Public App Logo
Jansamasya
News
पुलिस
बॉलीवुड
Bjp
National
Police
Bihar
India
रेलवे
कांग्रेस
Congress
Modi
Delhi
Viral
Dm
Rajasthan
Bollywood
दिल्ली
Patna
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
अनिल
उत्तरप्रदेश
Pmmodi
Rahulgandhi
कानपुर
Uttarpradesh
Haryana

Igrs

नमामि गंगे योजना की पाइपलाइन बनी शोपीस! दो महीने बाद भी 27 घरों तक नहीं पहुंचा पानी

सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान, ग्रामीणों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन

उरई/कालपी (जालौन) केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे पेयजल योजना ग्राम आटा में सवालों के घेरे में है। 
कालपी तहसील के कदौरा विकासखंड स्थित ग्राम आटा में करोड़ों रुपये की लागत से बिछाई गई पाइपलाइन और लगाए गए नल कनेक्शन फिलहाल ग्रामीणों के लिए केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। 
आरोप है कि करीब दो महीने पहले कनेक्शन दिए जाने के बावजूद 27 घरों में आज तक एक बूंद पानी नहीं पहुंचा, जिससे लोगों को रोजाना पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव के केवल आधे हिस्से में ही जलापूर्ति हो रही है, जबकि शेष 27 परिवार योजना का लाभ मिलने का इंतजार कर रहे हैं। 
कई बार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से शिकायत की गई, लेकिन किसी ने भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराया। 
मजबूर होकर ग्रामीणों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कुमार संजय को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल जलापूर्ति बहाल कराने की मांग की।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने इस गंभीर समस्या की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई (आईजीआरएस) पोर्टल पर भी दर्ज कराई थी, लेकिन शिकायत का समाधान आज तक धरातल पर दिखाई नहीं दिया। 
यदि शिकायत के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिलती, तो फिर जनसुनवाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

बरसात और उमस के बीच पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में योजना पूरी दिखाई जा सकती है, लेकिन हकीकत में दर्जनों परिवार अब भी पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।
 लोगों का सवाल है कि जब पाइपलाइन बिछ चुकी है और कनेक्शन भी दे दिए गए हैं, तो आखिर जलापूर्ति शुरू क्यों नहीं की जा रही? 
जिम्मेदार विभाग आखिर कब जागेगा?

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और जिन 27 घरों तक अब तक पानी नहीं पहुंचा है, वहां तत्काल नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए।

ज्ञापन देने वालों में रानी विश्वकर्मा, गौरव कुमार, अवधेश कुमार, राममोहन, लखन कुमार, नरेश कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

अब सवाल उठते हैं…

- आखिर दो महीने बाद भी 27 घरों तक पानी क्यों नहीं पहुंचा?
- क्या नमामि गंगे योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?
- सीएम पोर्टल पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी?
- क्या ग्रामीणों को उनका मूल अधिकार समय पर मिल पाएगा?

आपकी क्या राय है?
 क्या सरकारी योजनाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए? 
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

#BreakingNews #Jalaun #Kalpi #Kadaura #GramAata #NamamiGange #WaterCrisis #DrinkingWater #UPNews #CMPortal #IGRS #GraminNews #GroundReport #PublicIssue #VillageNews #Urai #SonuMaharaj #CrimeReporter #JalaunNews #UPGovernment #NalJalYojana #WaterSupply #ViralNews #HindiNews #LocalNews #Journalism #JanSamasya #PublicVoice #Bundelkhand

