गोचर भूमि पर अतिक्रमण के विरोध में ग्रामीण लामबंद
दो साल से शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप, जिला मुख्यालय पर धरने की तैयारी
भीलवाड़ा :राजकुमार गोयल
बांसड़ा। गांव की गोचर भूमि पर कथित अवैध अतिक्रमण को हटाने की मांग को लेकर ग्रामीण पिछले करीब दो वर्षों से प्रशासन के समक्ष लगातार शिकायतें एवं ज्ञापन दे रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इसको लेकर ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, गोचर भूमि पर अतिक्रमण को लेकर कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। इसके अलावा 181 हेल्पलाइन पर भी कई बार ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने तहसीलदार को भी दो बार ज्ञापन देकर गोचर भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग की, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव की करीब 50 प्रतिशत गोचर भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है। विशेष रूप से खसरा नंबर 442 एवं उसके आसपास स्थित गोचर भूमि पर कब्जे किए जाने की बात ग्रामीणों ने कही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर पत्थर डालकर भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने सरपंच एवं पटवारी सहित स्थानीय प्रशासन पर कथित मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि ग्राम की अलग-अलग गोचर भूमि पर प्रभावशाली एवं चहेते लोगों को कब्जा करने की कथित छूट दी जा रही है तथा शिकायतों के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं की जा रही।
ग्रामीणों का कहना है कि गोचर भूमि गांव के सामुदायिक हित एवं पशुधन के लिए महत्वपूर्ण है, ऐसे में यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो आने वाले समय में गांव के पास बची गोचर भूमि भी समाप्त हो सकती है।
जिला मुख्यालय पर धरने की तैयारी
लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीण अब आंदोलन की तैयारी में हैं। ग्रामीणों ने बताया कि आगामी दिनों में भीलवाड़ा जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गोचर भूमि की मौके पर जांच करवाकर सीमांकन कराया जाए तथा खसरा नंबर 442 सहित अन्य स्थानों पर हुए कथित अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो जिला मुख्यालय पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
हालांकि, सरपंच, पटवारी एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष इस मामले में सामने नहीं आया है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जा सकता है।