ने बताया कि शिविर का उद्देश्य बच्चों में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, आत्मविश्वास एवं नेतृत्व क्षमता का विकास करना तथा उन्हें संस्कारित एवं जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना है।

कार्यशाला में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी जगदीश पालीवाल ने बच्चों को श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्यायों का ज्ञान सरल एवं रोचक शैली में प्रदान किया। संरक्षक गोपाल कनेरिया ने प्रेरणादायक कहानियों एवं खेलों के माध्यम से सनातन संस्कारों की शिक्षा दी। योगाचार्य सुरेश पालीवाल ने बच्चों को आसन, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास करवाया और पर्यावरण और गौरैया संरक्षण का संदेश दिया।

संयोजक आशीष सिंहल ने व्यक्तित्व विकास से संबंधित रचनात्मक गतिविधियों एवं खेलों के माध्यम से जीवन में सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र बताए। वहीं सुभाष मेहता ने बच्चों को दैनिक जीवन में उपयोगी संस्कृत श्लोकों का अभ्यास कराया।

कार्यक्रम के समापन दिवस पर पीस पार्क सोसाइटी के अध्यक्ष पुष्पेंद्र लोढ़ा एवं उपाध्यक्ष नरेश अग्रवाल द्वारा प्रतिभागी बच्चों एवं अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। समापन दिवस पर बड़ी संख्या में अभिभावकों की भी उपस्थिति रही। समिति की ओर से चिड़ियों के घोंसले और श्रीमद्भगवद्गीता प्रतिभागियों को भेंट की गई। सोसाइटी सचिव रीटा भाटिया ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों एवं अभिभावकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में वासुदेव तनवानी, कविता ठाकुर एवं विजयलक्ष्मी वर्मा की विशेष उपस्थिति रही।
विश्व पर्यावरण दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन
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उदयपुर, 6 जून। राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में संगोष्ठी आयोजित हुई।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए संस्थान के उपनिदेशक डाॅ द्वारकाप्रसाद गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण व्यक्ति विशेष या क्षेत्र विशेष से नहीं अपितु सामुदायिक प्रयासों से ही संभव है। पर्यावरण प्रदूषण एवं उसके दोष को ढूंढने से बेहतर है कि हम सब मिलकर प्रयास करें एवं पर्यावरण संरक्षण में कहीं देर ना हो जाये इस हेतु हमें अधिक से अधिक वृक्षारोपण कार्यक्रम को अपनाना होगा। डॉ. गुप्ता ने अवगत कराया कि पशुपालन देश की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपुर्ण आधार है यह केवल दूध मॉस व अन्य उत्पाद ही नहीं देता बल्की पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भुमिका निभाता है। हमें वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल पशुपालन को बढ़ावा देना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण निश्चित किया जा सके। पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण एक दूसरे के पुरक है। मुख्य अतिथि हिनल गुप्ता की उपस्थिति में वृक्षारोपण किया गया। वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. ओमप्रकाश साहू ने पॉलीथिन पशुओं के लिए अभिशाप एवं पर्यावरण के लिए भयावह खतरा है पर विचार रखे। वरिष्ठ पशुचिकित्साधिकारी डॉ. पदमा मील एवं डॉ. ममता सोनी ने भी विचार व्यक्त किए।
उदयपुर डाक मंडल द्वारा एक्सपोर्टर मीट का सफल आयोजन
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उदयपुर, 6 जून। उदयपुर डाक मंडल द्वारा शुक्रवार को बीपीसी उदयपुर के तत्वावधान में होटल कनेर बाग, सुखाड़िया सर्किल में एक उदयपुर और मेवाड़ के समस्त हैंडीक्राफ्ट्स मार्बल हस्तशिल्प उत्पाद आर्टिफिसियल ज्वेलरी एवं विभिन्न उत्पादों के एक्सपोर्टर मीट का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रवर अधीक्षक, डाकघर मंडल अक्षय भानुदास गाडेकर द्वारा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एपीएमजी (बीडी एंड मेल्स) परिमंडल कार्यालय, जयपुर सुभाष चन्द्र मीणा रहे। इस अवसर पर क्षेत्रीय कार्यालय, अजमेर से सहायक निदेशक वी.एस. जैन, एवं सहायक अधीक्षक घेवर चन्द, भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एमएसएमई के डिप्टी डायरेक्टर शेलेन्द्र शर्मा कस्टम एवं जीएसटी अधीक्षक राजेश मीणा उदयपुर हैंडीक्राफ्ट संगठन के नितेश कपूर एवं उदयपुर जिले के करीब 50 से अधिक निर्यातकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन विपणन कार्यकारी प्रधान डाकघर, उमेश निमावत द्वारा किया गया। वहीं जनसंपर्क निरीक्षक प्रधान डाकघर रमेश भाटी ने डाक निर्यात केंद्र से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान डाकघर के प्रवर अधीक्षक द्वारा सभी गणमान्य अतिथियों का पौधा भेंट कर सम्मान किया गया।

