*शिक्षक दिवस मनाया सार्थक हो जाएगा जब बेटियों के प्रति भेदभाव खत्म हो जाएगा-आचार्य रामदयालजी महाराज*
*शिक्षक को परमात्मा का रूप मान श्रद्धाभाव रखने वाले की प्रगति कोई नहीं रोक सकता*
*माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में दैनिक चातुर्मासिक सत्संग*
भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार )5 सितम्बर। इंजीनियर, वकील या डॉक्टर की भूल किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकती या उसकी भरपाई हो सकती लेकिन राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी होने से शिक्षक की एक भूल का असर पूरे राष्ट्र पर पड़ता है। शिक्षक ही बच्चें का जीवन संवारता है ओर गुणों को निखारता है। जो अपने शिक्षक को परमात्मा के रूप में मान उसके प्रति श्रद्धाभाव रखता है उसकी प्रगति परमात्मा भी नहीं रोक सकते है। हमे अपने शिक्षक के प्रति हमेशा निष्ठावान होना चाहिए। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर दैनिक सत्संग में समाज में शिक्षक की भूमिका पर चर्चा करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मां अपने बच्चें की सबसे बड़ी शिक्षक होती है। मां की शिक्षा से ही वीर शिवाजी ओर राणा प्रताप तैयार होते है। सबसे बड़ा शिक्षक समय होता है जो प्रभावी रूप से सिखाता है।
आचार्यश्री ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा जगत को नई उंचाई प्रदान की ओर उनका चिंतन इतना गहन गंभीर था कि वह कहते थे मुझे राष्ट्रपति के रूप में नहीं एक शिक्षक के रूप में पहचाना जाए। ऐसे लोगों के विचारों में दल नहीं देश जीवित होता है। हमारी वर्तमान राष्ट्राध्यक्षा द्रोपदी मुर्मु में अहंकार शून्य ज्ञानपूर्व जीवन की झलक मिलती है ओर उन्होंने राष्ट्रपति के रूप में नारी जगत का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि हमारा शिक्षक दिवस, जन्माष्टमी आदि पर्व मनाना तभी सार्थक होगा जब समाज में बेटियों से भेदभाव ओर कन्या भ्रूण हत्या का कलंक सदा के लिए मिट जाएगा। कन्या नहीं होती तो मीराबाई, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, भक्तिमति द्रोपदी, सती अनुसूया, हाड़ा रानी, कल्पना चावला जैसी वीरांगनाएं ओर प्रतिभाएं कहां से आती। भारतीय नारियों जैसा क्रांतिकारी इतिहास विश्व में कहीं की नारियों का नहीं होने के पीछे आधारभूत तत्व शिक्षा था।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि भगवान भी कपिल अवतार में शिक्षक बनकर आए ओर सारे संसार को शिक्षा प्रदान की। कपिल भगवान ओर उनकी माता का भगवत भक्ति संवाद भागवत का प्राण है। भागवत नाम का स्मरण करने से हर संकट से मुक्ति प्राप्त कर सकते है। परमात्मा साधक की साधना को देखते है। जीवन में भजन करते रहो सुख शांति एवं आनंद की प्राप्ति होगी। भजन करने से व्यक्ति की मानसिकता भी बदलती है। परमात्मा के प्रति हमारा विश्वास ही फल का प्रदाता है।
*आचार्यश्री ने किया पुस्तक ‘फाइनेंस के लड्डु’ का विमोचन*
आचार्य रामदयाल महाराज ने सत्संग में मुंबई प्रवासी भीलवाड़ा निवासी कपिल लड्ढ़ा द्वारा लिखित पुस्तक ‘फाइनेंस के लड्डु’ के द्वितीय संस्करण का विमोचन किया। उन्होंने रामस्नेही भक्त बद्रीनारायण लड्ढ़ा के पुत्र पुस्तक लेखक कपिल के प्रति मंगलभावनाएं व्यक्त की। विमोचन करने वालों में संतो ंके साथ चातुर्मास समिति के पदाधिकारी भी शामिल थे। इस पुस्तक में वित्त जैसे विषय को सहज एवं सरल भाषा में समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि सही जानकारी व समझ के साथ पैसे का प्रबंधन किया तो जीवन में पछताना नहीं पड़ेगा। सत्संग में बताया गया कि इस पुस्तक से प्राप्त होने वाला पूरा पैसा सामाजिक कार्यो में समर्पित किया जाएगा। विमोचन समारोह का संचालन रामनारायण लड्ढ़ा ने किया। आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।
*श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह का आयोजन 13 सितम्बर से*
आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज के सानिध्य में माणिक्यनगर रामद्वारा में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से 13 से 20 सितम्बर तक विराट श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह का आयोजन होगा। इस दौरान 108 भागवत मूल पाठ का एतिहासिक आयोजन भी होगा। पुष्कर से आने वाले 108 वेद पाठी विद्धान भागवत का मूल पाठ करेंगे। इन 108 भागवत का पूजन 108 यजमान परिवार करेंगे। इस सप्ताह में प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा एवं सुबह 10.30 बजे से 11.30 बजे तक एवं शाम को 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा। वाणीजी का प्रवचन आचार्य श्री रामदयालजी महाराज के मुखारबिंद से होगा। श्रीमद् भागवत कथा का वाचन संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना द्वारा किया जाएगा।