अरबों की जलापूर्ति योजना पर पूर्व डिप्टी मेयर सह स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य मोहन श्रीवास्तव ने उठाए सवाल: टैंक बने, पाइप बिछे, फिर भी कई मोहल्लों में नहीं पहुंच रहा पानी
गया। शहर में जलापूर्ति व्यवस्था और सड़क-नाली निर्माण में सामने आ रही समस्याओं को लेकर गया नगर निगम में बुधवार को समीक्षा बैठक हुई। बैठक में जलापूर्ति से जुड़े कार्यों की स्थिति, पाइपलाइन में लीकेज, ड्राई जोन में पानी नहीं पहुंचने और नाली निर्माण में बरती जा रही लापरवाही को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में जनप्रतिनिधियों, पार्षदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, महापौर, उपमहापौर समेत संबंधित पदाधिकारियों और जलापूर्ति योजना से जुड़े लोगों की मौजूदगी में योजनाओं की समीक्षा की गई।
गया नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर सह स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए वर्षों पहले योजनाएं तैयार की गई थीं। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से अरबों रुपये की राशि स्वीकृत की गई। बावजूद इसके समय पर काम पूरा नहीं कराया गया और लगातार समय बढ़ता चला गया। उन्होंने कहा कि जलापूर्ति योजना की स्थिति को लेकर नगर निगम बोर्ड और सशक्त स्थायी समिति में कई बार समीक्षा की गई तथा संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों को सुधार का अवसर दिया गया।
मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि इसके बावजूद आज भी शहर के कई इलाकों में जलापूर्ति की स्थिति संतोषजनक नहीं है। समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कई क्षेत्रों में जलापूर्ति के लिए बनाए गए टैंकों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है। वहीं, जिन इलाकों में कुछ समय पहले पाइपलाइन बिछाई गई थी, वहां मुख्य पाइपलाइन के फटने और लीकेज होने की शिकायत लगातार सामने आ रही है। पाइपलाइन खराब होने के कारण कई मोहल्लों में कई-कई दिनों तक पानी की आपूर्ति बाधित हो रही है।
उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर पाइपलाइन को जमीन के अंदर निर्धारित तरीके से बिछाने के बजाय ऊपर या असुरक्षित तरीके से बिछाया गया है। इसके कारण पाइप पर दबाव पड़ने से वह बार-बार फट जा रही है और लीकेज की समस्या उत्पन्न हो रही है। उन्होंने जलापूर्ति के कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई जगह पेटी कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से काम कराए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में पूरे काम की गुणवत्ता और उसकी तकनीकी जांच आवश्यक है।
समीक्षा के दौरान गया बिगहा समेत कई ऐसे इलाकों का मुद्दा भी उठाया गया, जहां लंबे समय से जलापूर्ति की समस्या बनी हुई है। मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि कुछ इलाके लगातार ड्राई जोन की समस्या से जूझ रहे हैं। कहीं पाइपलाइन बंद है तो कहीं पानी का पर्याप्त प्रेशर नहीं है। ऐसे में करोड़ों-अरबों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि आम लोगों के घरों तक नियमित पानी नहीं पहुंच रहा है तो योजनाओं के क्रियान्वयन और गुणवत्ता की जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जलापूर्ति की समस्या को लेकर नगर निगम बोर्ड में प्रस्ताव पारित किए गए हैं और राज्य सरकार के स्तर पर भी मामला उठाया गया है। इस मुद्दे को लेकर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन तक किए गए हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि संबंधित एजेंसियों को मौके पर जाकर समस्या का समाधान करना होगा।
बैठक में शहर में सड़क और नाली निर्माण से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि नाली का निर्माण किसी एक स्थान से दूसरे स्थान तक कराकर उसे बीच में छोड़ देना उचित व्यवस्था नहीं है। नाली को एक निर्धारित प्लान के तहत अंतिम निकासी स्थल तक जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर नाली बनाकर उसका पानी सड़क पर ही छोड़ दिया गया है। इससे सड़क पर गंदा पानी बह रहा है और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि शहर में सड़क, नाली और गली निर्माण की योजनाएं समग्र प्लान के तहत बनाई जानी चाहिए। किसी एक स्थान पर नाली बनाकर छोड़ देने से समस्या खत्म होने के बजाय दूसरी जगह जलजमाव और गंदगी की समस्या पैदा हो जाती है। निर्माण कार्यों में स्थानीय जरूरत, जल निकासी और भविष्य की व्यवस्था को ध्यान में रखना जरूरी है।
मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि नगर निगम के सफाईकर्मी लगातार शहर से गंदगी और नालों की सफाई में जुटे हैं, लेकिन यदि निर्माण कार्य ही वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से नहीं होंगे तो सफाई व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में जलापूर्ति और नाली निर्माण से जुड़ी इन समस्याओं को मुख्यमंत्री, संबंधित विभाग के अधिकारियों और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष भी उठाया जाएगा। उद्देश्य शहर में निर्बाध जलापूर्ति, बेहतर जल निकासी और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करना है।
मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि गया शहर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाने के लिए जनप्रतिनिधि लगातार आवाज उठाते रहेंगे। समीक्षा बैठक में सामने आई कमियों को दूर कराने के लिए संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों से जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब योजनाओं की केवल कागजी समीक्षा नहीं, बल्कि धरातल पर काम की वास्तविक स्थिति देखना जरूरी है।
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