डाकघर मंडल के प्रवर अधीक्षक अक्षय भानुदास गाडेकर ने बताया किउक्त कार्यक्रम का उद्देश्य निर्यातकों को भारतीय डाक विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही निर्यात संबंधी सेवाओं एवं सुविधाओं की जानकारी प्रदान करना तथा डाक विभाग एवं निर्यातकों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा। साथ ही साथ सभी निर्यातको को ऑन स्पॉट पर ही उनकी सभी समस्याओं का समाधान किया गया एवं जीएसटी एवं कस्टम डिपार्टमेंट की तरफ से एवं लघु और मध्यम उद्योगों के विभाग की तरफ से सभी अन्य विभागों की तरफ से निर्यात को बेहतर से बेहतर सुविधाएं एवं समन्वय बढ़कर निर्यात को अधिक से अधिक लाभ एवं सुविधाएं उपलब्ध कराना रहा।
राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत वरिष्ठजनों को सहायक उपकरण वितरित
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उदयपुर, 6 जून। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग एवं आर्टिफिशियल लिम्ब्स मैन्युफैक्चरिंग काॅर्पोरेशन आॅफ इंडिया (एएलआईएमसीओ) के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय वयोश्री योजना के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहायक उपकरण वितरण शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लगभग 900 लाभार्थियों को 76 लाख रुपये मूल्य के सहायक उ पकरण वितरित किए गए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में सांसद डाॅ मन्नालाल रावत, गोगुंदा विधायक प्रताप लाल तथा उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय वयोश्री योजना वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को अधिक सुगम एवं सम्मानजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने लाभार्थियों को प्रदान किए गए उपकरणों का सदुपयोग करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक गिरीश भटनागर, सामाजिक सुरक्षा अधिकारी प्रवीण पानेरी, हर्षित पंचोली सहित विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिविर का सफल संचालन एवं सम्पूर्ण कार्यक्रम का निर्देशन उपखंड अधिकारी (एसडीएम) गोगुंदा शुभम भैसारे के नेतृत्व में किया गया।
जल, जंगल, जमीन, जानवर एवं जन के समग्र वन हेल्थ मिशन से होगा पर्यावरण संरक्षण : डॉ. दत्तात्रेय चौधरी
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उदयपुर, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शिल्पग्राम नर्सरी में आयोजित वंदे गंगाजल अभियान के समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए ब्लॉक पशुपालन अधिकारी डॉ. दत्तात्रेय चौधरी ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, जानवर एवं जन के समग्र वन हेल्थ मिशन से ही पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास संभव है।

उन्होंने बताया कि गंगा दशमी से विश्व पर्यावरण दिवस तक चलाए गए वंदे गंगाजल संरक्षण जन अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा तथा प्रकृति के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना रहा है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि तहसीलदार बड़गांव हितेंद्र त्रिवेदी, नायब तहसीलदार राजपुरोहित, सहायक विकास अधिकारी हितेश जोशी, शिल्पग्राम नर्सरी प्रभारी राणावत सहित अनेक अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान वृक्षारोपण, नर्सरी अवलोकन, वंदे गंगाजल शपथ तथा पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। तहसीलदार हितेंद्र त्रिवेदी ने कहा कि 10 दिवसीय सरकारी अभियान भले ही पूर्ण हो गया हो, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को अपने कार्यालय अथवा घर पर कम से कम पांच पौधे लगाकर उन्हें पांच वर्षों तक जीवित रखने का संकल्प लेना चाहिए। इससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने तथा पृथ्वी के बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी।

डॉ. चौधरी ने वन हेल्थ मिशन की जानकारी देते हुए कहा कि जल, जंगल, जमीन और जानवरों का मानव जीवन में विशेष महत्व है तथा प्रकृति के साथ संतुलित तालमेल बनाकर ही स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जलवायु संकट भविष्य की नहीं बल्कि वर्तमान की चुनौती है। ग्रीनहाउस गैसों में कमी, स्वच्छ ऊर्जा में निवेश तथा टिकाऊ जीवनशैली अपनाकर ही इस चुनौती का समाधान संभव है।

