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Saranda Live

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*मलेरिया जागरूकता*
*जल्दी जांच, सही इलाज - मलेरिया पर प्रभावी वार*
*मलेरिया जागरूकता:- सुरक्षित रहें, जागरूक रहें, मलेरिया से बचें*

*बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं.*

*जल्दी जांच, सही इलाज - मलेरिया पर प्रभावी वार*
*आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन, सुरक्षित एवं समावेशी विद्यालयी वातावरण पर जिला प्रशासन का विशेष जोर*

*निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर नामांकन की हुई समीक्षा, बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव पर होगी सख्त कार्रवाई*

पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में शिक्षा का अधिकार अधिनियम(आरटीई) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिले के निजी विद्यालयों के प्राचार्यों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशिक्षु आईएएस सुश्री ईरा जोरवाल, जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री प्रिंस कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक श्री प्रवीण कुमार सहित जिले के विभिन्न निजी विद्यालयों के प्राचार्य एवं संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में आरटीई अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर नामांकन की अद्यतन स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि आरटीई के प्रावधानों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए तथा पात्र बच्चों के नामांकन में किसी प्रकार की अनावश्यक बाधा उत्पन्न न हो। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आरटीई के तहत नामांकित बच्चों सहित विद्यालय में अध्ययनरत किसी भी छात्र-छात्रा के साथ किसी प्रकार का भेदभाव, असमान व्यवहार अथवा उपेक्षा स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी बच्चों को समान अवसर, सम्मान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना प्रत्येक विद्यालय की जिम्मेदारी है। उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए निर्देश दिया कि जिले के सभी निजी विद्यालयों में वाहन सुरक्षा एवं फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यालय प्रबंधन सभी सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करें ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं संरक्षित वातावरण उपलब्ध हो सके।

बैठक के दौरान उपायुक्त ने विद्यालय प्राचार्यों से अपील की कि वे केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों में सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता विकसित करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में नियमित रूप से सड़क सुरक्षा, मलेरिया एवं डायरिया से बचाव, तंबाकू निषेध, स्वच्छता तथा स्वस्थ जीवनशैली जैसे विषयों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि बच्चे स्वयं जागरूक नागरिक बनने के साथ-साथ अपने परिवार एवं समाज को भी जागरूक कर सकें।

बैठक में उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सरकारी विद्यालयों की तर्ज पर निजी विद्यालयों में भी "प्रोजेक्ट परख" के अंतर्गत "बोलेगा सिंहभूम" तथा "आज क्या सीखे" कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में अभिव्यक्ति क्षमता, तार्किक सोच, संवाद कौशल एवं आत्मविश्वास का विकास होगा, जो उनके समग्र व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से प्रत्येक निजी विद्यालय में प्रत्येक माह "खेल महोत्सव" आयोजित करने का भी निर्देश दिया। इसके साथ ही प्रत्येक माह की 20 तारीख को विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों का सामूहिक "जन्मोत्सव" आयोजित कर उन्हें सम्मानित करने एवं सकारात्मक विद्यालयी वातावरण विकसित करने पर बल दिया।

उपायुक्त ने सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत सभी निजी विद्यालय प्रबंधन से अपील की कि वे "निक्षय मित्र" बनकर जिले के टीबी मरीजों को गोद लेने की दिशा में आगे आएं तथा उनके पोषण एवं उपचार सहयोग में सहभागिता निभाएं। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक सक्षम संस्थान की भागीदारी से ही टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त किया जा सकेगा। बैठक में पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व देते हुए उपायुक्त ने सभी विद्यालयों को निर्देशित किया कि विद्यालय परिसर एवं उपलब्ध खाली स्थानों पर व्यापक स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जाए तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण की भी जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है।

बैठक के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री प्रिंस कुमार एवं जिला शिक्षा अधीक्षक श्री प्रवीण कुमार ने भी आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित उपस्थिति, सुरक्षा मानकों के अनुपालन तथा जिला प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न नवाचार कार्यक्रमों में निजी विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया।

बैठक के अंत में उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य सरकारी एवं निजी विद्यालयों के बीच समन्वय स्थापित कर शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सुरक्षा, सामाजिक संवेदनशीलता तथा समग्र व्यक्तित्व विकास को नई दिशा देना है। उन्होंने सभी विद्यालय प्रबंधन से अपेक्षा की कि वे प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए इन सभी निर्देशों का गंभीरतापूर्वक अनुपालन सुनिश्चित करें, जिससे पश्चिमी सिंहभूम शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में एक आदर्श जिला बन सके।
दुबिल माइंस के आंदोलनरत ग्रामीणों से मिली सांसद जोबा माझी, समाधान का दिया आश्वासन

-सांसद की पहल पर जल्द होगी प्रबंधक के साथ त्रिपक्षीय वार्ता

मनोहरपुर: चिरिया अंतर्गत दुबिल माइंस में विभिन्न मांगों को लेकर पिछले दस दिनों से आंदोलनरत ग्रामीणों से मिलने रविवार को सांसद जोबा माझी पहुंची। यहां सांसद को ग्रामीणों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा और सहयोग की अपील की। सांसद जोबा माझी करीब एक घंटे तक ग्रामीणों से वार्ता कर उनकी बातों को सुना। ग्रामीणों ने सांसद के समक्ष अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा मांगो पर सहानुभूति पूर्वक विचार नहीं किया तो आंदोलन यूं ही जारी रहेगा। सांसद के साथ वार्ता के दौरान सहमति बनी कि जल्द ही त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की जाएगी, जिसमें सांसद के अलावा माइंस प्रबंधक और ग्रामीण उपस्थित रहेंगे। त्रिपक्षीय वार्ता के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। मालूम हो कि दुबिल के ग्रामीण दुबिल गांव के स्थानीय बेरोजगारों को दुबिल माइंस में रोजगार में प्राथमिकता देने, दुबिल गांव के 200 युवक-युवतियों को दुबिल माइंस में रोजगार देने, दुबिल गांव के माइंस से प्रभावित बंजर जमीन का मुआवजा खतियान के आधार पर देने और दुबिल गांव में कुल 8 चापाकलों में सौर ऊर्जा द्वारा जलमीनार स्थापित करने की प्रमुख मांगों को लेकर पिछले दस दिनों से आंदोलन कर रहे है। माइंस के मुख्य गेट के सामने ग्रामीण तंबू गाड़कर बैठ गये है। जिससे माइंस में खनन समेत अन्य कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मौके पर ग्राम मुंडा रामलाल चांपिया, दुलाल आइन्द, गुरा मुर्मू, निशा आईंद, सुनील हांसदा समेत काफी संख्या में आंदोलनरत ग्रामीण उपस्थित रहे।
बंदगांव मंडल कार्यसमिति की बैठक संपन्न, संगठन विस्तार व 'मन की बात' कार्यक्रम पर बनी रणनीति

