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Aurangabad news

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ट्रेन में नींद आने से कटिहार से बंगाल पहुंच गया बच्चा, 31 साल बाद घर लौटा लेकिन पिंटू यादव से हो गया था अब्दुल जब्बार,31 साल तक मुस्लिम परिवार ने पाला फिर शादी और तीन बच्चे 

कटिहार के कांटाकोष गांव में भावुक कर देने वाली कहानी आई सामने, बचपन में बिछड़े बेटे को आंख के ऊपर पुराने जख्म के निशान से मां ने पहचाना; जन्म देने वाले माता-पिता और पालने वाले परिवार, दोनों के साथ रहना चाहता है युवक
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कटिहार। बिहार। एक छोटी-सी झपकी ने आठ साल के बच्चे को उसके परिवार से ऐसा दूर किया कि घर लौटने में 31 साल लग गए। इस दौरान उसका नाम, पहचान, रहन-सहन और जीवन की परिस्थितियां सब बदल गईं। बिहार के कटिहार जिले के मनिहारी प्रखंड स्थित कांटाकोष गांव का पिंटू यादव बचपन में पश्चिम बंगाल पहुंच गया था। वहां एक मुस्लिम परिवार ने उसे सहारा दिया, उसका पालन-पोषण किया और वह अब्दुल जब्बार के नाम से पहचाना जाने लगा। वक्त के साथ उसकी शादी हुई और उसके अपने बच्चे भी हो गए। इधर, बिहार में उसके माता-पिता बेटे की वापसी की उम्मीद लगाए बैठे रहे। आखिरकार तीन दशक से अधिक समय बाद पिंटू अपने जन्मदाता परिवार तक पहुंच गया। वर्षों से बिछड़े बेटे को सामने देखकर मां की आंखें भर आईं। यह पुनर्मिलन जितना भावुक करने वाला है, उतना ही मानवीय रिश्तों की गहराई को भी सामने लाता है।

 दोस्तों के साथ ट्रेन में चढ़ा, नींद खुली तो बंगाल में था

इस कहानी की शुरुआत वर्ष 1995 में हुई थी। कटिहार जिले के कांटाकोष गांव निवासी मोतीलाल यादव और मीणा देवी का बेटा पिंटू उस समय करीब आठ साल का था। बताया जाता है कि वह अपने कुछ दोस्तों के साथ ट्रेन में चढ़ गया था। सफर के दौरान उसे झपकी आ गई। इस बीच उसके दोस्त ट्रेन से उतर गए, लेकिन पिंटू सोते-सोते ट्रेन में ही रह गया।

जब उसकी नींद खुली तो वह अपने गांव और परिचित लोगों से बहुत दूर पश्चिम बंगाल के राधिकापुर इलाके में पहुंच चुका था। इतनी कम उम्र में परिवार से बिछड़ने के बाद उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने घर का रास्ता खोजने की थी। अनजान जगह पर उसे न अपने परिवार का पता मालूम था और न ही घर लौटने का कोई आसान रास्ता।

इसी दौरान हरिकृष्णपुरी निवासी अब्दुल रहीम की नजर उस बच्चे पर पड़ी। उन्होंने उसे सहारा दिया और अपने घर ले गए। इसके बाद पिंटू की जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया। अब्दुल रहीम ने उसकी देखभाल की, उसे अपने परिवार में जगह दी और अपने बच्चे की तरह पाल-पोसकर बड़ा किया।

 पिंटू से अब्दुल जब्बार बन गया, बंगाल में बस गया परिवार

समय बीतने के साथ पिंटू की पहचान बदलती चली गई। वह अब्दुल जब्बार के नाम से जाना जाने लगा। बचपन में अपने परिवार से बिछड़ने के बाद उसने जिस परिवेश में जीवन बिताया, वही उसकी दुनिया बन गई। धीरे-धीरे वह बड़ा हुआ और उसकी जिंदगी भी आगे बढ़ती गई।

बाद में अब्दुल जब्बार की शादी पश्चिम बंगाल के कालियाचक की रहने वाली मुतैना खातून से हुई। आज उसके दो बेटे और एक बेटी हैं। इस तरह जिस बच्चे ने बचपन में अपने माता-पिता और घर का साथ खो दिया था, उसने दूसरे परिवार के सहारे अपना संसार बसा लिया।

दूसरी ओर, कटिहार के कांटाकोष गांव में उसके जन्मदाता माता-पिता के लिए बेटे की यादें ही सहारा बनी रहीं। उन्हें लंबे समय तक यह जानकारी नहीं मिल सकी कि पिंटू कहां है और किस हाल में जीवन बिता रहा है। 31 साल तक उसके लौटने का इंतजार करने वाले परिवार को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि एक दिन उनका बेटा बदली हुई पहचान के साथ उनके सामने आ खड़ा होगा।

 दिल्ली में मजदूरी के दौरान अपने गांव का सुराग मिला

अब्दुल जब्बार के अपने जन्मदाता परिवार तक पहुंचने की कहानी दिल्ली से शुरू हुई। बताया जाता है कि वह मजदूरी करने के लिए दिल्ली गया था। वहां उसकी मुलाकात मनिहारी क्षेत्र के कुछ लोगों से हुई। बातचीत के दौरान उसने अपने घर के बारे में बताया कि उसका संबंध मनिहारी से है, उसके पिता का नाम मोतीलाल यादव है और उसका गांव गंगा नदी के किनारे स्थित है।

इन जानकारियों के आधार पर उसके दोस्तों ने उसके परिवार का पता लगाने की कोशिश शुरू की। मनिहारी क्षेत्र में पूछताछ के दौरान कांटाकोष गांव में मोतीलाल यादव के परिवार के बारे में जानकारी मिली। इस तरह वर्षों से खोए हुए रिश्ते तक पहुंचने की उम्मीद बनने लगी।

इसी बीच उसके एक दोस्त ने उसे मनिहारी में गेहूं की फसल से संबंधित एक वायरल वीडियो दिखाया। वीडियो देखकर उसके मन में अपने गांव लौटने की इच्छा और मजबूत हो गई। बताया जाता है कि वह इससे पहले भी दो बार कांटाकोष आने की कोशिश कर चुका था, लेकिन इस बार उसने अपने जन्मदाता परिवार से मिलने का पक्का इरादा कर लिया।

आंख के ऊपर पुराने निशान ने दिलाई बचपन की याद

जब पिंटू यादव उर्फ अब्दुल जब्बार कांटाकोष गांव पहुंचा तो स्थानीय लोगों की मदद से अपने परिवार तक जा पहुंचा। 31 साल बाद बेटे को सामने देखकर परिवार के लिए उस पर तुरंत विश्वास कर पाना आसान नहीं था। इतने लंबे अंतराल में उसका चेहरा और व्यक्तित्व काफी बदल चुका था। मां मीणा देवी भी शुरुआत में उसे पहचान नहीं सकीं।

लेकिन उसकी आंख के ऊपर मौजूद कटने का पुराना निशान पहचान की अहम कड़ी बन गया। बचपन की कुछ ऐसी बातें और शरीर पर मौजूद पुराने जख्मों के निशान भी सामने आए, जिनसे परिवार को उसके पिंटू होने का भरोसा हुआ। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों को विश्वास हो गया कि सामने खड़ा व्यक्ति वही बच्चा है, जो 1995 में परिवार से बिछड़ गया था।

पहचान का भरोसा होते ही मां, पिता और भाइयों ने उसे गले लगा लिया। 31 वर्षों से बिछड़े बेटे की वापसी ने परिवार को भावुक कर दिया। मां की आंखों में खुशी के आंसू थे, तो घर के अन्य सदस्य भी इस अप्रत्याशित मिलन से अभिभूत थे।

पिंटू के लौटने की खबर पूरे गांव में फैल गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण उसे देखने और उसकी कहानी जानने के लिए पहुंचने लगे। परिवार के सदस्यों में मुन्ना यादव, अजीत यादव, सुभाष यादव, राहुल यादव, विक्रम यादव, सूरज यादव और बहन पुष्पा देवी सहित अन्य लोग उसकी वापसी से बेहद खुश हैं।

 अब दो परिवारों के बीच बंटा है भावनात्मक जुड़ाव

पिंटू यादव उर्फ अब्दुल जब्बार की जिंदगी में अब एक साथ दो परिवार हैं। एक तरफ उसके जन्मदाता माता-पिता मोतीलाल यादव और मीणा देवी हैं, जिनसे वह बचपन में बिछड़ गया था। दूसरी ओर वह परिवार है, जिसने अनजान जगह पर उसे सहारा दिया, उसकी परवरिश की और उसे जीवन में आगे बढ़ने का अवसर दिया।

अब्दुल रहीम ने जिस बच्चे को अपने घर में जगह दी थी, वह आज अपने पैरों पर खड़ा है। उसी परिवेश में उसका बचपन बीता, वहीं उसने अपना परिवार बसाया और आज उसकी पत्नी मुतैना खातून तथा तीन बच्चे उसकी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं।

ऐसे में 31 साल बाद अपने जन्मदाता परिवार से मिलने के बावजूद उसके लिए पुराने जीवन और रिश्तों से अलग होना आसान नहीं है। जन्म देने वाले माता-पिता से मिलना उसके लिए भावनात्मक रूप से बेहद खास है, लेकिन जिस परिवार ने उसे बचपन से पाला-पोसा, उसके प्रति भी उसका गहरा लगाव है।

बताया जाता है कि पिंटू यादव उर्फ अब्दुल जब्बार दोनों परिवारों के साथ अपना जीवन बिताना चाहता है। उसके सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन रिश्तों के बीच संतुलन बनाने की है, ताकि जन्मदाता माता-पिता के साथ दोबारा जुड़ने के साथ ही पालने वाले परिवार से उसका रिश्ता भी कायम रहे।

धर्म और पहचान से आगे इंसानियत की कहानी

कटिहार की यह घटना केवल एक बिछड़े बेटे के 31 साल बाद घर लौटने की कहानी नहीं है। यह उस मां के लंबे इंतजार की दास्तान भी है, जिसने बचपन में खोए बेटे को फिर से अपनी आंखों के सामने देखा। साथ ही यह अब्दुल रहीम के उस मानवीय व्यवहार को भी सामने लाती है, जिन्होंने अनजान बच्चे को सहारा देकर उसकी जिंदगी संवारने में अहम भूमिका निभाई।

एक ओर जन्मदाता परिवार का खून का रिश्ता है, तो दूसरी ओर पालन-पोषण से बना भावनात्मक संबंध। पिंटू की जिंदगी में दोनों का अपना महत्व है। समय के साथ नाम और पहचान बदल गए, लेकिन बचपन की यादों से जुड़ा एक पुराना निशान उसे उसके परिवार तक ले आया।