नमामि गंगे योजना की पाइपलाइन बनी शोपीस! दो महीने बाद भी 27 घरों तक नहीं पहुंचा पानी सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान, ग्रामीणों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन उरई/कालपी (जालौन) केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे पेयजल योजना ग्राम आटा में सवालों के घेरे में है। कालपी तहसील के कदौरा विकासखंड स्थित ग्राम आटा में करोड़ों रुपये की लागत से बिछाई गई पाइपलाइन और लगाए गए नल कनेक्शन फिलहाल ग्रामीणों के लिए केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। आरोप है कि करीब दो महीने पहले कनेक्शन दिए जाने के बावजूद 27 घरों में आज तक एक बूंद पानी नहीं पहुंचा, जिससे लोगों को रोजाना पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के केवल आधे हिस्से में ही जलापूर्ति हो रही है, जबकि शेष 27 परिवार योजना का लाभ मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कई बार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से शिकायत की गई, लेकिन किसी ने भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराया। मजबूर होकर ग्रामीणों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कुमार संजय को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल जलापूर्ति बहाल कराने की मांग की। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने इस गंभीर समस्या की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई (आईजीआरएस) पोर्टल पर भी दर्ज कराई थी, लेकिन शिकायत का समाधान आज तक धरातल पर दिखाई नहीं दिया। यदि शिकायत के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिलती, तो फिर जनसुनवाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। बरसात और उमस के बीच पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में योजना पूरी दिखाई जा सकती है, लेकिन हकीकत में दर्जनों परिवार अब भी पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। लोगों का सवाल है कि जब पाइपलाइन बिछ चुकी है और कनेक्शन भी दे दिए गए हैं, तो आखिर जलापूर्ति शुरू क्यों नहीं की जा रही? जिम्मेदार विभाग आखिर कब जागेगा? ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और जिन 27 घरों तक अब तक पानी नहीं पहुंचा है, वहां तत्काल नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन देने वालों में रानी विश्वकर्मा, गौरव कुमार, अवधेश कुमार, राममोहन, लखन कुमार, नरेश कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। अब सवाल उठते हैं… - आखिर दो महीने बाद भी 27 घरों तक पानी क्यों नहीं पहुंचा? - क्या नमामि गंगे योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है? - सीएम पोर्टल पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? - जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी? - क्या ग्रामीणों को उनका मूल अधिकार समय पर मिल पाएगा? आपकी क्या राय है? क्या सरकारी योजनाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। #BreakingNews #Jalaun #Kalpi #Kadaura #GramAata #NamamiGange #WaterCrisis #DrinkingWater #UPNews #CMPortal #IGRS #GraminNews #GroundReport #PublicIssue #VillageNews #Urai #SonuMaharaj #CrimeReporter #JalaunNews #UPGovernment #NalJalYojana #WaterSupply #ViralNews #HindiNews #LocalNews #Journalism #JanSamasya #PublicVoice #Bundelkhand

Kalpi, Jalaun | Jul 24, 2026

हवा-हवाई जांच! न पीड़ित से मिले, न गवाहों से की बात, बस स्क्रिप्ट लिखकर लगा दी फर्जी रिपोर्ट;  #gonda #farjireport #igrs #falsereporting #chhapiya #hdfcbank

हवा-हवाई जांच! न पीड़ित से मिले, न गवाहों से की बात, बस स्क्रिप्ट लिखकर लगा दी फर्जी रिपोर्ट; #gonda #farjireport #igrs #falsereporting #chhapiya #hdfcbank

Gonda, Gonda | Jul 23, 2026

बंद पड़े पीपीसी में कर दिया ट्रांसफर!

18 साल से एक ही सीएचसी में तैनाती, अब 'कागजों में' स्थानांतरण का आरोप; सीएमओ कार्यालय की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

जनपद जालौन का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 

इस बार मामला शासन की स्थानांतरण नीति के कथित उल्लंघन और आईजीआरएस शिकायत के बाद जारी हुए स्थानांतरण आदेश को लेकर है।
 शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि करीब 18 वर्षों से सीएचसी जालौन में तैनात चीफ फार्मासिस्ट को वास्तव में हटाने के बजाय केवल कागजों में ऐसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीपीसी) से संबद्ध दिखा दिया गया, जहां नियमित स्वास्थ्य सेवाएं संचालित ही नहीं हो रहीं।

शिकायत के अनुसार शासन का उद्देश्य वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों का वास्तविक स्थानांतरण कर प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना था। लेकिन आरोप है कि इस मामले में आदेश की मंशा को दरकिनार करते हुए केवल औपचारिक कार्रवाई कर दी गई, जिससे संबंधित कर्मचारी उसी व्यवस्था में बने रहे।

मामला आईजीआरएस शिकायत संख्या 60000260159142 से जुड़ा है। शिकायत के निस्तारण में सीएमओ कार्यालय ने बताया कि महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुपालन में 1 जुलाई 2026 को स्थानांतरण आदेश जारी किया गया। 
लेकिन शिकायतकर्ता का दावा है कि जिस पीपीसी में स्थानांतरण दिखाया गया है, वहां न नियमित चिकित्सकीय व्यवस्था है और न ही प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हैं। 
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह वास्तविक स्थानांतरण है या केवल कागजी औपचारिकता?