बंदगांव- भारतीय जनता पार्टी के चक्रधरपुर विधानसभा अंतर्गत बंदगांव मंडल की कार्यसमिति बैठक मंडल अध्यक्ष करम सिंह मुंडरी की अध्यक्षता में आयोजित हुई. बैठक में मंडल प्रभारी सह जिला महामंत्री तीरथ जमुदा ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, मंडल कार्यसमिति का शीघ्र विस्तार करने तथा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया.बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' को सभी बूथों एवं शक्ति केंद्रों पर सामूहिक रूप से सुना जाएगा. साथ ही पार्टी के कार्यक्रमों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं को आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया.इस दौरान संगठन विस्तार, बूथ सशक्तिकरण, आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तथा विभिन्न संगठनात्मक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई. कार्यकर्ताओं से संगठन की नीतियों एवं सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लेने का आग्रह किया गया.बैठक में जिला उपाध्यक्ष अनूप सिंह, डॉ. विजयसिंह गागराई, पूर्व मंडल अध्यक्ष राजेंद्र मछुवा, डॉ. पी. के. विश्वास, सिकंदर मछुवा, रोशन गुप्ता सहित मंडल के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे.
मनोहरपुर के खुदपोस में महिला समूह सहायता समूह के खाते से 2.26 लाख की कथित निकासी, जांच की मांग...
लुम्बई में मैट्रिक एवं इंटर के आदिवासी विद्यार्थियों का सम्मान समारोह कार्यक्रम आयोजित

बंदगांव- सरना धर्म सोतो समिति, शाखा लुम्बई, बंदगांव के तत्वावधान में मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में सफल आदिवासी छात्र-छात्राओं के सम्मान में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. विजय सिंह गागराई ने मेधावी विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान देकर उनका उत्साहवर्धन किया. इंटरमीडिएट परीक्षा में सफल अनामिका मुण्डरी, भवानी कुमारी एवं चीता पुरती को सम्मानित किया गया। वहीं मैट्रिक परीक्षा में सफल रानी मुण्डरी, रावकन हेम्ब्रम, बिरंग हेम्ब्रम, करमी हेम्ब्रम, बिष्णु हेम्ब्रम, पालो हेम्ब्रम, मनसा हंस, मिनी मुंडू, सुषमा दिग्गी चंपिया, रंदाय मुंडा, अजय मुंडू, सुनील मुंडरी, दुर्गा हेम्ब्रम, श्याम हेम्ब्रम, सलामी बोदरा एवं रंदाय मुंडू को सम्मानित किया गया.मुख्य अतिथि डॉ. विजय सिंह गागराई ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा ही समाज की सबसे बड़ी शक्ति है. उन्होंने विद्यार्थियों से कठिन परिश्रम, अनुशासन और उच्च लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं.उन्होंने कहा एक शिक्षित ब्यक्ति ही समाज तथा गांव,राज्य एवं देश का विकास कर सकता है.इसलिए हमें शिक्षित होकर अपने तथा अपने गांव एवं समाज को तरक्की की ओर ले जाना है.समिति के सलाहकार बलराम हेम्ब्रम ने कहा कि हमारा उद्देश्य गांव के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना और अन्य बच्चों को भी शिक्षा के प्रति प्रेरित करना है. आने वाले वर्षों में भी समिति इस प्रकार के कार्यक्रम लगातार आयोजित करती रहेगी. कार्यक्रम में बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया.
कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष गोमेगा पाहन, सचिव आश्रिता मुण्डरी, सोमा हेम्ब्रम, कोषाध्यक्ष बिरसा हेम्ब्रम, सलाहकार बेला मुण्डरी एवं बलराम हेम्ब्रम की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि सुमित गुड़िया, दुलारी गुड़िया, अनिल गुड़िया, सुनील गुड़िया, अनीसा बरला, अंजलि प्रिया कंडुलना एवं प्रिया कंडुलना सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, अभिभावक एवं समिति के सदस्य उपस्थित रहे.
*<nis:link nis:type=tag nis:id=कहानी nis:value=कहानी nis:enabled=true nis:link/> सफलता की<nis:link nis:type=tag nis:id=* nis:value=* nis:enabled=true nis:link/>

सरकारी योजना, प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प ने बदली सुषमा देवी की तकदीर*

*दुग्ध उत्पादन से आत्मनिर्भर बनीं आनंदपुर की महिला, अब अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणास्रोत*

ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में गव्य विकास विभाग की योजनाएं पश्चिमी सिंहभूम जिले में प्रभावी परिणाम दे रही हैं। इन योजनाओं का एक प्रेरणादायक उदाहरण आनंदपुर प्रखंड के आनंदपुर गांव की निवासी श्रीमती सुषमा देवी हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपनी मेहनत, आत्मविश्वास तथा विभागीय सहयोग के बल पर दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। आज वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं, बल्कि आसपास की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही हैं।

कुछ वर्ष पूर्व तक सुषमा देवी का परिवार सीमित आय पर निर्भर था। परिवार की दैनिक आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा तथा घरेलू खर्चों का प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय स्वयं कुछ करने का संकल्प लिया। इसी दौरान उन्हें गव्य विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी मिली। उन्होंने विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय गोपालन प्रशिक्षण में भाग लेकर वैज्ञानिक पशुपालन, पशुओं के पोषण, रोग नियंत्रण, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की तकनीक तथा व्यवसाय प्रबंधन की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

प्रशिक्षण से मिली जानकारी और आत्मविश्वास के आधार पर वर्ष 2021-22 में उन्होंने गव्य विकास विभाग की 50 प्रतिशत अनुदान योजना का लाभ उठाते हुए गाय पालन की शुरुआत की। शुरुआती दौर में सीमित संसाधनों, अनुभव की कमी और पशुपालन से जुड़ी चुनौतियों ने कई बार उन्हें परेशान किया, लेकिन उन्होंने धैर्य और लगन के साथ कार्य जारी रखा। विभागीय अधिकारियों के नियमित मार्गदर्शन, संतुलित पशु आहार, समय-समय पर टीकाकरण, स्वच्छ पशुशाला तथा वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धति को अपनाकर उन्होंने धीरे-धीरे अपने दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की।

