
नरवाई जलाने पर प्रशासन सख्त दो किसानों पर कार्रवाई
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कुरवाई, सिरोंज और नटेरन विकासखंडों में मौके पर पहुंचकर प्रशासनिक दल ने की जांच, किसानों को नरवाई प्रबंधन का दिया संदेश
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जिले में फसल अवशेष नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सख्ती बरती जा रही है। कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने जिले में नरवाई नहीं जलाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों के बावजूद खरीफ फसल सोयाबीन एवं मक्का की कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाने की घटनाएं सामने आने पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की है।
कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता के निर्देश पर कृषि एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों के दल ने विभिन्न क्षेत्रों में मौके पर पहुंचकर नरवाई जलाने की घटनाओं का निरीक्षण किया। उप संचालक कृषि श्री सचिन जैन, कृषि यंत्री श्री राहुल खातरकर, तहसीलदार कुरवाई श्री संदीप शर्मा सहित राजस्व निरीक्षक, कृषि विस्तार अधिकारी एवं राजस्व और कृषि विभाग के मैदानी अमले द्वारा संबंधित क्षेत्रों में पहुंचकर घटनाओं का सत्यापन किया गया।
तीन विकासखंडों में सात घटनाएं दर्ज -
जिले में नरवाई जलाने की कुल सात घटनाएं मौके पर दर्ज की गई हैं। इनमें विकासखंड कुरवाई के ग्राम माला, रोशन पिपरिया, वीरपुर एवं करेई बेरखेड़ी में कुल चार घटनाएं, विकासखंड सिरोंज के ग्राम रूसलली दामा में एक तथा विकासखंड नटेरन के ग्राम फुफेर में एक घटना दर्ज की गई। संबंधित स्थानों पर प्रशासनिक दल द्वारा मौके का निरीक्षण कर पंचनामे तैयार किए गए।
दो किसानों पर प्रतिबंधात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई -
मौके पर संबंधित किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान की जानकारी देते हुए भविष्य में नरवाई नहीं जलाने की समझाइश दी गई। कुरवाई एवं सिरोंज के तहसीलदारों द्वारा दो किसानों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक एवं दंडात्मक आदेश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नरवाई जलाने की घटनाओं पर आगे भी नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नरवाई से भूसा और जैविक खाद बनाने की दी जानकारी -
प्रशासनिक दल ने किसानों को नरवाई के उचित प्रबंधन के विकल्पों की जानकारी भी दी। किसानों को बताया गया कि नरवाई को जलाने के स्थान पर उससे भूसा तैयार कर नजदीकी गौशालाओं में भेजा जा सकता है। साथ ही डीकंपोजर के उपयोग से खेत में ही फसल अवशेष को जैविक खाद में परिवर्तित किया जा सकता है। मौके पर उपस्थित कृषकों को नरवाई न जलाने और उसे गौशालाओं तक पहुंचाने का संकल्प भी दिलाया गया।
नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण पर असर -
अधिकारियों ने किसानों को बताया कि नरवाई जलाने से खेत की उपजाऊ मिट्टी को नुकसान पहुंचता है। आग के कारण मिट्टी में मौजूद उपयोगी जीवाणु एवं सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं, जिससे मृदा स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इसके अलावा नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है तथा तेज हवा के दौरान आग आसपास के खेतों और फसलों तक फैलने की आशंका बनी रहती है।
गांव-गांव चौपाल लगाकर किया जाएगा जागरूक -
नरवाई जलाने की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। गांव-गांव में चौपाल आयोजित कर किसानों को नरवाई प्रबंधन के वैज्ञानिक एवं उपयोगी तरीकों की जानकारी दी जाएगी। चौपालों में नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान और उसके बेहतर प्रबंधन से संबंधित वीडियो भी दिखाए जाएंगे, ताकि किसान व्यावहारिक रूप से इसके दुष्परिणामों और वैकल्पिक उपायों को समझ सकें।
कृषि यंत्रों से करें नरवाई का प्रबंधन -
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय रोटावेटर, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर सहित अन्य कृषि यंत्रों का उपयोग कर नरवाई का उचित प्रबंधन करें। इससे खेत की मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई न जलाएं और फसल अवशेषों का वैज्ञानिक एवं पर्यावरण हितैषी तरीके से प्रबंधन करें। प्रशासन द्वारा नरवाई जलाने की घटनाओं की सतत निगरानी की जा रही है तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध आगे भी प्रतिबंधात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी। #vidisha