बेगूसराय के कई स्कूलों में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’, बच्चों को गुड टच-बैड टच और साइबर अपराध से बचाव की दी गई जानकारी
नालसा के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने चलाया जागरूकता अभियान, बाल विवाह और नशे के दुष्परिणामों से भी कराया अवगत
बेगूसराय: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (नालसा), नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बेगूसराय की ओर से बुधवार को ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत जिले के विभिन्न विद्यालयों में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के दौरान बच्चों को उनके अधिकारों, लैंगिक अपराधों से सुरक्षा, गुड टच-बैड टच की पहचान, बाल विवाह के दुष्परिणामों, साइबर सुरक्षा और नशामुक्ति के प्रति जागरूक किया गया।
यह अभियान डीएवी पब्लिक स्कूल, इटवा, बीआर डीएवी पब्लिक स्कूल, माउंट लिट्रा पब्लिक स्कूल, जेके प्लस टू स्कूल, ज्ञान भारती प्लस टू स्कूल, बीएस कॉलेज प्लस टू स्कूल, यूएचएस लडुआरा, तक्षशिला पब्लिक स्कूल, गंगा ग्लोबल पब्लिक स्कूल सहित जिले के अन्य विद्यालयों में चलाया गया।
अनुचित व्यवहार होने पर चुप न रहें बच्चे
मुख्य कार्यक्रम डीएवी पब्लिक स्कूल, इटवा में आयोजित हुआ। यहां परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश बृजेंद्र कुमार ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सुरक्षित बचपन अभियान का उद्देश्य बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण संबंधी कानूनों की जानकारी देना और उन्हें गुड टच-बैड टच के बीच अंतर समझाना है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे के साथ अनुचित व्यवहार होता है, तो उसे बिना किसी संकोच के अपने अभिभावक, शिक्षक या विद्यालय के प्राचार्य को इसकी जानकारी देनी चाहिए। बच्चों को ऐसे व्यवहार का विरोध करने, संबंधित व्यक्ति से दूरी बनाने और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रधान न्यायाधीश ने बच्चों को साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और इंटरनेट के दुष्परिणामों के बारे में भी बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर अनावश्यक रूप से अपनी तस्वीरें और निजी जानकारियां साझा नहीं करने की सलाह दी।
बाल विवाह को बताया समाज के लिए अभिशाप
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सह अवर न्यायाधीश करुणानिधि प्रसाद आर्य ने बाल विवाह को समाज के लिए अभिशाप बताते हुए कहा कि कम उम्र में विवाह होने से बच्चों, विशेषकर बालिकाओं के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने बाल विवाह में शामिल दोषियों के विरुद्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। साथ ही बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्हें नशे से दूर रहने की अपील की।
किशोर न्याय अधिनियम और साइबर सुरक्षा पर भी जोर
माउंट लिट्रा पब्लिक स्कूल, बेगूसराय में आयोजित कार्यक्रम में किशोर न्याय परिषद के प्रधान मजिस्ट्रेट प्रभात कुमार ने बच्चों को संबोधित किया। उन्होंने सुरक्षित बचपन अभियान के तीन प्रमुख बिंदुओं—लैंगिक अपराधों से संबंधित कानूनों की जानकारी, गुड टच-बैड टच की पहचान और साइबर अपराधों से बचाव—पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने किशोर न्याय अधिनियम (जेजे एक्ट) के प्रावधानों की भी जानकारी दी।
विभिन्न विद्यालयों में न्यायिक पदाधिकारियों ने किया जागरूक
अभियान के प्रभावी संचालन के लिए जिले के अलग-अलग विद्यालयों में न्यायिक पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई थी। बीआर डीएवी पब्लिक स्कूल में गौरव आनंद, गंगा ग्लोबल पब्लिक स्कूल में ब्रजेश कुमार सिंह, तक्षशिला पब्लिक स्कूल में देवेश कुमार, बीएस कॉलेज प्लस टू स्कूल में मनोज कुमार पंचम, ज्ञान भारती प्लस टू स्कूल में एमडी अफजाल, जेके प्लस टू स्कूल में नवीन श्रीवास्तव तथा माउंट लिट्रा पब्लिक स्कूल में प्रभात कुमार ने बच्चों को जागरूक किया।
वहीं, ओमर बालिका उच्च विद्यालय में पोक्सो न्यायालय के विशेष न्यायाधीश दिव्य शेखर ने बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा से संबंधित आवश्यक जानकारी दी।
सभी विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान बच्चों को पोक्सो अधिनियम, बाल विवाह निषेध, साइबर सुरक्षा, किशोर न्याय अधिनियम और नशामुक्ति से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों से अवगत कराया गया। बच्चों को समझाया गया कि किसी भी प्रकार के शोषण या अनुचित व्यवहार की स्थिति में चुप न रहें और विश्वसनीय अभिभावक, शिक्षक या संबंधित प्राधिकार से सहायता लें।
कार्यक्रम के अंत में डीएवी पब्लिक स्कूल, इटवा की प्राचार्या सविता कुमारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से समय-समय पर आयोजित ऐसे जागरूकता कार्यक्रम बच्चों को उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी देने के साथ-साथ उनके सुरक्षित और समुचित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।