केंद्र सरकार की तानाशाही के खिलाफ व दिल्ली में डी वाई एफ आई तथा एस एफ आई के 300 से अधिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की किसान सभा और सीआईटीयू ने निंदा की है तथा विरोध में जोरदार प्रदर्शन करके
भिवानी सहित दस स्थानों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले फूंके; एसआईआर रद्द करने और हटाए गए वोट दोबारा जोड़ने की मांग
भिवानी, 10 अक्टूबर2026
केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को रोकने व दिल्ली में डी वाई एफ आई व एस एफ आई के 300 से अधिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की निंदा की और आरोप लगाते हुए अखिल भारतीय किसान सभा और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीआईटीयू) के कार्यकर्ताओं ने आज भिवानी सहित जिले के विभिन्न कस्बों में जोरदार प्रदर्शन किए। भिवानी, बवानीखेड़ा, धनाना, मिराण, ओबरा, कैरू ईशरवाल, तोशाम, लोहारू, बलियाली और कूंगड़ सहित विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले फूंके और उनके पद से हटाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने, मतदाता सूचियों से हटाए गए सभी पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल करने तथा चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने की मांग उठाई।
भिवानी में प्रदर्शन शहीद भगत सिंह यादगार भवन से शुरू होकर कोर्ट रोड तक पहुंचा। प्रदर्शन को अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान रामफल देशवाल, उपप्रधान कामरेड ओम प्रकाश, पूर्व कर्मचारी नेता सुखदर्शन सरोहा, युवा कल्याण संगठन के संरक्षक कमल प्रधान तथा किसान सभा की भिवानी तहसील कमेटी के अध्यक्ष संतोष देशवाल ने संबोधित किया। इस अवसर पर सज्जन कुमार सिंगला, निर्मल सिंह , जयपाल साहू , रिटायर्ड कर्मचारी संघ के रतन कुमार जिंदल, नरेंद्र धनाना, रतन कालवास , दिलबाग कालवास , प्रह्लाद राय , ईश्वर कोंट , अनिल शेषमा , सुखपाल सिंह , राजाराम, अमीर सिंह, भीम सिंह और राजकुमार दलाल , ओम प्रकाश दलाल , रामनारायण , रमन , अनिल स्योराण , सहित अनेक किसान, मजदूर और जनसंगठनों के नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए।
वक्ताओं ने कहा कि आज दिल्ली में लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों को लेकर प्रदर्शन करने जा रहे लोगों को रोकना बेहद गंभीर मामला है। उनके अनुसार, भिवानी से दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे अनेक लोगों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया और हिरासत में लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में अभिषेक शर्मा सहित 300 नौजवानों को गिरफ्तार कर लिया गया और कई लोगों को नजरबंद किया गया, जबकि कोकरोच पार्टी के नेता लोकेश कुमार को रास्ते में उतारकर हिरासत में लिया गया। किसान सभा के जिला सचिव मास्टर जगरोशन , सुबेदार धनपत व कर्ण सिंह जैनावास सीटू के नेता सुखदेव पालवास व कामरेड अनिल कुमार के नेतृत्व में विभिन्न जगहों पर ज्ञानेश कुमार के पुतले फूंके । उन्होंने आरोप लगाया कि कई नेताओं के घरों पर पुलिस भेजकर आंदोलन में शामिल होने से रोकने का प्रयास किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने और संगठन बनाने का अधिकार प्राप्त है। सरकार और प्रशासन द्वारा शांतिपूर्ण विरोध को रोकना इन लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में बैरिकेडिंग, आवाजाही में बाधाओं और नेताओं व कार्यकर्ताओं को रोकने की कार्रवाइयों से सरकार की दमनकारी नीति उजागर होती है।
किसान और मजदूर नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम हटने का मामला देश के लोकतंत्र और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार से जुड़ा हुआ है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के माध्यम से करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और बिहार, असम तथा पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची से हटाए गए सभी पात्र मतदाताओं के नामों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें दोबारा जोड़ा जाए और एसआईआर प्रक्रिया रद्द की जाए।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की पूर्व व्यवस्था बहाल करने तथा नियुक्ति प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी उठाई।
वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों का विरोध करना कोई अपराध नहीं है। किसान, मजदूर और आम नागरिक अपने अधिकारों तथा निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था की रक्षा के लिए आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार से दमनकारी कार्रवाई बंद करने, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करने और आंदोलनकारियों को रोकने के बजाय उनकी मांगों पर बातचीत करने की अपील की।
किसान सभा और सीआईटीयू ने चेतावनी दी कि यदि लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन जारी रहा और मतदाता सूची से हटाए गए पात्र नागरिकों के नाम बहाल नहीं किए गए, तो इस मुद्दे पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा । उन्होंने सभी गिरफ्तार नेताओं की रिहाई की मांग की है ।