
राशन आवंटन के नाम पर 4.5 लाख की रिश्वत का आरोप, एडीएसओ समेत तीन पर केस; सभी फरार
The silence media news
नरकटियागंज/गौनाहा (पश्चिम चंपारण)। पश्चिम चंपारण जिले में जनवितरण प्रणाली के एक डीलर से कथित तौर पर साढ़े चार लाख रुपये रिश्वत मांगने के मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई के बाद तीनों नामजद आरोपित फरार बताए जा रहे हैं। मामले में सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी (एडीएसओ) सुशील प्रताप सिंह, गौनाहा के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) प्रदीप कुमार और कथित बिचौलिया उदयभान सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एडीएसओ और एमओ के सरकारी तथा निजी मोबाइल नंबरों के बंद रहने की बात सामने आई है। वहीं, तीसरे आरोपित उदयभान सिंह के बारे में भी बताया जा रहा है कि वह अपने ठिकाने से गायब है। निगरानी की टीम आरोपितों की तलाश में संभावित स्थानों पर छापेमारी कर रही है।
अधिकारियों के गायब होने से चर्चाओं का बाजार गर्म
तीनों आरोपितों के अचानक सामने नहीं आने से अनुमंडल कार्यालय और स्थानीय प्रशासनिक महकमे में चर्चाएं तेज हैं। बताया जाता है कि एडीएसओ सुशील प्रताप सिंह नरकटियागंज के पांडेयटोला इलाके में एक निजी मकान में किराए पर रहते थे। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि उनके आवास पर राशन डीलरों सहित अन्य लोगों का आना-जाना रहता था।
राशन आवंटन रोकने के बाद शुरू हुआ विवाद
मामले की शुरुआत भितिहरवा पंचायत के पीडीएस डीलर सुजीत कुमार की शिकायत से हुई। शिकायत के अनुसार, जून 2026 में डीलर ने निर्धारित मात्रा के तहत 8,578 किलो गेहूं और 12,867 किलो चावल कार्डधारियों के बीच वितरित किया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद विभागीय पोर्टल पर उनका आवंटन शून्य कर दिया गया और अगस्त में उनके उपावंटन पर रोक लगा दी गई। इससे परेशान होकर डीलर ने आवंटन दोबारा शुरू कराने के लिए गौनाहा के एमओ, एसडीएम और जिला आपूर्ति पदाधिकारी के समक्ष आवेदन दिया।
निजी आवास पर कथित तौर पर मांगी गई रकम
डीलर के अनुसार, इसी सिलसिले में जब वह एडीएसओ के पांडेयटोला स्थित आवास पर पहुंचे, तब उनसे कथित रूप से पिछले साढ़े चार साल के हिसाब-किताब के नाम पर 4.50 लाख रुपये की मांग की गई।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि रकम नहीं देने की स्थिति में गोदाम से खाद्यान्न की आपूर्ति पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी गई थी।
बिचौलिए के माध्यम से रकम तय करने का आरोप
शिकायतकर्ता ने निगरानी विभाग को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि एडीएसओ ने उन्हें गौनाहा एमओ से संपर्क करने को कहा। इसके बाद एमओ ने कथित रूप से मामले के निपटारे के लिए उन्हें उदयभान सिंह के पास भेजा।
डीलर का दावा है कि बिचौलिए ने बातचीत के दौरान अलग-अलग चरणों में रकम देने का दबाव बनाया। पहले दो लाख रुपये, फिर डेढ़ लाख रुपये और बाद में सवा लाख रुपये की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया है।
गोपनीय सत्यापन के बाद निगरानी ने दर्ज की प्राथमिकी
डीलर की लिखित शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले का गोपनीय सत्यापन कराया। सत्यापन के बाद 3 अगस्त 2026 को एडीएसओ सहित तीनों आरोपितों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।
बताया जाता है कि सुशील प्रताप सिंह के पास सिकटा प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी था। प्रोन्नति के बाद वह करीब एक वर्ष से अनुमंडल में एडीएसओ के पद पर कार्यरत हैं।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद निगरानी विभाग की विशेष टीम आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है। हालांकि, मामले में आरोपित अधिकारियों या संबंधित विभाग की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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