पुलिसकर्मियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए भिवानी पुलिस ने आयोजित किया एक दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग सेमिनार
पुलिस अधीक्षक भिवानी मयंक मिश्रा, आईपीएस के दिशा-निर्देशन में जिला पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यकुशलता, अनुसंधान क्षमता तथा साक्ष्य प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आज एक दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग सेमिनार का आयोजन किया गया।
✍️ सेमिनार में थाना प्रबंधकों, पुलिस उपाधीक्षकों, अनुसंधान अधिकारियों तथा विभिन्न पुलिस कार्यों से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपराध स्थल के प्रबंधन, साक्ष्यों के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित संकलन, दस्तावेजीकरण, पैकेजिंग, सीलिंग तथा चेन ऑफ कस्टडी सहित महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दो बैचों में प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
*विशेषज्ञों ने अपराध स्थल से न्यायालय तक साक्ष्य की पूरी प्रक्रिया पर दिया प्रशिक्षण*
✍️ सेमिनार में प्रो. (डॉ.) जसकरण सिंह, डीन, स्कूल ऑफ साइंसेज एवं प्रोफेसर, फोरेंसिक साइंस, गीता यूनिवर्सिटी, पानीपत तथा श्री साहिल शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, फोरेंसिक साइंस, स्कूल ऑफ साइंसेज, गीता यूनिवर्सिटी, पानीपत बतौर विशेषज्ञ एवं व्याख्याता उपस्थित रहे।
✍️ प्रो. (डॉ.) जसकरण सिंह ने अपने व्याख्यान में “Crime Scene – Evidence to Court Room” विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अपराध स्थल पर साक्ष्यों की अखंडता बनाए रखने, अपराध स्थल को सुरक्षित रखने, साक्ष्यों की पहचान एवं वैज्ञानिक तरीके से उनके संग्रहण तथा अपराध स्थल से लेकर न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने तक की पूरी प्रक्रिया के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि अपराध स्थल पर पुलिस द्वारा की गई शुरुआती कार्रवाई जांच की दिशा और न्यायालय में मामले की मजबूती पर सीधा प्रभाव डालती है। उन्होंने साक्ष्य की विश्वसनीयता बनाए रखने तथा कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप उसके दस्तावेजीकरण पर भी विशेष जोर दिया।
✍️ वहीं श्री साहिल शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, फोरेंसिक साइंस, गीता यूनिवर्सिटी, पानीपत ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को फोरेंसिक साक्ष्यों के वैज्ञानिक प्रबंधन और व्यावहारिक पहलुओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न प्रकार के भौतिक, जैविक, ट्रेस एवं डिजिटल साक्ष्यों की पहचान, उनके सुरक्षित संग्रहण, उचित पैकेजिंग, लेबलिंग एवं सीलिंग तथा साक्ष्य को एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी तक हस्तांतरित किए जाने के दौरान चेन ऑफ कस्टडी का रिकॉर्ड सही तरीके से बनाए रखने के महत्व को समझाया। उन्होंने अपराध स्थल के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण तथा क्रॉस-कंटैमिनेशन से बचाव के आवश्यक उपायों की भी जानकारी दी।
*व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं सिमुलेशन अभ्यास भी कराया*
सेमिनार को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए सिमुलेशन आधारित हैंड्स-ऑन एक्सरसाइज भी कराई गई। इसमें अपराध स्थल से साक्ष्य की पहचान, उसके सुरक्षित संग्रहण, पैकेजिंग, लेबलिंग, सीलिंग तथा आगे सुपुर्दगी की प्रक्रिया का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। इससे पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वास्तविक परिस्थितियों में वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्यों को संभालने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला।
*पुलिस अधीक्षक भिवानी ने बताई सेमिनार की महत्ता, विशेषज्ञों का जताया आभार*
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक भिवानी श्री मयंक मिश्रा, आईपीएस ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक पुलिसिंग में वैज्ञानिक साक्ष्य एवं गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अपराध स्थल पर की गई कार्रवाई में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सटीकता तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किसी भी आपराधिक मामले की जांच को मजबूत बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को समय-समय पर इस प्रकार के क्षमता निर्माण प्रशिक्षण दिए जाने से उनकी अनुसंधान क्षमता, साक्ष्य प्रबंधन कौशल और व्यावहारिक कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। अपराध स्थल से प्राप्त साक्ष्य को सही तरीके से सुरक्षित रखना, उसकी पूरी चेन ऑफ कस्टडी बनाए रखना और न्यायालय के समक्ष उसकी विश्वसनीयता सुनिश्चित करना पुलिस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पुलिस अधीक्षक भिवानी ने सेमिनार में उपस्थित प्रो. (डॉ.) जसकरण सिंह एवं श्री साहिल शर्मा, गीता यूनिवर्सिटी, पानीपत का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों विशेषज्ञों द्वारा पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपराध स्थल प्रबंधन एवं फोरेंसिक साक्ष्य के संबंध में दी गई महत्वपूर्ण एवं व्यावहारिक जानकारी निश्चित रूप से पुलिस अनुसंधान को और अधिक प्रभावी बनाने में उपयोगी सिद्ध होगी।
उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी को अपने दैनिक पुलिस कार्य में प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।
सेमिनार का मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों को साक्ष्य संग्रहण एवं अपराध स्थल प्रबंधन में बेहतर दक्षता प्रदान करना, प्रक्रियात्मक कमियों को दूर करना तथा लेबलिंग, सीलिंग और चेन ऑफ कस्टडी के दस्तावेजीकरण में एकरूपता सुनिश्चित करना रहा।
— पुलिस प्रवक्ता, भिवानी।।