31 साल पहले ट्रेन में आई झपकी के कारण बिछड़ा बच्चा आज अपने जन्मदाता परिवार से मिल चुका है। इस मिलन ने एक घर की वर्षों पुरानी प्रतीक्षा को खुशी में बदल दिया है। वहीं, उसकी कहानी यह भी बताती है कि इंसानियत, अपनापन और रिश्तों का महत्व किसी एक नाम या पहचान तक सीमित नहीं होता। अब देखना यह है कि पिंटू यादव उर्फ अब्दुल जब्बार अपने दोनों परिवारों के साथ किस तरह जीवन की नई शुरुआत करता है। <nis:link nis:type=tag nis:id=pintuyadavabduljabbar nis:value=pintuyadavabduljabbar nis:enabled=true nis:link/>  <nis:link nis:type=tag nis:id=katihar nis:value=katihar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=katiharkagayabbachchapintuyadav nis:value=katiharkagayabbachchapintuyadav nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=biharsebangal nis:value=biharsebangal nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=thesilencemedianews nis:value=thesilencemedianews nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=कटिहार nis:value=कटिहार nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=bengali nis:value=bengali nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=उत्तरीदीनाजपुर nis:value=उत्तरीदीनाजपुर nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=dinajpurcity nis:value=Dinajpurcity nis:enabled=true nis:link/>
औरंगाबाद सदर हॉस्पिटल इन दिनों अपनी अव्यवस्था को लेकर फिर से चर्चा में है। सदर अस्पताल के प्रसूति कक्ष में अव्यवस्था का आलम यह है कि वहां पर मरीजों को लेटने के लिए सुरक्षित बेड नहीं है। बेड कई जगह से फट गए हैं, चादर की व्यवस्था नहीं है।वहीं डिलीवरी के बाद मरीज के परिजन से लगातार पैसे की मांग की जाती है और पैसे मिलने के बाद ही टीका वगैरा लगाया जाता है। 

  इस संबंध में स्थानीय निवासी और समाजसेवी विकास राय यादव ने सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। जिसके बाद आनन फानन में संबंधित महिला नर्स पर कार्रवाई की बात सामने आ रही है। औरंगाबाद सांसद अभय कुशवाहा ने मामले को गंभीर बताया है।वहीं सिविल सर्जन कृष्ण कुमार ने मामले में कार्रवाई की बात कही है।
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भतीजा गया जेल तो बहु से बना लिया अवैध संबंध, 4 साल बाद जेल से छूता भतीजा, संबंध का विरोध करने पर चाचा ने भतीजे को मारी छह गोलियां, मौके पर ही मौत 
चार साल से चल रहा था विवाद, आर्थिक मदद के बहाने बढ़ी नजदीकी, सीसीटीवी फुटेज से ललन शर्मा की भूमिका सामने आने की बात बोले एएसपी
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फुलवारीशरीफ (पटना)। पटना के फुलवारीशरीफ में रिश्तों को शर्मसार करने वाला हत्याकांड सामने आया है। यहां 30 वर्षीय दीपक कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक के परिजनों का आरोप है कि दीपक का अपने चाचा ललन शर्मा के साथ उसकी पत्नी से कथित अवैध संबंध को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। दीपक इस संबंध का विरोध करता था और इसी बात को लेकर चाचा-भतीजे के बीच अक्सर झगड़ा होता था। परिजनों ने जमीन विवाद को भी हत्या की वजह बताया है।

आरोप है कि मंगलवार सुबह ललन शर्मा पिस्टल लेकर दीपक के घर पहुंचा। दोनों के बीच कहासुनी हुई और इसके बाद दीपक पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी गईं। उसे छह गोलियां लगने की बात सामने आई है। गंभीर रूप से घायल दीपक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज से हत्या में ललन शर्मा की भूमिका सामने आई है। उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

 आर्थिक मदद के दौरान बहू से बढ़ी नजदीकी का आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार दीपक कुमार एक मामले में पिछले 4 साल से जेल में था। इसी दौरान उसकी पत्नी चाचा ससुर से आर्थिक मदद लेने लगी। चाचा ससुर ने आर्थिक मदद के बहाने उसे अपने प्रेम जाल में फांस लिया और अवैध संबंध कायम कर लिए। जब दीपक जेल से छूटा तो उसे इस संबंध के बारे में जानकारी मिली।
मृतक के परिजनों के अनुसार, ललन शर्मा बिल्डर है और जमीन के कारोबार से जुड़ा हुआ है। वह आर्थिक रूप से संपन्न है, जबकि दीपक का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए दीपक की पत्नी कविता देवी  तौर पर ललन शर्मा से आर्थिक मदद लेती थी।

ग्रामीणों का दावा है कि आर्थिक सहायता देने के दौरान ललन शर्मा और कविता देवी के बीच नजदीकियां बढ़ गई थीं। जब दीपक को इसकी जानकारी मिली तो उसने इसका विरोध किया। परिजनों का आरोप है कि इसी मुद्दे को लेकर परिवार में लंबे समय से तनाव बना हुआ था। दीपक अपनी पत्नी को इस संबंध से दूर रहने के लिए समझाता था और चाचा ललन शर्मा से भी नाराजगी जताता था।

हालांकि, कथित संबंधों और हत्या के बीच सीधे संबंध की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

 विरोध करने पर चाचा-भतीजे में होती थी कहासुनी

परिजनों के मुताबिक, दीपक और ललन शर्मा के बीच करीब चार वर्षों से विवाद चल रहा था। परिवार का कहना है कि दीपक अपनी पत्नी और चाचा के बीच कथित संबंधों को स्वीकार नहीं कर पा रहा था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच कई बार तीखी बहस हुई थी।

ग्रामीणों का दावा है कि एक बार दीपक ने इस मामले को लेकर ललन शर्मा को सार्वजनिक रूप से खरी-खोटी सुनाई थी। इससे ललन नाराज हो गया था। बताया जाता है कि दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि एक-दूसरे को गोली मारने और देख लेने जैसी धमकियां भी दी जाती थीं।

परिजनों का आरोप है कि कथित संबंधों को लेकर शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे जमीन और पारिवारिक रंजिश से भी जुड़ गया। पुलिस इन आरोपों की सत्यता की जांच कर रही है।

 सुबह सात बजे घर पहुंचा चाचा, फिर चलीं गोलियां

जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब सात बजे दीपक अपने घर में एक दोस्त के साथ बैठा था। इसी दौरान उसका चाचा ललन शर्मा वहां पहुंचा। बताया जाता है कि वह अपने साथ पिस्टल लेकर आया था। ललन ने आवाज देकर दीपक को बाहर बुलाया। इसके बाद दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

आरोप है कि विवाद बढ़ने पर ललन ने पिस्टल निकालकर दीपक पर फायरिंग कर दी। दीपक को सिर, पैर, जांघ और पेट सहित शरीर के अलग-अलग हिस्सों में छह गोलियां लगीं। गोली लगते ही वह जमीन पर गिर पड़ा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़े, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुका था। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया।

 आरोपी की पत्नी बोली- मेरे पति ने ही मारी गोली

इस मामले में ललन शर्मा की पत्नी शोभा देवी का बयान भी सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति का भतीजे की पत्नी के साथ कथित अवैध संबंध था और इसी बात को लेकर ललन तथा दीपक के बीच अक्सर झगड़ा होता था।

शोभा देवी ने दावा किया कि दीपक को गोली उनके पति ने ही मारी है। पुलिस ने पूछताछ के लिए शोभा देवी और उनकी बेटी को थाने लाया है। जांच के दौरान पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय कौन-कौन मौजूद था और वारदात में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

पिता बोले- बेटे को चाचा और बहू के कथित संबंधों पर था एतराज

दीपक के पिता विंध्याचल शर्मा ने बताया कि घटना के समय वह घर पर मौजूद नहीं थे। लौटने पर उन्हें बेटे की हत्या की जानकारी मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि ललन शर्मा और उसके दामाद रवि कुमार ने मिलकर उनके बेटे की हत्या की है। उन्होंने ललन की पत्नी शोभा देवी और रवि की पत्नी आरती की भूमिका पर भी संदेह जताया है।

विंध्याचल शर्मा के अनुसार, दीपक अपनी पत्नी और चाचा के बीच कथित संबंधों का विरोध करता था। उन्होंने कहा कि परिवार में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि विवाद का अंत बेटे की हत्या के रूप में होगा।

परिजनों के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस अन्य लोगों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है।

 जमीन विवाद ने भी बढ़ाई थी पारिवारिक रंजिश

दीपक की मां ने आरोप लगाया कि ललन शर्मा ने सड़क किनारे स्थित कीमती जमीन दीपक और उसकी पत्नी से धोखे से अपने नाम करा ली थी। परिवार का कहना है कि जमीन को लेकर विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट की नौबत आती थी। घटना की सुबह भी जमीन के मुद्दे पर विवाद होने का दावा किया गया है।

परिजनों के मुताबिक, एक ओर दीपक अपनी पत्नी और चाचा के कथित संबंधों का विरोध कर रहा था, वहीं दूसरी ओर जमीन को लेकर भी परिवार में तनाव बना हुआ था। इन दोनों विवादों ने पारिवारिक रिश्तों में कड़वाहट बढ़ा दी थी। हालांकि, हत्या में जमीन विवाद की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

पत्नी बच्चों के साथ रहने लगी थी अलग

दीपक के पिता ने बताया कि पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ने के बाद दोनों अलग-अलग रहने लगे थे। उनके अनुसार, ललन शर्मा ने नौबतपुर में कविता के मायके के आसपास जमीन खरीदकर मकान बनवाया था। इसके बाद कविता अपने बच्चों के साथ वहां रहने लगी, जबकि दीपक बभनपुरा में रह रहा था।

ग्रामीणों के अनुसार, दीपक की पत्नी चिरौरा स्थित एक वाटर पार्क में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी और उसे करीब 12 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। दीपक परिवार का खर्च चलाने के लिए कभी ऑटो चलाता था तो कभी मजदूरी करता था। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और उसके तीन छोटे बच्चे हैं।

 घटना से एक रात पहले भी हुआ था विवाद

परिजनों के अनुसार, सोमवार रात दीपक की मां को सांप ने डस लिया था। उस समय दीपक घर में अकेला था, जबकि उसकी पत्नी बच्चों के साथ नौबतपुर स्थित मकान में रह रही थी। इसी दौरान दीपक और ललन शर्मा के बीच किसी बात को लेकर विवाद होने की बात सामने आई है।

परिवार का दावा है कि दोनों के बीच कहासुनी हुई और एक-दूसरे को देख लेने की धमकी दी गई। परिजनों को आशंका है कि पुराने विवाद और तनाव के बीच अगले दिन हत्या की वारदात हुई। पुलिस इस घटनाक्रम की भी जांच कर रही है।

सीसीटीवी फुटेज से सामने आई आरोपी की भूमिका: एएसपी

फुलवारीशरीफ के एएसपी नारायण उपाध्याय ने बताया कि घटनास्थल पर मौजूद सीसीटीवी फुटेज से यह सामने आया है कि दीपक की हत्या उसके चाचा ललन शर्मा ने ही की है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।

एएसपी के अनुसार, मृतक के पिता का बयान दर्ज कर लिया गया है। घटनास्थल से छह खोखे बरामद हुए हैं। पुलिस ने पूछताछ के लिए आरोपी की पत्नी शोभा देवी और उसकी बेटी को थाने लाया है। हत्या में इस्तेमाल हथियार और घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सहित अन्य पहलुओं की जांच जारी है।