आज श्रीमती सुषमा देवी के पास 8 दुधारू गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग 50 से 60 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। स्थानीय बाजार में दूध की नियमित बिक्री के साथ-साथ वे दूध से घी, पनीर और दही जैसे मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रही हैं। इस व्यवसाय से होने वाली नियमित आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा रही हैं, परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से कर रही हैं और भविष्य के लिए भी बचत कर रही हैं।

श्रीमती सुषमा देवी बताती हैं, *"एक समय ऐसा था जब परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन हो जाता था। गव्य विकास विभाग से मिले प्रशिक्षण और सरकारी योजना का लाभ मिलने के बाद मैंने पूरे मन से दुग्ध व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन विभाग के सहयोग और अपनी मेहनत से आज मैं आत्मनिर्भर हूं। इस व्यवसाय ने मुझे आर्थिक मजबूती के साथ आत्मसम्मान भी दिया है। मैं चाहती हूं कि गांव की अन्य महिलाएं भी आगे आएं और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपने पैरों पर खड़ी हों।"*

जिला गव्य विकास पदाधिकारी श्री राम नारायण शाश्वत ने कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं का उद्देश्य केवल अनुदान उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि लाभुकों को वैज्ञानिक पशुपालन से जोड़कर उन्हें स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा लाभुकों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, पशु स्वास्थ्य संबंधी सलाह तथा समय-समय पर आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि *"श्रीमती सुषमा देवी की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि लाभुक प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को व्यवहार में अपनाएं और योजनाओं का सही उपयोग करें, तो पशुपालन अत्यंत लाभकारी व्यवसाय बन सकता है। विभाग का प्रयास है कि जिले के अधिक से अधिक किसान और महिलाएं दुग्ध उत्पादन से जुड़कर अपनी आय बढ़ाएं।"*

उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए विभिन्न विभागों की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने कहा, *"श्रीमती सुषमा देवी की उपलब्धि यह दर्शाती है कि यदि सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से लिया जाए और उसके साथ मेहनत एवं दृढ़ संकल्प जोड़ा जाए, तो सीमित संसाधनों में भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। उनकी सफलता जिले की अन्य महिलाओं एवं किसानों के लिए प्रेरणा है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि अधिकाधिक परिवार स्वरोजगार आधारित गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिले।"*

पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन एवं गव्य विकास विभाग जिले के पात्र किसानों एवं महिलाओं से अपील करता है कि वे विभाग द्वारा संचालित योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं अनुदान का लाभ उठाकर वैज्ञानिक पशुपालन को अपनाएं। दुग्ध उत्पादन न केवल अतिरिक्त आय का विश्वसनीय स्रोत है, बल्कि ग्रामीण परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण और महिला स्वावलंबन की दिशा में एक प्रभावी माध्यम भी सिद्ध हो रहा है। श्रीमती सुषमा देवी की सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ, वैज्ञानिक सोच और निरंतर परिश्रम किसी भी परिवार की तस्वीर बदल सकता है।
जिले के सभी निजी अस्पतालों एवं क्लीनिकों में अनिवार्य रूप से होगा फायर ड्रिल*

*उपायुक्त श्री मनीष कुमार के मार्गदर्शन पर अग्निशमन विभाग द्वारा निर्धारित तिथियों में किया जाएगा फायर ड्रिल एवं सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण*

पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा जिले के सभी निजी अस्पतालों एवं क्लीनिकों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 06 व 07 जुलाई को फायर ड्रिल आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में सभी निजी अस्पताल एवं क्लीनिक संचालकों को निर्देशित किया गया है कि वे निर्धारित तिथि के अनुसार अपने-अपने संस्थानों में अनिवार्य रूप से फायर ड्रिल का आयोजन सुनिश्चित करें तथा अग्निशमन विभाग के अधिकारियों को आवश्यक सहयोग प्रदान करें। जिला प्रशासन के निर्देशानुसार प्रत्येक निजी स्वास्थ्य संस्थान में आग जैसी आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों का व्यवहारिक परीक्षण किया जाएगा। इस दौरान अस्पतालों में स्थापित अग्निशमन यंत्रों की कार्यशीलता, आपातकालीन निकास मार्ग, विद्युत सुरक्षा व्यवस्था, चेतावनी प्रणाली, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता तथा कर्मचारियों की आपदा प्रबंधन संबंधी तैयारियों का भी मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कर्मियों को आग लगने की स्थिति में मरीजों के सुरक्षित निकासी, प्राथमिक प्रतिक्रिया एवं बचाव कार्यों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अग्निशमन विभाग के फायर सेफ्टी पदाधिकारी एवं उनकी टीम संबंधित निजी अस्पतालों एवं क्लीनिकों का भ्रमण करेगी। निरीक्षण के दौरान संस्थानों में उपलब्ध अग्नि सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाएगी तथा जहां भी आवश्यक होगा, वहां सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। उक्त के संदर्भ में *उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि "अस्पताल एवं स्वास्थ्य संस्थान ऐसे स्थान हैं जहां बड़ी संख्या में मरीज, उनके परिजन एवं स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहते हैं। ऐसी स्थिति में अग्नि सुरक्षा के मानकों का शत-प्रतिशत अनुपालन अत्यंत आवश्यक है। किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूर्व तैयारी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। नियमित फायर ड्रिल से न केवल कर्मचारियों की आपातकालीन परिस्थितियों में कार्य करने की क्षमता विकसित होती है, बल्कि मरीजों एवं आम नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।"*

उपायुक्त ने सभी निजी अस्पताल एवं क्लीनिक संचालकों से अपील करते हुए कहा कि "फायर ड्रिल को केवल औपचारिकता न समझें, बल्कि इसे संस्थान की सुरक्षा संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाएं। सभी स्वास्थ्य संस्थान निर्धारित तिथियों पर आयोजित फायर ड्रिल में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें तथा अग्निशमन विभाग द्वारा दिए गए सभी सुरक्षा निर्देशों का अक्षरशः पालन करें।" जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार फायर सेफ्टी अधिकारी संबंधित निजी स्वास्थ्य संस्थानों का भ्रमण करेंगे। सभी अस्पताल एवं क्लीनिक संचालकों से अपेक्षा की गई है कि वे फायर ड्रिल के दौरान अपने संस्थान के समस्त चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करें तथा अग्नि सुरक्षा से संबंधित सभी आवश्यक संसाधनों को कार्यशील अवस्था में रखें। जिला प्रशासन का उद्देश्य जिले के प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना तथा किसी भी संभावित अग्नि दुर्घटना की स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम करना है।
*उलीझारी पावरग्रिड से चिमीहातु चौक तक करीब 2.56 करोड़ रुपए की लागत से बनेगी पीसीसी सड़क, ग्रामीणों में खुशी* 