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि स्थानांतरण आदेश के बाद भी संबंधित कर्मचारी ने सीएचसी का कार्यभार पूरी तरह नहीं छोड़ा।
 यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो विभागीय आदेशों के पालन और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

अब शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। 
उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित पीपीसी की वास्तविक स्थिति क्या है, वहां स्वास्थ्य सेवाएं चल रही हैं या नहीं, कर्मचारी ने वास्तव में कार्यभार ग्रहण किया या नहीं, और स्थानांतरण केवल अभिलेखों तक सीमित रहा या धरातल पर भी लागू हुआ।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी, आदेशों की अवहेलना या अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध सख्त विभागीय और विधिक कार्रवाई की जाए। 
उनका कहना है कि यदि इस प्रकार केवल कागजों में स्थानांतरण कर शासन के आदेशों को निष्प्रभावी बनाया जाता रहा तो स्थानांतरण नीति की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगेंगे।

नोट: इस समाचार में प्रकाशित आरोप शिकायतकर्ता एवं उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित हैं। 
मामले की आधिकारिक पुष्टि सक्षम प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी। संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

 अब आपकी बारी...

क्या अगर कोई पीपीसी वास्तव में बंद या निष्क्रिय है, तो वहां किया गया स्थानांतरण प्रभावी माना जाना चाहिए?

क्या वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात कर्मचारियों के मामलों में पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है?

 आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

#BreakingNews #Jalaun #Urai #CMOJalaun #HealthDepartment #TransferPolicy #IGRS #CHCJalaun #PPCJalaun #ChiefPharmacist #UttarPradesh #HealthSystem #AdministrativeTransparency #Investigation #Accountability #PublicInterest #GovernmentOrders #JalaunNews #HindiNews #LatestNews #GroundReport #SonuMaharaj #NewsUpdate #स्वास्थ्य_विभाग #सीएमओ #स्थानांतरण_विवाद #आईजीआरएस #जालौन #उरई #जनहित

बंद पड़े पीपीसी में कर दिया ट्रांसफर! 18 साल से एक ही सीएचसी में तैनाती, अब 'कागजों में' स्थानांतरण का आरोप; सीएमओ कार्यालय की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल जनपद जालौन का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला शासन की स्थानांतरण नीति के कथित उल्लंघन और आईजीआरएस शिकायत के बाद जारी हुए स्थानांतरण आदेश को लेकर है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि करीब 18 वर्षों से सीएचसी जालौन में तैनात चीफ फार्मासिस्ट को वास्तव में हटाने के बजाय केवल कागजों में ऐसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीपीसी) से संबद्ध दिखा दिया गया, जहां नियमित स्वास्थ्य सेवाएं संचालित ही नहीं हो रहीं। शिकायत के अनुसार शासन का उद्देश्य वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों का वास्तविक स्थानांतरण कर प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना था। लेकिन आरोप है कि इस मामले में आदेश की मंशा को दरकिनार करते हुए केवल औपचारिक कार्रवाई कर दी गई, जिससे संबंधित कर्मचारी उसी व्यवस्था में बने रहे। मामला आईजीआरएस शिकायत संख्या 60000260159142 से जुड़ा है। शिकायत के निस्तारण में सीएमओ कार्यालय ने बताया कि महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुपालन में 1 जुलाई 2026 को स्थानांतरण आदेश जारी किया गया। लेकिन शिकायतकर्ता का दावा है कि जिस पीपीसी में स्थानांतरण दिखाया गया है, वहां न नियमित चिकित्सकीय व्यवस्था है और न ही प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह वास्तविक स्थानांतरण है या केवल कागजी औपचारिकता? शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि स्थानांतरण आदेश के बाद भी संबंधित कर्मचारी ने सीएचसी का कार्यभार पूरी तरह नहीं छोड़ा। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो विभागीय आदेशों के पालन और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं। अब शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित पीपीसी की वास्तविक स्थिति क्या है, वहां स्वास्थ्य सेवाएं चल रही हैं या नहीं, कर्मचारी ने वास्तव में कार्यभार ग्रहण किया या नहीं, और स्थानांतरण केवल अभिलेखों तक सीमित रहा या धरातल पर भी लागू हुआ। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी, आदेशों की अवहेलना या अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध सख्त विभागीय और विधिक कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि इस प्रकार केवल कागजों में स्थानांतरण कर शासन के आदेशों को निष्प्रभावी बनाया जाता रहा तो स्थानांतरण नीति की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगेंगे। नोट: इस समाचार में प्रकाशित आरोप शिकायतकर्ता एवं उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित हैं। मामले की आधिकारिक पुष्टि सक्षम प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी। संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। अब आपकी बारी... क्या अगर कोई पीपीसी वास्तव में बंद या निष्क्रिय है, तो वहां किया गया स्थानांतरण प्रभावी माना जाना चाहिए? क्या वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात कर्मचारियों के मामलों में पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है? आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। #BreakingNews #Jalaun #Urai #CMOJalaun #HealthDepartment #TransferPolicy #IGRS #CHCJalaun #PPCJalaun #ChiefPharmacist #UttarPradesh #HealthSystem #AdministrativeTransparency #Investigation #Accountability #PublicInterest #GovernmentOrders #JalaunNews #HindiNews #LatestNews #GroundReport #SonuMaharaj #NewsUpdate #स्वास्थ्य_विभाग #सीएमओ #स्थानांतरण_विवाद #आईजीआरएस #जालौन #उरई #जनहित