तीन छोटे बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

दीपक की हत्या से परिवार में मातम पसरा है। आर्थिक परेशानियों के बीच परिवार का भरण-पोषण करने वाले दीपक की मौत से उसकी पत्नी और तीन छोटे बच्चों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

फिलहाल ललन शर्मा फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। मामले में कथित अवैध संबंध, जमीन विवाद और पारिवारिक रंजिश को लेकर सामने आए आरोपों की जांच की जा रही है। पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही पूरे घटनाक्रम की अंतिम तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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एनएच -139 को जल्द ही किया जायेगा फोर लेन - सांसद अभय कुशवाहा ने किया दावा।  देव मेडिकल कॉलेज और उत्तर कोयल नहर पर भी किया दावा।<nis:link nis:type=tag nis:id=abhaykushwaha nis:value=abhaykushwaha nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=aurangabadmp nis:value=aurangabadmp nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=aurangabadsansad nis:value=aurangabadsansad nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nh139 nis:value=NH139 nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=अभयकुशवाहा nis:value=अभयकुशवाहा nis:enabled=true nis:link/> 
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विजयादशमी के अवसर पर गांधी मैदान में रावण दहन 

औरंगाबाद में रावण दहन कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न, जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं सुविधाओं के व्यापक इंतजाम
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विजयादशमी के पावन अवसर पर गांधी मैदान, औरंगाबाद में रावण दहन कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी  अभिलाषा शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक, औरंगाबाद उपेंद्रनाथ वर्मा की उपस्थिति में कार्यक्रम का आयोजन संपन्न हुआ।

उक्त अवसर पर माननीय सांसद, औरंगाबाद  अभय कुशवाहा, विधायक औरंगाबाद  त्रिविक्रम नारायण सिंह, पूर्व विधायक आनंद शंकर सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

इस अवसर पर जिला पदाधिकारी ने समस्त जिलेवासियों को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं एवं आम नागरिकों की सुरक्षा, सुविधा तथा भीड़ प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई थीं। गांधी मैदान में अग्निशमन दल की तैनाती, एम्बुलेंस एवं चिकित्सा सुविधा, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग तथा सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

इसके अतिरिक्त, महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं के आवागमन एवं भीड़ प्रबंधन के लिए पृथक एवं सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम स्थल के आसपास यातायात को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया था। संबंधित पदाधिकारियों एवं पुलिस बल की तैनाती के माध्यम से संपूर्ण कार्यक्रम के दौरान विधि-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था पर सतत निगरानी रखी गई।

जिला प्रशासन द्वारा किए गए समुचित प्रबंधों एवं संबंधित पदाधिकारियों के आपसी समन्वय से गांधी मैदान सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।

जिला प्रशासन, औरंगाबाद सभी जिलेवासियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करता है तथा भविष्य में भी सभी पर्व-त्योहारों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने हेतु प्रतिबद्ध है। <nis:link nis:type=tag nis:id=औरंगाबाद nis:value=औरंगाबाद nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=durgapuja nis:value=durgapuja nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=rawandahan nis:value=rawandahan nis:enabled=true nis:link/>
औरंगाबाद बिहार, महानवमी में जुटे श्रद्धालु.
सिपाही अजीत कुमार हत्याकांड: आरोपी दरोगा पुष्पा कुमारी पर अवैध वसूली और निजी गिरोह चलाने के गंभीर आरोप, राजगीर में 5 करोड़ का रिसॉर्ट बनाने की थी तैयारी!

पूर्व सहयोगियों के दावे से जांच के दायरे में आया कथित नेटवर्क; शराब तस्करों से सांठगांठ, फर्जी छापेमारी टीम और लाखों की वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी
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नालंदा/राजगीर। मद्यनिषेध विभाग की विशेष जांच इकाई (ईआईबी) के सिपाही अजीत कुमार की मौत के मामले में नामजद सब-इंस्पेक्टर पुष्पा कुमारी को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। उनके पूर्व सहयोगियों ने दावा किया है कि वह राजगीर में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से एक रिसॉर्ट बनाने की तैयारी कर रही थीं। आरोप लगाने वाले पूर्व सहयोगियों के मुताबिक, इसके लिए कथित तौर पर अवैध वसूली, शराब कारोबारियों से सांठगांठ और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल किया जाना था।

पूर्व सहयोगियों ने यह भी आरोप लगाया है कि पुष्पा कुमारी अपनी आधिकारिक पुलिस टीम से अलग निजी लोगों का एक समूह रखती थीं। इस समूह में करीब 10 लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है। आरोप है कि ये लोग पुलिसकर्मियों की तरह व्यवहार करते थे और छापेमारी जैसी कार्रवाइयों में उनके साथ रहते थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों के संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष और जांच एजेंसियों के निष्कर्ष सामने आना भी जरूरी है।

सिपाही अजीत कुमार की मौत के मामले के बीच सामने आए इन आरोपों ने पुलिस और मद्यनिषेध विभाग की कार्यप्रणाली, छापेमारी के तौर-तरीकों तथा कथित अवैध वसूली के नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

निजी टीम बनाकर कार्रवाई करने का आरोप

दरोगा पुष्पा कुमारी के पूर्व सहयोगियों का दावा है कि वह विभाग की आधिकारिक टीम के अतिरिक्त निजी युवकों को अपने साथ रखती थीं। आरोप के मुताबिक, ये लोग कथित तौर पर खाकी वर्दी पहनते थे और उनके पास निजी हथियार भी रहते थे। पूर्व सहयोगियों ने सरकारी राइफल के इस्तेमाल और निजी हथियारों से फायरिंग किए जाने के भी आरोप लगाए हैं।

उनका कहना है कि शराब कारोबारियों के ठिकानों पर कार्रवाई के दौरान यह कथित निजी समूह सक्रिय रहता था। आरोप है कि छापेमारी के दौरान विरोध होने पर गोलीबारी भी की जाती थी। पूर्व सहयोगियों ने दावा किया कि इस तरह की घटनाएं केवल पावापुरी तक सीमित नहीं थीं, बल्कि हिलसा में तैनाती के दौरान भी कई बार ऐसी परिस्थितियां बनी थीं।

हालांकि, निजी व्यक्तियों के पास हथियार होने, उनके वर्दी पहनकर कार्रवाई में शामिल होने और कथित गोलीबारी की घटनाओं की पुष्टि संबंधित मामलों के रिकॉर्ड, हथियारों की जांच तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से ही हो सकती है।

कांस्टेबल अजीत कुमार की मौत के मामले में गोलीबारी को लेकर दावा

ईआईबी सिपाही अजीत कुमार की मौत से जुड़े घटनाक्रम के बारे में पूर्व सहयोगियों ने दावा किया है कि चलती स्कॉर्पियो के दौरान दोनों तरफ से कई राउंड गोलियां चलाई गई थीं। उनके अनुसार, इस घटनाक्रम में सरकारी हथियारों के साथ निजी हथियारों के इस्तेमाल की भी आशंका है।

यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला केवल एक कर्मचारी की मौत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी अभियान के दौरान हथियारों के इस्तेमाल, निजी लोगों की भूमिका और कार्रवाई की वैधानिकता जैसे गंभीर सवाल भी जांच के केंद्र में आ सकते हैं।

हालांकि, गोलीबारी की वास्तविक परिस्थितियों, किसने गोली चलाई, किन हथियारों का इस्तेमाल हुआ और किसकी भूमिका कितनी थी, इसका निर्धारण पुलिस की जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट, बैलिस्टिक जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। किसी आरोपी की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।

 शराब की खेप छोड़ने के बदले 20 लाख रुपये लेने का आरोप

पूर्व सहयोगियों ने पुष्पा कुमारी के कथित नेटवर्क पर शराब कारोबारियों के साथ मिलीभगत करने के भी आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि शराब की खेप पकड़े जाने के बाद कथित तौर पर मोटी रकम लेकर वाहन या माल को छोड़ने की व्यवस्था की जाती थी।

एक कथित मामले का उल्लेख करते हुए पूर्व सहयोगियों ने आरोप लगाया कि शराब लदे वाहन को छोड़ने के बदले 20 लाख रुपये तक की रकम ली गई थी। हालांकि, इस कथित लेन-देन की तारीख, संबंधित वाहन, रकम के भुगतान के प्रमाण और इसमें शामिल लोगों की पहचान से जुड़ी जानकारी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुई है।

आरोप यह भी है कि जब्त शराब को कथित तौर पर निजी सहयोगियों के माध्यम से दोबारा तस्करी के लिए उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियां संचालित की जाती थीं। यदि ऐसा हुआ है तो यह सरकारी कार्रवाई की विश्वसनीयता और जब्त सामग्री की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।

इन आरोपों की पुष्टि के लिए जब्ती सूची, वाहन से संबंधित दस्तावेज, मालखाने के रिकॉर्ड, केस डायरी, वित्तीय लेन-देन और संबंधित लोगों के बयानों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

शराब पीने के आरोप में पकड़े गए लोगों से भी वसूली का दावा

पूर्व सहयोगियों के मुताबिक, कथित नेटवर्क केवल बड़े शराब कारोबारियों तक सीमित नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब पीने के आरोप में पकड़े गए सामान्य लोगों को भी कथित तौर पर वाहन में बैठाकर घुमाया जाता था और उन्हें छोड़ने के बदले उनके परिजनों से तीन हजार से साढ़े तीन हजार रुपये तक वसूले जाते थे।

यदि इस तरह की गतिविधियां हुई हैं तो यह कानून के पालन और आम नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है। हालांकि, इस आरोप के समर्थन में फिलहाल कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित दस्तावेज या आधिकारिक निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है।

जांच एजेंसियों के लिए ऐसे मामलों में कथित पीड़ितों के बयान, गिरफ्तारी और रिहाई से जुड़े रिकॉर्ड, संबंधित अधिकारियों की ड्यूटी संबंधी जानकारी तथा किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन की पड़ताल अहम हो सकती है।

 पांच करोड़ के रिसॉर्ट की योजना और आय से अधिक संपत्ति का सवाल

राजगीर में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से रिसॉर्ट बनाने की तैयारी का दावा इस पूरे प्रकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू बनकर सामने आया है। पूर्व सहयोगियों का आरोप है कि पुष्पा कुमारी कथित अवैध कमाई से यह संपत्ति तैयार करने की योजना बना रही थीं।

हालांकि, केवल किसी संपत्ति या परियोजना की योजना होने से अवैध कमाई साबित नहीं होती। इस दावे की जांच के लिए यह पता लगाना आवश्यक होगा कि संबंधित जमीन किसके नाम पर है, रिसॉर्ट के निर्माण के लिए कोई समझौता या भुगतान हुआ है या नहीं, परियोजना में किसकी पूंजी लगाई जानी थी और रकम का स्रोत क्या था।