*चाईबासा।*
चाईबासा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सदर प्रखंड के उलीझारी पावरग्रिड से चिमीहातु चौक तक ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल विभाग द्वारा क्रियान्वित डीएमएफटी मद से करीब 2 करोड़ 56 लाख रुपए की लागत से पीसीसी सड़क निर्माण कार्य होगा।
कैबिनेट मंत्री दीपक बिरुवा ने रविवार को सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। सड़क का शिलान्यास विधिवत पूजा अर्चना के बाद नारियल फोड़कर किया गया। जर्जर सड़क से जूझ रहे ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हो गई। सड़क बनने की जानकारी पाकर ग्रामीणों में खुशी देखी गई। वहीं ग्रामीणों ने मंत्री के प्रति आभार प्रकट किया। ग्रामीणों ने गर्मजोशी के साथ मंत्री का स्वागत किया। इस दौरान मंत्री दीपक बिरुवा ग्रामीणों संग मिलकर विभिन्न समस्याओं से अवगत हुए। मंत्री जी ने कहा कि चाईबासा विधानसभा क्षेत्र को विकसित करना मेरी प्राथमिकता है। चरणबद्ध तरीके से कार्य पूरा किया जा रहा है। क्षेत्र में बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी व अन्य बुनियादी सुविधाओं के प्रति हमारी सरकार सजग और गंभीर है। इन योजनाओं के पूरा होने से इस क्षेत्र में आवागमन की सुविधा बेहतर होगी जिससे विकास की संभावना बढ़ जाती है और छोटे छोटे रोजगार के अवसर मिलने लगते हैं। मालूम हो कि मंत्री ने सड़क निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान में रखकर कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया। इस मौके पर झामुमो प्रखंड अध्यक्ष सतीश सुंडी, मानाराम कुदादा, मंगल सिंह तीयु, राजू सुंडी समेत काफी संख्या में ग्रामीण एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता उपस्थित थे।
सदानंद होता ने पेश की मानवता की मिसाल, 10 वर्षों से बिस्तर पर पड़े युवक के इलाज का उठाया जिम्मा

बंदगांव प्रखंड के लांडुपोदा पंचायत अंतर्गत डेंगसरगी गांव निवासी करन हेंब्रम के 17 वर्षीय पुत्र रूपसिंह हेंब्रम पिछले लगभग 10 वर्षों से गंभीर बीमारी के कारण बिस्तर पर पड़े हैं. समय पर समुचित इलाज नहीं मिलने से उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ती गई और वे चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गए. हाथ-पैरों ने भी काम करना लगभग बंद कर दिया है. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान गणना प्रपत्र भरने के क्रम में सांख्यिकी पदाधिकारी एवं समाजसेवी सदानंद होता को युवक की स्थिति की जानकारी मिली. इसके बाद उन्होंने मानवीय पहल करते हुए सुमिता होता फाउंडेशन के माध्यम से रूपसिंह को इलाज के लिए अनुमंडल अस्पताल पहुंचाया. अस्पताल में चिकित्सक डॉ जेजे मुंडू ने मरीज की जांच कर आवश्यक चिकित्सीय परीक्षण कराने की सलाह दी. इसके बाद सदानंद होता ने रक्त जांच, रिपोर्ट तथा जरूरी दवाइयों की व्यवस्था कराई. उनके इस सराहनीय प्रयास की क्षेत्र में व्यापक प्रशंसा हो रही है. जानकारी देते हुए सांख्यिकी पदाधिकारी सदानंद होता ने बताया कि जानकारी के अभाव से बच्चों का इलाज समय पर नहीं हो सका. बच्चें को अनुमंडल अस्पताल में भर्ती का उपचार की प्रक्रिया शुरू किया गया है. मौके पर गांव के अन्य मौजूद थे.
*'प्रोजेक्ट जागृति' के तहत 08 जुलाई 2026 को पश्चिमी सिंहभूम के 6 प्रखंडों में रक्तदान शिविर का आयोजन*

जिला प्रशासन, पश्चिमी सिंहभूम द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और "स्वस्थ समाज, सशक्त समुदाय" के संकल्प को पूरा करने के उद्देश्य से एक विशेष पहल की जा रही है। 'प्रोजेक्ट जागृति - बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम' के अंतर्गत आगामी 08 जुलाई 2026 को पूर्वाह्न 10:00 बजे से संध्या 4:00 बजे तक जिले के विभिन्न प्रखंडों में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा।

*"रक्तदान महादान - आपका एक यूनिट रक्त किसी की जिंदगी बन सकता है" के संदेश के साथ जिला प्रशासन ने आम नागरिकों, युवाओं और स्वैच्छिक संस्थाओं से इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। प्रशासन का मानना है कि "एक बूंद रक्त - अनमोल जीवन" का आधार है।*

*◆ शिविर के आयोजन स्थलों की सूची:-*

बुधवार, 08 जुलाई 2026 को सुबह 10 बजे से संध्या 4 बजे निर्धारित समय तक निम्नलिखित स्थानों पर शिविर आयोजित किए जाएंगे:-

01. चाईबासा सदर- एमटीसी, सदर अस्पताल कैंपस.
02. चक्रधरपुर- अनुमंडल अस्पताल, चक्रधरपुर.
03. मनोहरपुर- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र.
04. सोनुआ- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र.
05. नोआमुंडी- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र.
06. खूँटपानी- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र.

जिला प्रशासन, पश्चिमी सिंहभूम सभी स्वास्थ्य पदाधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों से अनुरोध करता है कि वे इस अभियान को सफल बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान दें और अधिक से अधिक लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करें।
गोईलकेरा के छोटा कुईड़ा गांव में वज्रपात से भाभी की मौत, देवर और देवरानी गम्भीर रुप से घायल
*'प्रोजेक्ट जागृति– बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम' के तहत मिशन उदय-2.0 को सफल बनाने पर विशेष जोर*
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*उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग के सभी पदाधिकारियों एवं चिकित्सकों के साथ की विस्तृत चर्चा*
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*बरसाती मौसम में मलेरिया एवं डायरिया की रोकथाम को लेकर दिए आवश्यक दिशा-निर्देश*
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पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार से जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में "प्रोजेक्ट जागृति- बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम" के अंतर्गत संचालित मिशन उदय-2.0 के प्रभावी संचालन एवं बरसात के मौसम में संचारी रोगों की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों एवं चिकित्सकों के साथ वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। बैठक में सिविल सर्जन, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी, जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा पदाधिकारी, विभिन्न स्वास्थ्य उपकेंद्रों के चिकित्सक तथा स्वास्थ्य विभाग के अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

