किशनगंज,विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, समय पर पहचान, संवेदनशील बातचीत और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पर जोर
किशनगंज जिला अन्तर्गत आज दिनांक 10 सितंबर 2026 को हर व्यक्ति जो मुस्कुरा रहा है, जरूरी नहीं कि वह भीतर से भी ठीक हो। कई बार मानसिक तनाव, अवसाद, अकेलापन और जीवन की कठिन परिस्थितियां व्यक्ति को भीतर तक प्रभावित करती हैं, लेकिन वह अपनी परेशानी किसी से कह नहीं पाता। ऐसे में आत्महत्या की रोकथाम का पहला और सबसे जरूरी कदम किसी बीमारी की पहचान से पहले व्यक्ति की पीड़ा को पहचानना और उसकी बात सुनना है। समय पर मिला भरोसा, परिवार का साथ और विशेषज्ञ की मदद किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जिंदगी की ओर लौटने का रास्ता बन सकती है, जिसे उस क्षण कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा हो। इसलिए आत्महत्या की रोकथाम केवल स्वास्थ्य क्षेत्र का विषय नहीं, बल्कि समाज में संवाद, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी विकसित करने का भी सवाल है।इसी संदेश को मजबूत करने के उद्देश्य से विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत सदर अस्पताल, किशनगंज में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी, डॉ. मंजर आलम, डॉ. उर्मिला कुमारी, डॉ. देवेंद्र कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे। इस वर्ष की थीम जिसका उद्देश्य आत्महत्या को लेकर समाज में मौजूद चुप्पी, गलत धारणाओं और कलंक से आगे बढ़कर संवेदनशील एवं समाधान-केंद्रित संवाद को बढ़ावा देना है।
आत्महत्या रोकना इलाज से पहले समझने का सवाल
जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए। किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव, लगातार निराशा, सामाजिक गतिविधियों से दूरी या अत्यधिक मानसिक दबाव दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे समय में परिवार और समुदाय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।उन्होंने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, समाज, स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षण संस्थान और कार्यस्थल मिलकर ऐसा माहौल बना सकते हैं, जहां व्यक्ति अपनी परेशानी कह सके और जरूरत पड़ने पर बिना झिझक मदद ले सके। समय पर सही सहयोग मिलने से गंभीर मानसिक संकट को संभालने की संभावना बढ़ती है।
जिसे हम ‘चुप’ समझते हैं, वह मदद मांग रहा हो सकता है
कार्यक्रम में डॉ. उर्मिला कुमारी ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम में शुरुआती संकेतों को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। लगातार उदासी, निराशा, लोगों से दूरी बनाना, व्यवहार में अचानक बदलाव अथवा जीवन को लेकर अत्यधिक नकारात्मक सोच जैसे संकेतों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति से उसकी मानसिक स्थिति के बारे में बात करना उसे आत्महत्या के लिए प्रेरित नहीं करता। इसके विपरीत, बातचीत उसे यह एहसास दिला सकती है कि कोई उसकी परेशानी सुनने और उसके साथ खड़े होने के लिए तैयार है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर परिवार और समुदाय में खुलकर बातचीत का वातावरण बनाना जरूरी है।
मानसिक स्वास्थ्य को बीमारी मानना, कमजोरी नहीं
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि आत्महत्या के पीछे कोई एक कारण नहीं होता। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के साथ सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियां भी व्यक्ति के जीवन को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए आत्महत्या की रोकथाम के लिए केवल उपचार ही नहीं, बल्कि सामाजिक सहयोग और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता भी जरूरी है।उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानी को छिपाने या उसे कमजोरी समझने के बजाय समय रहते चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने और जरूरतमंद लोगों को परामर्श एवं उपचार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
बदलाव की शुरुआत एक सवाल से हो सकती है—‘आप ठीक हैं?’
कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि संकट में मौजूद व्यक्ति को हमेशा समाधान बताने की जरूरत नहीं होती; कई बार उसे केवल किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है जो बिना निर्णय सुनाए उसकी बात सुन सके। परिवार का सदस्य, मित्र, सहकर्मी या समुदाय का कोई व्यक्ति यदि किसी के व्यवहार में लगातार बदलाव महसूस करता है तो उससे सहजता से बातचीत करना और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाना महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जिले का संदेश इसी दिशा में रहा कि मानसिक संकट को छिपाने से नहीं, साझा करने से रास्ता निकलता है। एक संवेदनशील बातचीत, समय पर मिला सहयोग और सही स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच किसी व्यक्ति को निराशा के अंधेरे से वापस जिंदगी की ओर ला सकती है। यही संवाद को बदलने की दिशा में पहला कदम है—और यही आत्महत्या की रोकथाम में समाज की सबसे मानवीय भूमिका भी। #viralreels #viralreelschallenge #viralchallenge #vacaciones #viralpost #videogames #venezuela #newyork #2026Goals