यदि जांच में पुष्पा कुमारी या उनसे जुड़े लोगों की संपत्ति और ज्ञात वैध आय के बीच असंगति सामने आती है तो सक्षम एजेंसियां कानून के प्रावधानों के तहत आय से अधिक संपत्ति के पहलू की जांच कर सकती हैं।

इस मामले में बैंक खातों, संपत्ति के दस्तावेजों, निवेश, बेनामी स्वामित्व की संभावनाओं और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

 हिलसा में तैनाती के दौरान भी विवादों के आरोप

पुष्पा कुमारी के पूर्व सहयोगियों ने दावा किया है कि हिलसा अनुमंडल में तैनाती के दौरान भी उनकी कार्यशैली को लेकर विवाद होते रहे थे। उनके मुताबिक, वहां भी निजी युवकों को कथित तौर पर वर्दी पहनाकर छापेमारी दल में शामिल किया जाता था और अवैध वसूली के आरोप लगते थे।

उपलब्ध कराई गई जानकारी में हिलसा में उनकी तैनाती की अवधि जुलाई 2023 से फरवरी 2026 तक बताई गई है। हालांकि, इन तारीखों और उस दौरान की गई कार्रवाइयों की आधिकारिक सेवा संबंधी जानकारी से पुष्टि की जानी चाहिए।

पूर्व सहयोगियों ने इस्लामपुर थाना क्षेत्र के शरीफाबाद में हुई एक छापेमारी का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, फरवरी 2023 में शराब मामले में ग्रामीणों को पकड़े जाने के विरोध के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी और पुलिस टीम को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था।

दावे के मुताबिक, घटना में पांच पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे, सरकारी वाहन को नुकसान पहुंचा था और टीम को अपनी सुरक्षा के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी। इस घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था, इसकी पुष्टि संबंधित प्राथमिकी, पुलिस रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और विभागीय दस्तावेजों से की जानी चाहिए।

हिलसा क्षेत्र में शराब कारोबारियों से कथित तौर पर नियमित मासिक रकम वसूलने के आरोप भी पूर्व सहयोगियों ने लगाए हैं। इन आरोपों की सत्यता और उन पर पहले कोई विभागीय या कानूनी कार्रवाई हुई थी या नहीं, इसकी जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकती है।

 निजी जीवन को लेकर भी जानकारी आई सामने

आरोपी सब-इंस्पेक्टर के निजी जीवन के संबंध में भी कुछ जानकारियां सामने आई हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, पुष्पा कुमारी मूल रूप से औरंगाबाद जिले के खखड़ा गांव की रहने वाली बताई गई हैं। उनकी शादी वर्ष 2024 में एक कारोबारी परिवार में हुई थी।

दिए गए विवरण में दावा किया गया है कि शादी के बाद नौकरी जारी रखने और पारिवारिक प्राथमिकताओं को लेकर पति-पत्नी के बीच मतभेद उत्पन्न हुए।  शादी के चार दिन के भीतर ही दोनों के बीच अलगाव की स्थिति बन गई थी। पति भी दरोगा था। जिससे तलाक का मामला चल रहा है।

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माता-पिता की सेवा और भाईचारे का संदेश दे रही प्रतिमाएं, झारखंड के युवा नेता देवेंद्रनाथ महतो को भी मिली जगह; पंडाल निर्माण पर 30 लाख और कुल आयोजन पर 35 से 40 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान
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रांची। राजधानी रांची में शारदीय नवरात्र के अवसर पर दुर्गा पूजा की तैयारियां आकर्षक रूप ले रही हैं। शहर के विभिन्न इलाकों में भव्य पूजा पंडालों का निर्माण किया गया है, जहां मां दुर्गा की आराधना के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और समसामयिक विषयों को भी अनूठे अंदाज में प्रस्तुत किया जा रहा है। इसी क्रम में नामकुम रेलवे स्टेशन के पास जय माता दी नवयुवक दुर्गा पूजा समिति की ओर से तैयार किया गया पंडाल लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

जयपुर के प्रसिद्ध हवा महल की स्थापत्य शैली से प्रेरित इस पंडाल में मां भगवती की प्रतिमा के साथ कई अन्य प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं। इन प्रतिमाओं के माध्यम से माता-पिता के प्रति सम्मान, पारिवारिक एकता, भाइयों के बीच प्रेम और राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़े संदेश देने का प्रयास किया गया है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार से जुड़ी प्रतिमाओं के साथ झारखंड के युवा नेता देवेंद्रनाथ महतो को भी स्थान दिया गया है।

 माता-पिता की सेवा का संदेश दे रहीं प्रतिमाएं

पूजा पंडाल में माता-पिता की प्रतिमाएं स्थापित कर उनकी सेवा और सम्मान का संदेश दिया गया है। समिति के आयोजक विनोद सिंह के अनुसार, उनकी समिति हर वर्ष दुर्गा पूजा के अवसर पर धार्मिक आस्था के साथ समाज को कोई सकारात्मक संदेश देने का प्रयास करती है। इसी सोच के तहत इस बार माता-पिता की प्रतिमाओं को भी विशेष स्थान दिया गया है।

आयोजकों का मानना है कि माता-पिता अपने बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए जीवनभर त्याग और परिश्रम करते हैं। बच्चों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को अपने माता-पिता के प्रति सम्मान, जिम्मेदारी और सेवा का भाव रखना चाहिए।

पंडाल में स्थापित इन प्रतिमाओं के जरिए लोगों, विशेषकर नई पीढ़ी को यह समझाने की कोशिश की गई है कि माता-पिता का योगदान केवल बच्चों को बड़ा करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनके व्यक्तित्व और जीवन की दिशा तय करने में भी उनकी अहम भूमिका होती है।

 तेजप्रताप और तेजस्वी की प्रतिमाओं के जरिए भाईचारे का संदेश

इस पूजा पंडाल की एक अन्य खासियत बिहार के राजनीतिक परिवार से जुड़ी प्रतिमाएं हैं। यहां राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार में सामने आए मतभेदों की पृष्ठभूमि में तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव की प्रतिमाओं के माध्यम से भाइयों के बीच एकता और आपसी सद्भाव का संदेश दिया गया है।

प्रतिमाओं के साथ रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए संदेश दिया गया है कि भगवान श्रीराम को अपने भाइयों का साथ मिला, जबकि रावण के पक्ष में विभीषण का साथ नहीं रहा। इस प्रस्तुति के जरिए आयोजकों ने यह बताने का प्रयास किया है कि परिवार और समाज में एकजुटता, सहयोग तथा आपसी विश्वास सफलता की राह आसान बनाते हैं, जबकि आपसी मतभेद संबंधों को कमजोर कर सकते हैं।

पंडाल में इस विषय को इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि श्रद्धालु धार्मिक प्रसंगों के साथ-साथ अपने पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी एकता के महत्व पर विचार कर सकें। प्रतिमाओं के माध्यम से राजनीतिक परिवार की चर्चा को सामाजिक संदेश से जोड़ना इस बार की सजावट की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।

 लालू-राबड़ी की प्रतिमाओं में नवरात्र की झलक

पंडाल में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं। इन प्रतिमाओं को नवरात्र के नौ दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान करते हुए दिखाया गया है। इसके साथ ही विरोधियों पर विजय से जुड़ा राजनीतिक संदेश भी प्रस्तुत किया गया है।

समिति के आयोजक विनोद सिंह का कहना है कि वर्तमान सामाजिक परिवेश में राजनीति को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राजनीतिक नेतृत्व का प्रभाव शासन, प्रशासन और समाज की विभिन्न व्यवस्थाओं पर पड़ता है। इसलिए समसामयिक राजनीतिक विषयों को भी पंडाल की प्रस्तुति में जगह दी गई है।

हालांकि, इस प्रस्तुति का उद्देश्य केवल राजनीतिक व्यक्तित्वों को दिखाना नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतीकों और प्रतिमाओं के जरिए लोगों का ध्यान वर्तमान घटनाक्रम की ओर आकर्षित करना भी है। इसी वजह से पंडाल में धार्मिक आस्था और राजनीतिक विषयवस्तु का मिश्रण देखने को मिल रहा है।

 युवा नेता देवेंद्रनाथ महतो को भी मिला स्थान

जय माता दी नवयुवक दुर्गा पूजा समिति की ओर से इस बार झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के युवा नेता देवेंद्रनाथ महतो की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। आयोजकों ने उन्हें युवा आइकॉन के रूप में प्रस्तुत किया है।

विनोद सिंह के अनुसार, समिति हर वर्ष बिहार और झारखंड से जुड़े ऐसे लोगों को अपनी प्रस्तुति में शामिल करने का प्रयास करती है, जिन्होंने अपने कार्यों से समाज में पहचान बनाई हो। इसी क्रम में इस बार देवेंद्रनाथ महतो को जगह दी गई है।

आयोजक के मुताबिक, महतो ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं तथा घोटालों के खिलाफ आंदोलन किया था। लंबे समय तक अनशन के माध्यम से उन्होंने युवाओं और छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे उठाए। इसी पृष्ठभूमि में समिति ने उन्हें युवाओं से जुड़े एक प्रमुख चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया है।

 57 फीट ऊंचा पंडाल, निर्माण पर करीब 30 लाख रुपये खर्च

नामकुम रेलवे स्टेशन के पास बनाया गया यह पंडाल जयपुर के ऐतिहासिक हवा महल की स्थापत्य शैली से प्रेरित है। इसकी भव्यता और आकार इसे इलाके के प्रमुख पूजा स्थलों में शामिल कर रहे हैं। पंडाल की ऊंचाई लगभग 57 फीट और चौड़ाई करीब 72 फीट बताई गई है।

आयोजकों के अनुसार, केवल पंडाल के निर्माण पर लगभग 30 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। सजावट, प्रतिमाओं और अन्य व्यवस्थाओं को मिलाकर पूरे आयोजन का बजट करीब 35 से 40 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

पंडाल के निर्माण में हवा महल की वास्तुकला से प्रेरणा लेते हुए भव्य स्वरूप तैयार किया गया है। धार्मिक वातावरण, आकर्षक संरचना और अलग-अलग विषयों पर आधारित प्रतिमाओं के कारण यहां श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

 धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सरोकारों की प्रस्तुति

नामकुम का यह दुर्गा पूजा पंडाल इस बात का उदाहरण है कि धार्मिक आयोजन मनोरंजन और पूजा-अर्चना के साथ सामाजिक जागरूकता का माध्यम भी बन सकते हैं। माता-पिता की सेवा, परिवार में एकता, भाइयों के बीच प्रेम और युवाओं के भविष्य जैसे विषयों को प्रतिमाओं के जरिए सामने लाने का प्रयास किया गया है।

जय माता दी नवयुवक दुर्गा पूजा समिति की इस पहल में धार्मिक परंपरा के साथ वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को भी स्थान दिया गया है। हवा महल की तर्ज पर निर्मित भव्य पंडाल और उसमें स्थापित विभिन्न प्रतिमाएं इस बार नामकुम में दुर्गा पूजा को खास पहचान दे रही हैं।
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।। आपका त्योहार हो सुरक्षित, इसके लिए तत्पर है औरंगाबाद पुलिस ।।

