गयाजी में आस्था का महासंगम! सीताकुंड में डॉ. प्रेम कुमार ने लगाई डुबकी, माता-पिता का किया तर्पण
गया। पितृपक्ष मेला महासंगम 2026 के बीच रविवार को बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने प्रसिद्ध सीताकुंड में आस्था की डुबकी लगाकर अपने माता-पिता एवं पितरों का विधि-विधान से तर्पण किया। उन्होंने सीताकुंड के पवित्र जल में स्नान करने के बाद पुरोहितों के निर्देशन में श्राद्ध एवं तर्पण की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान उन्होंने अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उनकी आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना की।
पितृपक्ष के दौरान गया जी में देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में रविवार को बिहार विधानसभा अध्यक्ष सह गया टाउन विधायक डॉ. प्रेम कुमार भी अपने पितरों का श्राद्ध करने सीताकुंड पहुंचे। धार्मिक परंपरा के अनुसार उन्होंने पहले सीताकुंड में स्नान किया और इसके बाद अपने माता-पिता तथा पूर्वजों के निमित्त तर्पण किया। तर्पण के दौरान उन्होंने पितरों को जल अर्पित कर श्रद्धा व्यक्त की।
इस मौके पर बिहार विधानसभा अध्यक्ष सह गया टाउन विधायक
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि “गया जी पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां आकर अपने माता-पिता और पूर्वजों का तर्पण करना मेरे लिए श्रद्धा और भावनाओं से जुड़ा विषय है। पितृपक्ष में गया जी आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की यही कामना होती है कि उनके पूर्वजों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति हो।” गौरतलब है कि इन दिनों गया जी में पितृपक्ष मेला महासंगम 2026 चल रहा है। देश के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में पिंडदानी गया पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु यहां पहुंचकर फल्गु नदी के तट और विभिन्न पिंडवेदियों पर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान, तर्पण एवं श्राद्ध कर्म कर रहे हैं। अब तक 28 लाख से अधिक पिंडदानियों के गया पहुंचने की बात सामने आई है।
गया जी में पिंडदान का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि गया में पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी धार्मिक आस्था के कारण पितृपक्ष के दौरान गया जी में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
सीताकुंड भी गया श्राद्ध क्षेत्र की महत्वपूर्ण वेदियों में शामिल है। पितृपक्ष के दौरान यहां सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। श्रद्धालु विधि-विधान से स्नान करने के बाद अपने पितरों के लिए तर्पण और अन्य धार्मिक कर्मकांड कर रहे हैं। रविवार को डॉ. प्रेम कुमार के पहुंचने के दौरान भी सीताकुंड परिसर में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। गया जी के विष्णुपद मंदिर, सीताकुंड, प्रेतशिला, रामशिला, देवघाट सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है। पिंडदानी अपने निर्धारित कर्मकांड के अनुसार अलग-अलग वेदियों पर पहुंचकर पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं। पितृपक्ष के कारण पूरे गया शहर का वातावरण धार्मिक और आध्यात्मिक बना हुआ है।
मेला महासंगम को लेकर जिला प्रशासन की ओर से भी श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मेला क्षेत्र में साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश, यातायात, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी विभिन्न पिंडवेदी और मेला क्षेत्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। पितृपक्ष मेला महासंगम के दौरान गया पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा से जुड़ा भावनात्मक अवसर भी है। यही वजह है कि हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर लोग गया पहुंच रहे हैं और अपने पितरों का तर्पण कर रहे हैं।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार का सीताकुंड पहुंचकर अपने माता-पिता और पितरों का तर्पण करना भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा रहा। उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ श्राद्ध कर्म संपन्न किया और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित की। पितृपक्ष के बीच विधानसभा अध्यक्ष का सीताकुंड पहुंचना और तर्पण करना श्रद्धालुओं के बीच भी चर्चा का विषय रहा। 28 लाख से अधिक पिंडदानियों के पहुंचने के साथ गयाजी इन दिनों आस्था के सबसे बड़े संगम में बदल गया है। सीताकुंड से लेकर विष्णुपद और अन्य पिंडवेदियों तक हर तरफ पितरों के प्रति श्रद्धा, धार्मिक अनुष्ठान और मोक्ष की कामना का दृश्य दिखाई दे रहा है।
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