मसूरी एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण का विरोध नहीं, लेकिन प्रक्रिया पर उठे सवालः- गुनसोला
पूर्व विधायक ने कहा एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण को लेकर नगर पालिका जारी करे ब्लूप्रिंट और श्वेत पत्र
मसूरी। मसूरी म्युनिसिपल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज (एमपीजी कॉलेज) के प्रांतीयकरण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला ने कॉलेज के प्रांतीयकरण का विरोध करने से इनकार करते हुए इसकी प्रक्रिया और भविष्य को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के हित में कॉलेज का बेहतर संचालन और उच्च शिक्षा की सुविधाओं का विस्तार जरूरी है, लेकिन प्रांतीयकरण से पहले सभी वैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कॉलेज का विश्वविद्यालय और संबंधित संस्थाओं से पुराना संबंध रहा है और कॉलेज की व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं का पालन किया जाता रहा है। ऐसे में प्रांतीयकरण के मामले में भी सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
घटती छात्र संख्या और शिक्षकों की कमी पर चिंता
गुनसोला ने कॉलेज में घटती छात्र संख्या को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समय के साथ मसूरी में शिक्षा का स्वरूप बदला है। शहर में निजी और मिशनरी स्कूलों की संख्या बढ़ने के कारण विद्यार्थियों को स्कूली स्तर पर ही बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इसका असर उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज में आने वाले विद्यार्थियों की संख्या पर भी पड़ा है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में वर्तमान में स्थायी शिक्षकों की संख्या बेहद कम है और करीब चार-पांच स्थायी शिक्षक ही कार्यरत बताए जा रहे हैं, जिनमें से कई आने वाले समय में सेवानिवृत्त होंगे। ऐसे में सवाल यह है कि कॉलेज के शैक्षणिक ढांचे और इंफ्रास्ट्रक्चर को किस तरह मजबूत किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कई शिक्षकों की नियुक्ति के बाद भी उनके भुगतान का मामला लंबित होना गंभीर विषय है। ऐसे मामलों का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए, ताकि शिक्षकों और कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े और कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित न हो।
‘शिक्षा का मंदिर, राजनीति का अखाड़ा नहीं’
पूर्व विधायक ने कॉलेज में शिक्षक और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एमजी कॉलेज शिक्षा का मंदिर है और इसे राजनीतिक गतिविधियों का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए। यदि किसी शिक्षक या कर्मचारी की ओर से नियमों के विपरीत राजनीतिक गतिविधियां की जा रही हैं तो कॉलेज प्रबंधन को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉलेज नगर पालिका के अधीन है और नगर पालिका अध्यक्ष कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भी होते हैं। ऐसे में प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि कॉलेज में अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण कायम रखा जाए तथा किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि को शिक्षा व्यवस्था पर हावी न होने दिया जाए।
कॉलेज की पूरी भूमि और भवन को लेकर स्पष्टता मांगी
गुनसोला ने प्रांतीयकरण के बाद कॉलेज की संपत्ति को लेकर भी स्पष्ट नीति की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि एमजी कॉलेज का प्रांतीयकरण किया जाता है तो कॉलेज की संपूर्ण भूमि, भवन और उससे संबंधित परिसंपत्तियां भी कॉलेज की व्यवस्था में सुरक्षित रहनी चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि प्रांतीयकरण की प्रक्रिया के दौरान कॉलेज की जमीन का किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उन्होंने नगर पालिका प्रशासन से प्रांतीयकरण के लिए तैयार किए गए प्रस्ताव, उसकी पूरी रूपरेखा और भविष्य की योजना को सार्वजनिक करने की मांग की।
‘नगर पालिका एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण को लेकर जारी करे श्वेतपत्र’
पूर्व विधायक ने नगर पालिका प्रशासन से प्रांतीयकरण के पूरे मामले पर ब्लूप्रिंट और श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता के सामने यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रांतीयकरण के बाद कॉलेज की भूमि, भवन, शिक्षकों, कर्मचारियों, पाठ्यक्रम, वित्तीय व्यवस्था और विद्यार्थियों के हितों को लेकर क्या योजना है। उन्होंने कहा कि पूरी जानकारी सार्वजनिक होने से लोगों के मन में उठ रहे संदेह दूर होंगे और कॉलेज के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
एमपीजी कॉलेज की भूमि पर तहसील बनाने की कवायद पर जताई आपत्ति
गुनसोला ने एमपीजी कॉलेज की भूमि के किसी अन्य उपयोग की संभावित कवायद पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कॉलेज की भूमि पर तहसील बनाए जाने की बात सामने आ रही है, जो उचित नहीं है। उनका कहना है कि यदि कॉलेज को भविष्य में विश्वविद्यालय का स्वरूप देना है तो उसके लिए पर्याप्त भूमि का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एमजी कॉलेज की भूमि का इस्तेमाल किसी अन्य प्रयोजन के लिए किया गया और इससे कॉलेज के भविष्य या विश्वविद्यालय के प्रस्ताव पर असर पड़ा तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
‘विश्वविद्यालय के लिए भूमि सबसे जरूरी’
गुनसोला ने कहा कि एमपीजी कॉलेज को भविष्य में विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उसकी भूमि को सुरक्षित रखना जरूरी है। यदि कॉलेज की जमीन को किसी दूसरे विभाग या संस्था के उपयोग में दे दिया गया तो विश्वविद्यालय के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि मसूरी के इस ऐतिहासिक कॉलेज को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाई जानी चाहिए। प्रांतीयकरण हो या विश्वविद्यालय का स्वरूप दिया जाए, हर स्थिति में प्राथमिकता विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा, पर्याप्त शिक्षक, आधुनिक सुविधाएं और सुरक्षित शैक्षणिक भविष्य उपलब्ध कराने की होनी चाहिए। पूर्व विधायक ने नगर पालिका प्रशासन से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने और कॉलेज की संपत्ति व भविष्य को लेकर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
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Mussoorie, Dehradun | Sep 7, 2026