लंपी बीमारी को लेकर पशुपालन विभाग सतर्क, हलुवास रोड नंदीशाला का किया निरीक्षण
नंदीशाला में शत-प्रतिशत टीकाकरण पूरा, एक भी केस नहीं : डा. विजय सनसनवाल
बुखार, दूध में गिरावट और त्वचा पर गांठें लंपी के है प्रमुख लक्षण, तुरंत अलग करें संक्रमित पशु : डा. विजय सनसनवाल
नंदीशाला में नए पशुओं के प्रवेश पर रोक, वैक्सीनेशन से सभी नंदी स्वस्थ : प्रबंधक अमित बंसल
भिवानी, 16 सितंबर : पशुओं में फैलने वाली लंपी बीमारी को लेकर पशुपालन विभाग पूरी तरह से मुस्तैद और सतर्क नजर आ रहा है। विभाग के उपनिदेशक डा. रविंद्र सहरावत एवं उपमंडलाधिकारी डा. राजेश जाखड़ के दिशा-निर्देशों के तहत बुधवार को पशु चिकित्सक विजय सनसनवाल ने भिवानी के हालुवास रोड स्थित नंदीशाला का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि नंदीशाला में मौजूद शत-प्रतिशत पशुओं का सफलतापूर्वक टीकाकरण किया जा चुका है, जिसके परिणामस्वरूप वहां लंपी बीमारी का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
निरीक्षण के बाद डा. विजय सनसनवाल ने नंदीशाला की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि यहां साफ-सफाई का उत्कृष्ट ध्यान रखा जा रहा है। इसके साथ ही नंदियों को गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक चारा दिया जा रहा है, जिससे पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि लंपी जैसी संक्रामक बीमारी से निपटने के लिए पशुपालन विभाग पूरी तरह से सतर्क है और जिला भर में व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने जिले के सभी गौशाला संचालकों और आम पशुपालकों से अपील की कि वे अपने परिसरों में स्वच्छता बनाए रखें, चारे का विशेष प्रबंध करें और अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण अवश्य करवाएं, ताकि बीमारियों को फैलने से रोका जा सके।
डा. विजय सनसनवाल ने कहा कि पशुओं, विशेषकर गायों में तेजी से फैलने वाला लंपी त्वचा रोग एक घातक संक्रामक वायरल बीमारी है, इस बीमारी की शुरुआत में पशुओं को तेज बुखार आता है, उनके दूध उत्पादन में अचानक भारी गिरावट हो जाती है, आंखों-नाक से गाढ़ा पानी बहने लगता है और भूख न लगने से पशु बेहद कमजोर हो जाते हैं। वहीं इसके सबसे प्रमुख लक्षण में गर्दन, सिर, थन और जननांगों के पास 2 से 5 सेंटीमीटर आकार की सख्त व दर्दनाक गांठें बनना तथा पैरों में सूजन से लंगड़ापन आना शामिल है। इससे बचाव और रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग और विशेषज्ञों ने स्वस्थ पशुओं का समय पर गोट पॉक्स या एलएसडी (एलएसडी) टीकाकरण करवाने की सलाह दी है। डा. सनसनवाल ने कहा कि लक्षण दिखते ही सक्रमित पशु को तुरंत कम से कम 14 से 21 दिनों के लिए अलग कर दें, बाड़े में मच्छर, मक्खी व चीचड़ों पर नियंत्रण के लिए नीम के पानी का प्रयोग करें, तथा सैनिटाइजेशन करें। अगर किसी पशु में लंपी के लक्ष्ण दिखाई तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
नंदीशाला के प्रबंधक अमित बंसल ने बताया कि लंपी बीमारी की आहट मिलते ही नंदीशाला प्रबंधन ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए थे। उन्होंने बताया कि जब से लंपी बीमारी का प्रकोप बढ़ा है, तब से नंदीशाला में बाहर से आने वाले नए पशुओं के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही पशुपालन विभाग के सहयोग से नंदीशाला के सभी नंदियों का समय रहते टीकाकरण पूरा करवा लिया गया था। प्रबंधक अमित बंसल ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इन कड़े सुरक्षा उपायों और शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन के कारण ही नंदीशाला में लंपी का एक भी केस दर्ज नहीं हुआ है और सभी पशु पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
फोटो : नंदीशाला में लंपी बीमारी के मद्देनजर नंदियों का निरीक्षण करते हुए डा. विजय सनसनवाल।