अंतर्राष्ट्रीय आत्महत्या निषेध दिवस पर कार्यशाला का आयोजन हुआ
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संवादहीनता तोड़कर एक-दूसरे से खुलकर बात करें, जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प लें
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अंतर्राष्ट्रीय आत्महत्या निषेध दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय महाविद्यालय विदिशा में आनंद विभाग के सौजन्य से जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया था। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, कठिन परिस्थितियों में धैर्य एवं साहस बनाए रखने तथा मानसिक तनाव अथवा व्यक्तिगत समस्याओं के समय संवाद और सहयोग का महत्व समझाना रहा। कार्यशाला को आनंद विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश अहिरवार ने संबोधित किया। इस अवसर पर आनंद विभाग के मास्टर ट्रेनर श्री संजय श्रीवास्तव, श्रीमती अंजना श्रीवास्तव तथा आनंदक डॉ. जय बाबू अहिरवार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. वनिता बाजपेई ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत दुखद एवं चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन की चुनौतियों का सकारात्मकता के साथ सामना करने तथा आवश्यकता पड़ने पर परिवार, मित्रों एवं शिक्षकों से अपनी बात साझा करने का आह्वान किया।
युवा आगे आएं, संवादहीनता की स्थिति को समाप्त करें -
आनंद विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश अहिरवार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा देश का भविष्य हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और कठिन परिस्थितियों में हार न मानने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आत्महत्या से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आत्महत्या के मामलों में 18 से 29 वर्ष की आयु वर्ग की भागीदारी विशेष रूप से चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें आस्था, विश्वास, पारस्परिकता और सहयोग की भावना सिखाती है। ऐसे में युवाओं को इन जीवन-मूल्यों को अपनाते हुए एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से संवादहीनता को समाप्त करने पर जोर देते हुए कहा कि चाहे परिवार हो या कोई संस्थान, एक-दूसरे से खुलकर बात करना आवश्यक है। मन में चल रही परेशानियों और भावनाओं को साझा करने से व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने में मदद मिल सकती है।
युवाओं में अदम्य शक्ति और साहस मौजूद -
आनंद विभाग की मास्टर ट्रेनर श्रीमती अंजना श्रीवास्तव ने प्रभावी वक्तव्य के माध्यम से विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर अदम्य साहस और अपार शक्ति मौजूद होती है, लेकिन कई बार व्यक्ति स्वयं अपनी इस शक्ति को पहचान नहीं पाता। विशेषकर युवाओं को अपनी क्षमताओं और सामर्थ्य को पहचानकर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच के साथ अपने लक्ष्य निर्धारित करने और चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित किया। मास्टर ट्रेनर श्री संजय श्रीवास्तव ने युवाओं को प्रेरित करते हुए आनंद विभाग की अवधारणाओं एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों के बीच सकारात्मक वातावरण विकसित करने के उद्देश्य से महाविद्यालय में आनंद क्लब की स्थापना का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि सामूहिक गतिविधियों, सकारात्मक संवाद और आपसी सहयोग के माध्यम से विद्यार्थियों में जीवन के प्रति उत्साह और आनंद की भावना को बढ़ाया जा सकता है। डॉ. जय बाबू अहिरवार ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्हें सकारात्मक सोच अपनाने तथा जीवन की चुनौतियों का दृढ़ता के साथ सामना करने के लिए प्रेरित किया।
प्रश्नोत्तर के माध्यम से विद्यार्थियों ने किया सहभागिता -
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. अजय सिंह हजारी द्वारा किया गया। कार्यशाला में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विद्यार्थियों ने विषय से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका वक्ताओं द्वारा समाधान एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि जीवन अनमोल है और कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद, संवाद, सहयोग और सकारात्मक सोच का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। साथ ही, परिवार, मित्रों, शिक्षकों एवं समाज के स्तर पर संवेदनशील संवाद और सहयोग की संस्कृति को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। #Vidisha
Vidisha, Madhya Pradesh | Sep 12, 2026