ग्राम पंचायत वर्धा में किसान संगोष्ठी आयोजित: जैविक खेती, सोयाबीन फसल सुरक्षा एवं नरवाई प्रबंधन पर किसानों को मिला तकनीकी मार्गदर्शन
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कृषकों को उन्नत, सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत वर्धा में किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में कृषि विभाग एवं ITC सुनहरा कल मिशन के प्रतिनिधियों द्वारा किसानों को जैविक खेती, सोयाबीन फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन, नरवाई प्रबंधन तथा विभिन्न कृषक हितैषी शासकीय योजनाओं की जानकारी देते हुए तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
जैविक खेती के लाभों की दी जानकारी -
संगोष्ठी में कृषि विस्तार अधिकारी श्री राघवेंद्र अहिरवार ने किसानों को जैविक खेती के महत्व एवं इसके दीर्घकालीन लाभों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग से मिट्टी की उर्वरता एवं जैविक गतिविधियों को बनाए रखने में मदद मिलती है। साथ ही, उपलब्ध स्थानीय संसाधनों एवं फसल अवशेषों के बेहतर उपयोग से कृषि लागत को कम करने की दिशा में भी प्रयास किया जा सकता है। कृषकों को खेत में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाने, फसल अवशेषों का उचित उपयोग करने तथा मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने के विभिन्न उपायों से अवगत कराया गया।
सोयाबीन में कीट एवं रोग प्रबंधन पर तकनीकी मार्गदर्शन -
श्री अहिरवार ने सोयाबीन फसल में पाए जाने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों की पहचान तथा उनके नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से फसल का नियमित निरीक्षण करने तथा प्रारंभिक अवस्था में कीट एवं रोग के लक्षणों की पहचान कर उचित प्रबंधन उपाय अपनाने की अपील की। उन्होंने अनावश्यक एवं अत्यधिक रासायनिक दवाओं के प्रयोग से बचते हुए आवश्यकता के अनुरूप समन्वित कीट एवं रोग प्रबंधन पद्धति अपनाने पर जोर दिया, ताकि फसल की सुरक्षा के साथ-साथ उत्पादन लागत एवं पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव को भी कम किया जा सके।
ITC सुनहरा कल मिशन ने बताईं कृषक हितैषी योजनाएं -
कार्यक्रम में ITC सुनहरा कल मिशन से श्री मनोज शर्मा एवं श्री शिवराज किरार ने किसानों को कृषि एवं कृषक कल्याण से संबंधित विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को पात्रतानुसार योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करते हुए आधुनिक, टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता बताई। इस दौरान जैविक खेती, फसल अवशेष प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा कृषि में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर भी किसानों से चर्चा की गई।
नरवाई नहीं जलाने और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन की समझाइश
संगोष्ठी में किसानों को नरवाई प्रबंधन के प्रति जागरूक करते हुए फसल अवशेषों को खेत में जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करने की समझाइश दी गई। बताया गया कि फसल अवशेषों का उचित तरीके से प्रबंधन कर उन्हें खेत में जैविक पदार्थ के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।
कृषकों को निःशुल्क बायो-डीकंपोजर का वितरण -
नरवाई एवं फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किसान संगोष्ठी के दौरान कृषकों को निःशुल्क बायो-डीकंपोजर का वितरण किया गया। किसानों को बायो-डीकंपोजर के उपयोग की विधि तथा फसल अवशेषों को खेत में अपघटित करने में इसकी उपयोगिता के बारे में जानकारी दी गई। संगोष्ठी के दौरान किसानों ने खेती से संबंधित विभिन्न समस्याएं एवं जिज्ञासाएं भी विशेषज्ञों के समक्ष रखीं। उपस्थित कृषि विभाग के अधिकारियों एवं ITC सुनहरा कल मिशन के प्रतिनिधियों द्वारा किसानों की समस्याओं का समाधान करते हुए आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। किसान संगोष्ठी का उद्देश्य कृषकों को जैविक एवं टिकाऊ खेती, सुरक्षित फसल उत्पादन, सोयाबीन में कीट एवं रोग प्रबंधन, नरवाई के उचित प्रबंधन तथा शासन की कृषक हितैषी योजनाओं से जोड़ते हुए कृषि को अधिक लाभकारी एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए प्रेरित करना रहा। #Vidisha
25 views | Vidisha, Madhya Pradesh | Sep 15, 2026