महाष्टमी को पुलिस अधीक्षक उपेंद्र नाथ वर्मा औरंगाबाद के द्वारा नगर, ओबरा, दाउदनगर थाना क्षेत्र सहित विभिन्न पूजा पंडालों का सघन निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन एवं यातायात व्यवस्था का जायजा लिया गया तथा मौके पर तैनात पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को सजगता एवं सतर्कता के साथ ड्यूटी निर्वहन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

इस दौरान पूजा समिति के सदस्यों एवं स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित कर पर्व को शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने की अपील की गई।
पटना में प्रसव के कुछ घंटे बाद महिला प्रखंड कृषि पदाधिकारी की मौत, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप

सिजेरियन ऑपरेशन से दिया था बेटे को जन्म, रात में अचानक बिगड़ी तबीयत; सिविल सर्जन ने नर्सिंग होम की जांच कराने की कही बात
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पटना। राजधानी पटना के राजाबाजार स्थित एक निजी नर्सिंग होम में प्रसव के कुछ घंटे बाद प्रखंड कृषि पदाधिकारी राजलक्ष्मी की मौत हो गई। उन्होंने सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए बेटे को जन्म दिया था। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है। मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि ऑपरेशन के बाद राजलक्ष्मी की हालत सामान्य थी, लेकिन देर शाम अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने के कारण उनकी मौत होने का आरोप लगाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना के सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल ने संज्ञान लिया है और नर्सिंग होम की जांच कराने की बात कही है।

ऑपरेशन के बाद सामान्य थी स्थिति, शाम को बिगड़ने लगी तबीयत

परिजनों के अनुसार, राजलक्ष्मी को सोमवार, 12 तारीख को प्रसव के लिए निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। अगले दिन यानी 13 तारीख को दोपहर करीब तीन बजे उनका सिजेरियन ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। नवजात का वजन लगभग 2.100 किलोग्राम बताया गया है।

परिवार का कहना है कि प्रसव के बाद शुरुआती घंटों में राजलक्ष्मी की स्थिति सामान्य बताई गई थी। शाम करीब 7:30 से 7:45 बजे के बीच चिकित्सक ने भी उनकी हालत ठीक होने की जानकारी दी थी। हालांकि, इसके कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।

परिजनों के मुताबिक, रात करीब 8:15 बजे राजलक्ष्मी की पल्स रेट बढ़कर 162 तक पहुंच गई। उनकी स्थिति में तेजी से हो रहे बदलाव को देखते हुए अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों और ड्यूटी पर तैनात नर्सों को इसकी जानकारी दी गई। परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद समय पर डॉक्टर नहीं पहुंचे।

पिता का आरोप- सूचना देने के बाद भी देर से पहुंचे डॉक्टर

राजलक्ष्मी के पिता और वरिष्ठ पत्रकार केके लाल ने आरोप लगाया कि बेटी की तबीयत बिगड़ने की जानकारी अस्पताल की नर्सों को दी गई थी, लेकिन चिकित्सक को पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे की देरी हुई। उनका कहना है कि जब तक डॉक्टर पहुंचे, तब तक राजलक्ष्मी की मौत हो चुकी थी।

परिजनों ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए अस्पताल की कार्यप्रणाली और आपात स्थिति में मरीज को उपलब्ध कराई गई चिकित्सा सुविधाओं की जांच कराने की मांग की है। परिवार का आरोप है कि प्रसव के बाद मरीज की हालत बिगड़ने पर जिस तत्परता से इलाज मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला।

हालांकि, चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। घटना के वास्तविक कारणों और उपचार में किसी तरह की चूक हुई या नहीं, इसका निर्धारण जांच और संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद ही हो सकेगा।

बेटे के जन्म से घर में थी खुशी, कुछ घंटों में मातम

राजलक्ष्मी के परिवार में बच्चे के जन्म को लेकर खुशी का माहौल था। परिजनों को उम्मीद थी कि घर में नए सदस्य के आने से खुशियां बढ़ेंगी और परिवार एक नए जीवन की शुरुआत करेगा। लेकिन प्रसव के कुछ ही घंटे बाद उनकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

केके लाल ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि परिवार अपनी बेटी को सुरक्षित प्रसव की उम्मीद के साथ अस्पताल लेकर आया था। बच्चे के जन्म से सभी खुश थे, लेकिन कुछ ही घंटों में परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। परिवार के लिए यह घटना बेहद पीड़ादायक है।

परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

 गर्भावस्था के दौरान जांच को लेकर भी लगाए आरोप

परिजनों ने केवल प्रसव के दौरान हुई घटनाओं पर ही सवाल नहीं उठाए हैं, बल्कि गर्भावस्था के दौरान अस्पताल में कराई गई जांच को लेकर भी आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान जांच कराने के क्रम में प्रत्येक जांच के लिए दबाव बनाए जाने की बात उन्हें बाद में पता चली।

परिजन चाहते हैं कि जांच के दायरे में गर्भावस्था के दौरान दी गई चिकित्सा सेवाओं, कराई गई जांचों, अस्पताल की कार्यप्रणाली और प्रसव के समय अपनाई गई उपचार प्रक्रिया को भी शामिल किया जाए।

हालांकि, गर्भावस्था के दौरान जांच को लेकर लगाए गए आरोपों की भी अभी पुष्टि नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष पड़ताल के लिए अस्पताल के रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, चिकित्सकीय दस्तावेजों और संबंधित चिकित्साकर्मियों के बयान अहम हो सकते हैं।

वर्ष 2024 में हुई थी शादी, पटना सिटी में थीं तैनात

परिजनों के मुताबिक, राजलक्ष्मी की शादी वर्ष 2024 में हुई थी। वह पटना सिटी के मुसल्लहपुर इलाके में प्रखंड कृषि पदाधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। नौकरी और पारिवारिक जीवन के बीच परिवार को उनसे काफी उम्मीदें थीं। बेटे के जन्म के बाद परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन उनकी असमय मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

 सिविल सर्जन ने लिया संज्ञान, जांच का आश्वासन

घटना के बाद परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और सिविल सर्जन कार्यालय में शिकायत कर मामले की जांच कराने तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। परिवार चाहता है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि राजलक्ष्मी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या इलाज के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई थी।

पटना के सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित नर्सिंग होम की जांच कराने की बात कही है। 
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दुर्गा पूजा के मद्देनजर जिले के सभी प्रखंडों में दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी प्रतिनियुक्त, विधि-व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद
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शांति, सौहार्द एवं सुरक्षित वातावरण में दुर्गा पूजा संपन्न कराने के लिए संवेदनशील स्थलों पर विशेष निगरानी, असामाजिक तत्वों एवं अफवाह फैलाने वालों पर रहेगी कड़ी नजर

जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद  अभिलाषा शर्मा  के निर्देशानुसार दुर्गा पूजा पर्व के दौरान जिले में विधि-व्यवस्था संधारण, शांति एवं सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। इसके मद्देनजर जिले के सभी प्रखंडों में पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी एवं पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई है।

जिले के प्रमुख चौक-चौराहों, पूजा पंडालों, मेला क्षेत्रों, संवेदनशील स्थलों एवं जुलूस मार्गों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रख रहे हैं, ताकि पूजा-अर्चना एवं अन्य धार्मिक गतिविधियां शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हों तथा श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।

जिला पदाधिकारी द्वारा सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि संवेदनशील स्थलों, धार्मिक जुलूसों के मार्गों तथा मंदिर-मस्जिद के आसपास विशेष चौकसी बरतें। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना, तनाव अथवा विधि-व्यवस्था से संबंधित सूचना प्राप्त होने पर तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। सभी पूजा समितियों एवं अनुज्ञप्तिधारियों को निर्धारित शर्तों का पालन करने, उत्तेजक एवं भड़काऊ गीतों, आपत्तिजनक नारों तथा प्रतिबंधित हथियारों के प्रदर्शन से परहेज करने का निर्देश दिया गया है।

सोशल मीडिया पर भी रहेगी कड़ी निगरानी

दुर्गा पूजा के दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह फैलाने, भ्रामक सूचना प्रसारित करने अथवा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करने वाले तत्वों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके लिए समाहरणालय परिसर में जिला नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जो तीन पालियों में 24×7 कार्यरत रहेगा। नियंत्रण कक्ष के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं की निगरानी करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त संवेदनशील क्षेत्रों, पूजा पंडालों एवं विसर्जन मार्गों पर उपलब्ध सीसीटीवी कैमरों तथा ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी की व्यवस्था की गई है।

जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि दुर्गा पूजा पर्व को आपसी भाईचारे, शांति एवं सौहार्द के साथ मनाएं। किसी भी अपुष्ट सूचना या अफवाह पर विश्वास न करें और न ही उसे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से प्रसारित करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि अथवा विधि-व्यवस्था से संबंधित समस्या की सूचना तत्काल प्रशासन या पुलिस को दें।

जिला प्रशासन स्पष्ट करता है कि पर्व के दौरान शांति एवं सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने अथवा कानून-व्यवस्था बाधित करने का प्रयास करने वालों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 एवं अन्य सुसंगत विधिक प्रावधानों के तहत नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि दुर्गा पूजा पर्व जिले में शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हो। इसके लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

जिला नियंत्रण कक्ष, औरंगाबाद
दूरभाष संख्या: 06186-295027
औरंगाबाद न्यू एरिया, दुर्गापूजा महाअष्ठमी.
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मशहूर अभिनेता जैकी श्राफ के पुत्र और अभिनेता टाइगर श्राफ की कार पर फायरिंग की गई है। यह फायरिंग 8 से 10 राउंड तक की गई है। पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है। घटना मुंबई के जुहू इलाके की है।
बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी हुई है। हालांकि, अभिनेता सुरक्षित हैं। उन्हें चोट नहीं लगी है। मुंबई पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है।
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दुर्गा पूजा पर्व के मद्देनजर जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद अभिलाषा शर्मा  एवं पुलिस अधीक्षक, औरंगाबाद  उपेंद्रनाथ वर्मा द्वारा संयुक्त रूप से औरंगाबाद जिले के विभिन्न पूजा पंडालों का निरीक्षण किया गया।
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 निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य मेला के दौरान विधि-व्यवस्था की स्थिति का जायजा लेना, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा पूजा समितियों द्वारा की गई व्यवस्थाओं का अवलोकन करना था।

इसी क्रम में जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा औरंगाबाद शहर अंतर्गत कर्मा रोड, महाराणा प्रताप चौक एवं जसोइया मोड़ स्थित पूजा पंडालों का निरीक्षण किया। इसके अतिरिक्त ओबरा प्रखंड अंतर्गत कारा मोड़ सहित अन्य पूजा पंडालों तथा दाउदनगर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पूजा पंडालों का भी जायजा लिया गया।

 निरीक्षण के दौरान संबंधित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, श्रद्धालुओं के आवागमन तथा विधि-व्यवस्था संधारण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई।

