फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर किसानों को किया जागरूक, नरवाई नहीं जलाने की दी समझाइश
कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), रायसेन के वैज्ञानिकों द्वारा भैरूंदा विकासखंड में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर जागरूकता कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम में किसानों को फसल कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों के उचित प्रबंधन तथा नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि फसल अवशेषों को जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है और भूमि में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं। इसके साथ ही वायु प्रदूषण बढ़ने से पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसानों को फसल अवशेषों का उपयोग जैविक खाद बनाने तथा खेतों में मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नरवाई नहीं जलाने की सलाह दी।
कार्यक्रम में एईओ सोनाली कुशवाह, साधना परमार, केजी उइके एवं अशोक उइके उपस्थित रहे। अधिकारियों ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को खेतों में न जलाएं, बल्कि उनका उचित प्रबंधन कर पर्यावरण संरक्षण के साथ मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहभागी बनें।
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