उन्होंने वर्षा जल संचयन को जन-जन की आदत बनाने, तालाबों एवं प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, स्थानीय प्रजातियों के वृक्ष लगाने, प्लास्टिक उपयोग कम करने तथा ऊर्जा एवं पानी की बचत को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विशेष पहल करते हुए सज्जनगढ़ एवं अन्य विभागीय कार्यक्रमों में प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रखा गया। अतिथियों को कांच की बोतलों में पेयजल उपलब्ध कराया गया तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए तुलसी के पौधे भेंट किए गए। कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण एवं जल संवर्धन के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
मादड़ी में जमी कलक्टर की रात्रि चैपाल
सुनी समस्याएं, अधिकारियों को दिए निर्देश
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उदयपुर, 6 जून। पंचायत समिति फलासिया अंतर्गत ग्राम पंचायत झाड़ोल में शुक्रवार रात को जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल की रात्रि चैपाल जमी। इस दौरान जिला कलक्टर ने ग्रामीणों की परिवेदनाओं को पूर्ण संवेदनशीलता के साथ सुना तथा उनके त्वरित निस्तारण के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया।

प्रारंभ में जिला कलक्टर श्री अग्रवाल का स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने मादड़ी में नवनिर्मित जीएसएस प्रारंभ नहीं होने से विद्युत संबंधी परेशानियों से अवगत कराया। साथ ही जलापूर्ति के लिए बिछाई जा रही पाइपलाइन एवं नल कनेक्शन का कार्य अधूरा होने की शिकायत भी रखी। ग्रामीणों ने विद्युत आपूर्ति को नियमित करने, सड़क के बीच लगे विद्युत पोल हटाने, सीएचसी मादड़ी में मोर्चरी निर्माण, बैंक शाखा खोलने तथा एक वर्ष पूर्व हुई करीब 50 लाख रुपये की चोरी का खुलासा करने, मादड़ी में पुलिस चैकी खोलने, मादड़ी से भेरूजी मंदिर मार्ग पर पुलिया निर्माण तथा फलासिया से सागवाड़ा पाल तक डामर सड़क निर्माणआदि को लेकर परिवेदनाएं प्रस्तुत की। जिला कलेक्टर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देते हुए समस्याओं के शीघ्र निराकरण का भरोसा दिलाया।

रात्रि चैपाल में प्रशिक्षु आईएएस मणिमाला एन, जिला परिषद सीईओ विरमाराम, उपखंड अधिकारी कपिल कुमार कोठारी, तहसीलदार अभिषेक दरंगा, विकास अधिकारी प्रताप सिंह मीणा, पीडब्ल्यूडी, पीएचईडी एवं एवीवीएनएल के सहायक अभियंता, प्रशासक अंबावी देवी, समाजसेवी जगदीश कसोटा, अतिरिक्त विकास अधिकारी प्रकाश चंद्र भील, सहायक विकास अधिकारी बाबूलाल महरिया, ग्राम विकास अधिकारी हितेश पाटीदार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
शिल्पग्राम में 7 जून को होगा नाटक ‘साइकिल ऑफ लाईफ’ का मंचन
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उदयपुर, 5 जून। पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर द्वारा आयोजित मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के अंतर्गत रविवार 7 जून को ‘साइकिल ऑफ लाईफ’ नाटक का मंचन किया जाएगा।

पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया की प्रति माह आयोजित होने वाली मासिक नाट्य संध्या रंगशाला के अंतर्गत प्रिज्म थिएटर सोसायटी दिल्ली द्वारा साइकिल ऑफ लाईफ नाटक का मंचन रविवार 7 जून को सायं 7 बजे शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में किया जाएगा। इस नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन गिन्नी बब्बर करेंगे। इस कार्यक्रम में आमजन का प्रवेश निःशुल्क रहेगा।
(1) जल संरक्षण और वृक्षारोपण का संदेश
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उदयपुर, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वंदे गंगा अभियान का समापन कार्यक्रम शिल्पग्राम नर्सरी में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन एवं वृक्षारोपण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, सहायक विकास अधिकारी हीतेश जोशी, सहायक अभियंता नरेंद्र सोनी तथा कृषि अधिकारी वालूराम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
तहसीलदार ने वंदे गंगा अभियान के दौरान आयोजित गतिविधियों की जानकारी देते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया। कृषि अधिकारी वालूराम ने किसानों के लिए संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी दी।

सहायक अभियंता नरेंद्र सोनी ने जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वृक्षारोपण अभियानों में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। इस अवसर पर वन विभाग के रेंजर तेज सिंह ने उपस्थित लोगों को शिल्पग्राम नर्सरी का भ्रमण कराया तथा नर्सरी में विकसित पौधों एवं संरक्षण कार्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई तथा वृक्षारोपण भी किया गया
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(2) विश्व पर्यावरण दिवस पर एचसीएम रीपा ओटीसी में हरित प्रहरी कार्यक्रम

