कालपी में सरकारी नजूल भूमि की बिक्री के आरोपों से हड़कंप, जांच में अभिलेखों में अनियमितताओं का खुलासा!
गाटा संख्या 165 और भूखंड संख्या 1407-1409 को लेकर बढ़ा विवाद, सेवानिवृत्त पालिका कर्मचारी और भूमाफियाओं की कथित मिलीभगत की जांच
कालपी/जालौन। कालपी के अदलसराय इलाके में सरकारी नजूल भूमि की कथित बिक्री और अभिलेखों में हेरफेर के आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।
जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद प्रकरण तहसीलदार कालपी तक पहुंचा, जहां 19 अगस्त को सदर लेखपाल द्वारा की गई जांच में राजस्व अभिलेखों में अनियमितताओं का मामला सामने आने की बात दर्ज की गई है।
शिकायतकर्ता अमर सिंह अहिरवार एडवोकेट ने मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि अदलसराय, कालपी खास स्थित गाटा संख्या 165, वर्ग-12(ख), राज्य सरकार की नजूल भूमि तथा नगर पालिका परिषद कालपी के भूखंड संख्या 1407 को कथित रूप से कूटरचित अभिलेखों और मिलीभगत के जरिए निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया।
शिकायत में नगर पालिका के एक पूर्व/सेवानिवृत्त कर्मचारी और कुछ कथित भूमाफियाओं की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
नाप-जोख पर भी उठे गंभीर सवाल
शिकायत में 13 जुलाई 2026 को नगर पालिका के राजस्व निरीक्षक द्वारा की गई नाप-जोख पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि भूखंड संख्या 1409 के रकबे को कथित रूप से भूखंड संख्या 1407 में शामिल दर्शाया गया, जिससे सरकारी भूमि की स्थिति प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
मामले की गंभीरता इस बात से भी बढ़ गई है कि शिकायतकर्ता ने संबंधित भूमि का दोबारा राजस्व और नगर पालिका अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष सीमांकन कराने की मांग की है।
जांच रिपोर्ट में सामने आईं अनियमितताओं की बात
IGRS पर दर्ज शिकायत संख्या 40016526017150 की उपलब्ध स्थिति के अनुसार मामला राजस्व एवं आपदा विभाग से संबंधित है और इसे तहसीलदार कालपी को अग्रसारित किया गया है।
जांच विवरण में बताया गया है कि गाटा संख्या 165, वर्ग 12(ख) की सरकारी भूमि के संबंध में जांच की गई।
जांच विवरण में राज्य सरकार की नजूल भूमि से संबंधित अभिलेखों में अनियमितताओं की बात दर्ज है।
साथ ही, एक सेवानिवृत्त नगर पालिका कर्मचारी और कुछ कथित भूमाफियाओं द्वारा सरकारी भूमि के अनधिकृत विक्रय के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है।
मकान बने तो विवाद और गहराया
जांच के दौरान यह भी सामने आने की बात कही गई है कि कई लोगों के निर्मित मकान कथित अतिक्रमण की सीमा में आने लगे हैं।
इसके बाद स्थानीय स्तर पर विवाद और आक्रोश की स्थिति बनने की बात जांच रिपोर्ट में दर्ज की गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सरकारी नजूल भूमि के अभिलेखों में वास्तव में हेरफेर हुआ है तो यह किस स्तर पर हुआ और इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं?
साथ ही, यदि जमीन का कथित रूप से अनधिकृत विक्रय हुआ है तो उसमें शामिल लोगों की भूमिका और दस्तावेजों की वैधता भी जांच का अहम हिस्सा होगी।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
मामले में शिकायतकर्ता ने मांग की है कि गाटा संख्या 165 तथा नगर पालिका के भूखंड संख्या 1407 और 1409 का दोबारा निष्पक्ष सीमांकन कराया जाए। साथ ही 13 जुलाई की नाप-जोख रिपोर्ट, राजस्व अभिलेख, नगर पालिका के रिकॉर्ड और कथित बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई जाए।
फिलहाल उपलब्ध जांच विवरण में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।
किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
लेकिन सरकारी नजूल भूमि और अभिलेखों में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक जांच पर सभी की निगाहें टिक गई हैं।
अब देखना यह है कि जांच आगे बढ़ने पर सरकारी जमीन के कथित खेल की परतें खुलती हैं या मामला फिर कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाता है।
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Kalpi, Jalaun | Aug 21, 2026