कागजों में चारा, गौशाला में हाहाकार!
कासिमपुर गौशाला की बदहाली पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
चारा-पानी से लेकर गोवंश की मौत और कथित धमकी तक के आरोप, ग्रामीणों ने एसडीएम से मांगी औचक जांच
माधौगढ़ (जालौन)
ग्राम पंचायत कासिमपुर की गौशाला में कथित अव्यवस्थाओं को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। गुरुवार को ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी माधौगढ़ मनोज प्रकाश को ज्ञापन सौंपकर गौशाला की व्यवस्थाओं की निष्पक्ष और बिना पूर्व सूचना के औचक जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी कागजों में गौशाला की व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखाई जा रही हैं, लेकिन मौके पर चारा, पानी, छाया, साफ-सफाई और उपचार जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला में कई गोवंश कमजोर और अस्वस्थ हालत में बताए जा रहे हैं।
ज्ञापन में एक गोवंश की मौत और उसके निस्तारण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों के निरीक्षण की जानकारी पहले से पहुंच जाने पर व्यवस्थाओं को आनन-फानन में ठीक-ठाक दिखाने का प्रयास किया जाता है।
ऐसे में ग्रामीणों ने मांग की कि अचानक और गोपनीय तरीके से निरीक्षण कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
सवाल सिर्फ व्यवस्था का नहीं, बेजुबानों की जिंदगी का है
ग्रामीणों ने गौशाला में मौजूद गोवंशों की वास्तविक संख्या का सत्यापन कराने, प्रतिदिन उपलब्ध कराए जा रहे चारे-पानी की जांच, दवाओं की उपलब्धता, साफ-सफाई, छाया और उपचार व्यवस्था का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है।
साथ ही सरकारी धन से होने वाले खर्च का भी रिकॉर्ड से मिलान कराने की मांग उठाई गई है।
मामले को लेकर ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गौशाला की कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाने और आवाज उठाने पर उन्हें धमकाया गया तथा झूठे मुकदमे में फंसाने की चेतावनी दी गई।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों ने पूछा—अगर सब ठीक है तो औचक जांच से डर कैसा?
ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला में यदि वास्तव में सभी व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप हैं तो प्रशासन को बिना किसी पूर्व सूचना के निरीक्षण कराकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
इससे न केवल ग्रामीणों की शिकायतों का समाधान होगा, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर भी लोगों का भरोसा मजबूत होगा।
ज्ञापन देने वालों में महेंद्र सिंह परिहार, हुकुम सिंह, नेकसे, अंजनी कुमार, रामेश, देवीदास, कल्लू, डीके कुशवाहा और सुमित समेत अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
अब बड़ा सवाल यह है कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की प्रशासन कितनी गंभीरता से जांच करता है और जांच में क्या सामने आता है।
बेजुबान गोवंश की देखभाल के नाम पर यदि कहीं लापरवाही या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय होना बेहद जरूरी है।
काश, हर ग्राम पंचायत के ग्रामीण इसी तरह बेजुबानों की आवाज बनकर सामने आएं, ताकि किसी गौशाला में गोवंश भूख-प्यास, बीमारी या बदइंतजामी का शिकार न हो।
आपकी क्या राय है?
क्या गौशालाओं की नियमित औचक जांच होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
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Kalpi, Jalaun | Aug 20, 2026