भारत शिपिंग सेक्टर में अपनी ताकत बनाना चाहता है। दुनिया की कुल जहाज बनाने (शिप बिल्डिंग) की क्षमता में भारत का हिस्सा 1% से भी कम है। चीन, दक्षिण कोरिया और जापान मिलकर दुनियाभर में बनने वाले जहाजों का 98.5% हिस्सा बनाते हैं। अकेले चीन की हिस्सेदारी 60% है। भारत भी उस खास ग्रुप में शामिल होने को इच्छुक है।
सरकार ने 2030 तक देश को जहाज बनाने वाले टॉप 10 देशों में और 2047 तक टॉप पांच देशों में शामिल करने के लिए 69,725 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी है। भारतीय शिपयार्ड नेवी की मांग के कारण मुख्य रूप से घरेलू जरूरतों पर ध्यान देते रहे हैं।
सरकार उन्हें एक्सपोर्ट पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड (MDL), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE), गोवा शिपयार्ड्स लिमिटेड (GSL) और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) इस सेक्टर की प्रमुख प्लेयर्स हैं। इनसे कहा गया है कि वे भारत को पेट्रोल कार्वेट और छोटे जहाज बनाने वाले क्षेत्रीय �
Korba, Korba | Sep 29, 2026