उदयपुर, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हरिश्चन्द्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान (एचसीएम रीपा) ओटीसी में राजस्थान राज्य सेवा के प्रशिक्षणरत अधिकारियों द्वारा ‘हरित प्रहरी कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के तहत पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए रैली, वृक्षारोपण और पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के अतिरिक्त निदेशक बी. डी. कुमावत द्वारा पर्यावरण जन-जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के साथ हुई। रैली ओटीसी परिसर से प्रारंभ होकर जगदीश चौक पहुंची, जहां प्रशिक्षु अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। इसके बाद संस्थान परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्थान के निदेशक एम. एल. चौहान तथा अतिरिक्त निदेशक बी. डी. कुमावत ने पौधारोपण किया गया। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। प्रशिक्षु अधिकारी भागीरथ कुमार बुंदेला ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विभिन्न प्रजातियों के कुल 250 पौधे लगाए गए।
विश्व पर्यावरण दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, पौधारोपण एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन
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उदयपुर, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पीएम श्री विद्यालय, लखावली में माय भारत केंद्र उदयपुर (युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार) के सहयोग से पर्यावरण संरक्षण विषयक जागरूकता कार्यक्रम, पौधारोपण, परिंडा बंधन प्रतियोगिता एवं पर्यावरण संरक्षण कविता प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी ग्राम पंचायत लखावली डॉ. मंजुलता परिहार रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में सहायक कृषि अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र बड़गांव डॉ. हिम्मतराम मेघवाल, उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता यूनिवर्सिटी सिटी कॉलेज ऑफ लॉ, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय,डॉ. हंसा जोशी ने की।
कार्यक्रम प्रभारी जिला युवा अधिकारी, माय भारत केंद्र, डॉ. समीर खान ने युवाओं एवं विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। इस अवसर पर माय भारत केंद्र उदयपुर के स्टाफ जगदीश पूरी गोस्वामी भी उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि डॉ. मंजुलता परिहार ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं पौधारोपण के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पौधे लगाकर उनकी नियमित देखभाल करनी चाहिए।विशिष्ट अतिथि डॉ. हिम्मतराम मेघवाल ने जल संरक्षण, प्लास्टिक उपयोग में कमी तथा प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. हंसा जोशी ने युवाओं को पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं में पर्यावरण संरक्षण कविता प्रतियोगिता में गुंजन गमेती ने प्रथम तथा मुस्कान गमेती ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। चार्ट प्रतियोगिता में जीनल मेघवाल प्रथम एवं चारु राठौड़ द्वितीय स्थान पर रहीं। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित कर सम्मानित कियागया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया गया तथा विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। कार्यक्रम का संचालन स्थानीय विद्यालय के अध्यापक राजकुमारी पानेरी द्वारा किया गया। आयोजन के संयोजक राजू कुंवर ने कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, युवा एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान - 2026
विश्व पर्यावरण दिवस पर जिला स्तरीय कार्यक्रम
जनभागीदारी से ही संभव है जल और पर्यावरण संरक्षण - सांसद डॉ. मन्नालाल रावत
कालका माता नर्सरी में हुए विविध आयोजन
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उदयपुर, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सीसारमा रोड स्थित कालका माता नर्सरी मेंवंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत जिला प्रशासन, वन विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय एवं ग्रीन पीपल सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में जिला स्तरीय आयोजित हुआ।

मुख्य अतिथि सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि जल और पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सामूहिक प्रयासों से ही सफल हो सकता है। उन्होंने युवाओं से प्रकृति संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। मुख्य समारोह में उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा, संभागीय मुख्य वन संरक्षक सेडूराम यादव, समाजसेवी गजपालसिंह,  ग्रीन पीपल सोसायटी अध्यक्ष राहुल भटनागर भी बतौर अतिथि मंचासीन रहे। अतिथियों ने जल संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरण संतुलन के लिए जनसहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया। इससे पूर्व उप वन संरक्षक मुकेश सैनी, अजय चित्तौड़ा, यादवेंद्रसिंह चुण्डावत, सहायक वन संरक्षक सुरेखा चैधरी आदि ने अतिथियों का स्वागत किया।

प्रकृति से साक्षात्कार: ट्रैकिंग और बर्ड वॉचिंग
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 6 बजे जंगल सफारी पार्क में हुई, जहां विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए पैदल ट्रैकिंग, बर्ड वॉचिंग एवं नर्सरी भ्रमण का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान बच्चों का उत्साह देखने योग्य रहा।

कैप और बीज वितरण से दिया हरित संदेश
वन विभाग द्वारा वंदे गंगा अभियान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिभागियों को विशेष कैप वितरित की गई। वहीं ग्रीन पीपल सोसायटी ने अमलतास, करंज, कचनार, सहजन और सीताफल सहित पांच प्रजातियों के बीज वितरित कर अधिक से अधिक पौधारोपण के लिए प्रेरित किया।

चंदन, महुआ और सीताफल के पौधे लगाए
मंचीय कार्यक्रम के पश्चात् अतिथियों ने परिसर में चंदन, महुआ, सीताफल सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया और उनके संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भी पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। समूचा आयोजन वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान की थीम पर आधारित रहा। वक्ताओं ने जल स्रोतों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

