*कृषि एवं संबद्ध विभागों की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उपायुक्त ने दिए निर्देश*
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*किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने एवं स्वरोजगार के अवसर सृजित करने पर जोर*
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पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित प्रकोष्ठ में उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में कृषि एवं संबद्ध विभागों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि, पशुपालन, मत्स्य, भूमि संरक्षण, उद्यान, कृषि विज्ञान केंद्र एवं सहकारिता विभाग के पदाधिकारियों के साथ विभागवार संचालित योजनाओं, परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई। उक्त बैठक में संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान उपायुक्त ने भूमि संरक्षण विभाग के माध्यम से तालाब निर्माण, कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण एवं तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने, मत्स्य विभाग द्वारा मत्स्य बीज वितरण तथा केज कल्चर के माध्यम से मछली पालन को बढ़ावा देने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए अधिक से अधिक किसानों एवं ग्रामीण परिवारों को मत्स्य पालन से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाए।
उपायुक्त ने पशुपालन विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए बकरी, सूअर एवं गाय वितरण के साथ-साथ मवेशियों के नियमित टीकाकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि पशुपालन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका से जोड़ने के लिए योजनाओं का लाभ पात्र लाभुकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए। साथ ही, जेएसएलपीएस के तहत कार्यरत पशु सखियों को आवश्यकतानुसार मवेशी उपलब्ध कराने की दिशा में समन्वय के साथ कार्य करने को कहा, ताकि पशु सखी ग्रामीण स्तर पर पशुपालकों को बेहतर तकनीकी सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान कर सकें।
सहकारिता विभाग की समीक्षा के क्रम में बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित किसानों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने तथा पात्र किसानों को योजनाओं से जोड़ने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि फसल बीमा योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करते हुए किसानों को समय पर योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाए।
कृषि विभाग की योजनाओं एवं परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों की सुलभता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग, उन्नत कृषि पद्धतियों एवं तकनीकी नवाचारों के संबंध में नियमित प्रशिक्षण दिया जाए, जिससे कृषि कार्य में लागत कम करने के साथ उत्पादकता एवं आय में वृद्धि की जा सके। उन्होंने जेएसएलपीएस के कृषि उत्पादक समूहों एवं अन्य किसान समूहों को कृषि कार्यों से जोड़ने तथा विभागीय योजनाओं के साथ उनका बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि जिले में उपलब्ध मानव संसाधन, कृषि संसाधन एवं संस्थागत व्यवस्थाओं का समुचित समन्वय कर किसानों को एकीकृत रूप से प्रशिक्षण, तकनीक, कृषि उपकरण, बीज, बाजार एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उद्यान विभाग के माध्यम से संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने फल, सब्जी एवं अन्य उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा देने, किसानों को उन्नत तकनीक से अवगत कराने तथा उद्यानिकी फसलों के माध्यम से अतिरिक्त आय के अवसर विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करने एवं लाभुकों को समय पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से किसानों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने, आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी देने तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उन्नत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने पर भी चर्चा हुई।
उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान के किसान एवं ग्रामीण परिवार तक पहुंचाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। इसलिए कृषि के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी जैसी गतिविधियों को जोड़कर किसानों की आय में वृद्धि तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर सृजित किए जाएं।
उन्होंने पदाधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में गति लाने, पात्र लाभुकों का चयन पारदर्शी तरीके से करने, नियमित क्षेत्र भ्रमण एवं योजनाओं की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही, किसानों को विभागीय योजनाओं की जानकारी समय पर उपलब्ध कराने तथा किसी भी स्तर पर लाभ प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों का त्वरित समाधान करने पर भी विशेष जोर दिया।