पीजी कॉलेज में दो दिवसीय बलराम जयंती एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव आयोजित
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भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों से विद्यार्थियों को कराया परिचित
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भगवान बलराम के जीवन से श्रम, कृषि और कर्तव्यनिष्ठा तथा श्रीकृष्ण से कर्मयोग की मिली प्रेरणा
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खरगोन 03 सितंबर। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय खरगोन में मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार प्राचार्य डॉ. जी.एस. चौहान के मार्गदर्शन में भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत दो दिवसीय बलराम जयंती एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव आयोजित किया गया। महोत्सव के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं एवं जीवन मूल्यों से परिचित कराया गया।
महोत्सव के प्रथम दिवस 2 सितंबर को बलराम जयंती के अवसर पर “भारतीय ज्ञान परंपरा में बलराम जयंती का महत्व” विषय पर विशिष्ट व्याख्यान आयोजित किया गया। राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापक प्रो. गणेश पाटील ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता भगवान बलराम भारतीय संस्कृति में शक्ति, श्रम एवं कृषि परंपरा के प्रतीक हैं। उनके हाथ में धारण किया गया हल कृषि एवं श्रम के महत्व को दर्शाता है। उनका जीवन श्रम, कर्तव्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों की प्रेरणा देता है।
अंग्रेजी साहित्य के सहायक प्राध्यापक प्रो. तुषार जांधव ने कहा कि भगवान बलराम एवं श्रीकृष्ण की जयंती जैसे आयोजन विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध ज्ञान एवं सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों के सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास के साथ आध्यात्मिक ज्ञान और भारतीय जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है।
हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. राजू देसाई ने कहा कि भगवान बलराम और श्रीकृष्ण के जीवन से प्राप्त व्यावहारिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है। उनके जीवन चरित्र एवं आदर्शों से प्रेरणा लेकर विद्यार्थी अपने जीवन को अधिक सार्थक एवं मूल्यवान बना सकते हैं।
महोत्सव के द्वितीय दिवस श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई। विशिष्ट अतिथि समाजशास्त्र की वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. वंदना बर्वे ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व बहुआयामी एवं जीवन के प्रत्येक क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी है। उनका जीवन प्रेम, करुणा, कर्तव्य, नीति तथा परिस्थितियों के अनुरूप विवेकपूर्ण निर्णय लेने की शिक्षा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया कर्मयोग का संदेश आज भी मानव जीवन के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
डॉ. सी.एस. चौहान ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े आयोजन विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत एवं जीवन मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।
कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन डॉ. रमेश चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में अपनी संस्कृति, परंपराओं एवं जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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