टॉक शो में युवाओं ने रखे सुझाव
समापन अवसर पर आयोजित टॉक शो में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, ग्रीन पीपल सोसायटी तथा वन विभाग की टीम ने भाग लिया। चर्चा के दौरान पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के विषयों पर विचार साझा किए गए। पिपलांत्री मॉडल की कार्बन क्रेडिट प्रणाली की जानकारी साझा की गई। इस दौरान पेड़ बचाओ, पैसा कमाओ की अवधारणा पर चर्चा करते हुए बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण को आजीविका और आर्थिक विकास से भी जोड़ा जा सकता है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आरएनटी मेडिकल कॉलेज में वृक्षारोपण
परिसर में वरिष्ठ चिकित्सकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर रोपे पौधे, देखभाल का लिया संकल्प
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उदयपुर, 5 जून। रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध चिकित्सालय परिसर में शुक्रवार को वृहद वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। एक शीर्ष चिकित्सा संस्थान होने के नाते आरएनटी मेडिकल कॉलेज ने इस कार्यक्रम को सीधे जन-स्वास्थ्य से जोड़ा है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने संदेश दिया कि पर्यावरण का सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है। वर्तमान में बढ़ती भीषण गर्मी, वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियां इंसानी शरीर को बीमार कर रही हैं। स्वास्थ्य संबंधी खतरों और सांस की बीमारियों से निपटने के लिए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी, प्राकृतिक और अचूक उपायों में से एक है। इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल पौधे लगाए गए, बल्कि आमजन से उनकी निरंतर देखभाल करने की भी अपील की गई।

इस विशेष मुहिम का मुख्य उद्देश्य चिकित्सालय परिसर को पूरी तरह स्वच्छ, हरित और इको-फ्रेंडली बनाना है, ताकि अस्पताल में आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और नर्सिंग-मेडिकल स्टाफ को शुद्ध हवा और तनावमुक्त, सेहतमंद वातावरण मिल सके। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यदि आज हम सब मिलकर प्रकृति की रक्षा करेंगे, तभी हमारी भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और स्वस्थ जीवन मिल सकेगा।

प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ. राहुल जैन ने बताया कि कॉलेज परिसर और पूरे उदयपुर शहर को हरा-भरा व प्रदूषण मुक्त बनाना हम सभी का सामूहिक और नैतिक दायित्व है। चिकित्सा विज्ञान मानता है कि शुद्ध पर्यावरण मरीजों की रिकवरी को तेज करता है। हमने प्रकृति के संरक्षण को हमेशा अपनी समृद्ध संस्कृति और जीवनशैली का अभिन्न अंग माना है। मैं संभाग के सभी नागरिकों, युवाओं और स्वास्थ्य कर्मियों से आग्रह करता हूँ कि वे अपने घर, चिकित्सालय, विद्यालय, कार्यालय और सार्वजनिक स्थलों पर अधिक से अधिक पौधे लगाएं। पेड़ लगाना केवल पर्यावरण की सेवा नहीं, बल्कि मानव जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करने का सबसे बड़ा पुनीत कार्य है।

कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने का सामूहिक संदेश दिया गया। वृक्षारोपण के इस महाभियान में डॉ. राहुल जैन के साथ अतिरिक्त प्रधानाचार्य (प्रथम) डॉ. विजय गुप्ता, अतिरिक्त प्रधानाचार्य (तृतीय) डॉ. कीर्ति, महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय अधीक्षक डॉ. आर. एल. सुमन, डॉ. मेघश्याम, डॉ. नरेंद्र राठौड़, नयन  सेठ एवं आर.एन.टी. प्रधानाचार्य कार्यालय में कार्यरत सभी वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और रोपे गए पौधों को जीवित रखने व सींचने की शपथ ली।
वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान - 2026
श्रमदान से निखर हो उठी 400 साल पुरानी धरोहर
उदयपुर के सीटीएई परिसर स्थित सुंदर बाई बावड़ी की सफाई
काॅलेज प्रशासन तथा आमजन ने किया श्रमदान
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उदयपुर, 5 जून। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की पहल पर प्रारंभ किए गए वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान में आमजन की सहभागिता से ऐतिहासिक जल स्त्रोतों का कायाकल्प हो रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर महाराणा प्रताप कृषि एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय से संबद्ध काॅलेज आॅफ टेक्नोलाॅजी एण्ड इंजीनियरिंग के फाॅर्म में स्थित ऐतिहासिक सुंदरबाई बावड़ी पर आमजन से स्वस्फूर्त श्रमदान किया। इससे लगभग 400 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक सुंदर बाई बावड़ीका स्वरूप निखर उठा।

संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार सुधीर कुमार वर्मा ने बताया कि क्षेत्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी प्रातःकालीन भ्रमण के लिए एकत्र होते हैं। अभियान से प्रेरित होकर क्षेत्रवासियों ने बावड़ी की सफाई का जिम्मा उठाया। काॅलेज प्रबंधन से चर्चा कर शुक्रवार को सामूहिक श्रमदान किया गया। इसमें उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए बावड़ी की साफ-सफाई कर इसकी ऐतिहासिक गरिमा को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया। श्रमदान के दौरान बावड़ी परिसर में फैली गंदगी, झाड़-झंखाड़ और कचरे को हटाया गया। सामूहिक प्रयासों से वर्षों पुरानी इस जल धरोहर का स्वरूप निखर कर सामने आया। अभियान में शामिल लोगों ने जल स्रोतों के संरक्षण एवं पारंपरिक जल संरचनाओं के महत्व पर भी चर्चा की तथा इनके संरक्षण का संकल्प लिया। प्रतिभागियों ने कहा कि बावड़ियां केवल जल संचयन की संरचनाएं ही नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की पहचान भी हैं। ऐसे में इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए जनभागीदारी आवश्यक है। इस दौरान काॅलेज प्रशासन से मनजीतसिंह, फाॅर्म इंचार्ज सचिन सहित आमजन उपस्थित रहे।

वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत जिलेभर में जल संरक्षण, जल स्रोतों की साफ-सफाई और जनजागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सुंदर बाई बावड़ी में हुए इस श्रमदान ने जल संरक्षण के प्रति समाज की सहभागिता और जागरूकता का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया।
वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026 अन्तर्गत विश्व पर्यावरण दिवस पर विविध गतिविधियों का आयोजन
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उदयपुर, 5 जून। वन्दें गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026 के तहत शुक्रवार को गिर्वा पंचायत समिति स्तरीय कार्यक्रम का समापन समारोह विश्व पर्यावरण दिवस पर ग्राम पंचायत चणावदा  में आयोजित किया गया। इसके तहत पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन एवं जन जागरूकता हेतु विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उदेश्य आमजन में जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढाना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उदयपुर ग्रामीण विधायक श्री फूल सिंह मीणा उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होने आमजन से जल बचाने, एक पेड मां के नाम, पौधारोपण को बढावा देने एवं पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया एवं उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों, ग्रामीणजनों को पर्यावरण संरक्षण एवं जल बचाने का संकल्प दिलाया। विधायक ने पौधारोपण, तुलसी के पौधों का वितरण, नर्सरी का अवलोकन किया गया।

विकास अधिकारी श्री अजीत कुमार मीणा ने जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अभियान के माध्यम से जल संरक्षण संरचानो के संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा जल के विवेक पूर्ण उपयोग हेतु निरन्तर जनजागरूकता एवं सक्रिय भागीदारी फैलाने संबंधी कार्यक्रमों की जानकारी प्रदान की। इसके साथ ही पंचायत समिति गिर्वा में भी वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

उक्त कार्यक्रम में वर्तमान एवं पूर्व जनप्रतिनिधि, वन विभाग एवं अन्य समस्त विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी के साथ बडी संख्या में ग्रामीण महिला एवं पूरूष उपस्थित रहे।
डीएमएफटी के तहत स्वीकृत कार्यों में लाएं तेजी- जिला कलक्टर
डीएमएफटी के तहत समीक्षा बैठक
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उदयपुर, 5 जून। जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) के अंतर्गत स्वीकृत विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा को लेकर शुक्रवार को जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने कलेक्ट्रेट मिनी सभागार में बैठक ली। बैठक में विभिन्न कार्यकारी एजेंसियों द्वारा संचालित कार्यों की विभागवार समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने स्वीकृत परियोजनाओं की प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृतियों की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली।

बैठक के दौरान जिला कलक्टर ने डीएमएफटी के तहत पिछले गवर्नेंस कमेटी बैठक तक स्वीकृत कार्यों की वर्तमान प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।साथ ही 4 जून को आयोजित बैठक में लिए गए प्रस्तावों को भी जल्द से जल्द गति देने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी विभाग निर्धारित समयावधि में कार्य पूर्ण कराने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर कार्य करें।कलक्टर अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वीकृत कार्यों को शीघ्र गति प्रदान की जाए ताकि इनके सकारात्मक परिणाम आमजन को धरातल पर दिखाई दें। उन्होंने कहा कि डीएमएफटी के माध्यम से क्षेत्र के विकास और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण का उद्देश्य तभी सफल होगा, जब कार्य गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध तरीके से पूर्ण किए जाएं। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने-अपने कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा लंबित मामलों एवं आगामी कार्ययोजना से अवगत कराया। जिला कलक्टर ने आवश्यक समन्वय स्थापित कर सभी कार्यों को गति देने के निर्देश दिए। बैठक में प्रशिक्षु आईएएस मणिमाला एन., सीईओ जिला परिषद विरमाराम, कोषाधिकारी प्रीति वर्मा सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं जिले के सभी विकास अधिकारी वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बैठक में वर्चुअली शामिल हुए।
(1) वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान - 2026
सांस्कृतिक संध्या में गूंजा जल संरक्षण का संदेश
लोक कलाकारों ने बांधा समां
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उदयपुर, 5 जून। वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026 के तहत जिला प्रशासन एवं पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार शाम नगर निगम के सुखाड़िया रंगमंच पर भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोक कलाकारों एवं स्कूली बालिकाओं ने रंगारंग प्रस्तुतियों के माध्यम से जल एवं पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश देकर दर्शकों को जागरूक किया।

सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत लोक संस्कृति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों के साथ हुई। प्रसिद्ध मांगणियार कलाकार शौकत खान एवं दल ने अपने सुरों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। महात्मा गांधी स्कूल धानमण्डी की छात्राओं धु्रवी एवं सारा ने अपनी नृत्य प्रस्तुति के माध्यम से जल का महत्व रेखांकित किया। वहीं बारां की लोक कलाकार अनीता देवी एवं उनके समूह ने चकरी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति से दी। वहीं छात्रा योगिता डांगी ने राजस्थानी लोक नृत्य के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए जल संरक्षण के संकल्प को दोहराया। उपनिदेशक पर्यटन शिखा सक्सेना ने सभी कलाकारों का अभिनंदन कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा अभियान के उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग से लक्ष्मण वैष्णव सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी, आमजन उपस्थित रहे। संचालन रणवीरसिंह राणावत ने किया।
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(2) डाइट उदयपुर में विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
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उदयपुर, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), उदयपुर में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण विषयक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा डीएलएड शिक्षक-प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता एवं जिला शिक्षा अधिकारी शीला काहाल्या ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक समाज का पथप्रदर्शक होता है। यदि शिक्षक-प्रशिक्षु पर्यावरण के प्रति जागरूक होंगे तो वे आने वाली पीढ़ियों में भी प्रकृति संरक्षण के संस्कार विकसित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल पौधा लगाना नहीं, बल्कि उसे वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल करना होना चाहिए।
पी एंड एम प्रभारी डॉ. मृदुला तिवारी ने विश्व पर्यावरण दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह अभियान आज एक वैश्विक आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने प्रकृति के प्रति सम्मान और सांस्कृतिक एवं जैविक पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। ईटी प्रभागाध्यक्ष बीना कंवर राजपूत ने वर्ष 2026 की वैश्विक थीम ‘प्रकृति के साथ जीना’ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मानव को प्रकृति पर प्रभुत्व स्थापित करने के बजाय उसके साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीना सीखना होगा।

गिरीश चैबीसा ने खेजड़ली बलिदान और चिपको आंदोलन का स्मरण कराते हुए दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलावों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने सिंगल-यूज प्लास्टिक के बहिष्कार और जल संरक्षण पर जोर देते हुए उपस्थित सभी संभागियों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन की सामूहिक शपथ दिलाई।

इस अवसर पर प्राध्यापक हरिदत्त शर्मा एवं त्रिभुवन चैबीसा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में डीएलएड प्रथम वर्ष के विकास मौसठ, भावेश पटेल, मोनिका गुप्ता तथा द्वितीय वर्ष के ललिता गुर्जर, ऋषभ मेहता, मानस कलाल, इंदिरा गरासिया, जयदेव सिंह पंवार और रोनकराज सिंह भी विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में सत्यप्रिय आर्य, गायत्री जोशी, दीपक सेन, सुरेन्द्र सिंह शक्तावत, अमिता शर्मा, रियाज अहमद, पुस्तकालयाध्यक्ष कल्पना दीक्षित एवं चिराग सेनानी सहित संस्थान परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंतिम चरण में संस्थान की प्राचार्या ने रमेश बड़गुर्जर एवं नीरू बेन के सहयोग से संस्थान परिसर में पौधारोपण किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
भागवत कथा में बलि के द्वार पधारे वामन भगवान्

भक्ति की महिमा अपार  : संत श्री कृष्णानंद जी महाराज

उदयपुर , सेक्टर 5 , शांति नगर में पुरूषोत्तम मास में राडा जी मंदिर परिसर में समस्त श्रेत्रवासियो द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में तृतीय दिवस व्यासपीठ से श्री वृंदावन धाम आश्रम, तीतरडी पीठाधीश्वर सुप्रसिद्ध भागवताचार्य संत कृष्णानंद महाराज ने आध्यात्मिक चर्चा करते हुए कहा कि निःसंदेह, भक्ति की महिमा अपार है। यह वह दिव्य ऊर्जा है जो मनुष्य को प्रेम, श्रद्धा और समर्पण से जोड़ती हैं। सच्चे मन से की गई भक्ति जीवन के सभी अंधकार, अहंकार और चिंताओं को मिटाकर आंतरिक शांति और परमानंद प्रदान करती हैं। 

