राखी के दिन भाजपा में टिकट का संग्राम! ‘बहनों’ ने खोला मोर्चा, आत्मदाह की चेतावनी से मचा हड़कंप
महापौर की कुर्सी महिला के लिए आरक्षित, फिर महिला कार्यकर्ताओं की अनदेखी क्यों?—जिला कार्यालय के बाहर विरोध; ‘रक्षा’ का वादा करने वाली पार्टी में टिकट की लड़ाई ने उठाए बड़े सवाल
भीलवाड़ा :महेन्द्र नागौरी/राजकुमार गोयल रक्षाबंधन पर जब बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर सुरक्षा, सम्मान और साथ का भरोसा जता रही थीं, उसी दिन भाजपा के भीतर टिकट को लेकर महिला कार्यकर्ताओं का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। नगर निगम में महापौर पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है, लेकिन टिकट वितरण को लेकर महिला कार्यकर्ताओं ने ही पार्टी नेतृत्व पर उपेक्षा के आरोप लगा दिए। भाजपा जिला कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्व सभापति मंजू चेचाणी ने तो टिकट नहीं मिलने पर आत्मदाह तक की चेतावनी दे डाली।
अब सवाल उठ रहा है—रक्षाबंधन पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की बातें करने वाली राजनीति में क्या टिकट की ‘राखी’ भी केवल प्रभावशाली परिवारों की कलाई पर बंधेगी?
महापौर की कुर्सी महिला के लिए, लेकिन टिकट की बिसात पर कौन?
नगर निगम चुनाव में इस बार महापौर पद महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि संगठन के लिए वर्षों से काम करने वाली जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका मिलेगा। लेकिन टिकट वितरण को लेकर उठे विरोध ने पार्टी के भीतर की खींचतान को सार्वजनिक कर दिया।
महिला कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संगठन में वर्षों से सक्रिय रहने वाली महिलाओं की जगह पुरुष कार्यकर्ताओं की पत्नियों को टिकट देने की कवायद हो रही है।
तो फिर सवाल लाजिमी है—
महिला आरक्षण का फायदा महिला कार्यकर्ता को मिलेगा या केवल ‘किसी की पत्नी’ होने का राजनीतिक परिचय टिकट की सबसे बड़ी योग्यता बन जाएगा?
चेचाणी का सीधा हमला—‘महिला कार्यकर्ता को मौका दो’
पूर्व सभापति मंजू चेचाणी ने पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी मांग साफ है—महापौर पद हो या वार्ड का टिकट, प्राथमिकता उन महिलाओं को मिलनी चाहिए जो वर्षों से भाजपा और संगठन के लिए काम कर रही हैं।
उनका आरोप है कि पुरुष कार्यकर्ताओं की पत्नियों को टिकट देने की कोशिश हो रही है, जबकि पार्टी की जमीनी महिला कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है।
चेचाणी ने कहा कि यदि उनकी मांग पर कल दोपहर 3 बजे तक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे महिला कार्यकर्ताओं के हक के लिए आत्मदाह करने को मजबूर होंगी।
यह चेतावनी सामने आने के बाद भाजपा के भीतर टिकट वितरण को लेकर चल रही नाराजगी ने गंभीर रूप ले लिया है।
25 साल की मेहनत बनाम एक टिकट!
महिला मोर्चा की पूर्व जिलाध्यक्ष रेखापुरी गोस्वामी ने भी पार्टी के भीतर महिला कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वे करीब 25 वर्षों से भाजपा में सक्रिय हैं और महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष सहित प्रदेश स्तर पर भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं।
गोस्वामी ने सवाल उठाया कि जब चुनाव आता है तो महिला कार्यकर्ताओं से संगठन के लिए मेहनत कराई जाती है, लेकिन जब टिकट देने की बारी आती है तो उन्हीं कार्यकर्ताओं की दावेदारी पीछे क्यों चली जाती है?
उन्होंने कहा कि एक तरफ महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात होती है, दूसरी तरफ राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मौका आने पर महिला कार्यकर्ताओं की अनदेखी क्यों?
राखी के धागे से लेकर टिकट की डोर तक... सवाल बड़ा है
रक्षाबंधन का पर्व रिश्तों में भरोसे और सम्मान का प्रतीक है। लेकिन भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं का यह विरोध अब राजनीतिक संदेश भी दे रहा है।
क्या पार्टी महिला कार्यकर्ताओं की नाराजगी को सिर्फ टिकट का विवाद मानकर नजरअंदाज करेगी?
क्या वर्षों से संगठन में सक्रिय महिलाओं को इस बार राजनीतिक ‘रक्षा कवच’ मिलेगा?
या फिर टिकट की डोर उन्हीं हाथों में जाएगी, जिनके पीछे राजनीतिक प्रभाव और मजबूत सिफारिश है?
नगर निगम में महापौर की कुर्सी महिला के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा के सामने अब सिर्फ प्रत्याशी चुनने की चुनौती नहीं है। पार्टी को यह भी साबित करना होगा कि महिला आरक्षण का अर्थ केवल महिला चेहरे को मैदान में उतारना है या वर्षों से संगठन में काम कर रही महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक अवसर देना भी है।
फिलहाल रक्षाबंधन के दिन भाजपा कार्यालय के बाहर उठा यह विरोध पार्टी के लिए महज टिकट का विवाद नहीं, बल्कि महिला सम्मान, संगठन में भागीदारी और राजनीतिक अवसर की परीक्षा बन गया है। टिकटों की घोषणा से पहले ही छिड़ा यह संग्राम आने वाले नगर निगम चुनाव की तस्वीर और समीकरण दोनों बदल सकता है।
Bhilwara, Bhilwara | Aug 28, 2026