आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण से स्वास्थ्यकर्मियों की आपातकालीन तैयारियों को मिला सुदृढ़ आधार
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अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय में हुआ प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक अभ्यास
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अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय, विदिशा में आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य चिकित्सालय की आपदा प्रबंधन संबंधी तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ करना तथा चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित, सुरक्षित एवं समन्वित ढंग से कार्य करने के लिए प्रशिक्षित करना रहा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम द्वारा आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। टीम ने प्रतिभागियों को आपदा की स्थिति में खोज एवं बचाव कार्य, प्राथमिक उपचार, घायलों एवं रोगियों की सुरक्षित निकासी तथा आपातकालीन परिस्थितियों में विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने की कार्यप्रणाली से अवगत कराया।
प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न प्रकार की आपदाओं एवं आपातकालीन परिस्थितियों के संभावित परिदृश्यों पर चर्चा करते हुए स्वास्थ्य संस्थान की भूमिका को रेखांकित किया गया। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि आपदा की स्थिति में सीमित समय एवं संसाधनों के बीच किस प्रकार प्राथमिकताओं का निर्धारण करते हुए मरीजों की सुरक्षा एवं उपचार सुनिश्चित किया जा सकता है। प्रशिक्षण में व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से आपातकालीन प्रतिक्रिया की प्रक्रिया को समझाया गया। कार्यक्रम में श्री हेमंत जैन, डिप्टी कमांडेंट, होमगार्ड तथा सुश्री रश्मि दुबे, प्लाटून कमांडर, होमगार्ड, विदिशा की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में होमगार्ड तथा सहयोगी एजेंसियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और आपसी समन्वय के महत्व की जानकारी दी।
इस अवसर पर डॉ. शिव रघुवंशी, विभागाध्यक्ष, ईएनटी विभाग एवं डॉ. नरेंद्र पटेल, विभागाध्यक्ष, फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग, अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, विदिशा भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल आपदा के समय की जाने वाली कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए पूर्व तैयारी, नियमित प्रशिक्षण और मॉक अभ्यास अत्यंत आवश्यक हैं। नियमित प्रशिक्षण से स्वास्थ्य संस्थानों की आपदा प्रबंधन क्षमता में वृद्धि होती है और वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों में जन-जीवन की सुरक्षा अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित की जा सकती है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में नर्सिंग अधीक्षक, उप नर्सिंग अधीक्षक, नर्सिंग ऑफिसर इंचार्ज, चिकित्सकों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों को आपदा के दौरान मरीजों की सुरक्षित निकासी, प्राथमिक उपचार, बचाव कार्य तथा आपातकालीन सेवाओं के संचालन से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया। व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को आपदा की स्थिति में टीम भावना के साथ त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई करने के लिए भी प्रशिक्षित किया गया। महाविद्यालय प्रशासन ने प्रशिक्षण प्रदान करने वाली NDRF टीम एवं होमगार्ड विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही, चिकित्सालय में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को निरंतर मजबूत बनाए रखने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं मॉक अभ्यास नियमित रूप से आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। #vidisha