बैठक में उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने मिशन उदय-2.0 के अंतर्गत जिले में संचालित गतिविधियों के संदर्भ में कहा कि वर्षा ऋतु के दौरान मलेरिया, डायरिया एवं अन्य जलजनित तथा वेक्टर जनित रोगों की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे समय में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पूरी गंभीरता, संवेदनशीलता एवं समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक गांव एवं पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मिशन उदय-2.0 का उद्देश्य केवल बीमारियों का उपचार करना नहीं, बल्कि समय रहते उनकी रोकथाम, शीघ्र पहचान तथा व्यापक जनजागरूकता के माध्यम से लोगों को स्वस्थ एवं सुरक्षित रखना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रत्येक पदाधिकारी एवं कर्मी को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं, मलेरिया जांच किट, ओआरएस पैकेट, जिंक टैबलेट, आवश्यक चिकित्सकीय उपकरणों एवं अन्य स्वास्थ्य सामग्रियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही किसी भी क्षेत्र से मलेरिया अथवा डायरिया के मरीजों की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल जांच, उपचार एवं आवश्यक नियंत्रणात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक के दौरान मलेरिया उन्मूलन अभियान के अंतर्गत नियमित बुखार सर्वेक्षण, संदिग्ध मरीजों की समय पर जांच, पॉजिटिव मरीजों का त्वरित उपचार, वेक्टर नियंत्रण गतिविधियों तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। वहीं डायरिया की रोकथाम के लिए स्वच्छ पेयजल के उपयोग, व्यक्तिगत स्वच्छता, हाथ धोने की आदत, खुले में शौच से बचाव तथा ओआरएस एवं जिंक के उपयोग के संबंध में व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित करने पर विशेष बल दिया गया।

उपायुक्त ने सभी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि सहिया, एएनएम, मल्टीपरपज हेल्थ वर्कर एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से गांव-गांव तथा घर-घर संपर्क स्थापित कर लोगों को मलेरिया एवं डायरिया के कारण, लक्षण, बचाव के उपाय तथा समय पर उपचार के महत्व के संबंध में विस्तार से जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी एवं जनजागरूकता के माध्यम से ही इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में रोगियों के उपचार की समुचित व्यवस्था बनाए रखें तथा गंभीर मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। साथ ही सभी प्रखंडों से रोगों की नियमित मॉनिटरिंग एवं प्रतिवेदन समय पर उपलब्ध कराया जाए, ताकि जिला स्तर से सतत समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्णय लिए जा सकें।

उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य जिले के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना तथा मलेरिया। एवं डायरिया जैसी मौसमी बीमारियों से जनसामान्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से टीम भावना के साथ कार्य करने तथा प्रशासन द्वारा संचालित स्वास्थ्य कार्यक्रमों को शत-प्रतिशत प्रभावी ढंग से धरातल पर क्रियान्वित करने का आह्वान किया।
शनिवार,04 जुलाई 2026*
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*सहकारिता से आत्मनिर्भर गांवों की नींव होगी मजबूत, योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता : उपायुक्त*

*सहकारिता सप्ताह पर जिला स्तरीय बैठक आयोजित, धान अधिप्राप्ति, फसल बीमा, रक्तदान एवं जन-जागरूकता अभियानों में MPCS की भूमिका होगी और सशक्त*

सहकारिता सप्ताह के अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय में उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में सहकारिता आंदोलन को नई गति देने, सहकारी संस्थाओं को अधिक सशक्त बनाने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर ग्रामीण विकास को गति देने की रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि "सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक एवं ग्रामीण परिवर्तन का प्रभावी माध्यम है। जब सहकारी संस्थाएं मजबूत होंगी, तब किसानों की आय बढ़ेगी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।"

उन्होंने पदाधिकारियों एवं सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए सहकारिता को जन-आंदोलन का स्वरूप दें। उन्होंने कहा कि आजीविका संवर्धन, कृषि विकास, मत्स्य पालन, वित्तीय समावेशन एवं ग्रामीण स्वावलंबन के लिए सहकारी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उपायुक्त ने विशेष रूप से धान अधिप्राप्ति, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा विभिन्न प्रायोजन योजनाओं को बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियों के माध्यम से ग्राम स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियां किसानों और ग्रामीणों के लिए सरकार एवं समाज के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करें।

बैठक में सामाजिक सरोकारों पर भी विशेष जोर दिया गया। उपायुक्त ने स्वैच्छिक रक्तदान को जनभागीदारी का अभियान बनाने, बढ़ते सर्पदंश एवं मलेरिया के मामलों के प्रति ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता फैलाने तथा स्वास्थ्य संबंधी संदेशों को गांव-गांव तक पहुंचाने में बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

बैठक में सहायक समाहर्ता, जिला सहकारिता पदाधिकारी, सहायक निबंधक (सहकारिता), चक्रधरपुर, जिला कृषि पदाधिकारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी, डीपीएम-जेएसएलपीएस, झारखंड राज्य सहकारी बैंक की चाईबासा, नोवामुंडी, चक्रधरपुर, जगन्नाथपुर एवं मझगांव शाखाओं के शाखा प्रबंधक, जिला अंकेक्षण पदाधिकारी-सहकारिता, चाईबासा एवं चक्रधरपुर क्षेत्र की बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियों के अध्यक्ष एवं सचिव तथा जेएसएलपीएस के सदस्यों ने भाग लिया।

बैठक के समापन अवसर पर सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण एवं हरित जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सभी प्रतिभागियों के बीच पौधों का वितरण किया गया।

बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सहकारिता आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए जिले में किसानों, ग्रामीणों एवं स्वयं सहायता समूहों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने तथा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सभी विभाग एवं सहकारी संस्थाएं समन्वित रूप से कार्य करेंगी।
संगठनात्मक मजबूती पर भाजपा का जोर: सोनुआ मंडल कार्यसमिति की बैठक संपन्न

बूथ सशक्तिकरण और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर हुआ मंथन; 6 जुलाई को मनेगी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती
आमजनों को सहकारिता विभाग की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रति जागरूक करने के लिए डीसी ने रथ को हरि झंडी दिखाकर किया रवाना 

सहकारिता सप्ताह के अवसर पर आमजनों को सहकारिता विभाग की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आज जिला समाहरणालय परिसर से जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने सहकारिता सप्ताह जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

यह जागरूकता वाहन जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करते हुए जिला सहकारिता विभाग की योजनाओं सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की जानकारी आमजनों तक पहुंचाएगा