कथा प्रसंग में मंगलवार को प्रभु के वामन भगवान की दिव्य झांकी को कथा परिसर में जीवंत किया गया। शहर के सेक्टर 5 में चल रही भागवतकथा से माहौल धर्ममय बना हुआ है। महाराज जी ने वामन अवतार का प्रसंग विस्तार से सुनाते हुए श्रोताओं को बताया कि जब राजा बलि अश्वमेध यज्ञ कर रहा था तो देवताओं को डर सताने लगा कि राजा इन्द्र की गददी पर आसीन नहीं हो जाए। इस पर देवताओं ने भगवान विष्णु के पास जाकर याचिका लगाई। भगवान विष्णु ने वामन अवतार का वेश धरा और राजा बलि के पास पहुंचकर तीन पैर की जमीन मांग ली। राजा बलि ने यह वचन दे दिया और भगवान ने विशाल काय रुप लेकर तीनों पैरों में ही संसार को नाप लिया।

 कथा के दौरान प्रसंग को सुनकर श्रोतागण भक्तिभाव में डूब गए। महाराज जी ने भक्तों को इस लीला के पीछे के मूल रहस्य को समझाया कि वामन अवतार धारण कर विष्णु भगवान् राजा बलि का समर्पण भाव की परिक्षा लेना चाहते थे जिसमें राजा बलि सफल हुए। सभा अंत में समिति के सदस्यों ने सपरिवार भगवान् वामन के चरणों का पूजन कर आरती की।
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*विश्व पर्यावरण दिवस पर मांझी मंदिर में वृक्षारोपण एवं परिंडा स्थापना कार्यक्रम संपन्न*
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उदयपुर, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारतीय किसान संघ, वन उत्थान संस्थान उदयपुर एवं मांझी मंदिर भक्तजन परिवार के संयुक्त तत्वावधान में मांझी मंदिर प्रांगण, चांदपोल बाहर में वृक्षारोपण कार्यक्रम एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन एवं हरित विकास का संदेश देते हुए पीपल, आम, आंवला, कनेर, अमरूद, आसापाल गूलर  इत्यादि विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गए तथा उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए वृक्षारोपण अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प लेना चाहिए।

विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय किसान संघ की गिरवा इकाई द्वारा नाई, बुजड़ा एवं विभिन्न 21 स्थानों पर पक्षियों के लिए परिंडे भी लगाए गए। इस पहल का उद्देश्य भीषण गर्मी में पक्षियों को जल उपलब्ध कराना तथा जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देना रहा। वन उत्थान संस्थान के अध्यक्ष श्री सुरेश शर्मा द्वारा उदयपुर के आसपास काटी जा रही पहाड़ियों पर रोष व्यक्त करते हुए आव्हान किया कि हमें सब मिलकर अवैध कटाई को रोकने के साथ उदयपुर शहर के आसपास स्थित पहाड़ियों को हरा भरा बनाने के लिए उदयपुर विकास प्राधिकरण एवं नगर निगम से वार्ता कर पहाड़ियों के विकास की योजना तैयार करवानी चाहिए जिससे शहर में पर्यटन विकास को बल मिलेगा एवं स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।

कार्यक्रम में भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं सहित अनेक पर्यावरण प्रेमी नागरिक उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से डॉ. जगदीश चौधरी, डॉ. के.के. यादव, डॉ. ब्रजगोपाल छिपा, समाजसेवी रविंद्र जी नागदा एडवोकेट भारत कुमावत, भंवर प्रजापत, दिलीप लोहार, सोहन तेली, ललित पालीवाल, रोहित चौबीसा,निर्मल चौबीसा,कुंदन कुमावत, एकलिंगनाथ पालीवाल, अनुराग कुमावत, विनोद कुमावत,,सुरेश शर्मा तथा देवस्थान विभाग की अधिकारी श्रीमती सुमित्रा जी उपस्थित रहे। मांझी मंदिर के भक्तजनों एवं पर्यावरण प्रेमियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों ने पर्यावरण संरक्षण, जल बचत एवं वृक्षों के संरक्षण का संकल्प लिया तथा अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ने का आह्वान किया।
"एक वृक्ष – सौ सुख, हरित पर्यावरण – सुरक्षित जीवन" के संदेश के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

भारतीय किसान संघ, वन उत्थान संस्थान उदयपुर एवं 
मांजी मंदिर सनातन भक्तजन