निरीक्षण के क्रम में जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा संबंधित अनुमंडल पदाधिकारियों एवं अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी पूजा पंडालों में सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं। भीड़भाड़ वाले स्थानों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए तथा किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की आशंका को रोकने के लिए आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जाएं।

 साथ ही, पूजा पंडालों एवं आसपास के क्षेत्रों में विधि-व्यवस्था बनाए रखने, श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करने तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए तत्पर रहने का निर्देश दिया गया।

जिला प्रशासन द्वारा महिलाओं, बच्चों एवं अन्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि पूजा पंडालों में आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सहज वातावरण उपलब्ध कराया जाए। पूजा समितियों के साथ समन्वय स्थापित कर निर्धारित दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए तथा असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए।

इस अवसर पर जिला पदाधिकारी  अभिलाषा शर्मा ने विभिन्न पूजा पंडालों में पहुंचकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना भी की तथा जिलेवासियों की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की।

निरीक्षण के दौरान अपर समाहर्ता अनुग्रह नारायण सिंह, उप विकास आयुक्त कुमारी अनुपम सिंह, संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।

जिला प्रशासन द्वारा दुर्गा पूजा पर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए लगातार निगरानी एवं आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा आम नागरिकों एवं पूजा समितियों से अपील किया गया है कि वे निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें, आपसी भाईचारा एवं सामाजिक सौहार्द बनाए रखें तथा पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में प्रशासन का सहयोग करें।
त्योहारों से पहले औरंगाबाद में मिठाई दुकानों पर छापेमारी, तीन प्रतिष्ठानों से लिए गए नमूने

सरवन, मृगनयनी और मिठाई महल में हुई जांच; लड्डू, काजू कतली, पनीर और खोवा के सैंपल संग्रहित, रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई
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औरंगाबाद। दुर्गा पूजा सहित अन्य पर्व-त्योहारों के मद्देनजर बाजार में मिठाइयों की बढ़ती मांग के बीच खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जांच अभियान चलाया। रविवार को औरंगाबाद शहर में संचालित विभिन्न मिठाई दुकानों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार स्वयं अधिकारियों के साथ जांच के लिए पहुंचे। टीम ने दुकानों में बिक्री के लिए रखी मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का जायजा लिया तथा जांच के लिए नमूने एकत्र किए।

अभियान के दौरान शहर की तीन मिठाई दुकानों- सरवन, मृगनयनी और मिठाई महल से खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए। इनमें लड्डू, काजू कतली, पनीर और खोवा शामिल हैं। नमूनों की जांच के बाद ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुरूप होने की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अधिकारियों के अनुसार, जांच रिपोर्ट में अनियमितता सामने आने पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

 त्योहारों में बढ़ जाती है मिठाइयों की मांग

दुर्गा पूजा सहित अन्य पर्व-त्योहारों के दौरान मिठाइयों की बिक्री में तेजी आती है। पूजा-पाठ, प्रसाद वितरण, मेहमानों के स्वागत और पारिवारिक आयोजनों के लिए लोग बड़ी मात्रा में मिठाइयां खरीदते हैं। इस बढ़ी हुई मांग के बीच खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता पर निगरानी रखना जरूरी हो जाता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दुकानों का निरीक्षण किया। अभियान का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित मानकों के पालन पर नजर रखना है।

 तीन दुकानों से लड्डू, काजू कतली, पनीर और खोवा के नमूने

जांच के दौरान सरवन, मृगनयनी और मिठाई महल से अलग-अलग खाद्य पदार्थों के नमूने संग्रहित किए गए। इनमें लड्डू और काजू कतली जैसी मिठाइयों के साथ पनीर और खोवा भी शामिल हैं। इन नमूनों को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया के माध्यम से उनकी गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा।

खोवा, पनीर और दूध से तैयार होने वाले अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है। खाद्य सामग्री के निर्माण, भंडारण और रखरखाव में निर्धारित मानकों का पालन नहीं होने पर स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। ऐसे में समय-समय पर जांच और नमूनों का संग्रह खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

हालांकि, दुकानों से नमूने लिए जाने मात्र से मिलावट की पुष्टि नहीं होती है। संबंधित खाद्य पदार्थों में किसी तरह की गड़बड़ी है या नहीं, इसका पता प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।

 जांच में अनियमितता मिलने पर होगी कार्रवाई

इस अभियान में सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार के साथ नगर थाना की पुलिस टीम तथा मनीष कुमार और बैजू प्रसाद भी शामिल रहे। अधिकारियों ने दुकानों का निरीक्षण किया और विभिन्न खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र किए।

विभागीय जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण नमूनों की रिपोर्ट है। यदि किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट, गुणवत्ता संबंधी कमी या निर्धारित मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित प्रतिष्ठान के संचालक के विरुद्ध प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

 उपभोक्ताओं को भी बरतनी चाहिए सावधानी

त्योहारों के दौरान मिठाइयों की खरीदारी करते समय उपभोक्ताओं को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। मिठाई की दुकान में साफ-सफाई, खाद्य पदार्थों को ढककर रखने की व्यवस्था और उनकी गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। खुले में रखी या अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार की गई खाद्य सामग्री खरीदने से बचना बेहतर है।

स्वास्थ्य विभाग के इस अभियान से त्योहारों के मौसम में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी का संदेश गया है। अब लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि संबंधित दुकानों में उपलब्ध खाद्य पदार्थ निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने की स्थिति में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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, <nis:link nis:type=tag nis:id=बलिया nis:value=बलिया nis:enabled=true nis:link/> कोर्ट में फिर पेश नहीं हुए <nis:link nis:type=tag nis:id=पवनसिंह, nis:value=पवनसिंह, nis:enabled=true nis:link/> अदालत ने लगाया 3 हजार रुपये का जुर्माना; ज्योति बोलीं—मुझे न्यायालय पर भरोसा

तलाक और भरण-पोषण मामले में अगली सुनवाई 12 नवंबर को, पवन सिंह के वकील ने मां के स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज किए पेश
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बलिया। भोजपुरी फिल्म जगत के चर्चित अभिनेता और भाजपा के विधान परिषद सदस्य पवन सिंह तथा उनकी पत्नी ज्योति सिंह के बीच चल रहा वैवाहिक विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। शनिवार को उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान ज्योति सिंह अदालत में उपस्थित हुईं, लेकिन पवन सिंह खुद पेश नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति पर अदालत ने 3 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 नवंबर की तारीख निर्धारित की गई है।

यह मामला पवन सिंह और ज्योति सिंह के बीच तलाक तथा भरण-पोषण से संबंधित है। सुनवाई के बाद ज्योति सिंह ने पवन सिंह की लगातार गैरहाजिरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है और वह चाहती हैं कि इस मामले में उन्हें न्याय मिले।

 ‘मैं पवन के साथ रहना चाहती हूं, नहीं रखना चाहते तो भरण-पोषण दें’

अदालत में सुनवाई के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए ज्योति सिंह ने कहा कि पवन सिंह इस बार भी न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। उनके मुताबिक, बार-बार सुनवाई की तारीख मिलने के बावजूद पवन सिंह का अदालत में नहीं आना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा करके न्यायालय की प्रक्रिया को हल्के में लिया जा रहा है।

ज्योति सिंह ने कहा कि उन्हें केवल अदालत से उम्मीद है और वह न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास रखती हैं। उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह पवन सिंह के साथ रहना चाहती हैं। यदि पवन सिंह उन्हें अपने साथ रखने के इच्छुक नहीं हैं, तो उन्हें भरण-पोषण के लिए उचित राशि दी जानी चाहिए।

उनके इस बयान से स्पष्ट है कि वैवाहिक संबंध और आर्थिक सहायता से जुड़े मुद्दे अभी भी विवाद के केंद्र में हैं। हालांकि, मामले का अंतिम निर्णय न्यायालय की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

पिछली सुनवाई में भी नहीं पहुंचे थे पवन सिंह

ज्योति सिंह के अधिवक्ता अखिलेश सिंह के अनुसार, पिछली सुनवाई के दौरान भी न्यायालय ने पवन सिंह को उपस्थित होने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद शनिवार को भी उनके अदालत में नहीं पहुंचने पर न्यायालय ने नाराजगी जताई और अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए अंतिम अवसर दिया।

अधिवक्ता के मुताबिक, इस बार अनुपस्थिति के कारण पवन सिंह पर 3 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अब आगामी सुनवाई में उनकी उपस्थिति और मामले की आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी।

न्यायालय की ओर से अगली तारीख तय किए जाने के बाद दोनों पक्षों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्यवाही में शामिल होना होगा।

पवन सिंह की मां के स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज पेश

सुनवाई के दौरान पवन सिंह की ओर से उनके अधिवक्ता हरिवंश सिंह ने उनकी मां के स्वास्थ्य से संबंधित मेडिकल दस्तावेज न्यायालय में जमा किए। इसके साथ ही मामले को मध्यस्थता यानी मीडिएशन के माध्यम से सुलझाने के लिए आवेदन भी दिया गया।

दूसरी ओर, ज्योति सिंह ने मेडिकल दस्तावेज पेश किए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस बार भी पवन सिंह की मां की तबीयत खराब होने से संबंधित कागजात प्रस्तुत किए गए हैं। ज्योति ने इस दलील पर सवाल उठाते हुए अपने परिवार के एक सदस्य के अस्पताल में भर्ती होने का जिक्र किया और कहा कि उनके भाई को अस्पताल से अगले दिन ही छुट्टी मिल गई थी।

हालांकि, मां की बीमारी से संबंधित दस्तावेज और मध्यस्थता के आवेदन पर अंतिम रूप से क्या निर्णय होगा, यह न्यायालय की आगे की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

 5 अक्टूबर को भी लगा था एक हजार रुपये का जुर्माना

इससे पहले 5 अक्टूबर को भी बलिया की अदालत में पवन सिंह को भरण-पोषण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान उपस्थित होना था। उस दिन भी वह न्यायालय में पेश नहीं हुए थे। उनकी ओर से उनकी मां की तबीयत खराब होने का हवाला दिया गया था।

पवन सिंह की अनुपस्थिति पर अदालत ने उस समय एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। साथ ही उन्हें अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का अंतिम अवसर दिया गया था।

इसी मामले में समय पर साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने को लेकर ज्योति सिंह पर भी 500 रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी सामने आई थी। इस तरह दोनों पक्षों से संबंधित प्रक्रियात्मक मुद्दे भी मामले की सुनवाई के दौरान उठते रहे हैं।

 2022 में ज्योति सिंह ने दायर की थी भरण-पोषण की याचिका

पवन सिंह और ज्योति सिंह के बीच वैवाहिक विवाद लंबे समय से चल रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ज्योति सिंह ने 22 अप्रैल 2022 को बलिया फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की मांग को लेकर याचिका दायर की थी।

वहीं, पवन सिंह ने इससे पहले बिहार के आरा स्थित फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए याचिका दाखिल की थी। इसके बाद दोनों के बीच वैवाहिक संबंधों को लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।

विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के उद्देश्य से न्यायालय की ओर से काउंसिलिंग और समझौते की कोशिशें भी की गईं। हालांकि, अब तक कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका है।

अब 12 नवंबर की सुनवाई पर टिकी नजरें

पवन सिंह और ज्योति सिंह के मामले में अब अगली सुनवाई 12 नवंबर को होनी है। पिछली सुनवाइयों में पवन सिंह की अनुपस्थिति, उनकी ओर से मेडिकल दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने और मध्यस्थता के लिए आवेदन दिए जाने के बाद अगली तारीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

एक ओर ज्योति सिंह ने पवन सिंह के साथ रहने की इच्छा जताई है, वहीं दूसरी ओर साथ नहीं रखने की स्थिति में भरण-पोषण दिए जाने की मांग दोहराई है। ऐसे में आगामी सुनवाई में न्यायालय के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें और आगे की कानूनी प्रक्रिया अहम होगी। <nis:link nis:type=tag nis:id=thesilencemedianews nis:value=thesilencemedianews nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jyotisingh nis:value=JyotiSingh nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=pawansingh nis:value=pawansingh nis:enabled=true nis:link/>
औरंगाबाद में टाइल्स गोदाम की आड़ में गांजा तस्करी का खुलासा, 2.25 क्विंटल गांजा बरामद

प्रीतमपुर के पास एनएच-19 पर हुई छापेमारी, जब्त गांजे की कीमत करीब 30 लाख रुपये; तस्करी नेटवर्क की जांच में जुटी टीम
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औरंगाबाद। जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान बारुण थाना क्षेत्र में गांजा तस्करी के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (जीटी रोड) पर प्रीतमपुर के समीप स्थित एक टाइल्स गोदाम में छापेमारी कर मद्य निषेध विभाग एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो की टीम ने 2 क्विंटल 25 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। बरामद गांजे का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 30 लाख रुपये बताया जा रहा है।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि तस्करी में शामिल लोगों ने टाइल्स दुकान की आड़ में गोदाम किराए पर ले रखा था। इसी गोदाम में गांजे की बड़ी खेप छिपाकर रखी जाती थी। बाहर से सामान्य कारोबारी गतिविधियां दिखाई देने के कारण इस ठिकाने पर किसी को आसानी से संदेह नहीं होता था। गुप्त सूचना मिलने के बाद संबंधित विभाग की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की और गांजे की खेप बरामद की।

<nis:link nis:type=tag nis:id=## nis:value=## nis:enabled=true nis:link/> पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े तार

जांच के दौरान पहले गिरफ्तार किए गए सुरेश सिंह और प्रेम कुमार से संबंधित मामले की कड़ियों को भी खंगाला जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गांजा तस्करी के एक अन्य मामले में दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां आगे की कार्रवाई कर रही थीं।

इसी जांच के क्रम में बिक्की कुमार और रोशन कुमार के कथित तौर पर गांजे की खरीद-बिक्री से जुड़े होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद जांच टीम ने प्रीतमपुर के पास स्थित गोदाम पर ध्यान केंद्रित किया। छानबीन के दौरान गोदाम में बड़ी मात्रा में गांजा रखे जाने का पता चला, जिसके बाद वहां छापेमारी की गई।

<nis:link nis:type=tag nis:id=## nis:value=## nis:enabled=true nis:link/> छापेमारी के दौरान फरार मिले संदिग्ध

कार्रवाई के दौरान गोदाम से गांजे की बड़ी खेप तो बरामद कर ली गई, लेकिन संबंधित लोग मौके पर नहीं मिले। इस कारण उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। जांच टीम अब उनकी भूमिका और गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है।

जांच से जुड़े अधिकारियों को यह आशंका भी है कि छापेमारी से पहले गांजे की कुछ खेप गोदाम से दूसरी जगह भेज दी गई हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। टीम इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गोदाम में गांजा कब से रखा जा रहा था और तस्करी का संचालन किस तरह किया जा रहा था।

<nis:link nis:type=tag nis:id=## nis:value=## nis:enabled=true nis:link/> इंस्पेक्टर नवीन कुमार सिंह के नेतृत्व में छापेमारी

इस अभियान का नेतृत्व उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर नवीन कुमार सिंह ने किया। टीम में सब इंस्पेक्टर राजेश कुमार, सिपाही गौतम कुमार समेत अन्य कर्मी शामिल थे। अधिकारियों और कर्मियों ने गोदाम की तलाशी लेकर गांजे की खेप बरामद की।

कार्रवाई के बाद बरामद मादक पदार्थ को जब्त कर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, तस्करी से जुड़े लोगों की भूमिका और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में जिन लोगों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

<nis:link nis:type=tag nis:id=## nis:value=## nis:enabled=true nis:link/> गांजा कहां से आया, किन लोगों तक पहुंचनी थी खेप?

एनएच-19 जैसे प्रमुख मार्ग के नजदीक एक व्यावसायिक गोदाम में इतनी बड़ी मात्रा में गांजा मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गांजे की खेप कहां से लाई गई थी, इसे किन स्थानों पर पहुंचाया जाना था और इसके कारोबार में कितने लोग शामिल हैं।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि गोदाम का इस्तेमाल केवल मादक पदार्थों को जमा करने के लिए किया जा रहा था या वहां से आगे आपूर्ति का नेटवर्क भी संचालित होता था। पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े मामलों और नए सिरे से सामने आए नामों के बीच संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।

फिलहाल, 2 क्विंटल 25 किलोग्राम गांजे की बरामदगी इस कार्रवाई की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। हालांकि, तस्करी के पूरे नेटवर्क, गांजे के स्रोत और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
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औरंगाबाद पंचदेव मंदिर दुर्गा पूजा पंडाल, मंदिर और मूर्ति. <nis:link nis:type=tag nis:id=औरंगाबाद nis:value=औरंगाबाद nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=aurangabad nis:value=aurangabad nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=durgapuja nis:value=durgapuja nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=thesilencemedianews nis:value=thesilencemedianews nis:enabled=true nis:link/> The silence media news
माँ अम्बे क्लब जसोईया, औरंगाबाद की झलकियां.
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पिपरा ग्राम में लगातार 60वें वर्ष माँ दुर्गा की प्रतिमा हुई स्थापित, सप्तमी पूजा में शामिल हुए बारुण बीडीओ 
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औरंगाबाद - जिले के बारुण प्रखंड के पिपरा ग्राम में 
 पिछले 60 वर्षों से चले आ रहा है आजीवन संकल्पित दुर्गापूजा का सप्तमी पूजा और महाआरती कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।  ग्राम में पिछले 60 वर्षों से लगातार आजीवन संकल्पित दुर्गा पूजा समारोह मनाया जा रहा है। 
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नालंदा सिपाही हत्याकांड: प्रेम त्रिकोण, सरकारी राइफल से फायरिंग और साजिश के आरोपों ने बढ़ाई गुत्थी

नालंदा | विशेष रिपोर्ट
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नालंदा में उत्पाद विभाग की विशेष जांच इकाई (EIB) के सिपाही अजीत कुमार की गोली लगने से हुई मौत का मामला अब कई गंभीर आरोपों और नए दावों के कारण चर्चा में है। मामले में प्रेम संबंधों में तनाव, कथित साजिश, सरकारी राइफल छीने जाने और विभागीय कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल उठ रहे हैं। पुलिस की जांच में वारदात से जुड़े कई पहलुओं को खंगाला जा रहा है। हालांकि, प्रेम त्रिकोण को हत्या की वजह बताए जाने सहित कई दावे अभी जांच के दायरे में हैं और उन्हें अदालत या पुलिस की आधिकारिक पुष्टि के बिना अंतिम सच नहीं माना जा सकता।

मीडिया रिपोर्ट में नालंदा पुलिस के एक कर्मी के हवाले से दावा किया गया है कि इस मामले में आरोपी दरोगा पुष्पा कुमारी, सिपाही अजीत कुमार और बाल सुधार गृह में तैनात कांस्टेबल रिशु के बीच संबंधों की भूमिका की जांच की जा रही है। इसी दावे के अनुसार, अजीत और पुष्पा के बीच पहले से नजदीकी थी, लेकिन अजीत के पटना स्थानांतरित होने के बाद पुष्पा और रिशु के बीच भी संबंध बढ़ने की बात सामने आई है।

इस घटनाक्रम ने जांच के सामने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर अजीत और पुष्पा के बीच संबंधों की शुरुआत कब हुई? रिशु की भूमिका इस पूरे मामले में कैसे सामने आई? घटना वाले दिन उसकी ड्यूटी कहां थी और वह उत्पाद विभाग की टीम के साथ किस परिस्थिति में मौजूद था? इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

 छह साल पहले हुई थी अजीत की शादी, तीन साल से पुष्पा से नजदीकी का दावा

उपलब्ध विवरण के अनुसार, नालंदा जिले के नगरनौसा निवासी अजीत कुमार की शादी करीब छह साल पहले हुई थी। बताया जाता है कि उन्होंने आरा की रहने वाली युवती से प्रेम विवाह किया था। शादी के लगभग तीन साल बाद ड्यूटी के दौरान उनकी मुलाकात दरोगा पुष्पा कुमारी से हुई और धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अजीत और पुष्पा के बीच करीब तीन साल से प्रेम संबंध थे। अजीत की शादी को लेकर दोनों के बीच तनाव और विवाद होने की बात भी कही गई है। हालांकि, इन निजी संबंधों और विवादों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

अजीत की तैनाती पहले नालंदा जिले के हिलसा अनुमंडल में थी। बाद में उनका स्थानांतरण पटना स्थित उत्पाद विभाग की विशेष जांच इकाई में हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, अजीत के पटना जाने के बाद पुष्पा और बाल सुधार गृह में तैनात कांस्टेबल रिशु के बीच नजदीकियां बढ़ने का दावा किया गया है।

यह भी कहा गया है कि रिशु पहले से ही पुष्पा के संपर्क में था, जब वह हिलसा अनुमंडल में पदस्थापित थीं। पुलिस इस कथित संबंध और घटनाक्रम के बीच किसी संभावित कड़ी की जांच कर रही है या नहीं, इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

 घटना वाले दिन क्या हुआ था? जांच में सामने आए ये अहम सवाल

इस हत्याकांड में सबसे महत्वपूर्ण पहलू वारदात वाले दिन की घटनाओं का क्रम है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अजीत कुमार को शराब तस्करों की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर पुष्पा कुमारी को फोन किया और खराट मोड़ के पास पहुंचने के लिए कहा।

बताया गया है कि शराब तस्करी में इस्तेमाल की जा रही पिकअप वैन आगे चल रही थी। उसके पीछे काले रंग की स्कॉर्पियो में अजीत कुमार अपने एक साथी और चालक के साथ उसका पीछा कर रहे थे। सूचना मिलने के बाद पुष्पा कुमारी भी एक अन्य स्कॉर्पियो से मौके पर पहुंचीं। उनके साथ कांस्टेबल रिशु और चार होमगार्ड जवानों के रहने का दावा किया गया है।

