मानवता की मिसाल : दर्द को दरकिनार कर सत्यनारायण ने निभाया फर्ज, आपात स्थिति में रक्त दान कर बचाई मरीज की जान
भिवानी, 10 अक्तूबर : मानवता और जज्बे के आगे शारीरिक तकलीफें अक्सर बौनी साबित हो जाती हैं। ऐसा ही प्रेरणादायक नजारा भिवानी में देखने को मिला, जहां एक जरूरतमंद मरीज की जिंदगी बचाने के लिए भिवानी निवासी सत्यनारायण ने पैर में मोच होने के बावजूद अपनी परवाह न करते हुए निस्वार्थ भाव से रक्तदान किया। उनके इस साहसिक और मानवीय कदम से एक बार फिर साबित हो गया कि यदि मन में सेवा का भाव हो, तो कोई भी बाधा इंसान को नेक काम करने से नहीं रोक सकती।
जानकारी के अनुसार भिवानी जिले के गोलपुरा गांव के एक मरीज को अचानक ए-नेगेटिव ब्लड की अत्यंत आवश्यकता आन पड़ी। रक्त की इस गंभीर कमी को पूरा करने के लिए शतकवीर रक्तदाता राजेश डुडेजा ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने अपनी ब्लड डोनर्स टीम के सक्रिय सदस्यों से संपर्क किया और सोशल मीडिया व कॉल्स के जरिए अपील की कि कोई भी इच्छुक और योग्य रक्तदाता तुरंत आगे आए, ताकि मरीज का जीवन बचाया जा सके। राजेश डुडेजा की इस अपील का असर तुरंत देखने को मिला और भिवानी के ही रहने वाले सत्यनारायण ने बिना एक पल गंवाए आगे आने का फैसला किया। खास बात यह थी कि उस वक्त सत्यनारायण के पैर में गंभीर मोच आई हुई थी, जिसके कारण उन्हें चलने-फिरने में भी खासी तकलीफ हो रही थी। शारीरिक दर्द और डॉक्टर की आराम करने की सलाह के बावजूद, जब उन्होंने एक मरीज की जिंदगी खतरे में देखी, तो उनका जज्बा और फर्ज आड़े आया। वे दर्द की परवाह किए बिना सीधे ब्लड बैंक पहुंचे और रक्तदान किया। उनके इस समर्पण ने वहां मौजूद हर शख्स को प्रभावित किया।
सत्यनारायण के इस सराहनीय और प्रेरणादायी कार्य पर शतकवीर रक्तदाता राजेश डुडेजा ने उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने सत्यनारायण को सम्मानित करते हुए प्रशंसा पत्र भेंट किया और कहा कि सत्यनारायण का यह कदम केवल एक यूनिट रक्त दान करने से कहीं बढक़र है। पैर में मोच होने के बावजूद उनका अस्पताल पहुंचना यह साबित करता है कि सच्ची सेवा के लिए सिर्फ स्वस्थ शरीर ही नहीं, बल्कि एक बड़ा और संवेदनशील दिल होना चाहिए। ऐसे लोग हमारे समाज की असली ताकत हैं, जो दूसरों के जीवन के लिए प्रेरणा बनते हैं।