12 दिसंबर को भिवानी में होगा महाआंदोलन
यूजीसी के काले कानून और एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग के खिलाफ गांव खरककलां में 40 दिन से सडक़ों पर ग्रामीण, सरकार बनी बहरी
सरकार की जनविरोधी व अंधी नीतियों का अब और अधिक सहन करना संभव नहीं : कैप्टन अमर सिंह
भिवानी, 10 अक्तूबर : यूजीसी के काले फैसलों, आरक्षण प्रणाली में थोपे गए अव्यावहारिक संशोधनों और एससी-एसटी एक्ट के बेलगाम दुरुपयोग के विरोध में खरक कलां बस स्टैंड पर जारी अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को अपने 40वें दिन में प्रवेश कर गया है। इतने लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीणों की सुध तक न लेने वाली सरकार की इस उदासीनता और बहरेपन के खिलाफ अब क्षेत्र के हर वर्ग में भयंकर रोष व्याप्त है। इसके चलते 12 दिसंबर को भिवानी में स्वर्ण समाज महाआंदोलन का ऐलान किया गया है। इस हुंकार के समर्थन में अब लगातार विभिन्न सामाजिक संगठन और खापें यूजीसी रोल बैक संघर्ष समिति के इस मोर्चे पर डटकर समर्थन में उतर रही हैं, जिससे यह आंदोलन अब और अधिक आक्रामक और मजबूत हो गया है। 12 दिसंबर को होने वाले महाआंदोलन को लेकर लोगों से संपर्क भी साधा जा रहा है। इसी कड़ी में स्थानीय डिफेंस कॉलोनी में लोगों से इस महाआंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंंचने की अपील की गई। इस मौके पर राहुल राणा ने कहा कि 12 अक्तूबर को आयोजित होने वाला यह विशाल महाआंदोलन सरकार की इन तानाशाही और जनविरोधी नीतियों की नींव को हिलाकर रख देगा। उन्होंने मांग की है कि यूजीसी द्वारा थोपे गए सभी तानाशाही और भेदभावपूर्ण फैसलों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। इसके साथ ही, आरक्षण के नियमों में तर्कसंगत और व्यावहारिक बदलाव किए जाएं तथा एससी-एसटी एक्ट में न्यायसंगत संशोधन कर इसके जरिए हो रहे अन्याय और दुरुपयोग पर तुरंत कानूनी रोक लगाई जाए। वही दूसरी तरफ खरक कलां में चल रहे धरने की अध्यक्षता करते हुए संघर्ष समिति के प्रधान कैप्टन अमर सिंह ने सरकार को चेतावनी भरे शब्दों में दो-टूक कहा कि सरकार की जनविरोधी और अंधी नीतियों का अब और अधिक सहन करना संभव नहीं है। पिछले 40 दिनों से ग्रामीण पूरी शांति और अनुशासन के साथ अपनी न्यायोचित मांगों के लिए सडक़ों पर बैठे हैं, लेकिन सत्ता में बैठे हुक्मियों की लगातार अनदेखी उनकी क्रूर संवेदनशीलता को उजागर करती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अब भी जनता की इस जायज आवाज को दबाने की कोशिश की, तो यह आक्रोश विकराल रूप धारण कर सत्ता की चूलें हिला देगा।