रिपोर्ट में घटनास्थल पर वाहनों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सबसे आगे कथित तौर पर शराब तस्करों की पिकअप वैन थी। उसके पीछे अजीत कुमार की स्कॉर्पियो चल रही थी, जबकि पुष्पा की गाड़ी पीछे थी।

इसी दौरान फायरिंग की घटना हुई, जिसमें अजीत कुमार को गोली लग गई। उन्हें पहले पावापुरी स्थित अस्पताल ले जाया गया और बाद में पटना के पीएमसीएच में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

होमगार्ड की राइफल छीने जाने का आरोप

इस मामले में सबसे गंभीर दावा सरकारी राइफल से गोली चलाए जाने को लेकर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पुष्पा कुमारी ने कथित तौर पर होमगार्ड जवान दीनानाथ को फायरिंग करने का निर्देश दिया था। दावा है कि दीनानाथ ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद कांस्टेबल रिशु ने उनसे सरकारी राइफल ले ली और लगातार पांच राउंड फायरिंग की।

इसी फायरिंग के दौरान एक गोली अजीत कुमार को लगने की बात कही गई है। हालांकि, फायरिंग की वास्तविक परिस्थितियों, गोली चलाने वाले व्यक्ति और कथित आदेश की पुष्टि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।

यहां एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि यदि कांस्टेबल रिशु की ड्यूटी उस दिन बाल सुधार गृह में निर्धारित थी, तो वह उत्पाद विभाग की टीम के साथ मौके पर किस आधार पर मौजूद था? क्या उसे किसी अधिकारी ने विशेष रूप से बुलाया था? क्या वह आधिकारिक ड्यूटी पर था या किसी अन्य परिस्थिति में टीम के साथ गया था?

इन सवालों का जवाब मिलने से घटनास्थल पर मौजूद लोगों की भूमिका और वारदात से पहले की गतिविधियों को समझने में मदद मिल सकती है।

पुष्पा कुमारी की पिछली तैनाती और विवादों के आरोप भी चर्चा में

अजीत कुमार की मौत के मामले के बीच पुष्पा कुमारी की पूर्व तैनाती के दौरान लगे कथित आरोप भी चर्चा में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2023 से फरवरी 2026 के बीच हिलसा अनुमंडल में उनकी पदस्थापना के दौरान छापेमारी और विभागीय कार्यशैली को लेकर विवाद होने के आरोप लगाए गए थे।

इन आरोपों में निजी व्यक्तियों को छापेमारी टीम में शामिल करने, अवैध वसूली और शराबबंदी कानून के तहत कार्रवाई के दौरान अनियमितताओं जैसी बातें शामिल हैं। हालांकि, इन आरोपों को पुष्ट तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने से पहले संबंधित शिकायतों, विभागीय अभिलेखों और जांच के निष्कर्षों की पुष्टि जरूरी है।

शरीफाबाद में छापेमारी के दौरान हुआ था विवाद

रिपोर्ट में फरवरी 2024 में इस्लामपुर थाना क्षेत्र के शरीफाबाद में हुई एक छापेमारी का भी उल्लेख है। दावा किया गया है कि इस कार्रवाई के दौरान स्थानीय ग्रामीणों और उत्पाद विभाग की टीम के बीच विवाद बढ़ गया था। इसके बाद कथित तौर पर पथराव हुआ, जिसमें पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए और सरकारी वाहन को नुकसान पहुंचा।

रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति बिगड़ने पर उत्पाद विभाग की टीम को हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी थी। इस घटना को लेकर लगाए गए आरोपों और कार्रवाई के वास्तविक विवरण की पुष्टि संबंधित पुलिस रिकॉर्ड तथा विभागीय दस्तावेजों से की जानी चाहिए।

 अवैध वसूली और निजी संपत्ति को लेकर भी आरोप

पुष्पा कुमारी की हिलसा में तैनाती के दौरान शराब कारोबारियों से कथित तौर पर नियमित रकम वसूलने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसके अलावा, शराब पीने के आरोप में पकड़े गए लोगों को वाहन में घुमाने और उनके परिजनों से कथित रूप से 3,000 से 3,500 रुपये लेकर छोड़ने का दावा किया गया है।

रिपोर्ट में अवैध कमाई से निजी रिसॉर्ट खड़ा करने के आरोप का भी जिक्र है। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में किसी प्रमाणित जांच रिपोर्ट, विभागीय कार्रवाई या न्यायिक निष्कर्ष का विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

यदि इन शिकायतों की औपचारिक जांच होती है, तो संबंधित अवधि के विभागीय रिकॉर्ड, छापेमारी से जुड़े दस्तावेज, शिकायतकर्ताओं के बयान और संपत्ति से संबंधित अभिलेख महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

 पुलिस ने क्या कहा? पिकअप वैन बरामद, आरोपियों की तलाश जारी

नालंदा के पुलिस अधीक्षक हृदयकांत के हवाले से बताया गया है कि पुलिस ने मामले का खुलासा करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। वारदात में इस्तेमाल की गई पिकअप वैन बरामद कर ली गई है और उसे लाने वाले मुख्य आरोपियों की पहचान भी कर ली गई है।

पुलिस के अनुसार, मामले में शामिल अन्य लोगों तथा फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

जांच में वारदात के दौरान इस्तेमाल किए गए वाहन, हथियार की भूमिका, घटनास्थल पर मौजूद लोगों की गतिविधियों और आरोपियों के बीच संभावित संपर्कों की कड़ियां जोड़ना महत्वपूर्ण होगा। पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई आधिकारिक जानकारी और जांच के निष्कर्ष ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेंगे।

 जांच के सामने हैं कई बड़े सवाल
अजीत कुमार की मौत का मामला केवल फायरिंग की घटना तक सीमित नहीं है। इसमें घटनास्थल पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका, सरकारी हथियार के इस्तेमाल की परिस्थितियों और शराब तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की कार्यप्रणाली की भी पड़ताल जरूरी है।
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दरोगा पुष्पा कुमारी ने बनाये हैं करोड़ो की सम्पति 
अवैध वसूली और निजी संपत्ति को लेकर आरोप
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पुष्पा कुमारी की हिलसा में तैनाती के दौरान शराब कारोबारियों से कथित तौर पर नियमित रकम वसूलने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसके अलावा, शराब पीने के आरोप में पकड़े गए लोगों को वाहन में घुमाने और उनके परिजनों से कथित रूप से 3,000 से 3,500 रुपये लेकर छोड़ने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट में अवैध कमाई से निजी रिसॉर्ट खड़ा करने के आरोप का भी जिक्र है। ताज्जुब तो तब होता है जब इतने भ्रष्टाचार करने के बाद भी विभाग में लगातार पोस्टिंग पा रही थी।
यदि इन शिकायतों की औपचारिक जांच होती है, तो संबंधित अवधि के विभागीय रिकॉर्ड, छापेमारी से जुड़े दस्तावेज, शिकायतकर्ताओं के बयान और संपत्ति से संबंधित अभिलेख महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
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बिहार के नालंदा जिले में उत्पाद विभाग के सिपाही अजित कुमार की हत्या मामले में अब साफ हो गया है कि हत्यारा शराब माफिया नहीं है बल्कि साथी दरोगा के निर्देश पर पुलिस ने ही गोली मारी थी। इस बात का खुलासा होने के बाद विभाग की दरोगा पुष्पा कुमारी समेत 5 पुलिसकर्मी और 2 प्रायवेट वाहन चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है। मृतक सिपाही अजित कुमार पासवान और आरोपी दरोगा पुष्पा कुमारी प्रजापति का आपस में प्रेम प्रसंग चल रहा था. हालांकि अजित कुमार शादीशुदा और एक बच्चे का पिता भी था वहीं पुष्पा कुमारी की भी शादी हो चुकी थी, अब पति से तलाक का मामला चल रहा है। 22 वर्षीया पुष्पा कुमारी औरंगाबाद जिले के देव प्रखंड के खखड़ा ग्राम की रहने वाली है जबकि सिपाही अजित कुमार नालंदा जिले का ही रहने वाला था। बताया यह भी जा रहा है कि टस्करों को पकड़ने कि यह कार्रवाई बिना विभागीय जानकारी के चल रहे थे। जहां तस्करों से पैसों के लेनदेन का भी आरोप है। इस संबंध में पुलिस नालंदा एसपी ह्रदयकांत ने एक प्रेस वार्ता के दौरान सभी बातों को प्रमुखता से बताया है। मामले में महिला दारोगा (उपनिरीक्षक) पुष्पा कुमारी, 27 वर्षीय उत्पाद सिपाही अनूप कुमार मांझी, तीन होमगार्ड (बीएचजी) जवान जिनमें 26 वर्षीय रिशु कुमार, 29 वर्षीय दीनानाथ कुमार और 26 वर्षीय सन्नी कुमार शामिल हैं। इसके अलावा पटना जिले के खाजेकलां थाना क्षेत्र निवासी 27 वर्षीय निजी चालक गौरव कुमार उर्फ निशांत और पटना के ही रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र निवासी 32 वर्षीय शंकर कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। The silence media news  <nis:link nis:type=tag nis:id=pushpakumarinalalandadaroga nis:value=pushpakumarinalalandadaroga nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=pushpakumaridaroga nis:value=pushpakumaridaroga nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=sipushpakumarinalalanda nis:value=sipushpakumarinalalanda nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=thesilencemedianews nis:value=thesilencemedianews nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=shrabbandibihar nis:value=shrabbandibihar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=utpadvibhag nis:value=UtpadVibhag nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=नालंदा nis:value=नालंदा nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nitishkumar nis:value=NitishKumar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nalandapolice nis:value=nalandapolice nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nashakakarobar nis:value=nashakakarobar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=औरंगाबाद nis:value=औरंगाबाद nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=aurangabad nis:value=aurangabad nis:enabled=true nis:link/>
नालंदा जिले में तैनात दरोगा पुष्पा कुमारी ने अपने कथित बॉयफ्रेंड कांस्टेबल को कथित रूप से गोली मार दी है। हालांकि जिले की एसपी इस बात से इनकार कर रहे हैं कि पुष्पा कुमारी ने गोली मारी है। उनका कहना है कि होमगार्ड जवान ने गोली मारी है। लेकिन चर्चा यही है कि पुष्पा कुमारी ने गोली मार दी है।  पुष्पा कुमारी औरंगाबाद जिले के खाखरा गांव की रहने वाली है। <nis:link nis:type=tag nis:id=pushpakumaridaroga nis:value=pushpakumaridaroga nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=sipushpakumarinalalanda nis:value=sipushpakumarinalalanda nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=pushpakumarinalalandadaroga nis:value=pushpakumarinalalandadaroga nis:enabled=true nis:link/>
नालंदा उत्पाद विभाग के कांस्टेबल हत्या मामले में गिरफ्तार महिला दरोगा पुष्पा कुमारी को नालंदा एसपी घटनास्थल पर ले जाकर सेन का री क्रिएशन किया। गिरफ्तार पुष्पा कुमारी औरंगाबाद जिले के खसरा गांव की रहने वाली है।