Kalpi, Jalaun | Jul 8, 2026

नोएडा पुलिस का कीर्तिमान: IGRS रैंकिंग में प्रदेश में हासिल किया प्रथम स्थान
​#NoidaPolice #IGRS #Achievement #gbntoday

नोएडा पुलिस का कीर्तिमान: IGRS रैंकिंग में प्रदेश में हासिल किया प्रथम स्थान ​#NoidaPolice #IGRS #Achievement #gbntoday

Gautam Buddha Nagar, Gautam Buddh Nagar | Jul 4, 2026

Agra News: एडीए अभियंता सम्मेलन में उठा आईजीआरएस उत्पीड़न का मुद्दा

Tags: Agra, Administration, ADA, EngineersConference, JaipurHouse, PMModiTenure, Commissioner, NagendraPratap, ViceChairman, MArunmoli, ADAMember, ShivShankar, IGRSComplaints, BuildersHarassment, IllegalConstruction, AtalpuramScheme, GreaterAgra, TTZRules, ArvindRai, ProjectDirector, Report, TodayExpress, TajNews, AgraNews, June, आगरा, प्रशासन, एडीए, अभियंतासम्मेलन, जयपुरहाउस, पीएममोदीकार्यकाल, कमिश्नर, नगेंद्रप्रताप, उपाध्यक्ष, एमअरून्मोली, शिवशंकर, आईजीआरएसशिकायत, अवैधनिर्माण, अटलपुरमयोजना, ग्रेटरआगरा, टीटीजेडनियम, अरविंदराय, रिपोर्ट, ताजन्यूज, टुडेएक्सप्रेस, ADAEngineersMeetAgra, IGRSHarassmentIssueADA, June2026

#AgraDevelopmentAuthority #GreaterAgra #IGRS

Agra News: एडीए अभियंता सम्मेलन में उठा आईजीआरएस उत्पीड़न का मुद्दा Tags: Agra, Administration, ADA, EngineersConference, JaipurHouse, PMModiTenure, Commissioner, NagendraPratap, ViceChairman, MArunmoli, ADAMember, ShivShankar, IGRSComplaints, BuildersHarassment, IllegalConstruction, AtalpuramScheme, GreaterAgra, TTZRules, ArvindRai, ProjectDirector, Report, TodayExpress, TajNews, AgraNews, June, आगरा, प्रशासन, एडीए, अभियंतासम्मेलन, जयपुरहाउस, पीएममोदीकार्यकाल, कमिश्नर, नगेंद्रप्रताप, उपाध्यक्ष, एमअरून्मोली, शिवशंकर, आईजीआरएसशिकायत, अवैधनिर्माण, अटलपुरमयोजना, ग्रेटरआगरा, टीटीजेडनियम, अरविंदराय, रिपोर्ट, ताजन्यूज, टुडेएक्सप्रेस, ADAEngineersMeetAgra, IGRSHarassmentIssueADA, June2026 #AgraDevelopmentAuthority #GreaterAgra #IGRS

Agra, Agra | Jun 17, 2026

Latest Igrs News Videos - Watch the Latest News of July 25, 2026 | Public App