सम्भल में Live 3 Exclusive आचार्य प्रमोद कृष्णन को असमोली से चुनाव लड़ने की डॉ अमित कुमार उठवाल एडवोकेट ने दी खुली चुनौती वीडियो को शेयर
यूपी के जनपद सम्भल में राजनीतिक चाटुकारिता छोड़कर हिंदू-मुस्लिम एकता की बात करें प्रमोद त्यागी: डॉ. अमित कुमार उठवाल एडवोकेट धार्मिक आस्था के नाम पर राजनीतिक बयानबाजी दुर्भाग्यपूर्ण, देश में भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करने की जरूरत प्रेस से वार्ता करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आरटीआई विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी डॉ. अमित कुमार उठवाल एडवोकेट ने प्रमोद त्यागी पर निशाना साधते हुए कहा कि आजकल कुछ लोग प्रमोद त्यागी को ‘प्रमोद श्री’, ‘पीठाधीश्वर’ और अब ‘जगद्गुरु’ जैसे संबोधनों से विभूषित करके उनका महिमामंडन करने में लगे हैं। लेकिन किसने इनको, आचार्य, पीठाधीश्वर, और जगतगुरु की उपाधि दी आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया है उन्होंने आरोप लगाया कि प्रमोद त्यागी लंबे समय से सरकारी भूमि पर कब्जे को लेकर विवादों में रहे हैं।डॉ. उठवाल ने कहा कि कांग्रेस से निष्कासित होने के बाद से प्रमोद त्यागी लगातार कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी जी के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि वह राजनीतिक हताशा में इस प्रकार के बयान दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रमोद त्यागी अब भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करने में लगे हुए हैं।डॉ. उठवाल ने प्रमोद त्यागी के उस कथित बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने नवरात्र के नौ दिनों तक मौन धारण करने और बाद में स्वप्न में मां भगवती के दर्शन होने का उल्लेख करते हुए वर्ष 2027 के चुनाव में समाजवादी पार्टी की बड़ी हार की बात कही थी।उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था प्रत्येक व्यक्ति का निजी विषय है। देवी-देवताओं के नाम पर चुनावी भविष्यवाणी करना और धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है। प्रमोद त्यागी को चाहिए कि वह देवी-देवताओं के नाम पर राजनीतिक बयानबाजी करने से बचें और सभी धर्मों की आस्थाओं का सम्मान करें।डॉ. उठवाल ने कहा कि प्रमोद त्यागी को यह समझना चाहिए कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें राजनीतिक।पहचान और अवसर दिए थे। इसके बावजूद यदि वह कांग्रेस और राहुल गांधी पर लगातार निशाना साध रहे हैं तथा भाजपा की प्रशंसा कर रहे हैं, तो इससे उनकी राजनीतिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केवल राजनीतिक प्रशंसा और चाटुकारिता से राज्यसभा की सदस्यता मिलने की कोई गारंटी नहीं होती।उन्होंने प्रमोद त्यागी के पुराने सार्वजनिक व्यवहार और वर्तमान बयानों के बीच कथित विरोधाभास का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले वह मुस्लिम समुदाय के कार्यक्रमों में शायरी करते थे, नात पढ़ते थे और मौला अली की प्रशंसा में कसीदे पढ़ते थे। आज यदि वही व्यक्ति मुस्लिम समुदाय के प्रति नकारात्मक टिप्पणियां करता है और राष्ट्रभक्ति को किसी एक राजनीतिक दल के समर्थन से जोड़ता है, तो यह गंभीर वैचारिक विरोधाभास है।डॉ. उठवाल ने सवाल किया कि जो व्यक्ति कभी ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की बात करता था, उसके विचारों में सत्ता के प्रति राजनीतिक निकटता के कारण इतना बदलाव कैसे आ गया? उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति किसी एक राजनीतिक दल की बपौती नहीं है। देश का प्रत्येक नागरिक, चाहे उसका धर्म, जाति या राजनीतिक विचार कुछ भी हो, राष्ट्र के प्रति समान रूप से सम्मान और समर्पण रख सकता है।अंत में डॉ. अमित कुमार उठवाल एडवोकेट ने कहा कि देश और प्रदेश को धर्म तथा राजनीति के नाम पर बांटने के बजाय हिंदू-मुस्लिम एकता, आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करने की आवश्यकता है। नेताओं को चाहिए कि वे समाज में नफरत फैलाने वाली बयानबाजी से बचें और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, विकास तथा सामाजिक सद्भाव जैसे वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करें।उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता, आपसी सम्मान और साझा सांस्कृतिक विरासत में है। राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर देश और प्रदेश में शांति, सद्भाव तथा भाईचारे का वातावरण बनाए रखना सभी जिम्मेदार नेताओं का कर्तव्य है।
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