इस अवसर पर उपायुक्त ने कहा कि सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, किसानों एवं ग्रामीणों को संगठित कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने आमजनों से सहकारिता सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने तथा सहकारिता विभाग की योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।
*सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा*
*प्रेस विज्ञप्ति संख्या:-811/2026*
*शुक्रवार,03 जुलाई 2026*
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झारखंड राज्य खाद्य आयोग की प्रभारी अध्यक्ष शबनम परवीन ने किया पश्चिमी सिंहभूम का भ्रमण

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, शिकायतों के त्वरित निष्पादन एवं पात्र लाभुकों तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
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झारखंड राज्य खाद्य आयोग की प्रभारी अध्यक्ष सह सदस्या श्रीमती शबनम परवीन ने दो दिवसीय पश्चिमी सिंहभूम जिला भ्रमण के दौरान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की तथा विभिन्न संस्थानों एवं जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) से संबंधित केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। भ्रमण के दौरान परिसदन में जिला पंचायत राज पदाधिकारी सह प्रभारी जिला आपूर्ति पदाधिकारी सहित अन्य पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

भ्रमण के प्रथम चरण में प्रभारी अध्यक्ष ने सदर अस्पताल स्थित कुपोषण उपचार केंद्र (NRC) का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान केंद्र में भर्ती बच्चों एवं उनकी माताओं से उपचार एवं उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की। बच्चों की माताओं द्वारा उपचार व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया गया। प्रभारी अध्यक्ष ने केंद्र में उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता में सुधार, भोजन संबंधी मेन्यू को प्रमुखता से प्रदर्शित करने तथा लाभुकों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। लाभुकों को राशि उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए केंद्र प्रभारी को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। साथ ही राशि भुगतान में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं से आयोग को लिखित रूप से अवगत कराने को कहा, ताकि विभागीय स्तर पर आवश्यक पहल की जा सके।

द्वितीय दिवस प्रभारी अध्यक्ष ने प्रखंड खूंटपानी अंतर्गत कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, बदिया का निरीक्षण किया। विद्यालय में भोजन व्यवस्था, मेन्यू एवं अन्य सुविधाओं का जायजा लिया गया। छात्राओं से बातचीत के दौरान उन्होंने भोजन की गुणवत्ता एवं नियमित उपलब्धता पर संतोष व्यक्त किया।

इसके उपरांत ग्राम उपर लोटा एवं ग्राम बारीपी में जन वितरण प्रणाली के लाभुकों से खाद्यान्न वितरण की स्थिति की जानकारी प्राप्त की गई। निरीक्षण के दौरान लाभुकों ने कुछ स्थानों पर कम मात्रा में राशन वितरण की शिकायत की। इस संबंध में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा संबंधित जन वितरण प्रणाली विक्रेता के विरुद्ध पूर्व में निलंबन की कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई। प्रभारी अध्यक्ष ने जिला पंचायत राज पदाधिकारी सह प्रभारी जिला आपूर्ति पदाधिकारी एवं प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी को निर्देश दिया कि 15 दिनों के भीतर जांच पूर्ण करते हुए जिन लाभुकों को कम खाद्यान्न प्राप्त हुआ है, उन्हें नियमानुसार बकाया राशन मुआवजे सहित उपलब्ध कराया जाए। साथ ही सभी पात्र लाभुकों को निर्धारित मात्रा में पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान कुछ वृद्ध लाभुकों द्वारा e-PoS मशीन में अंगूठे का निशान दर्ज नहीं हो पाने की समस्या भी सामने आई। इस पर प्रभारी अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए समस्या का शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को नियमित क्षेत्र भ्रमण कर लाभुकों की शिकायतों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा।

प्रभारी अध्यक्ष ने सदर प्रखंड अंतर्गत मॉडल आंगनबाड़ी प्री-नर्सरी स्कूल, किलीगोट का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बच्चों को निर्धारित मानक के अनुरूप प्रतिदिन अंडा उपलब्ध नहीं कराए जाने की जानकारी मिलने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुसार नियमित रूप से पोषाहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

भ्रमण के उपरांत परिसदन भवन में आयोजित समीक्षात्मक बैठक में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के क्रियान्वयन, आयोग में लंबित शिकायतों, निरीक्षण के दौरान प्राप्त शिकायतों तथा झारखंड राज्य आकस्मिक खाद्यान्न कोष की समीक्षा की गई।

बैठक में प्रभारी अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से वंचित ऐसे निर्धन एवं जरूरतमंद व्यक्तियों को आकस्मिक परिस्थितियों में झारखंड राज्य आकस्मिक खाद्यान्न कोष के माध्यम से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही पात्र लाभुकों का राशन कार्ड शीघ्र बनाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

उन्होंने आयोग में लंबित शिकायतों की प्रतियां संबंधित पदाधिकारियों को उपलब्ध कराते हुए 10 दिनों के भीतर कार्रवाई प्रतिवेदन आयोग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। वहीं निरीक्षण के दौरान प्राप्त शिकायतों का 15 दिनों के भीतर निष्पादन सुनिश्चित करते हुए इसकी सूचना आयोग को उपलब्ध कराने का निर्देश अपर उपायुक्त सह जिला शिकायत निवारण पदाधिकारी को दिया।

बैठक में अपर उपायुक्त सह जिला शिकायत निवारण पदाधिकारी, जिला पंचायत राज पदाधिकारी सह प्रभारी जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, संबंधित अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।
*खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी द्वारा चाईबासा के होटलों एवं भोजनालयों का औचक निरीक्षण; मिलावट की जांच के साथ दिए गए सख्त निर्देश*

पश्चिमी सिंहभूम जिले में आम जनता को स्वच्छ, सुरक्षित एवं मिलावट रहित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी श्री धनेश्वर हेम्ब्रम द्वारा चाईबासा नगर स्थित गांधी मैदान के आसपास संचालित विभिन्न ठेलों एवं भोजनालयों का औचक निरीक्षण किया गया। इस विशेष अभियान के तहत क्षेत्र के प्रमुख भोजनालयों, जिनमें मनोज होटल, कोल्हान होटल, गुड्डू होटल, रामजी होटल, गणेश होटल, अजय होटल एवं अमित होटल शामिल हैं, की सघन जांच की गई।

निरीक्षण के क्रम में त्वरित कार्रवाई करते हुए इन होटलों में तैयार की जा रही दाल, हल्दी, भुजिया, चोखा, लड्डू एवं जलेबी में हानिकारक अखाद्य रंग यानी मेटानिल येल्लो की उपस्थिति की विशेष जांच की गई। राहत की बात रही कि किसी भी खाद्य पदार्थ में यह हानिकारक रासायनिक रंग नहीं पाया गया। इस दौरान खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी द्वारा सभी संचालकों को अनुमत खाद्य रंगों के सीमित और सही इस्तेमाल के बारे में विस्तार से जागरूक भी किया गया।

जांच के दौरान कई भोजनालयों में खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी और गंभीर कमियाँ उजागर हुईं। कई प्रतिष्ठानों में अनिवार्य खाद्य लाइसेंस या पंजीकरण को मुख्य परिसर में प्रदर्शित नहीं किया गया था। साथ ही, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाने वाले अखबार का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों को रखने या परोसने में किया जा रहा था। इसके अलावा रसोई में बिना लेबल वाले हल्दी के पैकेट पाए गए और भोजन बनाने व परोसने वाले कर्मी बिना हेडगियर तथा एप्रोन के कार्य करते मिले, जो व्यक्तिगत स्वच्छता के नियमों का उल्लंघन है। इन सभी अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी द्वारा संबंधित सभी प्रतिष्ठान संचालकों को सुधार हेतु आधिकारिक नोटिस जारी किया गया है। 

इसके साथ ही सभी को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे भोजन तैयार करने में अनिवार्य रूप से स्टेनलेस स्टील के काटने वाले औजारों और स्वच्छ पेयजल का ही इस्तेमाल करें। सभी कर्मचारियों के लिए हेडगियर और एप्रोन पहनना तथा परिसर में खाद्य लाइसेंस को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया है। विभाग द्वारा सचेत किया गया है कि दी गई अवधि में सुधार न होने या भविष्य में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित भोजनालयों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
*झारखण्ड सरकार की महत्वपूर्ण पहल- वृद्ध, गंभीर रूप से बीमार एवं दिव्यांग कलाकारों को ₹4,000 प्रतिमाह पेंशन.*

*आवेदन की अंतिम तिथिः 31 जुलाई 2026.*

*सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग- झारखण्ड सरकार।*
शनिवार,04 जुलाई 2026 को
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में आज उपायुक्त प्रकोष्ठ में जिला बाल संरक्षण कार्यालय के अंतर्गत संचालित स्पॉन्सरशिप कार्यक्रम की प्रगति को लेकर समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में योजना के अंतर्गत आच्छादित बच्चों की अद्यतन स्थिति, अनुश्रवण एवं सत्यापन की समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने बताया कि पूर्व से योजना के अंतर्गत आच्छादित 412 बच्चों का अनुश्रवण एवं भौतिक सत्यापन कराया गया है। सत्यापन उपरांत 373 पात्र बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना के तहत नियमित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की अनुशंसा की गई।

बैठक में बाल कल्याण समिति द्वारा नव चयनित 128 बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना के अंतर्गत आच्छादित किए जाने के प्रस्ताव की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने सभी प्रशिक्षु उपसमाहर्ताओं को निर्देश दिया कि इन बच्चों का भौतिक सत्यापन प्राथमिकता के आधार पर कराते हुए सत्यापन प्रतिवेदन उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, ताकि पात्र बच्चों को समय पर योजना का लाभ प्रदान किया जा सके।

उपायुक्त ने कहा कि स्पॉन्सरशिप योजना का उद्देश्य देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को समय पर आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना है। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि योजना के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए तथा सभी पात्र बच्चों को निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप समयबद्ध तरीके से लाभ उपलब्ध कराया जाए।

बैठक में उप विकास आयुक्त, प्रशिक्षु आईएएस, जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी,  उप निदेशक- सह असिस्टेंट डायरेक्टर सामाजिक सुरक्षा कोषांग सहित अन्य मुख्य रूप से मौजूद रहे।
शनिवार,04 जुलाई 2026 को
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में उपायुक्त प्रकोष्ठी में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) से संबंधित समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में नामांकन की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने आरटीई के तहत विभिन्न विद्यालयों में शेष रिक्त सीटों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिया कि रिक्त सीटों पर पात्र बच्चों के नामांकन हेतु शीघ्र पुनः विज्ञापन प्रकाशित किया जाए।

बैठक में यह भी समीक्षा की गई कि चयनित होने के बावजूद जिन बच्चों का अब तक संबंधित विद्यालयों में नामांकन नहीं हो पाया है, उनका नामांकन प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र सुनिश्चित किया जाए।

उपायुक्त ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य प्रत्येक पात्र बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि नामांकन प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए यह सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र बच्चा आरटीई के लाभ से वंचित न रहे।

बैठक में मुख्य रूप से उप विकास आयुक्त, प्रशिक्षु आईएएस, जिला शिक्षा अधीक्षक सहित शिक्षा विभाग के अन्य कर्मी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा*
*प्रेस विज्ञप्ति संख्या:-812/2026*
*शनिवार,04 जुलाई 2026*
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जिला दण्डाधिकारी-सह-अध्यक्ष, जिला जल एवं स्वच्छता समिति श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला समाहरणालय स्थित सभागार में जिला जल एवं स्वच्छता समिति की समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जल जीवन मिशन अंतर्गत संचालित विभिन्न ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

समीक्षा के दौरान एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजना (SVS), एसवीएस क्लस्टर (SVS Cluster) तथा बहुग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं (MVS) की योजनावार प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही विभिन्न समस्याओं, जैसे अनापत्ति प्रमाण-पत्र, रेलवे क्रॉसिंग एवं वन विभाग से संबंधित स्वीकृतियों के कारण उत्पन्न बाधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उपायुक्त ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सभी लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने तथा 15 अगस्त, 2026 तक जल जीवन मिशन अंतर्गत संचालित सभी बहुग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को पूर्ण करने का निर्देश दिया।

बैठक में जिला खनिज प्रतिष्ठान न्यास मद से निर्माणाधीन एवं पूर्ण हो चुकी बहुग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने जिन योजनाओं की संचालन एवं अनुरक्षण (Operation & Maintenance - O&M) अवधि समाप्त हो चुकी है, उनके नियमित संचालन हेतु आवश्यक प्राक्कलन तैयार कर जिला कार्यालय को शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

समीक्षा के क्रम में चक्रधरपुर प्रमंडल अंतर्गत एक जलापूर्ति योजना की पाइपलाइन पथ निर्माण विभाग के द्वारा क्षतिग्रस्त किए जाने का मामला भी सामने आया। इस पर उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत पर होने वाले व्यय का विस्तृत आकलन तैयार कर प्रतिवेदन समर्पित करने का निर्देश दिया, ताकि आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिन योजनाओं में FHTC का कार्य पूर्ण हो चुका है, उनकी प्रविष्टि IMIS पोर्टल पर अविलंब सुनिश्चित की जाए, ताकि योजनाओं की अद्यतन प्रगति का सही अभिलेखीकरण हो सके।

बैठक में उपायुक्त ने सभी सहायक अभियंताओं एवं कनीय अभियंताओं को नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण कर निर्माणाधीन एवं संचालित जलापूर्ति योजनाओं का निरीक्षण करने, कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का त्वरित निराकरण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक योजना की नियमित मॉनिटरिंग एवं प्रभावी समन्वय के माध्यम से ही निर्धारित समय-सीमा के भीतर योजनाओं को पूर्ण कर आमजन को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सकता है।

बैठक में उप विकास आयुक्त, प्रशिक्षु आईएएस, कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल चाईबासा एवं चक्रधरपुर, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, जिला जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्य तथा डीपीएमयू (DPMU) एवं बीओएमयू (BOMU) के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
*झारखण्ड सरकार की महत्वपूर्ण पहल- वृद्ध, गंभीर रूप से बीमार एवं दिव्यांग कलाकारों को ₹4,000 प्रतिमाह पेंशन.*

*आवेदन की अंतिम तिथिः 31 जुलाई 2026.*

*सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग- झारखण्ड सरकार।*
*सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा*
*प्रेस विज्ञप्ति संख्या:-811/2026*
*शुक्रवार,03 जुलाई 2026*
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झारखंड राज्य खाद्य आयोग की प्रभारी अध्यक्ष शबनम परवीन ने किया पश्चिमी सिंहभूम का भ्रमण

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, शिकायतों के त्वरित निष्पादन एवं पात्र लाभुकों तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
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झारखंड राज्य खाद्य आयोग की प्रभारी अध्यक्ष सह सदस्या श्रीमती शबनम परवीन ने दो दिवसीय पश्चिमी सिंहभूम जिला भ्रमण के दौरान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की तथा विभिन्न संस्थानों एवं जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) से संबंधित केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। भ्रमण के दौरान परिसदन में जिला पंचायत राज पदाधिकारी सह प्रभारी जिला आपूर्ति पदाधिकारी सहित अन्य पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

भ्रमण के प्रथम चरण में प्रभारी अध्यक्ष ने सदर अस्पताल स्थित कुपोषण उपचार केंद्र (NRC) का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान केंद्र में भर्ती बच्चों एवं उनकी माताओं से उपचार एवं उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की। बच्चों की माताओं द्वारा उपचार व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया गया। प्रभारी अध्यक्ष ने केंद्र में उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता में सुधार, भोजन संबंधी मेन्यू को प्रमुखता से प्रदर्शित करने तथा लाभुकों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। लाभुकों को राशि उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए केंद्र प्रभारी को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। साथ ही राशि भुगतान में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं से आयोग को लिखित रूप से अवगत कराने को कहा, ताकि विभागीय स्तर पर आवश्यक पहल की जा सके।

द्वितीय दिवस प्रभारी अध्यक्ष ने प्रखंड खूंटपानी अंतर्गत कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, बदिया का निरीक्षण किया। विद्यालय में भोजन व्यवस्था, मेन्यू एवं अन्य सुविधाओं का जायजा लिया गया। छात्राओं से बातचीत के दौरान उन्होंने भोजन की गुणवत्ता एवं नियमित उपलब्धता पर संतोष व्यक्त किया।

इसके उपरांत ग्राम उपर लोटा एवं ग्राम बारीपी में जन वितरण प्रणाली के लाभुकों से खाद्यान्न वितरण की स्थिति की जानकारी प्राप्त की गई। निरीक्षण के दौरान लाभुकों ने कुछ स्थानों पर कम मात्रा में राशन वितरण की शिकायत की। इस संबंध में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा संबंधित जन वितरण प्रणाली विक्रेता के विरुद्ध पूर्व में निलंबन की कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई। प्रभारी अध्यक्ष ने जिला पंचायत राज पदाधिकारी सह प्रभारी जिला आपूर्ति पदाधिकारी एवं प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी को निर्देश दिया कि 15 दिनों के भीतर जांच पूर्ण करते हुए जिन लाभुकों को कम खाद्यान्न प्राप्त हुआ है, उन्हें नियमानुसार बकाया राशन मुआवजे सहित उपलब्ध कराया जाए। साथ ही सभी पात्र लाभुकों को निर्धारित मात्रा में पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान कुछ वृद्ध लाभुकों द्वारा e-PoS मशीन में अंगूठे का निशान दर्ज नहीं हो पाने की समस्या भी सामने आई। इस पर प्रभारी अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए समस्या का शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को नियमित क्षेत्र भ्रमण कर लाभुकों की शिकायतों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा।

प्रभारी अध्यक्ष ने सदर प्रखंड अंतर्गत मॉडल आंगनबाड़ी प्री-नर्सरी स्कूल, किलीगोट का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बच्चों को निर्धारित मानक के अनुरूप प्रतिदिन अंडा उपलब्ध नहीं कराए जाने की जानकारी मिलने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुसार नियमित रूप से पोषाहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

भ्रमण के उपरांत परिसदन भवन में आयोजित समीक्षात्मक बैठक में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के क्रियान्वयन, आयोग में लंबित शिकायतों, निरीक्षण के दौरान प्राप्त शिकायतों तथा झारखंड राज्य आकस्मिक खाद्यान्न कोष की समीक्षा की गई।

बैठक में प्रभारी अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से वंचित ऐसे निर्धन एवं जरूरतमंद व्यक्तियों को आकस्मिक परिस्थितियों में झारखंड राज्य आकस्मिक खाद्यान्न कोष के माध्यम से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही पात्र लाभुकों का राशन कार्ड शीघ्र बनाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

उन्होंने आयोग में लंबित शिकायतों की प्रतियां संबंधित पदाधिकारियों को उपलब्ध कराते हुए 10 दिनों के भीतर कार्रवाई प्रतिवेदन आयोग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। वहीं निरीक्षण के दौरान प्राप्त शिकायतों का 15 दिनों के भीतर निष्पादन सुनिश्चित करते हुए इसकी सूचना आयोग को उपलब्ध कराने का निर्देश अपर उपायुक्त सह जिला शिकायत निवारण पदाधिकारी को दिया।

बैठक में अपर उपायुक्त सह जिला शिकायत निवारण पदाधिकारी, जिला पंचायत राज पदाधिकारी सह प्रभारी जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, संबंधित अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।